परमेश्वर के दैनिक वचन | "जिनके स्वभाव परिवर्तित हो चुके हैं, वे वही लोग हैं जो परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश कर चुके हैं" | अंश 539

अपने जीवन स्वभाव में परिवर्तन का प्रयास करने में, अभ्यास का मार्ग सरल है। यदि, अपने व्यावहारिक अनुभव में, तू पवित्र आत्मा के मौजूदा वचनों का पालन और परमेश्वर के कार्य का अनुभव कर सकता है, तो तेरा स्वभाव परिवर्तित हो सकता है। यदि तू पवित्र आत्मा की हर बात का पालन करता है, पवित्र आत्मा की कही हर बात की खोज करता है, तो तू उसकी आज्ञा का पालन करने वाला व्यक्ति है, और तेरे स्वभाव में परिवर्तन होगा। पवित्र आत्मा के मौजूदा वचनों से लोगों का स्वभाव परिवर्तित होता है; यदि तू हमेशा अपने पुराने अनुभवों और नियमों से चिपका रहता है, तो तेरे स्वभाव में परिवर्तन नहीं हो सकता। यदि पवित्र आत्मा के आज के वचन सभी लोगों को एक सामान्य मानवता की जिंदगी में प्रवेश करने को कहें, लेकिन तेरा ध्यान बाहरी चीज़ों पर ही अटका रहता है और तू वास्तविकता के बारे में अनिश्चित है और इसे गंभीरता से नहीं लेता है, तो तू पवित्रात्मा के कार्य के साथ कदम से कदम मिलाने में असफल हो गया है, तू कोई ऐसा है जिसने पवित्र आत्मा की रहनुमाई के मार्ग में प्रवेश नहीं किया है। तेरे स्वभाव में परिवर्तन होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि तू पवित्र आत्मा के मौजूदा वचनों के साथ चलता है या नहीं और सच्ची समझ तुझमें है या नहीं। यह तुम लोगों की पूर्व की समझ से अलग है। स्वभाव परिवर्तन के विषय में पहले जो तेरी समझ थी वह ये थी कि तू, जो आलोचना करने को इतना तत्पर है, परमेश्वर द्वारा अनुशासित किये जाने के कारण अब लापरवाही से नहीं बोलता है। पर यह परिवर्तन का सिर्फ एक पहलू है। अभी सबसे महत्वपूर्ण बात है पवित्र आत्मा के दिशा निर्देश में रहना : परमेश्वर की हर बात का अनुसरण करना और हर आज्ञा का पालन करना। लोग अपना स्वभाव स्वयं परिवर्तित नहीं कर सकते; उन्हें परमेश्वर के वचनों के न्याय, ताड़ना, पीड़ा और शोधन से गुजरना होगा, या उसके वचनों द्वारा निपटाया, अनुशासित किया जाना और काँटा-छाँटा जाना होगा। इन सब के बाद ही वे परमेश्वर के प्रति विश्वसनीयता और आज्ञाकारिता प्राप्त कर सकते हैं और उसके प्रति बेपरवाह होना बंद कर सकते हैं। परमेश्वर के वचनों के शोधन के द्वारा ही मनुष्य के स्वभाव में परिवर्तन आ सकता है। केवल उसके वचनों के संपर्क में आने से, उनके न्याय, अनुशासन और निपटारे से, वे कभी लापरवाह नहीं होंगे, बल्कि शांत और संयमित बनेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे परमेश्वर के मौजूदा वचनों और उसके कार्यों का पालन करने में सक्षम होते हैं, भले ही यह मनुष्य की धारणाओं से परे हो, वे इन धारणाओं को नज़रअंदाज करके अपनी इच्छा से पालन कर सकते हैं। पहले स्वभाव में बदलाव की बात मुख्यतः खुद को त्यागने, शरीर को कष्ट सहने देने, अपने शरीर को अनुशासित करने, और अपने आप को शारीरिक प्राथमिकताओं से दूर करने के बारे में होती थी—जो एक तरह का स्वभाव परिवर्तन है। आज, सभी जानते हैं कि स्वभाव में बदलाव की वास्तविक अभिव्यक्ति परमेश्वर के मौजूदा वचन को मानने में है, और साथ ही साथ उसके नए कार्य को सच में समझने में है। इस प्रकार, परमेश्वर के बारे में लोगों का पूर्व ज्ञान जो उनकी धारणा से रंगी थी, वह मिटाई जा सकती है और वे परमेश्वर का सच्चा ज्ञान और आज्ञाकारिता प्राप्त कर सकते हैं—केवल यही है स्वभाव में बदलाव की वास्तविक अभिव्यक्ति।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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