परमेश्वर के दैनिक वचन | "राज्य का युग वचन का युग है" | अंश 401

सहस्राब्दिक राज्य के युग में क्या तुमने इस नये युग में प्रवेश किया है, यह इस बात से तय होगा कि क्या तुमने वास्तव में परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश किया है या नहीं, और उसके वचन तुम्हारे जीवन में वास्तविकता बन चुके हैं या नहीं। परमेश्वर का वचन सभी को बताया गया है, ताकि सभी लोग अंत में, वचन के संसार में जीएँ और परमेश्वर का वचन प्रत्येक व्यक्ति को भीतर से प्रबुद्ध और रोशन कर देगा। यदि इस कालखण्ड के दौरान, तुम परमेश्वर के वचन को पढ़ने में जल्दबाज और लापरवाह हो, और उसके वचन में तुम्हारी रुचि नहीं है, यह दर्शाता है कि तुम्हारी स्थिति में कहीं कुछ गड़बड़ है। यदि तुम वचन के युग में प्रवेश करने में असमर्थ हो, तो पवित्र आत्मा तुम में कार्य नहीं करता है; यदि तुम इस युग में प्रवेश कर चुके हो तो वह तुम में अपना काम करेगा। तुम इस समय क्या कर सकते हो, जबकि वचन के युग का आरंभ हुआ है, ताकि तुम पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त कर सको? इस युग में परमेश्वर इसे तुम्हारे बीच वास्तविकता बनाएगा कि प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के वचन को जीयेगा, और सत्य पर अमल करने योग्य बनेगा, और ईमानदारीपूर्वक परमेश्वर से प्रेम करेगा; कि सभी लोग परमेश्वर के वचन को नींव के रूप में और उनकी वास्तविकता के रूप में ग्रहण करें, और उनके हृदयों में परमेश्वर के प्रति आदर हो, और परमेश्वर के वचन पर अमल करने के द्वारा मनुष्य तब परमेश्वर के साथ मिलकर राज्य करे। परमेश्वर अपने इस कार्य को संपन्न करेगा। क्या तुम परमेश्वर के वचन को पढ़े बिना रह सकते हो? अब, बहुत से लोग हैं, जो महसूस करते हैं कि वे एक दिन या दो दिन भी परमेश्वर के वचन को बिना पढ़े नहीं रह सकते। उन्हें परमेश्वर का वचन प्रतिदिन अवश्य पढ़ना चाहिये, और यदि समय न मिले तो वचन को सुनना ही काफी है। यही भाव मनुष्य को पवित्र आत्मा की ओर से मिलती है। और इस प्रकार वो मनुष्य को चालित करता है। अर्थात पवित्र आत्मा वचन के द्वारा मनुष्य को नियंत्रित करता है ताकि मनुष्य परमेश्वर के वचन की वास्तविकता में प्रवेश करे। यदि परमेश्वर के वचन को खाए-पीए बिना बस एक ही दिन में तुम्हें अंधकार और प्यास का अनुभव हो, और तम्हें यह अस्वीकार्य लगता है, तब ये बातें दर्शाती हैं कि पवित्र आत्मा तुम्हें प्रेरित कर रहा है और वह तुमसे अलग नहीं हुआ है। तब तुम वह हो जो इस धारा में हो। किंतु यदि परमेश्वर के वचन को खाए-पीए बिना एक या दो दिन के बाद, तुम में कोई अवधारणा न हो या तुम्हें भूख-प्यास न लगे, और तुम द्रवित महसूस न करो, तो यह दर्शाता है कि पवित्र आत्मा तुम से दूर जा चुका है। इसका अर्थ है कि तुम्हारी भीतरी दशा सही नहीं है; तुमने वचन के युग में प्रवेश नहीं किया है, और तुम वह हो जो पीछे छूट गये हो। परमेश्वर मनुष्यों को नियंत्रित करने के लिये वचन का उपयोग करता है; तुम जब वचन को खाते-पीते हो, तुम्हें अच्छा महसूस होता है, यदि अच्छा महसूस नहीं होता, तब तुम्हारे पास कोई मार्ग नहीं है। परमेश्वर का वचन मनुष्यों का भोजन और उन्हें संचालित करने वाली शक्ति बन जाता है। बाइबिल में लिखा है, "मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्‍वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा।" यही वह कार्य है जो परमेश्वर इस दिन में संपन्न करेगा। वह तुम लोगों को इस सत्य का अनुभव करायेगा। यह कैसे होता था कि प्राचीन दिनों में लोग परमेश्वर का वचन बिना पढ़े बहुत दिन रहते थे, पर खाते-पीते और काम करते थे? और अब ऐसा क्यों नहीं होता? इस युग में परमेश्वर सब मनुष्यों को नियंत्रित करने के लिए मुख्य रूप से वचन का उपयोग करता है। परमेश्वर के वचन के द्वारा मनुष्य परखा, और पूर्ण बनाया जाता है, और तब अंत में राज्य में ले जाया जाता है। केवल परमेश्वर का वचन मनुष्यों को जीवन दे सकता है, और केवल परमेश्वर का वचन ही मनुष्यों को ज्योति और अमल करने का मार्ग दे सकता है विशेषकर राज्य के युग में। जब तब तुम परमेश्वर के वचन को खाते-पीते हो, और परमेश्वर के वचन की वास्तविकता को नहीं छोड़ते, परमेश्वर तुम्हें पूर्ण बनाने का कार्य कर पाएगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

