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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

यदि इतना कार्य, और इतने सारे वचनों का तेरे ऊपर कोई असर नहीं हुआ, तो जब परमेश्वर के कार्य को फैलाने का समय आएगा तब तू अपने कर्तव्य को निभाने में असमर्थ हो जाएगा, और शर्मिन्दा और लज्जित होगा। उस समय, तू महसूस करेगा कि तू परमेश्वर का कितना ऋणी है, यह कि परमेश्वर के विषय में तेरा ज्ञान कितना छिछला है। यदि आज तू परमेश्वर के ज्ञान का अनुसरण नहीं करेगा, जबकि वह काम कर रहा है, तो बाद में बहुत देर हो जाएगी। अंत में, तेरे पास बोलने के लिए कोई ज्ञान नहीं होगा—तू खाली होगा, और तेरे पास कुछ भी नहीं होगा। तब, परमेश्वर को हिसाब देने के लिए तू किसका उपयोग करेगा? क्या तेरे पास परमेश्वर को देखने की कठोरता है? तुझे इसी वक्त अपने कार्य में कठिन परिश्रम करना है, जिस से तू, अंत में, पतरस के समान जान पाएगा कि परमेश्वर की ताड़ना और उसका न्याय मनुष्य के लिए कितना लाभकारी है, और बिना उसकी ताड़ना और न्याय के मनुष्य उद्धार प्राप्त नहीं कर सकता है, और वह केवल इस अपवित्र भूमि और इस दलदल में पहले से अधिक गहराई तक धंस सकता है। मनुष्यों को शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है, मनुष्यों ने एक दूसरे के विरूद्ध गुप्त साधनों का प्रयोग किया है और वे नुकीली नाल पहने हुए घोड़ों पर सवार होकर एक दूसरे के ऊपर से होकर गुज़र गए हैं, उन्होंने परमेश्वर के भय को त्याग दिया है, उनकी अनाज्ञाकारिता बहुत बड़ी है, उनकी धारणाएँ ढेर सारी हैं, और वे सभी शैतान से संबंध रखते हैं। परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के बगैर, मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव को शुद्ध नहीं किया जा सकता है और उसे बचाया नहीं जा सकता है। जो कुछ देहधारी परमेश्वर के कार्य के द्वारा देह में प्रकट किया गया है वह बिलकुल वही है जो आत्मा के द्वारा प्रकट किया गया है, और वह कार्य जो परमेश्वर करता है उसे आत्मा के द्वारा किए गए कार्य के अनुसार ही किया गया है। आज, यदि तेरे पास इस कार्य का कोई ज्ञान नहीं है, तो तू बहुत ही मूर्ख है, और तूने बहुत कुछ खो दिया है! यदि तूने परमेश्वर के उद्धार को प्राप्त नहीं किया है, तो तेरा विश्वास धार्मिक विश्वास है, और तू एक ऐसा मसीही है जो धर्म से जुड़ा हुआ है। क्योंकि तू मरे हुए सिद्धांतों को थामे हुए है, तूने पवित्र आत्मा के नए कार्य को खो दिया है; अन्य लोग, जो परमेश्वर के प्रेम का अनुसरण करते हैं, वे सत्य और जीवन पाने के योग्य हैं, जबकि तेरा विश्वास परमेश्वर की स्वीकृति को प्राप्त करने में असमर्थ है। उसके बजाय, तू बुरे काम करने वाला बन गया है, तू एक ऐसा व्यक्ति बन गया है जो घातक और घृणित कामों को करता है, तू शैतान के हँसी मज़ाक का निशाना बन गया है, और तू शैतान का क़ैदी बन गया है। मनुष्य के द्वारा परमेश्वर पर केवल विश्वास ही नहीं किया जाता है, परन्तु