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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

मानवजाति में प्रत्येक व्यक्ति को मेरे आत्मा के अवलोकन को स्वीकार करना चाहिए, अपने हर वचन और कार्य की बारीकी से जाँच करनी चाहिए, और इसके अलावा, मेरे चमत्कारिक कर्मों पर विचार करना चाहिए। पृथ्वी पर राज्य के आगमन के समय तुम लोग कैसा महसूस करते हो? जब मेरे पुत्र एवं लोग मेरे सिंहासन की ओर वापिस प्रवाहित होते हैं, तो मैं महान सफेद सिंहासन के सम्मुख औपचारिक रूप से न्याय आरम्भ करता हूँ। जिसका अर्थ है कि, जब मैं पृथ्वी पर व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य आरम्भ करता हूँ, और जब न्याय का युग अपने समापन के समीप होता है, तो मैं अपने वचनों को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की ओर निर्देशित करना आरम्भ करता हूँ और अपनी आत्मा की आवाज़ को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जारी करता हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से, मैं उनमें से सभी लोगों और चीज़ों को धो कर साफ कर दूँगा जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर हैं, ताकि भूमि अब और अधिक गंदी और व्यभिचारी नहीं हो, बल्कि एक पवित्र राज्य हो। मैं सभी चीज़ों को नया कर दूँगा, ताकि वे मेरे उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएँगी, ताकि वे अब फिर से पार्थिव श्वास को धारण नहीं करेंगी, और धरती की गंध से अब और दूषित नहीं होंगी। पृथ्वी पर, मनुष्य ने मेरे वचनों के लक्ष्य और मूल को टटोला है, और मेरे कर्मों को देखा है, फिर भी किसी ने भी वास्तव में मेरे वचनों के मूल को नहीं जाना है, और किसी ने भी कभी भी वास्तव में मेरे कर्मों की चमत्कारिकता को नहीं देखा है। यह केवल आज है, जब मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच में आकर अपने वचनों को कहता हूँ, कि मनुष्यों को मेरे बारे में अल्पज्ञान है, अपने विचारों में "मेरे" लिए स्थान को हटा रहे हैं, उसके बदले अपनी चेतना में व्यवहारिक परमेश्वर के लिए स्थान बना रहे हैं। मनुष्य की धारणाएँ हैं और उत्सुकता से भरा है; परमेश्वर को कौन नहीं देखना चाहेगा? कौन परमेश्वर का सामना नहीं करना चाहेगा? फिर भी केवल एक चीज जो मनुष्य के हृदय में एक निश्चित स्थान धारण किए हुए है वह है परमेश्वर जिसे मनुष्य महसूस करता है कि अज्ञात और अमूर्त है। यदि मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं बताया होता तो किसने इसे महसूस किया होता? किसने सच में विश्वास किया होता कि मैं वास्तव में विद्यमान हूँ? निश्चित रूप से जरा सी भी शंका के बिना? मनुष्य के हृदय में "स्वयं" और वास्तविकता में "स्वयं" के बीच एक बहुत ही विशाल अंतर है, और उनके बीच तुलना करने में कोई भी सक्षम नहीं है। यदि मैं देहधारी नहीं होता, तो मनुष्य ने मुझे कभी भी नहीं जाना होता, और यहाँ तक कि उसने मुझे जान भी लिया होता, तो क्या इस प्रकार का ज्ञान अभी भी एक धारणा नहीं होता? प्रत्येक दिन मैं लोगों के अनवरत प्रवाह के बीच चलता हूँ, और प्रत्येक दिन मैं प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कार्य करता हूँ। जब मनुष्य मुझे वास्तव में देख लेगा, तो वह मुझे मेरे वचनों में जानने में समर्थ बन जाएगा, और उस उपाय को जिसके माध्यम से मैं बोलता हूँ और साथ ही मेरे इरादों को समझ जाएगा।

जब राज्य औपचारिक तौर पर पृथ्वी पर आता है, तो सभी चीजों में से कौन शान्त नहीं होती है? सभी मनुष्यों में से कौन भयभीत नहीं होता है? मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हर जगह चलता हूँ, और प्रत्येक चीज मेरे ही द्वारा व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थित की जाती है। इस समय, कौन नहीं जानता है कि मेरे कार्य अद्भुत हैं? मेरे हाथ सभी चीजों को थामते हैं, फिर भी मैं सभी चीजों से ऊपर हूँ। क्या आज मनुष्यों के बीच मेरा देहधारण और मेरी व्यक्तिगत उपस्थिति मेरी विनम्रता और प्रच्छन्नता का सच्चा अर्थ नहीं है? बाहरी तौर पर, कई लोग मेरी अच्छे के रूप में सराहना करते हैं, और खूबसूरत के रूप में मेरी प्रशंसा करते हैं, किन्तु कौन मुझे वास्तव में जानता है? आज, मैं क्यों कहता हूँ कि तुम लोग मुझे जानते हो? क्या मेरा लक्ष्य बड़े लाल अजगर को शर्मिन्दा करना नहीं है? मैं मनुष्य को मेरी प्रशंसा करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहता हूँ, बल्कि चाहता हूँ कि वह मुझे जाने, जिसके माध्यम से वह मुझे प्रेम करने लगेगा, और इस प्रकार से मेरी प्रशंसा करने लगेगा। ऐसी प्रशंसा अपने नाम के योग्य है और एक खोखली बात नहीं है; केवल इस प्रकार की प्रशंसा ही मेरे सिंहासन तक पहुँच सकती है और आसमान में ऊँची उड़ान भर सकती है। क्योंकि मनुष्य को शैतान के द्वारा प्रलोभित और भ्रष्ट किया गया है, क्योंकि उस पर धारणाओं की सोच द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया है, इसलिए सम्पूर्ण मानवजाति को जीतने, मनुष्य की सम्पूर्ण धारणाओं को उजागर करने, और मनुष्य की सोच की धज्जियाँ उड़ाने के उद्देश्य से मैं देह बन गया हूँ। परिणामरूवरूप, मनुष्य मेरे सामने अब और आडंबर नहीं करता है, और अपनी स्वयं की धारणाओं का उपयोग करके मेरी सेवा अब और नहीं करता है, और इस प्रकार मनुष्य की धारणाओं में "मैं" पूरी तरह से तितर-बितर हो जाता है। जब राज्य आता है, तो मैं सबसे पहले इस चरण के कार्य को आरम्भ करता हूँ, और मैं ऐसा अपने लोगों के बीच करता हूँ। मेरे लोग होने के नाते जो कि बड़े लाल अजगर के देश में पैदा हुए हैं, निश्चित रूप से तुम लोगों के भीतर केवल थोड़ा सा, या अंश भी, बड़े लाल अजगर का ज़हर नहीं है। इस प्रकार, मेरे कार्य का यह चरण मुख्य रूप से तुम लोगों के ऊपर केन्द्रित है, और चीन में मेरे देहधारण के महत्व का एक पहलू है। अधिकांश लोग यहाँ तक कि मेरे द्वारा बोले गए वचनों के एक अंश को भी समझने में असमर्थ रहते हैं, और जब वे समझते भी हैं, तो उनकी समझ धुँधली और संभ्रमित होती है। यह उस विधि के महत्वपूर्ण बिन्दुओं में से एक है जिसके द्वारा मैं बोलता हूँ। यदि सभी लोग मेरे वचनों को पढ़ने में समर्थ थे और उनके अर्थ को समझ रहे थे, तो मनुष्यों में से किसे बचाया जा सकता था, और अधोलोक में नहीं डाला जा सकता था? जब मनुष्य मुझे जान लेगा और मेरा आज्ञापालन करेगा तभी मैं आराम करूँगा, और यही वह समय होगा जब मनुष्य मेरे वचनों के अर्थ को समझने में समर्थ होगा। आज, तुम लोगों की कद-काठी बहुत छोटी है, यह लगभग दयनीय रूप से छोटी है, यहाँ तक कि यह उल्लेख करने के योग्य भी नहीं है—मेरे बारे में तुम्हारे ज्ञान के बारे में तो कहने के लिए कुछ नहीं है।