राज्य के युग में परमेश्वर मनुष्य को वचनों के द्वारा पूर्ण करता है

राज्य के युग में परमेश्वर मनुष्य को वचनों के द्वारा पूर्ण करता है। इस युग में, परमेश्वर तुम लोगों में ये साकार करेगा: कि सभी करेंगे उसके सत्य का अभ्यास, कि सभी उसके वचन जिएँगे और दिल से करेंगे उससे प्यार। परमेश्वर का वचन है उनके जीवन का आधार। उन सभी का हृदय मानता है परमेश्वर का भय। परमेश्वर के वचनों के अभ्यास के ज़रिये, साथ परमेश्वर वे करेंगे शासन और हुकूमत। केवल परमेश्वर का वचन मनुष्य को देता है जीवन। केवल उसका ही वचन मनुष्य के लिए ला सकता है रोशनी, दिखा सकता है अभ्यास करने का मार्ग। राज्य के युग में यह है अधिक सत्य। दिखा सकता है अभ्यास करने का मार्ग। राज्य के युग में यह है अधिक सत्य। परमेश्वर के वचन, करते हैं मनुष्य पर शासन। परमेश्वर का वचन है शक्ति और भोजन। तू इसे खाकर महसूस करता है अच्छा। अगर तू इसे नहीं खाता तो फिर तुझे मिलेगा न कोई रस्ता, तुझे मिलेगा न कोई रस्ता।

बाइबल में है लिखा: मनुष्य केवल रोटी से नहीं, बाइबल में है लिखा: मनुष्य केवल रोटी से नहीं, परन्तु परमेश्वर के वचनों से जीवित रहेगा। अब परमेश्वर तुम लोगों में करेगा ये साकार। अब परमेश्वर तुम लोगों में करेगा ये साकार। केवल परमेश्वर का वचन मनुष्य को देता है जीवन। केवल उसका ही वचन मनुष्य के लिए ला सकता है रोशनी, दिखा सकता है अभ्यास करने का मार्ग। राज्य के युग में यह है अधिक सत्य। दिखा सकता है अभ्यास करने का मार्ग। राज्य के युग में यह है अधिक सत्य।

पहले, मनुष्य परमेश्वर के वचनों को बिना पढ़े बहुत दिन रहता था; वो काम करता था और अपना जीवन जीता था। लेकिन आज चीज़ें गईं बदल, वचनों के ज़रिये परमेश्वर करता सभी पर शासन। लोग परखे और पूर्ण बनाए जाते, उसके राज्य में प्रवेश कर पाते, होता ये सब उसके वचन के कारण। परमेश्वर के वचनों को पीना रोज़। परमेश्वर के वचनों को खाना रोज़। परमेश्वर के वचनों को पीना रोज़। परमेश्वर के वचनों को खाना रोज़। वचन के सत्य को मत छोड़। और तू बना दिया जाएगा बिल्कुल पूर्ण, बिल्कुल पूर्ण, बिल्कुल पूर्ण।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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