मनुष्य के द्वारा परमेश्वर से प्रेम किया जाता है, और मनुष्य के द्वारा उसका अनुसरण और उसकी आराधना की जाती है। यदि आज तू अनुसरण नहीं करेगा, तो वह दिन आएगा जब तू कहेगा, "काश! मैं ने परमेश्वर का अनुसरण सही रीति से किया होता, और उसे सही रीति से संतुष्ट किया होता। काश! मैंने अपने जीवन स्वभाव में परिवर्तन का अनुसरण किया होता। उस समय परमेश्वर के प्रति समर्पित हो पाने में असमर्थ होने, और परमेश्वर के वचन के ज्ञान का अनुसरण न करने के कारण मैं कैसा पछताता हूँ। तब परमेश्वर ने मुड़कर कितना कुछ कहा था; मैं कैसे अनुसरण नहीं कर सकता था? मैं कितना मूर्ख था!" तू एक निश्चित सीमा तक अपने आप से नफरत करेगा। आज, तू उन वचनों पर विश्वास नहीं करता है जो मैं कहता हूँ, और तू उन पर कोई ध्यान नहीं देता है; जब इस कार्य को फैलाने का दिन आता है, और तू उसकी सम्पूर्णता को देखता है, तब तू अफसोस करेगा, और उस समय तू भौंचक्का हो जाएगा। आशीषें हैं, फिर भी तू नहीं जानता है कि उसका आनन्द कैसे लें, और सच्चाई है, फिर भी तू उसका अनुसरण नहीं करता है। क्या तू अपने ऊपर अपमान लेकर नहीं आता है? आज, यद्यपि परमेश्वर का अगला कदम अभी शुरू होना बाकी है, फिर भी उन मांगों को लेकर कुछ भी अपवाद नहीं है जो तुझसे किया गया है और जो तुझ से कहा जाता है वह यह है कि तू उसे जीए। बहुत सारा कार्य है, बहुत सारी सच्चाईयाँ हैं; क्या वे इस योग्य नहीं हैं कि उन्हें तेरे द्वारा जाना जाए? क्या परमेश्वर की ताड़ना और उसका न्याय तेरी आत्मा को जागृत करने में असमर्थ है? क्या परमेश्वर की ताड़ना और उसका न्याय तुझे इस योग्य नहीं बना सकता है कि तू स्वयं से नफरत करे? क्या तू शैतान के प्रभाव में, शांति और आनन्द, और थोड़ा बहुत देह के सुकून के साथ जीवन बिताकर संतुष्ट है? क्या तू सभी लोगों में सब से अधिक निम्न नहीं हैं? उन से ज़्यादा मूर्ख और कोई नहीं है जिन्होंने उद्धार को देखा किन्तु उसे प्राप्त करने के लिए अनुसरण नहीं किया: वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने लालची इंसान की तरह माँस खाया और शैतान को प्रसन्न किया है। तू आशा करता है कि परमेश्वर पर विश्वास करने से तुझे चुनौतियाँ और क्लेश, या थोड़ी बहुत कठिनाई विरासत में नहीं मिलेगी। तू हमेशा ऐसी चीज़ों का अनुसरण करता है जो निकम्मी हैं, और तू अपने जीवन में कोई मूल्य नहीं जोड़ता है, उसके बजाय तू अपने फिजूल के विचारों को सत्य के सामने रख देता है। तू कितना निकम्मा है! तू एक सुअर के समान जीता है—तुझ में, और सूअर और कुत्तों में क्या अन्तर है? क्या वे जो सत्य का अनुसरण नहीं करते हैं, और उसके बजाय शरीर से प्रेम करते हैं, सब के सब जानवर नहीं हैं? क्या वे मरे हुए लोग जिन में आत्मा नहीं है चलती फिरती हुई लाशें नहीं हैं? तुम लोगों के बीच में कितने सारे वचन बोले गए हैं? क्या तुम लोगों के बीच में केवल थोड़ा सा ही कार्य किया गया है? मैं ने तुम लोगों के बीच में कितनी सामग्रियों का प्रबन्ध किया