परमेश्वर के दैनिक वचन | "जिनके स्वभाव परिवर्तित हो चुके हैं, वे वही लोग हैं जो परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश कर चुके हैं" | अंश 541

अपनी सेवा के भविष्य के पथ में, तू परमेश्वर की इच्छा को कैसे पूरा कर सकता है? एक महत्वपूर्ण बिंदु है, जीवन में प्रवेश करने का प्रयास करना, अपने स्वभाव में बदलाव का प्रयत्न करना, और सत्य में अधिक गहराई से प्रवेश करने का यत्न करना—यह परमेश्वर के द्वारा पूर्ण और प्राप्त किए जाने का मार्ग है। तुम सब परमेश्वर के आदेश के प्राप्तकर्ता हो लेकिन आदेश क्या है? यह कार्य के अगले क़दम से जुड़ा है; अगले चरण का कार्य एक अधिक बड़ा कार्य होगा जो पूरी कायनात भर में किया जाता है, इसलिए आज, तुम लोगों को अपने जीवन स्वभाव में बदलाव लाने की चेष्टा करनी चाहिए ताकि भविष्य में तुम सब परमेश्वर के अपने कार्य के माध्यम से महिमा पाने का एक प्रमाण बन जाओ, और उसके भविष्य के कार्यों के लिए एक नमूना बन जाओ। आज के प्रयास भविष्य के कार्य के लिए एक नींव है, ताकि तू परमेश्वर द्वारा उपयोग किया जा सके और उसकी गवाही देने में सक्षम बन सके। अगर तू इसे अपने प्रयासों का लक्ष्य बना ले, तो तू पवित्र आत्मा की उपस्थिति को प्राप्त कर पायेगा। तू अपने लक्ष्य को जितना ऊंचा रखेगा, उतना ही अधिक तू पूर्ण किया जा सकेगा। जितना अधिक तू सत्य के लिए प्रयास करेगा, उतना ही अधिक पवित्र आत्मा कार्य करेगा। अपने प्रयासों में तू जितनी ऊर्जा लगाएगा, उतना अधिक तू प्राप्त करेगा। पवित्र आत्मा लोगों को उनकी आंतरिक अवस्था के आधार पर पूर्ण करता है। कुछ लोग कहते हैं कि वे परमेश्वर द्वारा उपयोग होने या उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के इच्छुक नहीं हैं, वे बस चाहते हैं कि उनकी देह सुरक्षित रहे और उन्हें कोई दुर्भाग्य न झेलना पड़े। कुछ लोग राज्य में प्रवेश करना नहीं चाहते लेकिन अथाह कुंड में उतरना चाहते हैं। अगर ऐसा है तो परमेश्वर भी तेरी इच्छा को पूरा करेगा। तू जो भी प्रयास करेगा परमेश्वर उसे पूरा करेगा। तो इस समय तेरा प्रयास क्या है? क्या यह पूर्ण किया जाना है? क्या तेरे वर्तमान कार्यकलाप और व्यवहार परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने की खातिर हैं, उसके द्वारा प्राप्त किए जाने के लिए हैं? तुझे अपने रोजमर्रा के जीवन में इस तरह से स्वयं का आंकलन निरंतर करना चाहिए। यदि तू पूरे दिल से एक लक्ष्य का पीछा करने में लग जाता है, तो निस्संदेह परमेश्वर तुझे पूर्ण करेगा। यह पवित्र आत्मा का मार्ग है। जिस मार्ग पर पवित्र आत्मा लोगों को ले जाता है, वह प्रयास से प्राप्त होता है। जितनी अधिक तेरे भीतर परमेश्वर के द्वारा पूर्ण और प्राप्त किए जाने की प्यास होगी, पवित्र आत्मा तेरे अंदर उतना ही अधिक काम करेगा। जितना अधिक तू तलाश करने में असफल होता है, जितना अधिक तू नकारात्मक और पीछे हटनेवाला होता है, उतना ही तू पवित्र आत्मा से कार्य करने के अवसर छीन लेता है; जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा पवित्र आत्मा तुझे त्याग देगा। क्या तू परमेश्वर के द्वारा पूर्ण किया जाना चाहता है? क्या तू परमेश्वर के द्वारा प्राप्त किया जाना चाहता है? क्या तू परमेश्वर के द्वारा उपयोग किया जाना चाहता है? तुम लोगों को परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने, प्राप्त किए जाने, और उपयोग किए जाने के उद्देश्य से हर संभव कार्य करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे ब्रह्मांड की सभी चीज़ें तुम्हारे भीतर परमेश्वर के प्रदर्शित हुए कार्य को देख सकें। तुम सभी चीज़ों के बीच स्वामी हो, और जो सभी चीज़ें हैं उन सबके बीच, तुम परमेश्वर को तुम्हारे माध्यम से गवाही और महिमा का आनंद लेने दोगे—यह प्रमाण है कि तुम सभी पीढ़ियों में सबसे सौभाग्यशाली हो।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