यद्यपि मैं कहता हूँ कि मेरे पुत्रों और लोगों की अगुवाई के लिए स्वर्गदूतों को आगे भेजा जाना आरम्भ कर दिया गया है, फिर भी मेरे वचनों के अर्थ को समझने में कोई भी समर्थ नहीं है। जब मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच आता हूँ, तो स्वर्गदूत साथ-साथ चरवाही का कार्य आरम्भ कर देते हैं, और स्वर्गदूतों के द्वारा चरवाही के समय के दौरान, सभी पुत्र और लोग न केवल परीक्षाओं और चरवाही को प्राप्त करते हैं, बल्कि अपनी स्वयं की आँखों से सभी प्रकार के दर्शनों को देखने में समर्थ भी हो जाते हैं। क्योंकि मैं प्रत्यक्ष रूप से दिव्यता में कार्य करता हूँ, इसलिए सभी चीजें एक नए आरम्भ में प्रवेश करती हैं और क्योंकि यह दिव्यता प्रत्यक्ष रूप से कार्य करती है, इसलिए यह मानवजाति के द्वारा थोड़ी सी भी विवश नहीं होती है और अलौकिक परिस्थितियों के अधीन मुक्त रूप से संचालित होते हुए मनुष्य को प्रतीत होती है। फिर भी, मेरे लिए, सब कुछ सामान्य है (मनुष्य विश्वास करता है कि यह अलौकिक है क्योंकि उसने कभी भी प्रत्यक्ष रूप से दिव्यता का सामना नहीं किया है); यह मनुष्य की किसी भी धारणा को धारण नहीं करती है, और मानवीय अर्थ से निष्कलंक है। लोग इसे केवल तभी देखेंगे जब वे सभी सही मार्ग पर प्रवेश करेंगे; क्योंकि अभी शुरूआत है, इसलिए जब उसके प्रवेश की बात आती है तो मनुष्य में कई कमियाँ हैं, और ऐसी विफलताएँ और अस्पष्टता से मुश्किल से ही बचा जा सकता है। आज, चूँकि मैं तुम लोगों को इस स्थिति तक ले आया हूँ, इसलिए मैंने कई उपयुक्त व्यवस्थाएँ की हैं, और मेरे स्वयं के लक्ष्य हैं। यदि मुझे आज उनके बारे में तुम लोगों को बताना होता, तो क्या तुम लोग उन्हें सच में जानने में समर्थ होते? मैं मनुष्य के मन के विचारों और मनुष्य के हृदय की इच्छाओं से भली-भाँति परिचित हूँ: किसने कभी स्वयं के लिए बच निकलने के तरीके की तलाश नहीं की है? किसने कभी स्वयं के भविष्य की सम्भावना के बारे में नहीं सोचा है? फिर भी भले ही मनुष्य एक समृद्ध और प्रतिभाशाली मेधा से सम्पन्न है, कौन पूर्वानुमान करने में समर्थ था कि, युगों के बाद, वर्तमान ऐसा हो जाएगा जैसा कि यह हुआ है? क्या यह वास्तव में तुम्हारे स्वयं के व्यक्तिपरक प्रयासों का परिणाम है? क्या यही तुम्हारे अथक परिश्रम का भुगतान है? क्या यह तुम्हारे मन की सुंदर परिकल्पित मूक झाँकी है? यदि मैंने सम्पूर्ण मानवजाति का मार्गदर्शन नहीं किया होता, तो कौन स्वयं को मेरी व्यवस्थाओं से अलग करने और कोई अन्य तरीका ढूँढने में समर्थ हो पाता? क्या मनुष्यों के यही विचार और इच्छाएँ हैं जो उसे आज तक लेकर आई हैं? कई लोगों के जीवन उनकी इच्छाओं के पूरा हुए बिना बीत जाते हैं। क्या यह वास्तव में उनकी सोच में किसी दोष की वजह से है? कई लोगों के जीवन अप्रत्याशित खुशी और संतुष्टि से भरे हैं। क्या यह वास्तव में इसलिए है क्योंकि वे बहुत कम अपेक्षा करते हैं? सर्वशक्तिमान की नज़रों में सम्पूर्ण मानवजाति में से किसकी देखभाल नहीं की जाती है? कौन सर्वशक्तिमान द्वारा पूर्वनियति के बीच नहीं रहता है? किसके जन्म और मृत्यु उसके स्वयं के चयन से आते हैं? क्या मनुष्य अपने स्वयं