है? तो फिर तूने इसे प्राप्त क्यों नहीं किया? तेरे पास शिकायत करने के लिए क्या है? क्या यह वह मामला नहीं है कि तूने कुछ भी प्राप्त नहीं किया है क्योंकि तू देह के साथ बहुत अधिक प्रेम करता है? और क्या यह इसलिए नहीं है क्योंकि तेरे विचार बहुत ज़्यादा फिजूल हैं? क्या यह इसलिए नहीं है क्योंकि तू बहुत ही ज़्यादा मूर्ख हैं? यदि तू इन आशीषों को प्राप्त करने में असमर्थ है, तो क्या तू परमेश्वर को दोष देगा कि उसने तुझे नहीं बचाया? तू परमेश्वर पर विश्वास करने के बाद शांति प्राप्त करने के योग्य होने के लिए अनुसरण करता है—अपनी सन्तानों के लिए कि वे बीमारी से आज़ाद हों, अपने पति के लिए कि उसके पास एक अच्छी नौकरी हो, अपने बेटे के लिए कि उसके पास एक अच्छी पत्नी हो, तेरी बेटी के लिए कि वह एक सज्जन पति ढूँढ़ पाए, अपने बैल और घोड़े के लिए कि वे अच्छे से जमीन की जुताई करें, और अपनी फसलों के लिए साल भर अच्छे मौसम के लिए कोशिश करता है। तू इन्हीं चीज़ों की खोज करता है। तेरा कार्य केवल सुकून के साथ जीवन बिताना है, क्योंकि तेरे परिवार में कोई दुर्घटना नहीं होती है, क्योंकि हवा तेरे पास से होकर गुज़र जाती है, क्योंकि धूल मिट्टी तेरे चेहरे को छूती नहीं है, क्योंकि तेरे परिवार की फसलें बाढ़ में बहती नहीं हैं, क्योंकि तू किसी भी विपत्ति से प्रभावित नहीं होता है, इसलिए कि तू परमेश्वर की बांहों में रहता है, इसलिए कि तू आरामदायक घोंसले में रहता है। तेरे जैसा डरपोक इंसान, जो हमेशा शरीर के पीछे पीछे चलता है—क्या तेरे पास एक हृदय है, क्या तेरे पास एक आत्मा है? क्या तू एक पशु नहीं हैं? बदले में बिना कुछ मांगते हुए मैं ने तुझे एक सच्चा मार्ग दिया है, फिर भी तू अनुसरण नहीं करता है। क्या तू उनमें से एक है जो परमेश्वर पर विश्वास करता है? मैं ने तुझे वास्तविक मानवीय जीवन दिया है, फिर भी तू अनुसरण नहीं करता है। क्या तू कुत्ता और सुअर से अलग नहीं है? सूअर मनुष्य के जीवन का अनुसरण नहीं करते हैं, वे शुद्ध किए जाने का प्रयास नहीं करते हैं, और वे नहीं समझते हैं कि जीवन है क्या? प्रति दिन, जी भरकर खाने के बाद, वे बस सो जाते हैं। मैं ने तुझे सच्चा मार्ग दिया है, फिर भी तूने उसे प्राप्त नहीं किया है: तेरे हाथ खाली हैं। क्या तू इस जीवन में, सूअर के जीवन में, निरन्तर बने रहना चाहता है? ऐसे लोगों के ज़िन्दा रहने का क्या महत्व है? तेरा जीवन घृणित और नीच है, तू गन्दगी और व्यभिचार के मध्य रहता है, और तू किसी उद्देश्य का पीछा नहीं करता है; क्या तेरा जीवन सब से अधिक निम्न नहीं है? क्या तेरे पास परमेश्वर की ओर देखने की कठोरता है? यदि तू लगातार इस तरह अनुभव करता रहे, तो क्या तुझे शून्यता प्राप्त नहीं होगी? सच्चा मार्ग तुझे दे दिया गया है, किन्तु अंततः तू उसे प्राप्त कर सकता है कि नहीं यह तेरे व्यक्तिगत अनुसरण पर निर्भर है। लोग कहते हैं कि परमेश्वर एक धर्मी परमेश्वर है, और यह कि जब तक मनुष्य अंत तक उसके पीछे पीछे चलता रहता