परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (7)" | अंश 311

ऊपर से नीचे तक और शुरुआत से अंत तक, शैतान परमेश्वर के कार्य को बाधित कर रहा है और उसके साथ विवाद में बर्ताव कर रहा है। प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की सभी बातें, प्राचीन संस्कृति का मूल्यवान ज्ञान, ताओवाद और कन्फ्यूशीवाद की शिक्षाएँ, और कन्फ्यूशियस के क्लासिक्स और सामंती संस्कारों ने मनुष्य को नरक में पहुँचा दिया है। उन्नत आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी, साथ ही विकसित उद्योग, कृषि और व्यवसाय कहीं भी नज़र नहीं आते हैं। इसके बजाय, परमेश्वर के कार्य को जानबूझकर बाधित, प्रतिरोधित और नष्ट करने के लिए यह प्राचीन "वानरों" द्वारा प्रचारित केवल सामंती रिवाजों पर जोर देता है। आज तक इसने मनुष्य को केवल पीड़ित ही नहीं किया है, बल्कि यह मनुष्य को पूरी तरह से खा जाना चाहता है। सामंती नीति-संहिता की शिक्षा और प्राचीन संस्कृति के ज्ञान की विरासत ने लंबे समय से मनुष्य को संक्रमित किया गया है और मनुष्यों को बड़े और छोटे दुष्टों में बदल दिया है। कुछ ही ऐसे हैं जो आसानी से परमेश्वर को स्वीकार करते हैं और परमेश्वर के आगमन का उत्साहपूर्वक स्वागत करते हैं। मनुष्य का चेहरा हत्या से भर गया है, और सभी जगहों पर, मृत्यु हवा में है। वे इस भूमि से परमेश्वर को निष्कासित करने की कोशिश करते हैं; हाथों में चाकू और तलवारें के साथ, वे परमेश्वर का विनाश करने के लिए खुद को युद्ध के गठन में व्यवस्थित करते हैं। दुर्जनों की भूमि में जहाँ मनुष्य को लगातार सिखाया जाता है कि कहीं कोई परमेश्वर नहीं है, मूर्तियां फैली हुई हैं। इस जमीन के ऊपर जलते हुए कागज और धूप की एक घृणास्पद गंध फैली हुई है, इतनी घनी कि दम घुटता है। ऐसा लगता है मानो सर्प के मुड़ते और कुंडली मारते समय कीचड़ से ऊपर उठती हुई बदबू हो, और यह मनुष्य से बरबस कै कराने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, दुष्ट राक्षसों द्वारा ग्रंथों से किये गए मंत्रोच्चार की हलकी आवाज़ को सुना जा सकता है। यह आवाज़ दूर नरक से आती हुई प्रतीत होती है, और मनुष्य अपनी रीढ़ की हड्डी से होकर नीचे जाती एक थरथराहट को महसूस किये बिना नहीं रह सकता है। इस देश भर में इंद्रधनुष के सभी रंगों वाली मूर्तियाँ बिखरी पड़ी हैं, जिसने इस देश को एक चमचमाती दुनिया में बदल दिया है, और दुष्टों का राजा अपने चेहरे पर एक मूर्खतापूर्ण हँसी लिए हुए है, मानो कि उसकी शैतानी योजना सफल हो गई हो। इस बीच, मनुष्य पूरी तरह से इसके बारे में बेखबर है, और न ही मनुष्य को यह पता है कि इस दुष्ट ने पहले से ही उसे इस हद तक भ्रष्ट कर दिया है कि वह मूढ़ और पराजित हो गया है। यह परमेश्वर का सब कुछ एक झटके में मिटा देना, फिर से उसका अपमान करना और उसे मार डालना चाहता है, और उसके कार्य को ढहाने और उलट-पुलट करने का प्रयास करता है। वह कैसे परमेश्वर को समान दर्जे का मान