परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 9" | अंश 376

मैं तुझे याद दिलाना चाहता हूँ कि तू मेरे वचन पर थोड़ा भी अस्पष्ट नहीं हो सकता है और कोई भी लापरवाही अस्वीकार्य है। तुझे इस पर ध्यान देना चाहिए और इसका पालन करना चाहिए और मेरे इरादों के अनुसार चीज़ों को करना चाहिए। तुझे सदैव सतर्क रहना चाहिए और तेरा कभी भी ऐसा स्वभाव नहीं होना चाहिए जो अहंकारी और आत्म-तुष्ट हो, और तुझे अपने भीतर रहने वाले प्राकृतिक पुराने स्वभाव को दूर करने के लिए सदैव मुझ पर भरोसा करना चाहिए। तुझे सदैव मेरे सामने सामान्य स्थिति को बनाए रखने में सक्षम होना चाहिए, और एक स्थिर स्वभाव रखना चाहिए। तेरी सोच शांत और स्पष्ट होनी चाहिए और यह किसी भी व्यक्ति, घटना या चीज़ से डोलनी या नियंत्रित होनी नहीं चाहिए। तुझे मेरी उपस्थिति में सदैव शांत रहना चाहिए और सदैव मेरे साथ निरंतर निकटता और सहभागिता बनाए रखनी चाहिए। मेरे लिए अपनी गवाही में तुझे अवश्य ताक़त और रीढ़ दिखानी चाहिए, और अडिग रहना चाहिए। उठ और मेरे वास्ते बोल और डर मत कि दूसरे लोग क्या कहते हैं। मेरे इरादों को संतुष्ट करने पर ध्यान केंद्रित कर और दूसरों के द्वारा नियंत्रित मत हो। जो मैं तेरे लिए प्रकट करता हूँ, वह मेरे इरादों के अनुसार किया जाना चाहिए और उसमें विलंब नहीं किया जा सकता है। तू अंदर कैसा महसूस करता है? क्या तू असहज है? तू समझ जाएगा। तू मेरे लिए बात करने को खड़े होने और मेरी ज़िम्मेदारी की ओर विचार करने में असमर्थ क्यों है? तू छोटे-छोटे षड़यंत्र रचने में व्यस्त रहता है, लेकिन मैं इन सब को बिल्कुल साफ़-साफ़ देखता हूँ। मैं तेरा सहारा और तेरी ढाल हूँ, और सब कुछ मेरे हाथों में है, तो तुझे किस बात का डर है? क्या यह ज़रूरत से ज़्यादा भावुक होना नहीं है? तुझे तुरंत भावनाओं को अलग कर देना चाहिए; मैं भावनाओं पर विचार नहीं करता हूँ और मैं धार्मिकता का प्रयोग करता हूँ। यदि तेरे माता-पिता कुछ भी ऐसा करते हैं जो कलीसिया के किसी लाभ का नहीं है, तो वे बच कर नहीं निकल सकते हैं! मेरे इरादे तेरे लिए प्रकट कर दिए गए हैं और तुझे उनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसके बजाए, तुझे अपना पूरा ध्यान उन पर लगाना चाहिए और पूरे मनोयोग से उनका पालन करने के लिए सब कुछ छोड़ देना चाहिए। मैं सदैव तुझे अपने हाथों में रखूँगा। डरपोक मत बन और अपने पति या पत्नी के द्वारा नियंत्रित मत हो; तू मेरी इच्छा पूरी करने में सहयोगी बन।

आस्था रख! विश्वास रख! मैं तेरा सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ। यह कुछ ऐसा है जो तुझे कुछ-कुछ महसूस हो सकता है, लेकिन तुझे अभी भी सतर्क रहना होगा। कलीसिया की ख़ातिर, मेरी इच्छा के लिए और मेरे प्रबंधन के वास्ते, तुझे पूरी तरह से समर्पित होना चाहिए, और सभी रहस्य और परिणाम तुझे स्पष्ट रूप से दिखाए जाएँगे। इसमें कोई और विलंब नहीं होगा और दिन ख़त्म हो रहे हैं। तो तू क्या करेगा? तुझे अपने जीवन में बढ़ने और परिपक्व होने का प्रयास कैसे करना चाहिए? तू अपने आप को मेरे लिए जल्दी से कैसे उपयोगी बनाएगा? तू मेरी इच्छा कैसे पूरी करेगा? ऐसा करने के लिए मेरे साथ पूरी तरह से विचारमग्न होने और गहरी संगति करने की आवश्यकता है। मुझ पर भरोसा कर, मुझ पर विश्वास कर, कभी भी लापरवाह न बन, और मेरे मार्गदर्शन के अनुसार चीज़ों को करने में सक्षम बन। सत्य पूरी तरह से सुसज्जित होना चाहिए और तुझे इसे अक्सर खाना और पीना चाहिए। इससे पहले कि हर सत्य को स्पष्ट रूप से समझा जा सके, इस पर अवश्य अमल किया जाना चाहिए।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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