है, वह निश्चित रूप से मनुष्य के प्रति निष्पक्ष होगा, क्योंकि वह सब से अधिक धर्मी है। यदि मनुष्य बिलकुल अंत तक उसके पीछे पीछे चलता है, तो क्या वह मनुष्य को दरकिनार कर सकता है? मैं सभी मनुष्यों के प्रति निष्पक्ष हूँ, और अपने धर्मी स्वभाव से सभी मनुष्यों का न्याय करता हूँ, फिर भी जो मांग मैं मनुष्य से करता हूँ उसके लिए कुछ यथोचित स्थितियाँ होती हैं, और यह कि जो मैं मांगता हूँ उसे सभी मनुष्यों के द्वारा अवश्य की पूरा किया जाना चाहिए, इसकी परवाह किए बगैर कि वे कौन हैं। मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ कि तेरी योग्यताएँ कितनी व्यापक और आदरणीय हैं; मैं सिर्फ इसकी परवाह करता हूँ कि तू मेरे मार्ग में चलता है कि नहीं, और तू मुझ से प्रेम करता है कि नहीं और तू सत्य के लिए प्यासा है कि नहीं। यदि तुझ में सत्य की कमी है, और उसके बजाय तू मेरे नाम को लज्जित करता है, और मेरे मार्ग के अनुसार कार्य नहीं करता है, और किसी बात की परवाह या चिंता किए बगैर बस नाम के लिए मेरा अनुसरण करता है, तो उस समय मैं तुझे मार कर नीचे गिरा दूँगा और तेरी बुराई के लिए तुझे दण्ड दूँगा, तब तेरे पास कहने के लिए क्या होगा? क्या तू ऐसा कह सकता है कि परमेश्वर धर्मी नहीं है? आज, यदि तूने उन वचनों का पालन किया है जिन्हें मैं ने कहा है, तो तू ऐसा इंसान है जिसे मैं स्वीकार करता हूँ। तू कहता है कि तूने हमेशा परमेश्वर का अनुसरण करते हुए दुख उठाया है, यह कि तूने हमेशा हर परिस्थितियों में उसका अनुसरण किया है, और तूने उसके साथ अपना अच्छा और खराब समय बिताया है, किन्तु तूने परमेश्वर के द्वारा बोले गए वचनों के अनुसार जीवन नहीं बिताया है; तू हर दिन उसके पीछे पीछे भागना चाहता है, और तूने कभी भी एक अर्थपूर्ण जीवन बिताने के बारे में नहीं सोचा है। तू कहता है कि, किसी भी सूरत में, तू विश्वास करता है कि परमेश्वर धर्मी है: तूने उसके लिए दुख उठाया है, तू उसके लिए यहाँ वहाँ भागते रहता है, और तूने उसके लिए अपने आपको समर्पित किया है, और तूने कड़ी मेहनत की है इसके बावजूद तुझे कोई पहचान नहीं मिली है; वह निश्चय ही तुझे स्मरण रखता है। यह सच है कि परमेश्वर धर्मी है, फिर भी इस धार्मिकता को किसी अशुद्धता के द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है: इस में कोई मानवीय इच्छा नहीं है, और इसे शरीर, या मानवीय सौदों के द्वारा कलंकित नहीं किया जा सकता है। वे सभी जो विद्रोही हैं और विरोध में हैं, और जो उसके मार्ग की सम्मति में नहीं हैं, उन्हें दण्डित किया जाएगा; किसी को भी क्षमा नहीं किया गया है, और किसी को भी बख्शा नहीं गया है! कुछ लोग कहते हैं, "आज मैं आपके लिए यहाँ वहाँ भागता हूँ; जब अंत आता है, तो क्या तू मुझे थोड़ी सी आशीष दे सकता है?" अतः मैं तुझसे पूछता हूँ, "क्या तूने मेरे वचनों का पालन किया है?" वह धार्मिकता जिसकी तू बात करता है वह एक सौदे पर आधारित है। तू सोचता है कि केवल मैं ही धर्मी हूँ, और सभी