पवित्र आत्मा ज़्यादा कार्य करता है उनमें, पूर्ण किये जाने की तड़प है जिनमें

तुम लोगों को अपने जीवन-स्वभाव में अब बदलाव लाना चाहिये, ताकि धरती पर परमेश्वर की महिमा का, तुम प्रमाण बन सको, उसके आगे के कार्य का आदर्श बन सको।

है आज का अनुसरण महज़ कल की नींव डालने के लिये, ताकि परमेश्वर के लिए उसके गवाह बन सको तुम। अगर इसे अपने अनुसरण का लक्ष्य बना लो तुम, तो पवित्र आत्मा की मौजूदगी को पा लोगे तुम।

पूर्ण कर देगा तुम्हें परमेश्वर, ध्यान दो बस तुम एक ही लक्ष्य पर। ली है यही राह पवित्र आत्मा ने। पवित्र आत्मा इंसान को जो राह दिखाता है उस राह को वो अपनी ही कोशिशों से हासिल करता है। जितना ऊँचा होगा लक्ष्य तुम्हारा, उतने ही ज़्यादा पूर्ण किये जाओगे तुम। जितना ही ज्यादा सच को खोजोगे तुम उतना ही ज्यादा कार्य करेगा पवित्र आत्मा। जितनी ज़्यादा कोशिश करोगे, उतना ही ज़्यादा पाओगे तुम। इंसान के अंदर की जैसी दशा, वैसे ही उसे परमेश्वर पूर्ण करता।

परमेश्वर द्वारा पूर्ण और प्राप्त किए जाने की तड़प होगी तुममें जितनी ज्यादा, उतना ही ज्यादा कार्य करेगा तुम्हारे भीतर पवित्र आत्मा। जितना कम खोजोगे तुम, मायूस और पिछड़े रहोगे तुम, उतना ही कम कार्य कर सकता वो, धीरे-धीरे तुम्हें छोड़ जायेगा वो।

उसी काम का लक्ष्य रखो, जिससे परमेश्वर द्वारा पूर्ण हो सको, हासिल और इस्तेमाल हो सको। तुम्हारी कोशिशों के कारण कायनात की हर चीज़ देखती है परमेश्वर के कर्मों को प्रकाशित होते हुए तुम में। जितना ऊँचा होगा लक्ष्य तुम्हारा, उतने ही ज़्यादा पूर्ण किये जाओगे तुम। जितना ही ज्यादा सच को खोजोगे तुम उतना ही ज्यादा कार्य करेगा पवित्र आत्मा। हर चीज़ के मालिक हो तुम। उन सबके बीच, परमेश्वर को लेने दो आनंद तुम्हारे ज़रिये गौरव पाने और गवाही दिये जाने का। प्रमाण है ये, तमाम पीढ़ियों में तुम लोग सबसे ख़ुशनसीब हो।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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