परमेश्वर के दैनिक वचन | "जिनके स्वभाव परिवर्तित हो चुके हैं, वे वही लोग हैं जो परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश कर चुके हैं" | अंश 540

लोगों की जीवन में प्रवेश की चेष्टा परमेश्वर के वचनों पर आधारित है। पहले, यह कहा गया था कि सब कुछ उसके वचनों के कारण ही पूरा होता है, मगर किसी ने भी इस तथ्य को नहीं देखा। अगर तू वर्तमान चरण को अनुभव करने में प्रवेश करेगा, तो तुझे सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी और तू भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक अच्छी नींव खड़ी करेगा। परमेश्वर चाहे जो कहे, तुझे केवल उसके वचनों में प्रवेश करने पर ध्यान देना है। जब परमेश्वर कहता है कि वह लोगों को ताड़ना देना शुरू करेगा, तो उसकी ताड़ना को स्वीकार कर। जब परमेश्वर लोगों से प्राण त्यागने को कहे, तो यह परीक्षा स्वीकार कर। यदि तू सदा उसके नए कथनों के भीतर जीवन बिताता है, तो अंत में परमेश्वर के वचन तुझे पूर्ण कर देंगे। जितना अधिक तू परमेश्वर के वचनों में प्रवेश करेगा, उतनी ही शीघ्रता से तुझे पूर्ण किया जाएगा। क्यों मैं हर संगति में तुम सबसे परमेश्वर के वचनों को जानने और उनमें प्रवेश करने को कहता हूँ? केवल जब तू परमेश्वर के वचनों में अनुसरण करता है और उसका अनुभव करता है, और उसके वचनों की वास्तविकता में प्रवेश करता है, तभी पवित्र आत्मा को तेरे अंदर कार्य करने का अवसर मिलेगा। इसलिए परमेश्वर के कार्य की हर पद्धति में तुम सब प्रतिभागी हो, और इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारी पीड़ा कितनी अधिक है, अंत में तुम सबको "स्मारिका" मिलेगी। अपनी अंतिम पूर्णता प्राप्त करने के लिए, तुम्हें परमेश्वर के सारे वचनों में प्रवेश करना होगा। पवित्र आत्मा द्वारा लोगों की पूर्णता एकतरफा नहीं है; वह लोगों का सहयोग चाहता है। वह चाहता है कि हर कोई पूरी मर्ज़ी से उसके साथ सहयोग करे। परमेश्वर चाहे जो भी कहे, तुझे केवल उसके वचनों में प्रवेश करने पर ध्यान देना है, यह तुम्हारे जीवन के लिए अधिक लाभकारी होगा। सारी बातें तुम्हारे स्वभाव में परिवर्तन हासिल करने के लिए ही हैं। जब तू परमेश्वर के वचनों में प्रवेश करेगा, तब तेरा हृदय परमेश्वर द्वारा द्रवित किया जाएगा और तू वह सारी बातें समझ पायेगा जो परमेश्वर अपने कार्य के इस चरण में प्राप्त करना चाहता है और तुझमें उसे प्राप्त करने का संकल्प होगा। ताड़ना के समय के दौरान, कुछ लोग थे जिनका मानना था कि यह कार्य करने का एक तरीका है और उन्होंने परमेश्वर के वचनों पर विश्वास नहीं किया। इसके फलस्वरूप, वे शुद्धिकरण से नहीं गुज़रे और बिना कुछ पाये या समझे वे ताड़ना की अवधि से बाहर आ गए। कुछ लोग ऐसे थे जिन्होंने बिना किसी संदेह के इन वचनों में प्रवेश किया; जिन्होंने कहा कि परमेश्वर का वचन अचूक सत्य है और मनुष्यों को ताड़ना मिलनी चाहिए। कुछ समय के लिए उन्होंने अपने भविष्य और गंतव्य को छोड़ने में संघर्ष किया, और जब वे इससे बाहर निकले, तो उनका स्वभाव थोड़ा-बहुत बदल गया था और उन्होंने परमेश्वर की गहरी समझ पा ली थी। जो लोग ताड़ना से निकल आये, उन सब ने परमेश्वर की मनोहरता का अनुभव किया, और वे जानते थे कि परमेश्वर के कार्य का यह चरण उनमें परमेश्वर के महान प्रेम के अवतरित होने को मूर्त रूप देता है, यह चरण परमेश्वर के प्रेम का विजय और उद्धार है। उन्होंने यह भी कहा कि परमेश्वर के विचार सदैव अच्छे होते हैं, और जो कुछ परमेश्वर मनुष्य में करता है, वह प्रेम से उपजा है, द्वेष से नहीं। जिन लोगों ने परमेश्वर के वचनों पर विश्वास नहीं किया, जिन्होंने उन वचनों का सम्मान नहीं किया, जो ताड़ना के समय शुद्धिकरण से नहीं गुज़रे, परिणामस्वरूप उनके साथ पवित्र आत्मा नहीं था, और उन्होंने कुछ भी नहीं पाया। जिन लोगों ने ताड़ना के समय में प्रवेश किया, वे भले ही शुद्धिकरण से होकर गुज़रे, लेकिन पवित्र आत्मा उनके अंदर गुप्त तरीके से कार्य कर रहा था और उसके फलस्वरूप उनके स्वभाव में बदलाव हुआ। कुछ लोग बाहर से हर तरह से, बहुत सकारात्मक दिखते थे, वे सदा आनंदित रहते थे, लेकिन उन्होंने परमेश्वर के वचनों के द्वारा शुद्धिकरण की अवस्था में प्रवेश नहीं किया और इसलिए वे बिल्कुल नहीं बदले, जो कि परमेश्वर के वचनों में विश्वास नहीं करने का परिणाम था। यदि तू परमेश्वर के वचनों में विश्वास नहीं रखता है तो पवित्र आत्मा तेरे अंदर कार्य नहीं करेगा। परमेश्वर उन सबके सामने प्रकट होता है जो उसके वचनों पर विश्वास करते हैं। जो लोग उसके वचनों पर विश्वास रखते हैं और उन्हें स्वीकारते हैं, वे उसका प्रेम प्राप्त कर सकेंगे!