मनुष्यों के प्रति निष्पक्ष हूँ, और यह कि वे सब जो बिलकुल अंत तक मेरा अनुसरण करते हैं उन्हें निश्चय है कि उन्हें बचा लिया जाएगा और वे मेरी आशीषों को प्राप्त करते हैं। मेरे वचनों में एक भीतरी अर्थ है कि "वे सब जो बिलकुल अंत तक मेरा अनुसरण करते हैं उन्हें निश्चय है कि उन्हें बचा लिया जाएगा": वे जो बिलकुल अंत तक मेरा अनुसरण करते हैं वे ऐसे लोग हैं जिन्हें मेरे द्वारा पूरी तरह ग्रहण कर लिया जाएगा, वे ऐसे लोग हैं जो, मेरे द्वारा विजय पा लिए जाने के बाद, सत्य को खोजते हैं और उन्हें सिद्ध बनाया गया है। तूने कैसी स्थितियाँ हासिल की है? तू बिलकुल अंत तक सिर्फ मेरा अनुसरण करने में कामयाब हुआ है, किन्तु तूने और क्या किया है? क्या तूने मेरे वचनों का पालन किया है? तूने मेरी पाँच में से एक मांग को पूरा किया है, फिर भी बाकी चार को पूरा करने का तेरा कोई इरादा नहीं है। तूने बस सरल और आसान पथ को ढूँढ़ लिया है, और अपने आपको सौभाग्यशाली मानकर उसका अनुसरण किया है। तेरे जैसे इंसान के लिए मेरा धर्मी स्वभाव एक प्रकार से ताड़ना और न्याय है, यह एक प्रकार से सच्चा प्रतिफल है, और यह बुरा काम करनेवालों के लिए उचित दण्ड है; वे सभी जो मेरे मार्गों में नहीं चलते हैं उन्हें निश्चय ही दण्ड दिया जाएगा, भले ही वे अंत तक अनुसरण करते रहें। यह परमेश्वर की धार्मिकता है। जब यह धर्मी स्वभाव मनुष्य की सज़ा में प्रकट होता है, तो मनुष्य भौंचक्का हो जाता है, और परमेश्वर का अनुसरण करते हुए, अफसोस करता है कि वह उसके मार्ग पर नहीं चलता था। उस समय, परमेश्वर का अनुसरण करते हुए वह केवल थोड़ा सा दुख उठाता है, किन्तु वह परमेश्वर के मार्ग में नहीं चलता है। इस में क्या बहाने हैं? और ताड़ना दिए जाने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं है! फिर भी वह अपने मन में सोच रहा है, "किसी न किसी प्रकार से, मैं ने बिलकुल अंत तक अनुसरण किया है, अतः भले ही तू मुझे ताड़ना दे, फिर भी यह कठोर ताड़ना नहीं हो सकती है, और इस ताड़ना को बलपूर्वक लागू करने के बाद तुझे तब भी मेरी जरूरत पड़ेगी। मैं जानता हूँ कि तू धर्मी हैं, और तू हमेशा मेरे साथ उस प्रकार से व्यवहार नहीं करेगा। इतना सब होते हुए भी, मैं उनके समान नहीं हूँ जिन्हें मिटा दिया जाएगा; वे जो मिटा दिए जाते हैं वे भारी ताड़ना प्राप्त करेंगे, जबकि मेरी ताड़ना हल्की होगी।" परमेश्वर का स्वभाव ऐसा नहीं है जैसा तू कहता है। यह वह स्थिति नहीं है कि वे जो पापों का अंगीकार करने में अच्छे होते हैं उनके साथ कोमलता के साथ व्यवहार किया जाता है। धार्मिकता ही पवित्रता है, और वह एक स्वभाव है जो मनुष्य के अपराध को सहन नहीं कर सकता है, और वह सब कुछ जो अशुद्ध है और जो परिवर्तित नहीं हुआ है वह परमेश्वर की घृणा का पात्र है। परमेश्वर का धर्मी स्वभाव एक व्यवस्था नहीं है, किन्तु प्रशासनिक आज्ञा है: यह राज्य के भीतर एक प्रशासनिक आज्ञा है, और यह प्रशासनिक आज्ञा उस व्यक्ति के लिए सच्चा दण्ड है