परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल पूर्ण बनाया गया मनुष्य ही सार्थक जीवन जी सकता है" | अंश 553

तुम लोगों के बीच यह कार्य तुम लोगों पर उस कार्य के अनुसार किया जा रहा है जिसे किए जाने की आवश्यकता है। इन व्यक्तियों पर विजय के बाद, लोगों के एक समूह को पूर्ण बनाया जाएगा। इसलिए वर्तमान का बहुत सा कार्य तुम लोगों को पूर्ण बनाने के लक्ष्य की तैयारी के लिए किया जा रहा है, क्योंकि कई लोग हैं जो सत्य के लिए भूखे हैं जिन्हें पूर्ण बनाया जा सकता है। यदि विजय का कार्य तुम लोगों में किया जाता है और इसके बाद कोई और कार्य नहीं किया जाता है, तो क्या यह ऐसा मामला नहीं है कि कोई व्यक्ति जो सत्य की अभिलाषा रखता है वह इसे प्राप्त नहीं करेगा? वर्तमान के कार्य का लक्ष्य बाद में लोगों को पूर्ण बनाने के लिए मार्ग प्रशस्त करना है। यद्यपि मेरा कार्य सिर्फ़ विजय का कार्य है, तब भी मेरे द्वारा कहा गया जीवन का मार्ग बाद में लोगों को पूर्ण बनाने की तैयारी में है। जो कार्य विजय के बाद आता है वह लोगों को पूर्ण बनाने पर केन्द्रित होता है, और इसलिए पूर्णता के लिए नींव डालने हेतु विजय की जाती है। मनुष्य को केवल जीते जाने के बाद ही पूर्ण बनाया जा सकता है। अभी मुख्य कार्य विजय का है; बाद में जो लोग सत्य की खोज करेंगे और अभिलाषा रखेंगे उन्हें पूर्ण बनाया जाएगा। पूर्ण बनाए जाने के लिए लोगों के प्रवेश के सकारात्मक पहलू शामिल हैं: क्या तुम्हारे पास परमेश्वर से प्रेम करने वाला हृदय है? जब तुम इस मार्ग पर चले हो तो तुम्हारे अनुभव की गहराई कितनी रही है? परमेश्वर के लिए तुम्हारा प्रेम कितना शुद्ध है? सत्य का तुम्हारा अभ्यास कितना सटीक है? पूर्ण बनने के लिए, मानवता के सभी पहलुओं की आधारभूत जानकारी अवश्य होनी चाहिए। यह एक मूलभूत आवश्यकता है। जो लोग विजय प्राप्त किए जाने के बाद पूर्ण नहीं बनाए जा सकते हैं वे सेवा की वस्तु बन जाते हैं और अंततः वे तब भी आग और गन्धक की झील में डाल दिए जाएँगे और तब भी अथाह गड्डे में गिर जाएँगें क्योंकि उनका स्वभाव नहीं बदला है और वे अभी भी शैतान से संबंधित हैं। यदि किसी मनुष्य में पूर्णता के लिए योग्यताओं का अभाव है, तो वह बेकार है—वह अपशिष्ट है, एक उपकरण है, कुछ ऐसा है जो आग की परीक्षा में ठहर नहीं सकता है! अभी परमेश्वर के प्रति तुम्हारा प्रेम कितना अधिक है? तुम्हारी स्वयं के प्रति घृणा कितनी अधिक है? तुम शैतान को कितना अधिक गहराई से जानते हो? क्या तुम लोगों ने अपने संकल्प को कठोर कर लिया है? क्या मानवता में तुम लोगों का जीवन अच्छी तरह से नियमित है? क्या तुम लोगों का जीवन बदल गया है? क्या तुम लोग एक नया जीवन जी रहे हो? क्या तुम लोगों का जीवन का दृष्टिकोण बदल गया है? यदि ये चीजें नहीं बदली हैं, तो तुम्हें पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है भले ही तुम पीछे नहीं हटते हो; बल्कि, तुम्हें केवल जीता जा चुका है। जब तुम्हारी परीक्षा का समय आता है, तो तुममें सत्य का अभाव होता है, तुम्हारी मानवता अपसामान्य होती है, और तुम जानवर की तरह निम्न होते हो। तुम्हें केवल जीता गया है, तुम केवल वह हो जिसे मेरे द्वारा जीता गया है। वैसे ही जैसे, एक बार मालिक के कोड़े की मार का अनुभव हो जाए, तो गधा भयभीत हो जाता है और जब भी वह अपने स्वामी को देखता है तो हर बार कार्य करने के लिए डर जाता है, इसी तरह से, क्या तुम भी जीते गए गधे हो। यदि किसी व्यक्ति में उन सकारात्मक पहलुओं का अभाव है और इसके बजाय वह सभी बातों में निष्क्रिय और भयभीत, डरपोक और संकोची है, किसी भी चीज को स्पष्टता से पहचानने में असमर्थ है, सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ है, अभी भी अभ्यास के लिए बिना किसी पथ वाला है, इससे भी अधिक परमेश्वर को प्रेम करने वाले हृदय के बिना है—यदि किसी व्यक्ति को इस बात की समझ नहीं है कि परमेश्वर को कैसे प्रेम किया जाए, कैसे एक अर्थपूर्ण जीवन जीया जाए, या कैसे एक असली व्यक्ति बना जाए—तो इस प्रकार का व्यक्ति किस प्रकार से परमेश्वर की गवाही दे सकता है? यह इस बात को प्रगट करता है कि तुम्हारे जीवन का बहुत ही कम महत्व है और तुम सिर्फ़ एक जीते गए गधे हो। तुम्हें जीता जा चुका है, परन्तु इसका सिर्फ इतना ही अर्थ है कि तुमने बड़े लाल अजगर को त्याग दिया है और इसके अधिकार क्षेत्र में समर्पण करने से इनकार कर दिया है; इसका अर्थ है कि तुम विश्वास करते हो कि एक परमेश्वर है, परमेश्वर की सभी योजनाओं का पालन करना चाहते हो, और तुम्हें कोई शिकायत नहीं है। परन्तु सकारात्मक पहलुओं के बारे में क्या है? परमेश्वर के वचन को जीने की योग्यता, परमेश्वर को स्पष्ट करने की योग्यता—तुम्हारे पास इनमें से कोई भी नहीं है, जिसका अर्थ है कि तुम परमेश्वर के द्वारा प्राप्त नहीं किए गए हो, और तुम सिर्फ़ एक जीते गए गधे हो। तुम में कुछ भी वांछनीय नहीं है, और पवित्र आत्मा तुम में कार्य नहीं कर रहा है। तुम्हारी मानवता में बहुत कमी है और तुम्हें उपयोग करना परमेश्वर के लिए असम्भव है। तुम्हें परमेश्वर के द्वारा अनुमोदित होना है और अविश्वासी जानवरों और चलते-फिरते मृतकों से सौ गुना बेहतर होना है—केवल वे जो इस स्तर पर पहुँच जाते हैं वे ही पूर्ण बनाए जाने के योग्य हैं। केवल जब किसी के पास मानवता और अंतःकरण है तभी वह परमेश्वर के उपयोग के योग्य है। केवल जब तुम्हें पूर्ण बनाया जा चुका है तभी तुम मानव समझे जा सकते हो। केवल पूर्ण बनाए गए लोग ही हैं जो अर्थपूर्ण जीवन जीते हैं। केवल ऐसे लोग ही परमेश्वर के लिए और अधिक जबरदस्त ढंग से गवाही दे सकते हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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