परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए" | अंश 483

तुम परमेश्वर में विश्वास क्यों करते हो? अधिकांश लोग इस प्रश्न से हैरान हैं। उनके पास व्यावहारिक परमेश्वर और स्वर्ग के परमेश्वर के बारे में हमेशा से बिलकुल दो भिन्न दृष्टिकोण रहे हैं, जो दिखाता है कि वे आज्ञापालन के लिए नहीं, बल्कि कुछ निश्चित लाभों को प्राप्त करने, या विपत्तियों के कष्ट से बच निकलने के लिए परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। केवल तभी वे थोड़ा बहुत आज्ञाकारी होते हैं, किन्तु उनकी आज्ञाकारिता सशर्त है, यह उनकी स्वयं की व्यक्तिगत भावी संभावनाओं के वास्ते है, और जो उन पर जबरदस्ती डाली जाती है। इसलिए: तुम परमेश्वर पर विश्वास क्यों करते हो? यदि यह केवल तुम्हारी संभावनाओं, और तुम्हारे भाग्य के लिए है, तो बेहतर है कि तुम विश्वास ही मत करो। इस प्रकार का विश्वास आत्म-वंचना, आत्म-आश्वासन, और आत्म-प्रशंसा है। यदि तुम्हारा विश्वास परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता की नींव पर नहीं बना है, तो अंततः तुम्हें परमेश्वर का विरोध करने के परिणामस्वरूप दण्डित किया जाएगा। वे सभी जो अपने विश्वास में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता की खोज नहीं करते हैं परमेश्वर का विरोध करते हैं। परमेश्वर कहता है कि लोग सत्य की खोज करें, कि वे परमेश्वर के वचन के लिए प्यासे हों, और परमेश्वर के वचनों को खाएँ एवं पीएँ, और उन्हें अभ्यास में लाएँ, ताकि वे परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता को प्राप्त कर सकें। यदि तुम्हारी प्रेरणाएँ सचमुच में इस प्रकार की हैं, तो परमेश्वर निश्चित रूप से तुम्हें उठाएगा, और वह निश्चित रूप से तुम्हारे प्रति अनुग्रहपूर्ण होगा। कोई भी इस पर सन्देह नहीं कर सकता है, और कोई भी इसे बदल नहीं सकता है। यदि तुम्हारी प्रेरणाएँ परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता के वास्ते नहीं हैं, और तुम्हारे अन्य लक्ष्य हैं, तो जो कुछ भी तुम कहते और करते हो—परमेश्वर के सामने तुम्हारी प्रार्थनाएँ, और यहाँ तक कि तुम्हारे प्रत्येक कार्यकलाप—परमेश्वर के विरोध में होंगे। तुम मृदुभाषी एवं विनम्र-व्यवहार वाले हो सकते हो, तुम्हारा हर कार्यकलाप और अभिव्यक्ति सही दिखायी दे सकती है, तुम एक ऐसा व्यक्ति दिखाई दे सकते हो जो कि आज्ञाकारी है, किन्तु जब परमेश्वर के प्रति तुम्हारी प्रेरणाओं एवं परमेश्वर में विश्वास के बारे में तुम्हारे दृष्टिकोण की बात आती है, तो जो कुछ भी तुम करते हो वह परमेश्वर के विरोध में, तथा बुरा होता है। जो लोग भेड़ों के समान आज्ञाकारी प्रतीत होते हैं, परन्तु जिनके हृदय बुरे इरादों को आश्रय देते हैं, वे भेड़ की खाल में भेड़िए हैं, वे प्रत्यक्षत: परमेश्वर का अपमान करते हैं, और परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं छोड़ेगा। पवित्र आत्मा उन में से प्रत्येक को प्रकट करेगा, ताकि सभी यह देख सकें कि उन में से प्रत्येक से जो पाखण्डी हैं पवित्र आत्मा के द्वारा निश्चित रूप से घृणा की जाएगी एवं उनका तिरस्कार किया जाएगा। चिंता मत करो: परमेश्वर बारी-बारी से उन में से प्रत्येक के साथ निपटेगा और उनका समाधान करेगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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