जिसके पास सत्य नहीं है और जो परिवर्तित नहीं हुआ है, और उद्धार की कोई गंजाइश नहीं है। क्योंकि जब प्रत्येक मनुष्य को प्रकृति के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है, तो अच्छे मनुष्य को ईनाम दिया जाएगा और बुरे मनुष्य को दण्ड दिया जाएगा। यह तब होगा जब मनुष्य की नियति को स्पष्ट किया जाएगा, यह वह समय है जब उद्धार का कार्य समाप्त हो जाएगा, मनुष्य के उद्धार का कार्य आगे से नहीं किया जाएगा, और उन में से हर को बदला दिया जाएगा जो बुराई करते हैं। कुछ लोग कहते हैं, "परमेश्वर उन में से हर एक को स्मरण करता है जो बहुधा उसकी तरफ होते हैं। मैं उन भाईयों और बहनों में से एक हूँ, और परमेश्वर हम में से किसी को भी भूल नहीं सकता है। हमें परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाने के लिए आश्वस्त किया गया है। वह उन में से किसी को स्मरण नहीं करेगा जो हम से कमतर हैं, उन में से वे लोग जिन्हें सिद्ध बनाया जाएगा उन्हें आश्वस्त किया गया है कि वे हम से नीचे होंगे, जो अक्सर परमेश्वर का सामना करते हैं; हम में से किसी को परमेश्वर के द्वारा भुलाया नहीं गया है, हम सभी को परमेश्वर के द्वारा मंजूर किया गया है, और परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाने के लिए आश्वस्त किया गया है।" तुम सभी के पास ऐसी धारणाएँ हैं; क्या यह धार्मिकता है? तू सत्य को अभ्यास में लाया है या नहीं? तू वास्तव में इस प्रकार की अफवाह फैलाता है—तुझ में कोई शर्म नहीं है!

आज, कुछ लोग परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किए जाने का लगातार प्रयास करते हैं, किन्तु जब उन पर विजय पा लिया जाता है उसके बाद उन्हें सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। जहाँ तक आज बोले गए वचनों की बात है, यदि, जब परमेश्वर लोगों को इस्तेमाल करता है, तू अभी भी उन्हें पूरा करने में असमर्थ है, तो तुझे सिद्ध नहीं बनाया गया है। दूसरे शब्दों में, जब मनुष्य को सिद्ध बनाया जाता है तब उस समयावधि के अंत का आगमन यह निर्धारित करेगा कि परमेश्वर के द्वारा मनुष्य को ख़त्म किया जाएगा या इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे लोग जिन पर विजय पा लिया गया है वे निष्क्रियता और नकारात्मकता के उदाहरणों से बढ़कर और कुछ नहीं हैं; वे नमूने और आदर्श हैं, किन्तु वे सुर में सुर मिलानेवाले से बढ़कर और कुछ नहीं हैं। जब मनुष्य के पास जीवन होता है, केवल तभी उसका स्वभाव बदलता है, और जब वह भीतरी और बाहरी परिवर्तन हासिल कर लेता है तो उसे पूरी तरह सिद्ध बना दिया जाएगा। आज, तुम में से कौन चाहता है कि उस पर विजय पा लिया जाए, या उसे सिद्ध बना दिया जाए? तू किसे हासिल करना चाहता है? सिद्ध किए जाने की कितनी शर्तों को तूने पूरा किया है? तूने किसे पूरा नहीं किया है? तुझे स्वयं को सुसज्जित कैसे करना चाहिए, तुझे अपनी कमियों को कैसे पूरा करना चाहिए? तुझे सिद्ध किए जाने के पथ पर कैसे प्रवेश करना