के भाग्य को नियंत्रित करता है? कई लोग मृत्यु की माँग करते हैं, फिर भी यह उनसे काफी दूर रहती है; कई लोग ऐसे होना चाहते हैं जो जीवन में मज़बूत हैं और मृत्यु से डरते हैं, फिर भी उनकी जानकारी के बिना, उन्हें मृत्यु की खाई में डुबाते हुए, उनकी मृत्यु का दिन निकट आ जाता है; कई लोग आसमान की ओर देखते हैं और गहरी आह भरते हैं; कई लोग अत्यधिक रोते हैं, क्रन्दन करते हुए सिसकते हैं; कई लोग परीक्षणों के बीच गिर जाते हैं; कई लोग प्रलोभन के बंदी बन जाते हैं। यद्यपि मैं मनुष्य को मुझे स्पष्ट रूप से देखने की अनुमति देने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रकट नहीं होता हूँ, तब भी कई लोग मेरे चेहरों को देख कर भयभीत होते हैं, गहराई तक डरते हैं कि मैं उन्हें मार गिराऊँगा, कि मैं उन्हें नष्ट कर दूँगा। क्या मनुष्य वास्तव में मुझे जानता है, या क्या वह नहीं जानता है? कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता है। क्या यह ऐसा नहीं है? तुम लोग मुझ से और मेरी ताड़ना से भय खाते हो, फिर भी तुम लोग खड़े होकर मेरा खुलकर विरोध करते हो और मेरी आलोचना करते हो। क्या यही मामला नहीं है? मनुष्य ने मुझे कभी भी नहीं जाना है क्योंकि उसने कभी भी मेरा चेहरा नहीं देखा है या मेरी आवाज़ को नहीं सुना है। इसलिए, भले ही मैं मनुष्य के हृदय के भीतर हूँ, क्या ऐसा कोई है जिसके हृदय में मैं धुँधला और अस्पष्ट नहीं हूँ? क्या ऐसा कोई है जिसके हृदय में मैं पूरी तरह से स्पष्ट हूँ? मैं उनके लिए जो मेरे लोग हैं इच्छा नहीं करता हूँ कि वे भी मुझे अनिश्चितता और अस्पष्टता से देखें, और इसलिए मैंने इस महान कार्य को शुरू किया है।

मैं चुपचाप मनुष्यों के बीच आता हूँ, और चुपचाप चला जाता हूँ। क्या किसी ने कभी मुझे देखा है? क्या सूर्य अपनी दहकती हुई लपटों के कारण मुझे देख सकता है? क्या चन्द्रमा अपनी चमकदार स्पष्टता के कारण मुझे देख सकता है? क्या आकाश में अपनी स्थिति के कारण तारा-मंडल मुझे देख सकते हैं? जब मैं आता हूँ, तो मनुष्य मुझे नहीं जानता है, और सभी चीजें अनभिज्ञ रहती हैं और जब मैं जाता हूँ, तब भी मनुष्य अनजान रहता है। मेरी गवाही कौन दे सकता है? क्या यह पृथ्वी पर लोगों द्वारा स्तुति हो सकती है? क्या यह जंगल में खिलने वाली कुमुदिनियाँ हो सकती हैं? क्या यह आकाश में उड़ने वाले पक्षी हैं? क्या यह पहाडों में गर्जना करने वाले शेर हैं? कोई भी मुझे पूरी तरह से नहीं देख सकता है! कोई भी उस कार्य को नहीं कर सकता है जो मैं करूँगा! यहाँ तक कि यदि उन्होंने इस कार्य को किया भी, तो उसका क्या प्रभाव होगा? प्रत्येक दिन कई लोगों के हर कार्य को मैं देखता हूँ, और प्रत्येक दिन मैं कई लोगों के हृदयों और मनों को देखता हूँ; कोई भी कभी भी मेरे न्याय से बच कर नहीं निकला है, और किसी ने भी कभी भी स्वयं को मेरे न्याय की वास्तविकता से वंचित नहीं किया है। मैं आसमानों से ऊपर हूँ और दूर से देखता हूँ: असंख्य लोग मेरे द्वारा मार गिराए जा चुके हैं, फिर भी, असंख्य लोग मेरी दया और करूणा के बीच रहते भी हैं। क्या तुम लोग भी इसी प्रकार की परिस्थितियों के बीच नहीं रहते हो?

5 मार्च 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

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