परमेश्वर के वचनों की सच्चाई में प्रवेश करने के लिए, तुझे अभ्यास के मार्ग को ढूँढ़ना चाहिए और ज्ञात होना चाहिए कि कैसे परमेश्वर के वचनों को अभ्यास में लाएँ। केवल इस प्रकार से ही तेरे जीवन स्वभाव में परिवर्तन होगा। केवल इसी पथ से तू परमेश्वर के द्वारा पूर्ण किया जा सकता है और केवल वे जो परमेश्वर द्वारा इस तरह से पूर्ण किए गए हैं वे ही उसकी इच्छा के अनुसार हो सकते हैं। नयी ज्योति पाने के लिए, तुझे उसके वचनों में जीना होगा। केवल एक बार पवित्र आत्मा के द्वारा द्रवित किया जाना काफी नहीं है, तुझे और गहराई में जाना होगा। जो केवल एक बार पवित्र आत्मा द्वारा द्रवित किए गए हैं, उनमें उत्साह जाग जाता है और वे तलाश करने के इच्छुक बन जाते हैं, परंतु ये लंबे समय तक टिक नहीं सकता; उन्हें लगातार पवित्र आत्मा द्वारा द्रवित किया जाना चाहिए। पहले कई बार मैंने अपनी आशा को व्यक्त किया कि पवित्र आत्मा लोगों की आत्माओं को द्रवित करे, ताकि वे अपने जीवन स्वभाव में बदलाव लाने का प्रयास करें, और परमेश्वर द्वारा द्रवित किए जाने का प्रयास करते हुए वे अपनी कमियों को समझ पाएँ, और उसके वचनों को अनुभव करने की प्रक्रिया में, वे अपने अंदर की अशुद्धताओं को निकाल फेंकें (अहंकार, घमंड, धारणाएँ इत्यादि)। यह न मान बैठ कि बस नई ज्योति को प्राप्त करने में सक्रिय होने से काम चल जाएगा—तुझे सभी नकारात्मक बातों को भी उतार फेंकना होगा। एक ओर, तुम लोगों को सकारात्मक पहलु से प्रवेश करने की जरूरत है, और दूसरी ओर, तुम लोगों को नकारात्मक पहलु से सभी अपवित्र चीज़ों से भी छुटकारा पाने की जरूरत है। तुझे लगातार स्वयं कि जाँच यह देखने के लिए करनी चाहिए कि अभी भी तेरे भीतर कौन-सी अपवित्र चीज़ें मौजूद हैं। इंसानों की धार्मिक धारणाएँ, इरादे, आशाएं, अहंकार, और घमंड आदि सारी अशुद्ध बातें हैं। अपने भीतर झाँक, परमेश्वर के प्रकाशन के वचनों से खुद की तुलना कर और देख कि तुझमें कौन-सी धार्मिक धारणाएँ हैं। उन्हें सही तरह से पहचान पाने के बाद ही तू उन्हें निकाल फेंक सकता है। कुछ लोग कहते हैं: "अब बस पवित्र आत्मा के वर्तमान कार्य की ज्योति का अनुसरण करना पर्याप्त है। और किसी भी दूसरी चीज़ पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।" लेकिन जब, तेरी धार्मिक धारणाएं जागेंगी, तो तू उनसे कैसे छुटकारा पायेगा? क्या तू सोचता है कि आज परमेश्वर के वचनों का पालन करना एक सरल बात है? अगर तुम धर्म के कोई व्यक्ति हो तो धर्म से जुड़ी तुम्हारी धारणाओं और दिल में बसे पारंपरिक धार्मिक ज्ञान संबंधी सिद्धांतों से बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं, ये बातें तुम्हारे द्वारा नई चीज़ों की स्वीकृति में हस्तक्षेप करती हैं। यह सब समस्याएं वास्तविक हैं। यदि तू केवल पवित्र आत्मा के मौजूदा वचनों का ही अनुसरण करता है, तो तू परमेश्वर की इच्छा को संतुष्ट नहीं कर सकता। जब तू पवित्र आत्मा की वर्तमान ज्योति का अनुसरण करता है, तो इसके साथ ही तुझे यह पहचानना चाहिए कि तेरे भीतर कौन सी धारणाएँ और इरादे हैं, तुझमें कौन-से मानवीय अहंकार हैं, और कौन से व्यवहार परमेश्वर के प्रति अवज्ञाकारी हैं। और इन सारी चीज़ों को पहचान लेने के बाद, तुझे उन्हें निकाल फेंकना चाहिए। तुझसे तेरे पुराने क्रियाकलापों और व्यवहारों को त्याग करवाना, सब तुझे पवित्र आत्मा के आज बोले गए वचनों का अनुसरण करने देने के लिए है। स्वभाव में बदलाव, एक ओर परमेश्वर के वचनों द्वारा हासिल होता है और दूसरी ओर इसके लिए इंसान के सहयोग की आवश्यकता है। एक तो परमेश्वर का कार्य है और दूसरा लोगों का अभ्यास, दोनों ही अपरिहार्य हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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