चाहिए? तुझे स्वयं को पूरी तरह कैसे सौंपना चाहिए? तू कहता है कि तुझे सिद्ध बनाया जाए, तो क्या तू पवित्रता का अनुसरण करता है? क्या तू ताड़ना और न्याय का अनुसरण करता है ताकि तुझे परमेश्वर के द्वारा सुरक्षित किया जा सके? तू शुद्ध होने का अनुसरण करता है, तो क्या तू ताड़ना और न्याय को स्वीकार करने के लिए तैयार है? तू परमेश्वर को जानने की बात कहता है, किन्तु क्या तेरे पास उसकी ताड़ना और उसके न्याय का ज्ञान है? आज, अधिकतर कार्य जो मैं तुझ पर करता हूँ वह ताड़ना और न्याय है; उस कार्य के विषय में तेरा ज्ञान क्या है, जिसे तेरे ऊपर किया गया है? क्या वह ताड़ना और न्याय जिसका तूने अनुभव किया है उसने तुझे शुद्ध किया है? क्या इसने तुझे परिवर्तित किया है? क्या इसका तेरे ऊपर कोई प्रभाव पड़ा है? क्या तू आज के बहुत से कार्यों—शाप, न्याय, और रहस्यों का खुलासा—से थक गया है, या क्या तू महसूस करता है कि वे तेरे लिए बहुत लाभदायक हैं? तू परमेश्वर से प्रेम करता है, किन्तु तू किस कारण उस से प्रेम करता है? क्या तू उस से प्रेम करता है क्योंकि तूने थोड़ा सा अनुग्रह प्राप्त किया है, या क्या तू शांति और आनन्द प्राप्त करने के बाद उस से प्रेम करता है? क्या तू उसकी ताड़ना और उसके न्याय के द्वारा शुद्ध किए जाने के बाद उस से प्रेम करता है? वह वास्तव में कौन सी बात है जो तुझे परमेश्वर से प्रेम करने के लिए प्रेरित करती है? सिद्ध होने के लिए पतरस ने वास्तव में किन शर्तों को पूरा किया था? सिद्ध होने के बाद, वह कौन सा निर्णायक तरीका था जिसके तहत उसे प्रकट किया गया था? क्या उसने प्रभु यीशु से इसलिए प्रेम किया क्योंकि वह उसकी लालसा करता था, या इसलिए क्योंकि वह उसे देख नहीं सकता था, या इसलिए क्योंकि उसकी निन्दा की गई थी? या क्या वह प्रभु यीशु से कहीं ज़्यादा प्रेम इसलिए किया क्योंकि परमेश्वर ने क्लेशों के कष्ट को स्वीकार किया था, और स्वयं की अशुद्धता और अनाज्ञाकारिता को जान पाया था, और प्रभु की पवित्रता को जान पाया था? क्या परमेश्वर की ताड़ना और उसके न्याय के कारण परमेश्वर के प्रति उसका प्रेम और अधिक शुद्ध हो गया था, या किसी और कारण से? वह क्या था? तू परमेश्वर के अनुग्रह के कारण उस से प्रेम करता है और इसलिए क्योंकि आज उसने तुझे थोड़ी सी आशीष दी है। क्या यह सच्चा प्रेम है? तुझे परमेश्वर से प्रेम कैसे करना चाहिए? उसके धर्मी स्वभाव को देखने के बाद, क्या तुझे उसकी ताड़ना और उसके न्याय को स्वीकार करना चाहिए, और क्या तुझे उस से सचमुच में प्रेम करने के योग्य होना चाहिए, कुछ इस तरह कि तू पूरी तरह विश्वस्त हो जाता है, और क्या तेरे पास उसका ज्ञान होना चाहिए? पतरस के समान, क्या तू कह सकता है कि तू परमेश्वर से पर्याप्त प्रेम नहीं कर सकता है? क्या ताड़ना और न्याय के बाद जीत लिए जाने के लिए तू इसका अनुसरण करता है, या ताड़ना और न्याय के बाद शुद्ध, सुरक्षित और सँभाले जाने के लिए अनुसरण करता है? तू इन में से किसका अनुसरण करता