परमेश्वर के दैनिक वचन | "सत्य को समझने के बाद, तुम्हें उस पर अमल करना चाहिए" | अंश 422

सामान्य आध्यात्मिक जीवन जीने के लिए एक व्यक्ति को प्रतिदिन नई रोशनी प्राप्त करने और परमेश्वर के वचनों की समझ का अनुसरण करने में सक्षम होना चाहिए। एक व्यक्ति को सत्य स्पष्ट रूप से देखना चाहिए, सभी मामलों में अभ्यास का मार्ग तलाशना चाहिए, प्रतिदिन परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के माध्यम से नए प्रश्नों की खोज करनी चाहिए, और अपनी कमियों का एहसास करना चाहिए, ताकि उसके पास लालसा और प्रयास करने वाला हृदय हो सके जो उसके पूरे अस्तित्व को प्रेरित करे, वह हर समय परमेश्वर के सामने शांत रह सके और पीछे छूट जाने से बहुत भयभीत हो। इस तरह के लालायित और खोजी हृदय वाला व्यक्ति, जो लगातार प्रवेश पाने का इच्छुक है, वह आध्यात्मिक जीवन के सही मार्ग पर है। जो लोग पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित किए जाते हैं, जो बेहतर करने की इच्छा रखते हैं, जो परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने के लिए प्रयास करने को तैयार हैं, जो परमेश्वर के वचनों की गहरी समझ के लिए लालायित हैं, जो अलौकिक का अनुसरण नहीं करते, बल्कि वास्तविक कीमत का भुगतान करते हैं, वास्तव में परमेश्वर की इच्छा की परवाह करते हैं, वास्तव में प्रवेश प्राप्त करते हैं ताकि उनके अनुभव अधिक विशुद्ध और वास्तविक हों, जो खोखले वचनों और सिद्धांतों का अनुसरण नहीं करते या अलौकिकता को महसूस करने का प्रयास नही करते हैं, जो किसी महान व्यक्तित्व की आराधना नहीं करते हैं—ये वे लोग हैं जिन्होंने एक सामान्य आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश कर लिया है। वे जो कुछ भी करते हैं, उसका उद्देश्य जीवन में और अधिक विकास प्राप्त करना और स्वयं को आत्मा में ताज़ा और जीवंत बनाना है और वे हमेशा सक्रिय रूप से प्रवेश प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। बिना एहसास किए ही वे सत्य को समझने लगते हैं और वास्तविकता में प्रवेश करते हैं। सामान्य आध्यात्मिक जीवन वाले लोग प्रतिदिन आत्मा की मुक्ति और स्वतंत्रता पाते हैं और वे परमेश्वर की संतुष्टि के अनुसार उसके वचनों का स्वतंत्र रूप से अभ्यास कर सकते हैं। इन लोगों के लिए, प्रार्थना कोई औपचारिकता या प्रक्रिया नहीं है; वे प्रतिदिन नई रोशनी के साथ तालमेल रखने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के लिए, लोग परमेश्वर के सामने अपने हृदय को शांत करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करते हैं और उनका हृदय परमेश्वर के सामने वास्तव में शांत हो सकता है और उन्हें कोई परेशान नहीं कर सकता है। कोई भी व्यक्ति, घटना या वस्तु उनके सामान्य आध्यात्मिक जीवन को बाधित नहीं कर सकती है। इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य परिणाम प्राप्त करना है; इसका उद्देश्य लोगों से नियमों का पालन करवाना नहीं है। यह अभ्यास नियम-पालन के बारे में नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में विकास को बढ़ाने के बारे में है। यदि तुम इस अभ्यास को केवल नियमों के पालन के रूप में देखते हो, तो तुम्हारा जीवन कभी नहीं बदलेगा। हो सकता है कि तुम उसी अभ्यास में लगे हुए हो जिसमें दूसरे लगे हुए हैं, लेकिन ऐसा करते हुए तुम तो पवित्र आत्मा की धारा से निकाल दिये जाते हो जबकि अन्य लोग अंततः पवित्र आत्मा के कार्य के साथ तालमेल रखने में सक्षम हो जाते हैं। क्या तुम खुद को धोखा नहीं दे रहे हो? इन वचनों का उद्देश्य लोगों को परमेश्वर के आगे उनके हृदयों को शांत करने देना है, उनके हृदयों को परमेश्वर की ओर मोड़ने देना है, ताकि उनमें परमेश्वर का काम बिना बाधा के हो और फलीभूत हो सके। केवल तभी लोग परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हो सकते हैं।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

हटा दिया जाएगा उन्हें जो नहीं करते परमेश्वर के वचनों का अभ्यास

तुम्हारे स्वभाव में तब्दीली लाना है परमेश्वर के काम और वचन का अभिप्राय। महज़ इसे समझाना या पहचान कराना मकसद नहीं है उसका। इतना काफ़ी नहीं है, और यही सब-कुछ नहीं है। तुम ग्रहण कर सको अगर, तो आसान है समझना परमेश्वर के वचन। क्योंकि इंसानी ज़बान में लिखे हैं अधिकतर वचन। जो परमेश्वर चाहता है कि तुम जानो और करो, वो है ऐसा जो सामान्य इन्सान समझ सकता। इंसान परमेश्वर के वचनों में, हर तरह के सत्य का अनुभव करे। वो विस्तार से खोजे और जाँचे इसे। जो भी मिल जाए उसे लेने का इंतज़ार न करे, वरना मुफ़्तख़ोर के सिवा कुछ न होगा वो। जानता हो परमेश्वर के वचन के सत्य को, मगर अमल में न लाए वो, तो इसे प्रेम नहीं करता वो, आख़िरकार हटा दिया जाएगा उसको।

परमेश्वर जो कहता है अब साफ़ है। ये पारदर्शी और सुबोध है। बहुत-सी चीज़ों पर ध्यान दिलाता है परमेश्वर जो सोची नहीं हैं इंसान ने। इंसान के अलग-अलग हालात ज़ाहिर करता है वो। सबको अंगीकार करते हैं परमेश्वर के वचन। पूर्णमासी के चाँद की रोशनी की तरह साफ़ हैं वो। बहुत से मामलों को समझ सकता है इंसान। परमेश्वर के वचन को अमल में लाने की कोशिश करे इंसान। बस यही कमी है असल में इंसान में। इंसान परमेश्वर के वचनों में, हर तरह के सत्य का अनुभव करे। वो विस्तार से खोजे और जाँचे इसे। जो भी मिल जाए उसे लेने का इंतज़ार न करे, वरना मुफ़्तख़ोर के सिवा कुछ न होगा वो। जानता हो परमेश्वर के वचन के सत्य को, मगर अमल में न लाए वो, तो इसे प्रेम नहीं करता वो, आख़िरकार हटा दिया जाएगा उसको।

‘मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ’ से

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