परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 6" | अंश 374

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, समस्त वस्तुओं का मुखिया, अपने सिंहासन से अपने राजसी सामर्थ्य को संभालता है। वह समस्त ब्रह्माण्ड और सब वस्तुओं पर राज करता है और सारी पृथ्वी पर हमारा मार्गदर्शन करता है। हम हर क्षण उसके समीप होंगे, और एकांत में उसके सम्मुख आयेंगे, एक पल भी नहीं खोएँगे और हर समय कुछ न कुछ सीखेंगे। हमारे इर्द-गिर्द का वातावरण, लोग, बातें व वस्तुएं, सब उसके सिंहासन की अनुमति से अस्तित्व में हैं। किसी भी हाल में अपने दिल में शिकायतों को आने मत दो, अन्यथा परमेश्वर तुम्हें अपना अनुग्रह प्रदान न करेगा। जब रोग आता है तो यह परमेश्वर का प्रेम ही है और इसके पीछे निश्चित ही उसके भले अभिप्राय होते हैं। भले तुम्हारा शरीर पीड़ा सहे लेकिन शैतान का विचार मन में न लाओ। बीमारियों के मध्य परमेश्वर की स्तुति करो और अपनी स्तुति के मध्य परमेश्वर में आनंदित हो। बीमारी की हालत में निराश ना हो, खोजते रहो और हिम्मत न हारो, और परमेश्वर तुम्हें अपनी ज्योति से रोशन करेगा। अय्यूब का विश्वास कैसा था? सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सर्वसामर्थी चिकित्सक है! बीमारी में रहने का मतलब बीमार होना है, परन्तु आत्मा में रहने का मतलब स्वस्थ होना है। अगर तुम्हारी एक भी सांस बाकी है तो परमेश्वर तुम्हें मरने नहीं देगा।

पुनरुत्थित मसीह का जीवन हमारे भीतर है। निस्संदेह, परमेश्वर के समक्ष हममें विश्वास की कमी है : परमेश्वर हम में सच्चा विश्वास जगाये। परमेश्वर के वचन निश्चित ही मधुर हैं! परमेश्वर के वचन गुणकारी दवा हैं! वे दुष्टों और शैतान को शर्मिन्दा करते हैं! परमेश्वर के वचनों को समझने से हमें सहारा मिलता है। उसके वचन हमारे हृदय को बचाने के लिए शीघ्रता से कार्य करते हैं! वह सब बातों को दूर कर सर्वत्र शान्ति बहाल करते हैं। विश्वास लकड़ी के इकलौते लट्ठे के पुल की तरह है : जो लोग घृणास्पद ढंग से जीवन से लिपटे रहते हैं उन्हें इसे पार करने में परेशानी होगी, परन्तु जो खुद का त्याग करने को तैयार रहते हैं, वे बिना किसी फ़िक्र के, मजबूती से कदम रखते हुए उसे पार कर सकते हैं। अगर मनुष्य कायरता और भय के विचार रखते हैं तो यह इसलिए है की शैतान ने उन्हें मूर्ख बनाया है क्योंकि उसे इस बात का डर है कि हम विश्वास का पुल पार कर परमेश्वर में प्रवेश कर जायेंगे। शैतान अपने विचारों को हम तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास कर रहा है। हमें हर पल परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें अपने प्रकाश से रोशन करे, शैतान के जहर से हमें अपने आप को शुद्ध करने के लिए, हमें हर पल परमेश्वर पर भरोसा करना चाहिए। हमें हमेशा अपनी आत्माओं में परमेश्वर के निकट आने के लिए अभ्यास करना चाहिए। अपने सम्पूर्ण जीवन पर हमें परमेश्वर को अधिकार देना चाहिए।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

बीमारी की शुरुआत परमेश्वर का प्रेम है

सभी चीज़ों का स्वामी, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, राजसी सामर्थ्य का करता है उपयोग अपने सिंहासन से। करता है शासन हर चीज़ पर, दिखाता है राह हम सबको धरती पर। आओ उसके रूबरू, पाएं ज्ञान निरंतर। सब चीज़ें और पदार्थ, इंसान सब, पाते अनुमति परमेश्वर के सिंहासन से। शिकायती दिल न रखना, वो कृपा न बरसाएगा तुम पर वरना, आता है जब कोई रोग तो होते हैं उसके पीछे, यकीनन नेक इरादे उसके। तन को तकलीफ हो तो भी, ख़्याल शैतान के न रखना। रोग में परमेश्वर की स्तुति करना, न हार मानना, न दिल छोटा करना। खोजोगे जब तो परमेश्वर तुम्हें अपनी रोशनी देगा, रोशनी देगा। खोजोगे जब तो परमेश्वर तुम्हें अपनी रोशनी देगा, रोशनी देगा, अपनी रोशनी देगा।

याद करो अय्यूब कितना वफ़ादार था। समर्थ चिकित्सक है परमेश्वर। बीमारी में रहते हो तो बीमार हो तुम, उमंग में रहते हो तो तंदुरुस्त हो तुम। साँस लोगे तो तुम्हें मरने न देगा परमेश्वर। पुनर्जीवित मसीह की ज़िंदगी है हम में, मगर सचमुच परमेश्वर में आस्था की कमी है हम में। उसके सब वचनों में मिठास बहुत है, परमेश्वर आस्था पैदा करे हम में। परमेश्वर के वचन दवा हैं सब के लिये। परमेश्वर के वचन दवा हैं सब के लिये।

लानत है दुष्ट पर, लानत है शैतान पर। परमेश्वर के वचन बचायेंगे हमारे दिल। परमेश्वर के वचन ही हैं सहारा हमारा। हर बुरी चीज़ को भगाते हैं वचन, हर चीज़ को सुकून देते हैं वचन। आस्था एक कुंदे के पुल की तरह है, कायर उसके पार जा नहीं सकता। वो मगर कर सकते हैं इस पुल को पार, जिन में समर्पण होता है। शैतान बनाता है बेवकूफ़ बुज़दिल ख़्यालों से। शैतां आज़माता है हर तरीका, वो हमें अपने बुरे ख़्याल भेजता है। अक्सर दुआ करो, परमेश्वर की रोशनी के लिये, हमारे भीतर जो ज़हर है वो मिटाए उसको। उसके करीब आओ, उसे करने दो हम पर शासन। उसके करीब आओ, उसे करने दो हम पर शासन।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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