परमेश्वर के दैनिक वचन : मंज़िलें और परिणाम | अंश 603

भाइयों और बहनों के बीच जो लोग हमेशा अपनी नकारात्मकता का गुबार निकालते रहते हैं, वे शैतान के अनुचर हैं और वे कलीसिया को परेशान करते हैं। ऐसे लोगों को अवश्य ही एक दिन निकाल और हटा दिया जाना चाहिए। परमेश्वर में अपने विश्वास में, अगर लोगों के अंदर परमेश्वर के प्रति श्रद्धा-भाव से भरा दिल नहीं है, अगर ऐसा दिल नहीं है जो परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी है, तो ऐसे लोग न सिर्फ परमेश्वर के लिये कोई कार्य कर पाने में असमर्थ होंगे, बल्कि इसके विपरीत वे ऐसे लोग बन जाएँगे जो परमेश्वर के कार्य में बाधा उपस्थित करते हैं और उसकी उपेक्षा करते हैं। परमेश्वर में विश्वास करना किन्तु उसकी आज्ञा का पालन नहीं करना या उसका आदर नहीं करना, और उसके बजाय उसका प्रतिरोध करना, किसी भी विश्वासी के लिए सबसे बड़ा कलंक है यदि विश्वासी वाणी और आचरण में हमेशा ठीक उसी तरह लापरवाह और असंयमित हों जैसे अविश्वासी होते हैं, तो ऐसे लोग अविश्वासी से भी अधिक दुष्ट होते हैं; ये मूल रूप से राक्षस हैं। जो कलीसिया के भीतर विषैली, दुर्भावनापूर्ण बातों का गुबार निकालते हैं, और साथ ही ऐसे लोग भाईयों और बहनों के बीच अफवाहें फैलाते हैं, असामंजस्यता को भड़काते हैं और गुटबाजी करते हैं, उन सभी को कलीसिया से निकाल दिया जाना चाहिए था। हालाँक, क्योंकि यह अब परमेश्वर के कार्य का एक भिन्न युग है, इसलिए ऐसे लोगों को प्रतिबंधित कर दिया गया है, क्योंकि ये निश्चित रूप से हटाए जाने की वस्तुएँ हैं। शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिए गए सभी लोगों के भ्रष्ट स्वभाव हैं। हालाँकि, कुछ लोग बस भ्रष्ट स्वभावों वाले ही हैं जबकि अन्य ऐसे हैं जो इन बातों में भिन्न हैं कि न केवल उनके शैतानी स्वभाव हैं, बल्कि उनकी प्रकृति चरम रूप से विद्वेषपूर्ण है। ऐसे लोग जो कुछ भी करते और कहते हैं, उससे न केवल दूषित शैतानी स्वभाव प्रकट होता है, बल्कि यह भी प्रकट होता है कि वे असली इब्लीस शैतान हैं। ये लोग जो कुछ भी करते हैं उससे बस परमेश्वर के कार्य में बाधा ही पड़ती है; उनके सभी कृत्य भाइयों और बहनों के जीवन प्रवेश में व्यवधान उपस्थित करते हैं और कलीसिया के सामान्य कार्यकलापों को नष्ट करते हैं। भेड़ की खाल में छिपे इन भेड़ियों का कभी न कभी अवश्य ही सफाया किया जाना चाहिए, और शैतान के इन अनुचरों के प्रति एक सख्त रवैया, अस्वीकृति का रवैया अपनाया जाना चाहिए। केवल इससे ही प्रदर्शित होता है कि लोग परमेश्वर के पक्ष में खड़े हैं; और जो ऐसा करने में विफल हैं वे शैतान के साथ कीचड़ में लोट रहे हैं। जो लोग सच्चे मन से परमेश्वर में विश्वास करते हैं, परमेश्वर उनके हृदय में बसता है और उनके भीतर हमेशा परमेश्वर का आदर करने वाला हृदय, परमेश्वर को प्रेम करने वाला हृदय रहता है। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, उन्हें सावधानी और समझदारी से कार्यों को करना चाहिए, और वे जो कुछ भी करें वह परमेश्वर की अपेक्षा के अनुसार होना चाहिये और उसके हृदय को संतुष्ट करने में सक्षम होना चाहिए। उन्हें मनमाने ढंग से कुछ भी करते हुए दुराग्रही नहीं होना चाहिए; जो कि संतों की शिष्टता के अनुकूल नहीं है। लोग प्रवंचना और छल करते हुए सभी जगहों पर परमेश्वर का ध्वज लहराते हुए उन्मत्त हो कर नहीं भाग सकते हैं; यह सर्वाधिक विद्रोही प्रकार का आचरण है। परिवारों के अपने नियम होते हैं और राष्ट्रों के अपने कानून होते हैं; क्या परमेश्वर के परिवार में ऐसा और भी अधिक नहीं है? क्या मानक और भी अधिक सख़्त नहीं है? क्या और भी अधिक प्रशासनिक आदेश नहीं हैं? लोग जो चाहें वह करने के लिए स्वतंत्र हैं, परन्तु परमेश्वर के प्रशासनिक आदेशों को इच्छानुसार नहीं बदला जा सकता है। परमेश्वर आखिर परमेश्वर है जो मानवों से अपमान को सहन नहीं करता है; वह ऐसा परमेश्वर है जो लोगों को मौत दे देता है। क्या लोग वास्तव में यह सब पहले से ही नहीं जानते हैं?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो सत्य का अभ्यास नहीं करते हैं उनके लिए एक चेतावनी

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

परमेश्वर के दैनिक वचन : इंसान की भ्रष्टता का खुलासा | अंश 330

जब तुम आज के मार्ग पर चलते हो, तो किस प्रकार का अनुगमन सबसे अच्छा होता है? अपने अनुगमन में तुम्हें खुद को किस तरह के व्यक्ति के रूप में...

परमेश्वर के दैनिक वचन : इंसान की भ्रष्टता का खुलासा | अंश 333

यदि अब मुझे तुम्हारे सामने कुछ धन-सम्पत्ति रखनी होती और तुम से कहना होता कि खुलकर चुनिए, यह जानते हुए कि मैं तुम्हें दोषी नहीं ठहराऊँगा, तो...

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर के कार्य को जानना | अंश 230

परमेश्वर के सभी वचनों में उसके स्वभाव का एक हिस्सा समाहित होता है। परमेश्वर के स्वभाव को वचनों में पूरी तरह से व्यक्त नहीं किया जा सकता है,...

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें