परमेश्वर के दैनिक वचन | "मात्र उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं" | अंश 550

आजकल लोगों की तलाश में एक भटकाव है; वे मात्र परमेश्वर से प्रेम करने और परमेश्वर को संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं, परन्तु उनके पास परमेश्वर के विषय में कोई ज्ञान नहीं है, उन्होंने अपने भीतर की पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और रोशनी की उपेक्षा कर दी है। उनके पास परमेश्वर के वास्तविक ज्ञान का आधार नहीं है। इस रीति से, जैसे-जैसे उनका अनुभव बढ़ता है वे अपनी ऊर्जा खोते जाते हैं। वे सभी जो परमेश्वर के वास्तविक ज्ञान को पाने की खोज करते हैं, वे लोग भले ही बीते समय में अच्छी स्थितियों में नहीं थे, और उनका झुकाव नकारात्मकता और दुर्बलता की ओर हुआ करता था, और वे प्रायः आँसू बहाते, निरुत्साहित और हताश हो जाते थे; ऐसे लोग, जैसे-जैसे अधिक अनुभव प्राप्त करते हैं उनकी परिस्थितियाँ बेहतर होती जाती हैं। टूट जाने और निपटारा किए जाने के अनुभव के पश्चात, और एक बार शुद्धिकरण और परीक्षण के प्रकरण से गुज़रने के पश्चात, उन्होंने बहुत अधिक उन्नति की है। नकारात्मक परिस्थितियाँ कम हो गयी हैं, और उनके जीवन स्वभाव में कुछ परिवर्तन हुआ है। जैसे-जैसे वे और परीक्षण से गुज़रते हैं, उनका हृदय परमेश्वर से प्रेम करने लगता है। परमेश्वर द्वारा लोगों को पूर्ण किए जाने के लिए एक नियम है, जो यह है कि वह तुम्हारे योग्य भाग का प्रयोग करके तुम्हें प्रबुद्ध करता है, जिससे तुम्हारे पास अभ्यास करने के लिए एक मार्ग हो और तुम समस्त नकारात्मक अवस्थाओं से खुद को अलग कर सको, तुम्हारी आत्मा को स्वतन्त्रता प्राप्त करने में सहायता करता है, और तुम्हें उससे प्रेम करने के और योग्य बनाता है। इस रीति से तुम शैतान के भ्रष्ट स्वभाव को उतार फेंकने के योग्य हो जाते हो। तुम सरल और उदार, स्वयं को जानने और सत्य का अभ्यास करने के इच्छुक हो। परमेश्वर निश्चित रूप से तुम्हें आशीष देगा, अतः जब तुम दुर्बल और नकारात्मक होते हो, वह दोहरे रूप से तुम्हें प्रबुद्ध करता है, स्वयं को और अधिक जानने में तुम्हारी सहायता करता है, स्वयं के लिए पश्चाताप करने के और अधिक इच्छुक होने, और उन बातों का अभ्यास करने के योग्य करता है, जिन बातों का अभ्यास तुम्हें करना चाहिए। मात्र इसी रीति से तुम्हारा हृदय शांतिपूर्ण और सहज होता है। एक व्यक्ति, जो साधारणतः परमेश्वर और स्वयं को जानने और अपने अभ्यास पर ध्यान देता है, वही परमेश्वर के कार्य को निरन्तर प्राप्त करने और परमेश्वर से निरन्तर मार्गदर्शन और प्रबुद्धता प्राप्त करने के योग्य होगा। एक नकारात्मक अवस्था में होने पर भी, ऐसा व्यक्ति विवेक के कार्य से या परमेश्वर के वचन से प्रबुद्धता द्वारा तुरन्त कायापलट करने के योग्य हो जाता है। एक व्यक्ति के स्वभाव का परिवर्तन सर्वदा तभी प्राप्त होता है जब वह अपनी वास्तविक अवस्था और परमेश्वर के स्वभाव और कार्य को जानता है। एक व्यक्ति, जो स्वयं को जानने और स्वयं को सामने लाने का इच्छुक है, वही सत्य का निर्वाह करने के योग्य होगा। इस प्रकार का व्यक्ति एक ऐसा व्यक्ति है जो परमेश्वर के प्रति निष्ठावान है, और ऐसा व्यक्ति जो परमेश्वर के प्रति निष्ठावान होता है उसके पास परमेश्वर के विषय में समझ होती है, भले ही यह समझ गहरी हो या उथली, अल्प हो या प्रचुर। यह परमेश्वर की धार्मिकता है, और यही वह बात है जिसे लोग ग्रहण करते हैं; यह उनका अपना लाभ है। एक व्यक्ति जिसके पास परमेश्वर का ज्ञान है, वह ऐसा व्यक्ति है जिसके पास एक आधार है, जिसके पास एक दर्शन है। इस प्रकार का व्यक्ति परमेश्वर की देह, परमेश्वर के वचन और उसके कार्य के विषय में निश्चित होता है। चाहे परमेश्वर कैसे भी कार्य करे या बोले या अन्य लोग कैसे भी अशान्ति उत्पन्न करें, वह अपनी बात पर अडिग रह सकता है, और परमेश्वर के लिए गवाह बन सकता है। एक व्यक्ति जितना अधिक इस प्रकार का होता है, वह उस सत्य का उतना ही अधिक निर्वाह कर सकता है, जिस सत्य को वह समझता है। क्योंकि वह परमेश्वर के वचन का सर्वदा अभ्यास करता है, इसलिए वह परमेश्वर के विषय में और समझ प्राप्त करता है और परमेश्वर के लिए सर्वदा गवाह बने रहने का दृढ़-निश्चय रखता है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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