सकता है? कैसे वह पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अपने काम में परमेश्वर के "हस्तक्षेप" को बर्दाश्त कर सकता है? कैसे उसके घिनौने चेहरे को उजागर करने के लिए वह परमेश्वर को अनुमति दे सकता है? वह कैसे परमेश्वर को अपने काम को बाधित करने की अनुमति दे सकता है? क्रोध के साथ भभक रहा यह दुष्ट कैसे पृथ्वी पर अपनी शक्ति के दरबार में परमेश्वर को शासन करने की इजाजत दे सकता है? यह कैसे स्वेच्छा से हार स्वीकार कर सकता है? इसके कुत्सित चेहरे की असलियत को उजागर किया जा चुका है, इसलिए किसी को यह पता नहीं है कि वह हँसे या रोये, और इसकी तो बात करना ही वास्तव में मुश्किल है। क्या यही इसका सार नहीं है? एक बदसूरत आत्मा लिए वह अभी भी यही मानता है कि वह अविश्वसनीय रूप से सुंदर है। सह-अपराधियों का यह गिरोह! वे नश्वर भोग के सुख में लिप्त होने और विकार को फ़ैलाने के लिए मनुष्यों के बीच आते हैं। उनका उपद्रव दुनिया में अस्थिरता का कारण बनता है और मनुष्य के दिल में आतंक ले आता है, और उन्होंने मनुष्य को विकृत कर दिया है ताकि मनुष्य असहनीय कुरूपता वाले जानवरों के समान दिखे, मूल पवित्र व्यक्ति की थोड़ी-सी भी पहचान रखे बिना। यहाँ तक कि वे धरती पर अत्याचारियों की तरह ताकत ग्रहण करना चाहते हैं। वे परमेश्वर के कार्य में बाधा डालते हैं ताकि यह मुश्किल से आगे बढ़ सके और मानव को जैसे तांबे और इस्पात की दीवारों के पीछे बंद कर दिया जा सके। इतने सारे पाप करने और इतनी परेशानी का कारण बनने के बाद वे ताड़ना की प्रतीक्षा करने के अलावा कैसे अन्य किसी भी बात की उम्मीद कर सकते हैं? राक्षसों और बुरी आत्माओं ने सिर पर खून सवार कर धरती पर आतंक फैला रखा है और परमेश्वर की इच्छा और श्रमसाध्य प्रयास को रोक दिया है, जिससे वे अभेद्य बन गए हैं। कैसा नश्वर पाप है! परमेश्वर कैसे चिंतित महसूस न करता? परमेश्वर कैसे क्रोधित महसूस नहीं करता? वे परमेश्वर के कार्य के लिए गंभीर बाधा और विरोध का कारण बनते हैं। अत्यधिक विद्रोही! यहाँ तक कि अधिक शक्तिशाली दुष्ट की ताकत पर छोटे-बड़े राक्षस भी अभिमानी हो जाते हैं और मुश्किलें पैदा करते हैं। वे स्पष्ट जानकारी के बावजूद जानबूझकर सच्चाई का विरोध करते हैं। विद्रोह के बेटे! ऐसा लगता है कि अब, जब नरक का राजा राजसी सिंहासन पर चढ़ गया है, तो वे दम्भी हो गए हैं और दूसरों के प्रति घृणा करते हैं। कितने सच्चाई की खोज करते हैं और धर्मिकता का पालन करते हैं? वे सभी सूअरों और कुत्तों की तरह जानवर हैं, गोबर के एक ढेर में अपने सिरों को हिलाते हैं और उपद्रव भड़काने के लिए बदबूदार मक्खियों के गिरोह का नेतृत्व करते हैं। उनका मानना है कि नरक का उनका राजा राजाओं में सर्वश्रेष्ठ है, इस बात को समझे बिना कि वे सड़न पर भिनभिनाती मक्खियों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। इतना ही नहीं, वे सूअरों और कुत्तों जैसे अपने माता-पिता पर निर्भर करते हुए परमेश्वर के