परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे" | अंश 488

जैसे-जैसे तुम्हारा जीवन प्रगति करता है, तुम्हारे पास हमेशा नया प्रवेश और नया उच्चतर परिज्ञान अवश्य होना चाहिए, जो हर एक कदम के साथ और गहरा होता जाता है। यही वह चीज़ है जिसमें समस्त मानवजाति को प्रवेश करना चाहिए। संगति करने, सन्देश को सुनने, परमेश्वर का वचन पढ़ने, या किसी मसले को सँभालने के माध्यम से तुम्हें नया परिज्ञान और नई प्रबुद्धता प्राप्त होगी। और तुम पुराने नियमों और पुराने समयों के भीतर नहीं जीते हो। तुम हमेशा नई ज्योति के भीतर जीते हो, और परमेश्वर के वचन से नहीं भटकते हो। इसे ही सही पथ पर होना कहते हैं। मात्र सतही तौर पर कीमत चुकाने से कार्य नहीं चलेगा। दिन प्रति दिन परमेश्वर का वचन एक उच्चतर क्षेत्र में प्रवेश करता है, और हर दिन नई चीज़ें दिखाई देती हैं। मनुष्य के लिए यह आवश्यक है कि वह हर दिन नया प्रवेश भी करे। जब परमेश्वर बोलता है, तो वह उस सब को साकार करता है जो उसने बोला है; यदि तुम समान गति से नहीं चलोगे, तो तुम पीछे रह जाओगे। तुम्हारी प्रार्थनाओं को अधिक गहरा अवश्य भेदना चाहिए; तुम्हें परमेश्वर के वचन को अवश्य और अधिक खाना और पीना चाहिए, और उन प्रकाशनों को और गहरा करना चाहिए जिन्हें तुम प्राप्त करते हो, और उन चीजों को कम करना चाहिए जो नकारात्मक हैं। तुम्हें अपने आँकलन को और मज़बूत भी अवश्य करना चाहिए ताकि तुम चीज़ों में परिज्ञान प्राप्त करने, और जो कुछ आत्मा में है उसे समझ कर, बाहरी चीज़ों में परिज्ञान प्राप्त करने और किसी भी मुद्दे के केन्द्र को समझने में समर्थ बन जाओ। यदि तुम इन चीज़ों से सुसज्जित नहीं हो, तो तुम कलीसिया की अगुवाई करने में समर्थ कैसे हो सकते हो? यदि तुम किसी वास्तविकता के बिना और किसी अभ्यास के तरीके के बिना केवल पत्रों और सिद्धांतों की ही बात करोगे, तो तुम केवल थोड़े समय के लिए ही काम चला पाओगे। नए विश्वासियों के लिए बोलते समय यह सीमांत रूप से ही स्वीकार्य होगा, किन्तु एक समय के बाद, जब नए विश्वासी कुछ वास्तविक अनुभव प्राप्त कर लेते हैं, तो तुम अब और उनकी आपूर्ति नहीं कर पाओगे। तो तुम परमेश्वर के उपयोग के लिए उचित कैसे हो? नई प्रबुद्धता के बिना तुम कार्य नहीं कर सकते हो। जो बिना प्रबुद्धता के हैं वे ऐसे लोग हैं जो नहीं जानते हैं कि अनुभव कैसे करें, और ऐसे मनुष्य कभी भी नया ज्ञान या नया अनुभव प्राप्त नहीं करते हैं। और जीवन आपूर्ति करने के मामले में, वे अपना कार्य कभी नहीं कर सकते हैं, न ही वे परमेश्वर के उपयोग के लिए उचित हो सकते हैं। इस प्रकार का मनुष्य अनुपयोगी, मात्र रद्दी माल है। सच में, ऐसे मनुष्य कार्य में अपने प्रकार्य को करने में पूर्णतः अक्षम हैं और सभी अनुपयोगी हैं। न केवल वे अपने प्रकार्य को करने में असफल हैं, बल्कि वे वास्तव में कलीसिया के ऊपर अनावश्यक तनाव डालते हैं। मैं इन "आदरणीय वृद्ध मनुष्यों" को शीघ्रता करने और कलीसिया को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ ताकि दूसरों को उन्हें अब और न देखना पड़े। ऐसे मनुष्यों को नए कार्य की कोई समझ नहीं होती है परन्तु वे अंतहीन अवधारणाओं से भरे हुए होते हैं। वे कलीसिया में किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं करते हैं; बल्कि, यहाँ तक कि कलीसिया में हर प्रकार के दुर्व्यवहार और अशांति में संलग्न होने की हद तक, वे अनिष्ट करते हैं और हर कहीं नकारात्मकता फैलाते हैं, और परिणामस्वरूप उन लोगों को भ्रम और अव्यवस्था में डाल देते हैं जिनमें विभेदन-क्षमता का अभाव होता है। इन जीवित दुष्ट आत्माओं, और इन बुरी आत्माओं को जितना जल्दी हो सके कलीसिया छोड़ देनी चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कारण कलीसिया को नुक़सान पहुँचे। हो सकता है कि तुम आज के कार्य से भयभीत न हो, किन्तु क्या तुम आने वाले कल के धार्मिक दण्ड से भयभीत नहीं हो? कलीसिया में बहुत से लोग हैं जो मुफ़्तखोर हैं, और साथ ही एक बड़ी संख्या में भेड़िए हैं जो परमेश्वर के सामान्य कार्य को अस्तव्यस्त करने की कोशिश करते हैं। ये सभी चीज़ें दुष्ट आत्माएँ हैं जिन्हें शैतान के द्वारा भेजा गया है और दुष्ट भेड़िए हैं जो निर्दोष मेमनों को हड़पने का प्रयास करते हैं। यदि इन तथाकथित मनुष्यों को खदेड़ा नहीं जाता है, तो वे कलीसिया पर परजीवी और चढ़ावों को हड़पने वाले कीट-पतंगे बन जाते हैं। इन कुत्सित, अज्ञानी, नीच, और अरुचिकर कीड़ों को एक दिन दण्डित किया जाएगा!

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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