परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 192
जब अविश्वासियों की बात आती है, तो क्या परमेश्वर की कार्यवाइयों की पृष्ठभूमि में भलों को प्रतिफल देने और दुष्टों को दण्ड देने का सिद्धांत...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
तुम्हें उन अनेक स्थितियों की समझ होनी चाहिए, जिनमें लोग तब होते हैं, जब पवित्र आत्मा उन पर काम करता है। विशेषकर, जो लोग ईश्वर की सेवा में समन्वय करते हैं, उन्हें उन अनेक स्थितियों की और भी गहरी समझ होनी चाहिए, जो पवित्र आत्मा द्वारा लोगों पर किए जाने वाले कार्य से पैदा होती हैं। यदि तुम बहुत सारे अनुभवों या प्रवेश पाने के कई तरीकों के बारे में केवल बात ही करते हो, तो यह दिखाता है कि तुम्हारा अनुभव बहुत ज़्यादा एकतरफा है। अपनी वास्तविक अवस्था को जाने बिना और सत्य के सिद्धांतों को समझे बिना स्वभाव में परिवर्तन हासिल करना संभव नहीं है। पवित्र आत्मा के कार्य के सिद्धांतों को जाने बिना या उसके फल को समझे बिना तुम्हारे लिए बुरी आत्माओं के कार्य को पहचानना मुश्किल होगा। तुम्हें बुरी आत्माओं के कार्य के साथ-साथ लोगों की धारणाओं को बेनकाब कर सीधे मुद्दे के केंद्र में पैठना चाहिए; तुम्हें लोगों के अभ्यास में आने वाले अनेक भटकावों या लोगों को परमेश्वर में विश्वास रखने में होने वाली समस्याओं को भी इंगित करना चाहिए, ताकि वे उन्हें पहचान सकें। कम से कम, तुम्हें उन्हें नकारात्मक या निष्क्रिय महसूस नहीं कराना चाहिए। हालाँकि, तुम्हें उन कठिनाइयों को समझना चाहिए, जो अधिकांश लोगों के लिए समान रूप से मौजूद हैं, तुम्हें विवेकहीन नहीं होना चाहिए या "भैंस के आगे बीन बजाने" की कोशिश नहीं करनी चाहिए; यह मूर्खतापूर्ण व्यवहार है। लोगों द्वारा अनुभव की जाने वाली कठिनाइयाँ हल करने के लिए तुम्हें पवित्र आत्मा के काम की गतिशीलता को समझना चाहिए; तुम्हें समझना चाहिए कि पवित्र आत्मा विभिन्न लोगों पर कैसे काम करता है, तुम्हें लोगों के सामने आने वाली कठिनाइयों और उनकी कमियों को समझना चाहिए, और तुम्हें समस्या के महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना चाहिए और बिना विचलित हुए या बिना कोई त्रुटि किए, समस्या के स्रोत पर पहुँचना चाहिए। केवल इस तरह का व्यक्ति ही परमेश्वर की सेवा में समन्वय करने योग्य है।
तुम प्रमुख मुद्दों को समझने और बहुत-सी चीजों को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम हो पाते हो या नहीं, यह तुम्हारे व्यक्तिगत अनुभवों पर निर्भर करता है। जिस तरीके से तुम अनुभव करते हो, उसी तरीके से तुम अन्य लोगों की अगुआई भी करते हो। यदि तुम शब्द और सिद्धांत ही समझते हो, तो तुम दूसरों को भी शब्द और सिद्धांत समझने के लिए ही प्रेरित करोगे। तुम जिस तरीके से परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता का अनुभव करते हो, उसी तरीके से तुम दूसरों को परमेश्वर के कथनों की वास्तविकता में प्रवेश कराने के लिए उनकी अगुआई करोगे। यदि तुम बहुत-से सत्यों को समझते हो और परमेश्वर के वचनों से कई चीज़ों में स्पष्ट रूप से अंतर्दृष्टि प्राप्त कर लेते हो, तो तुम दूसरों को भी बहुत-से सत्य समझाने के लिए उनका नेतृत्व कर पाने में सक्षम हो, और जिन लोगों का तुम नेतृत्व कर रहे हो, उन्हें दर्शनों की स्पष्ट समझ होगी। यदि तुम अलौकिक भावनाओं को समझने पर ध्यान केंद्रित करते हो, तो तुम जिन लोगों का नेतृत्व करते हो, वे भी वैसा ही करेंगे। यदि तुम अभ्यास की उपेक्षा करते हो और उसके बजाय चर्चा पर ज़ोर देते हो, तो जिन लोगों का तुम नेतृत्व करते हो, वे भी बिना कोई अभ्यास किए, या बिना अपने स्वभाव में कोई परिवर्तन लाए, चर्चा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे; वे बिना किसी सत्य का अभ्यास किए, केवल सतही तौर पर उत्साहित होंगे। सभी लोग दूसरों को वही देते हैं, जो उनके पास होता है। व्यक्ति जिस प्रकार का होता है, उसी से वह मार्ग निर्धारित होता है, जिस पर वह दूसरों का मार्गदर्शन करता है, और साथ ही उन लोगों का प्रकार भी, जिनका वह नेतृत्व करता है। परमेश्वर के उपयोग हेतु वास्तव में उपयुक्त होने के लिए, तुम्हारे भीतर न केवल आकांक्षा होनी चाहिए, बल्कि तुम्हें बड़ी मात्रा में परमेश्वर की प्रबुद्धता, परमेश्वर के वचनों से मार्गदर्शन, परमेश्वर द्वारा निपटाए जाने का अनुभव, और उसके वचनों के शुद्धिकरण की भी आवश्यकता है। एक नींव के रूप में इसके साथ, साधारण समय में, तुम लोगों को अपने अवलोकनों, विचारों, चिंतनों और निष्कर्षों पर ध्यान देना चाहिए, और तदनुसार आत्मसात या उन्मूलन करने में संलग्न होना चाहिए। ये सभी तुम लोगों के वास्तविकता में प्रवेश करने के रास्ते हैं, और इनमें से प्रत्येक अनिवार्य है। परमेश्वर इसी तरह काम करता है। यदि तुम परमेश्वर के कार्य करने की पद्धति में प्रवेश करते हो, तो तुम्हारे पास हर दिन उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के अवसर हो सकते हैं। और किसी भी समय, चाहे तुम्हारा वातावरण कठोर हो या अनुकूल, चाहे तुम्हारी परीक्षा ली जा रही हो या तुम्हें प्रलोभन दिया जा रहा हो, चाहे तुम काम कर रहे हो या नहीं कर रहे हो, चाहे तुम एक व्यक्ति के रूप में जी रहे हो या किसी समूह के अंग के रूप में, तुम्हें हमेशा परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने के अवसर मिलेंगे और तुम उनमें से किसी एक को भी कभी नहीं चूकोगे। तुम उन सभी को खोज पाने में सक्षम होगे—और इस तरह तुम परमेश्वर के वचनों का अनुभव करने का रहस्य पा लोगे।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, एक योग्य चरवाहे को किन चीज़ों से लैस होना चाहिए
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
जब अविश्वासियों की बात आती है, तो क्या परमेश्वर की कार्यवाइयों की पृष्ठभूमि में भलों को प्रतिफल देने और दुष्टों को दण्ड देने का सिद्धांत...
सभी कलीसियाओं में समागम में विध्वंसकारी सदस्य होते हैं; उन सभी में ऐसे सदस्य होते हैं जो परमेश्वर के कार्य में व्यवधान डालते हैं। ये लोग...
इस समय, परमेश्वर का काम हर व्यक्ति को सही पथ पर प्रवेश कराने का है, ताकि हर एक को सामान्य आध्यात्मिक जीवन प्राप्त हो, और वो सच्चा अनुभव...
परमेश्वर के सभी वचनों में उसके स्वभाव का एक हिस्सा समाहित होता है। परमेश्वर के स्वभाव को वचनों में पूरी तरह से व्यक्त नहीं किया जा सकता है,...