अस्तित्व के विरुद्ध निंदनीय टिप्पणी करते हैं। अति तुच्छ मक्खियों को लगता है कि उनके माता-पिता एक दांतों वाली व्हेल की तरह विशाल हैं। क्या उन्हें एहसास नहीं है कि वे बहुत नन्हीं हैं, फिर भी उनके माता-पिता उनकी तुलना में अरबों गुना बड़े गंदे सूअर और कुत्ते हैं? अपनी नीचता से अनजान होकर, वे उन सूअरों और कुत्तों की दुर्गन्ध के सहारे उच्छृंखल व्यवहार करती हैं और भविष्य की पीढ़ियों को पैदा करने का भ्रामक विचार रखती हैं। वह तो बिल्कुल बेशर्म है! अपनी पीठों पर हरी पंखों के साथ (यह परमेश्वर पर उनके विश्वास करने के दावे को संदर्भित करता है), वे घमंडी हो जाती हैं और हर जगह पर अपनी सुंदरता और आकर्षण का अभिमान करती हैं, मनुष्य पर अपनी अशुद्धताओं को चुपके से डालती हैं। और वे दम्भी भी हैं, मानो कि इंद्रधनुष के रंगों वाले पंखों का एक जोड़ा उनकी अपनी अशुद्धताओं को छिपा सकता है, और इस तरह वे सच्चे परमेश्वर के अस्तित्व को सताती हैं (यह धार्मिक दुनिया की अंदर की कहानी को संदर्भित करता है)। मनुष्य को बहुत कम पता है कि हालांकि मक्खी के पंख खूबसूरत और आकर्षक हैं, यह अंततः केवल एक छोटी मक्खी से बढ़कर कुछ नहीं है जो गंदगी से भरी हुई और रोगाणुओं से ढकी हुई है। अपने माता-पिता के सूअरों और कुत्तों की ताकत पर, वे देश भर में अत्यधिक उग्रता के साथ आतंक मचाती हैं (यह उन धार्मिक अधिकारियों को संदर्भित करता है, जो सच्चे परमेश्वर और सत्य को धोखा देते हुए, देश से मिले मजबूत समर्थन के आधार पर, परमेश्वर को सताते हैं)। ऐसा लगता है कि यहूदी फरीसियों के भूत परमेश्वर के साथ बड़े लाल अजगर के देश में, अपने पुराने घोंसले में, वापस आ गए हैं। उन्होंने अपने हजारों वर्षों के कार्य को जारी रखते हुए फिर से उनके उत्पीड़न का कार्य शुरू कर दिया है, भ्रष्ट हो चुके इस समूह का अंततः पृथ्वी पर नष्ट हो जाना निश्चित है! ऐसा प्रतीत होता है कि कई सहस्राब्दियों के बाद, अशुद्ध आत्माएँ और भी चालाक और धूर्त हो गई हैं। वे परमेश्वर के काम को चुपके से क्षीण करने के तरीकों के बारे में लगातार सोचती हैं। वे बहुत कुटिल और धूर्त हैं और अपने देश में कई हजार साल पहले की त्रासदी की पुनरावृत्ति करना चाहती हैं। यह बात परमेश्वर को जोर से चीखने की ओर लगभग उकसाती है, और उनको नष्ट करने के लिए वह तीसरे स्वर्ग में लौट जाने से खुद को मुश्किल से रोक पाता है। परमेश्वर से प्रेम करने के लिए, मनुष्य को उसकी इच्छा, उसकी खुशी और उसके दुःख को समझना चाहिए, साथ ही साथ यह भी कि वह किससे घृणा करता है। इससे मनुष्य का प्रवेश बेहतर अग्रसर होगा। मनुष्य का प्रवेश जितना तेज होगा, परमेश्वर का हृदय उतना ही अधिक संतुष्ट होगा; दुष्टों के राजा के बारे में मनुष्य को जितनी अधिक सूझ-बूझ होगी, परमेश्वर से वह उतना ज्यादा करीब होगा, ताकि उसकी इच्छा पूर्ण हो सके।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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