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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

तुम्हारे हृदय में एक बहुत बड़ा रहस्य है। तुम कभी नहीं जान पाते कि वो वहाँ है क्योंकि तुम एक ऐसे संसार में जीवन बिता रहे हो जहां चमकती रोशनी नहीं है। तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा दुष्ट शक्ति द्वारा दबोच ली गई है। तुम्हारी आंखों को अंधकार ने ढक लिया है, तुम सूर्य को आकाश में नहीं देख सकते, न ही रात में टिमटिमाते तारों को। तुम्हारे कान धोखा देने वाले शब्दों से जाम हो गए हैं और तुम यहोवा की गर्जन वाली आवाज को सुन नहीं पाते हो, न ही सिंहासन से तेज बहते जल की आवाज को। जो जो तुम्हारा था और सर्वशक्तिमान ने जो तुम्हें दिया था सब कुछ तुमने खो दिया है। तुम कड़वाहट के एक अथाह सागर में प्रवेश कर चुके हो, जहां बच पाने का सामर्थ नहीं है, जीवित बचने की आशा नहीं है, बस संघर्ष और हलचल मचाने के लिये बचे हुए हो... उस घड़ी से लेकर तुम शैतान द्वारा यातना सहने के लिए विनाश की नियति में हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आशीषों से बहुत दूरी पर रखे गए हो, सर्वशक्तिमान के प्रावधानों की पहुँच से दूर, और तुम लौट न पाने वाली सड़क पर भटक रहे हो। लाखों पुकारें शायद ही तुम्हारे दिल और आत्मा को उकसा पाएँ। तुम दुष्ट के हाथों में गहरी नींद लेते हो, जिसने तुम्हें काल्पनिक संसार में बिना किसी दिशा, बिना किसी सड़क चिन्ह के। ललचाकर खींच लिया है। अब यहीं से तुमने अपनी मूल पवित्रता को, मासूमियत को खो दिया है, और सर्वशक्तिमान की देखभाल से छिपने लगे हो। वह दुष्ट तुम्हारे हृदय को चलाता है और तुम्हारा जीवन बन जाता है। अब तुम उससे डरते नहीं हो, उसे नजरअंदाज नहीं करते, उस पर संदेह नहीं करते। बल्कि उसे तो तुम अपने हृदय का ईश्वर समझने लगते हो। वह तुम्हारे मन की मूरत बन जाता है, उसकी आराधना करते हो, उसकी परछाई समान सदैव साथ रहते हो, और पारस्परिक रूप से जीवन और मृत्यु में एक दूसरे के लिए वचनबद्ध हो जाते हो। तुम्हें कोई अंदाज़ा नहीं कि तुम्हारा अस्तित्व कहां से प्राप्त हुआ, तुम अस्तित्व में क्यों हो, या तुम क्यों मरते हो? तुम्हारे लिए सर्वशक्तिमान एक अजनबी सा हो गया है, तुम उसके मूल अमर व्यक्तित्व को नहीं जानते हो, उसका कार्य जो तुम्हारे लिए उसने किया है, उसको भी भुला बैठे हो। उसका प्रत्येक कार्य तुम्हें घृणित लगने लगा है। न तुम उनसे प्रसन्न हो और न उनकी कीमत जानते हो। उसी दिन से जबसे तुमने सर्वशक्तिमान से प्रावधान प्राप्त करना शुरू कर दिया था। तुम उस दुष्ट शक्ति के साथ चलते आ रहे हो। हजारों वर्षों से तुम उस दुष्ट शक्ति के साथ आंधी तूफान में से होकर चलते रहे हो। उससे मिलकर तुमने परमेश्वर का विरोध किया, जो तुम्हारे जीवन का स्त्रोत था। तुम पश्चताप नहीं करते, अब तुम जान लो कि तुम नाश के चरम बिंदु पर जा पहुंचे हो। तुम भूल बैठे कि दुष्ट शक्ति ने तुम्हें प्रलोभित किया, तुम्हें सताया; तुम अपने मूल को भूल गए। ठीक इसी तरह दुष्ट शक्ति तुम्हें प्रत्येक कदम पर अभी भी हानि पहुंचा रही है। तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा ज्ञानहीन और रद्दी हो गये हैं। तुम अब संसार की व्याकुलता को लेकर शिकायत नहीं करते, ऐसा विश्वास ही नहीं करते कि संसार अधर्म से भरा है। तुम तो सर्वशक्तिमान के अस्तित्व की परवाह तक नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि तुमने दुष्ट शक्ति को अपना सच्चा पिता मान लिया है, और तुम अब उससे अलग नहीं हो सकते। यह तुम्हारे हृदय का एक राज़ है।

जब भोर होती है, भोर का तारा पूर्व दिशा से निकलता है। यह वह तारा है जो पहले कभी नहीं था। यह चमकते हुए आकाश को रोशनी देता है और लोगों के हृदय में बुझी हुई ज्योति को जला देता है। लोग अब अकेले नहीं हैं, इस ज्योति के कारण, ज्योति जो तुम्हारे और दूसरों के ऊपर चमकती है, परंतु सिर्फ तुम अंधकारमय रात में गहरी नींद में सोते रहते हो। तुम आवाज सुनने में, रोशनी को निहार पाने में असमर्थ हो, यहां तक कि एक नए आकाश और एक नई पृथ्वी, नये युग के आगमन पर ध्यान देने में भी असमर्थ हो। क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हें बताता है, "मेरे बेटे, जागना मत, अभी सुबह नहीं हुई है। बाहर सर्दी है, अंदर ही रहो, नहीं तो तलवार और भाले तुम्हारी आंखे छेद डालेंगे।" तुम्हें अपने पिता के प्रोत्साहन पर बड़ा विश्वास है क्योंकि तुम्हारा मानना है पिता जो तुमसे बड़ा है एकदम सही है और वो पिता तुमसे सच्चा प्यार भी करता है। ऐसा प्रोत्साहन और ऐसा प्यार उस किंवदन्ती पर विश्वास ही नहीं दिलाता कि इस संसार में ज्योति है, और बिल्कुल परवाह नहीं करता कि संसार में सच्चाई है। तुम अब और आशा नहीं लगाते कि सर्वशक्तिमान तुम्हें बचा ले। तुमअपनी यथा-स्थिति से संतुष्ट हो, अब रोशनी की किरण के आगमन की आशा ही नहीं रखते, और अब पौराणिक सर्वशक्तिमान परमेश्वर के आगमन हेतु आंखें भी खोलकर नहीं रखते। तुम्हारी नजरों में जो सुंदर दिखता है अब कभी भी उसका पुनरुत्थान नहीं होगा, न ही अस्तित्व में रहेगा। तुम्हारी नज़र में मानवजाति का कल या भविष्य गायब और नष्ट हो जाता है। तुम अपने पिता के वस्त्रों को पूरी शक्ति से पकड़े हुए हो, साथ में कष्ट उठाने को तैयार, अपने सहयात्री और अपनी सुदूर यात्रा की दिशा खो देने के भय से पीड़ित हो। विराट और भ्रमित संसार ने तुममें से अनेक को इस दुनिया में तरह-तरह की भूमिका निभाने हेतु निर्भीकता और निडरता से भर दिया है। उसने कई "योद्धाओं" को तैयार कर दिया है जो मृत्यु से डरते ही नहीं। इससे भी बढ़कर, उसने असंवेदनशील और लकवा ग्रसित मनुष्यों के दल बनाकर रखे हैं जो अपने सृजे जाने के अभिप्राय को बिल्कुल नहीं समझते। सर्वशक्तिमान की नज़रों ने अत्याधिक पीड़ित मानवजाति के चारों ओर देखा, वे जो दुख सह रहे थे उनके विलाप को सुना, वे जो व्यथित थे उनकी निर्लज्जता को देखा, और उस मानवजाति की बेबसी एवं भय को महसूस किया जिसने अपना उद्धार खो दिया है। मनुष्यजाति उसकी देखभाल को नकारती है, अपने ही मार्ग पर चलती है,और उस की नज़र रखने वाली आंखों से दूर रहती है। वह शत्रु के संग गहरे समुद्र की सारी कड़वाहट का स्वाद चखना अधिक पसंद करेगी। सर्वशक्तिमान की आह अब सुनाई नहीं देती। सर्वशक्तिमान के हाथ दुखित मानव जाति को अब स्पर्श करने के लिए तैयार नहीं हैं। वह अपना काम दोहराता है, बार-बार खोता और फिर से पाता है। उस क्षण से वह थक जाता है, ऊब जाता है और तब वह अपने हाथ को रोक देता है, और फिर लोगों के बीच में भ्रमण करना बंद कर देता है... लोग इन परिवर्तनों के प्रति जागरूक नहीं हैं, सर्वशक्तिमान के आने और जाने, सर्वशक्तिमान के खेदित मन और निराशा को नहीं जानते।

संसार में सब कुछ तेज़ी से परिवर्तित हो रहा है, सर्वशक्तिमान के विचारों से, उसकी नजरों के नीचे। मानवजाति ने जिन चीज़ों के बारे में अब तक कभी सुना ही नहीं एकाएक टूट पड़ेगी। तथापि, मानवजाति ने जिन बातों को अब तक अपने अधिकार में रखा है, उसके हाथ से अनजाने में फिसल सकती हैं। सर्वशक्तिमान के ठौर-ठिकाने के बारे में कोई भी समझ नहीं सकता है, इसके अलावा सर्वशक्तिमान के जीवन की सामर्थ की उत्तमता और महानता को कोई महसूस नहीं कर पा रहा है। मनुष्य जो महसूस नहीं कर सकता उसे सर्वशक्तिमान महसूस कर सकता है, इसी में उसकी अलौकिकता होती है। जिस मनुष्य जाति ने, उससे नाता तोड़ लिया, वह फिर भी उसी को बचाता है, उसकी महानता इसमें है। उसे जीवन और मृत्यु का अर्थ मालूम है। इसके अलावा वह मानवजाति, जो उसकी रचना है, उसके जीवन के नियमों को जानता है। वह मनुष्य के अस्तित्व का मूल आधार है और मानवजाति को पुनर्जीवित करने के लिए उसको छुड़ाने वाला भी है। वह प्रसन्नचित हृदय को व्याकुलता से भर देता है और दुखित हृदयों को प्रसन्नता के साथ उठाता है। ये सब उसके कार्य, और उसकी योजनाओं के लिए है।

मनुष्य, जिन्होंने सर्वशक्तिमान के जीवन की आपूर्ति को त्याग दिया, नहीं जानते हैं आखिर वे क्यों अस्तित्व में हैं, और फिर भी मृत्यु से डरते रहते हैं। इस दुनिया में, जहां कोई सहारा नहीं है, सहायता नहीं है, वहाँ बहादुरी के साथ, बिन आत्माओं की चेतना के शरीरों में एक अशोभनीय अस्तित्व को दिखाते हुए मनुष्य, अपनी आंखों को बंद करने में, अभी भी अनिच्छुक है। तुम इनके समान जीते हो, आशाहीन; उसका अस्तित्व इसी प्रकार का, बिना किसी लक्ष्य का है। किंवदन्ती में मात्र एक ही पवित्र जन है जो उन्हें बचाने के लिए आएगा जो कष्ट से कराहते हैं और उसके आगमन के लिए हताश होकर तड़पते हैं। इन लोगों में जो अचेत हैं अभी यह विश्वास जगाया नहीं जा सकता है। फिर भी लोगों में ऐसा प्राप्त करने की लालसा है। वे जो बुरी तरह से दुख में हैं सर्वशक्तिमान उन पर करुणा दिखाता है। साथ ही, वह उन लोगों से ऊब चुका है जो होश में नहीं है, क्योंकि उसे उनसे प्रत्युत्तर पाने में लंबा इंतजार करना पड़ता है। वह खोजने की इच्छा करता है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारी आत्मा को ढूंढता है। वह तुम्हें भोजन-पानी देना चाहता है, जगाना चाहता है, ताकि तुम फिर और भूखे और प्यासे न रहो। जब तुम थके हो और इस संसार में खुद को तन्हा महसूस करने लगो तो, व्याकुल मत होना, रोना मत। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, रखवाला, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा। वह तुम्हारे ऊपर नज़र रखे हुए है, वह तुम्हारे लौटने की प्रतीक्षा में बैठा है। वह उस दिन की प्रतीक्षा में है जब तुम्हारी याददाश्त एकाएक लौट आयेगी: और इस सत्य को पहचान लेगी कि तुम परमेश्वर से ही आए हो, किसी तरह और किसी जगह एक बार बिछड़ गए थे, सड़क के किनारे बेहोश पड़े थे, और फिर अनजाने में एक पिता आ गया। और फिर तुम्हें यह भी एहसास हो कि सर्वशक्तिमान निरंतर देख रहा था, तुम्हारे लौटकर आने की प्रतीक्षा कर रहा था। वह अत्यधिक लालायित है, बिना प्रत्युत्तर के जवाब के आस में बैठा है। उसका प्रतीक्षा करना अनमोल है, और यह मनुष्य के हृदय और उसकी आत्मा के लिए है। संभवतः यह प्रतीक्षा अनिश्चित है, शायद यह प्रतीक्षा अपनी अंतिम बेला में है। परंतु तुम्हें ठीक से जान लेना चाहिए कि तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा इस क्षण कहाँ है।

मई 28, 2003

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं

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