है? क्या तेरा जीवन अर्थपूर्ण है, या निराधार और बिना किसी मूल्य का है? क्या तुझे शरीर चाहिए, या तुझे सत्य चाहिए? तू न्याय की इच्छा करता है या राहत की? परमेश्वर के कार्यों का इतना अनुभव करने के बाद, और परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता को देखने के बाद, तुझे किस प्रकार अनुसरण करना चाहिए? तुझे इस पथ पर किस प्रकार चलना चाहिए? तू परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यवहार में कैसे ला सकता है? क्या परमेश्वर की ताड़ना और न्याय ने आपमें कोई असर डाला है? तुझ में परमेश्वर की ताड़ना और उसके न्याय का ज्ञान है कि नहीं यह इस पर निर्भर होता है कि तू किस प्रकार का जीवन जीता है, और तू किस सीमा तक परमेश्वर से प्रेम करता है! तेरे होंठ कहते हैं कि तू परमेश्वर से प्रेम करता है, फिर भी तू जिस प्रकार का जीवन जीता है वह पुराना और भ्रष्ट स्वभाव का है; तुझ में परमेश्वर का कोई भय नहीं है, और तेरे पास विवेक तो बिलकुल भी नहीं है। क्या ऐसे लोग परमेश्वर से प्रेम करते हैं? क्या ऐसे लोग परमेश्वर के प्रति वफादार होते हैं? क्या वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर की ताड़ना और उसके न्याय को स्वीकार करते हैं? तू कहता है कि तू परमेश्वर से प्रेम करता है और उस पर विश्वास करता है, फिर भी तू अपनी धारणाओं को नहीं छोड़ता है। तेरे कार्य में, तेरे लिखने में, उन शब्दों में जो तू बोलता है, और तेरे जीवन में परमेश्वर के प्रति तेरे प्रेम का कोई प्रकटीकरण नहीं है, और परमेश्वर के प्रति कोई आदर नहीं है। क्या यह एक ऐसा इंसान है जिसने ताड़ना और न्याय को प्राप्त किया है? क्या ऐसा कोई इंसान पतरस के समान हो सकता है? क्या वे लोग जो पतरस के समान हैं उनके पास केवल ज्ञान होता है, परन्तु वे उसे जीते नहीं हैं? आज, वह कौन सी शर्त है जिसकी जरूरत मनुष्य को है जिस से वह एक वास्तविक जीवन बिता सके? क्या पतरस की प्रार्थनाएँ उसके मुँह से निकलने वाले शब्दों से बढ़कर और कुछ नहीं थे? क्या वे उसके हृदय की गहराईयों से निकले हुए शब्द नहीं थे? क्या पतरस ने केवल प्रार्थना किया था, और सत्य को व्यवहार में नहीं लाया था? तेरा अनुसरण किसके लिए है? तुझे परमेश्वर की ताड़ना और उसके न्याय के दौरान अपने आपको किस प्रकार सुरक्षित और शुद्ध रखना चाहिए था? क्या परमेश्वर की ताड़ना और न्याय से मनुष्य को कोई लाभ नहीं है? क्या सभी न्याय सज़ा है? क्या ऐसा हो सकता है कि केवल शांति एवं आनन्द, और केवल भौतिक आशीषें एवं क्षणिक राहत ही मनुष्य के जीवन के लिए लाभदायक हैं? यदि मनुष्य एक सुहावने और आरामदेह वातावरण में रहे, बिना किसी न्यायिक जीवन के, तो क्या उसे शुद्ध किया जा सकता है? यदि मनुष्य बदलना और शुद्ध होना चाहता है, तो उसे सिद्ध किए जाने को कैसे स्वीकार करना चाहिए? आज तुझे कौन सा पथ चुनना चाहिए?

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

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