परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 584

मैंने तुम लोगों के बीच बहुत काम किया है और, निस्संदेह, बहुत से कथन भी कहे हैं। फिर भी मुझे पूरी तरह से महसूस होता है कि मेरे वचन और कार्य ने अंत के दिनों में मेरे कार्य के उद्देश्य को पूरी तरह से सम्पूर्ण नहीं किया है। क्योंकि, अंत के दिनों में, मेरा कार्य किसी खास व्यक्ति या खास लोगों के वास्ते नहीं है, बल्कि मेरे अन्तर्निहित स्वभाव को प्रदर्शित करने के लिए है। हालाँकि, असंख्य कारणों से—कदाचित् समय की दुर्लभता या कार्य का अति-व्यस्त कार्यक्रम—मेरे स्वभाव ने मनुष्य को मुझसे परिचित होने में जरा भी सक्षम नहीं बनाया। इसलिए अपने कार्य में एक नया पृष्ठ खोलने के लिए, मैं अपनी एक नयी योजना की ओर, अपने अंतिम कार्य में, कदम बढ़ाता हूँ ताकि वे सब जो मुझे देखते हैं मेरे अस्तित्व के कारण लगातार अपनी छाती पीटेंगे और रोएँगे और विलाप करेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं संसार में मनुष्यों का अंत कर दूँगा, और उसके बाद से, मैं मनुष्यों के सामने अपने पूरे स्वभाव को प्रकट करता हूँ, ताकि वे सभी जो मुझे जानते हैं, और वे सभी जो नहीं जानते हैं, अपनी आँखों को निहाल कर सकें और वे देखें कि मैं वास्तव में मनुष्यों के संसार मेंआ गया हूँ, पृथ्वी पर आ गया हूँ, जहाँ सभी चीज़ें वृद्धि करती हैं। यह मेरी योजना है, यह मनुष्यों के सृजन के समय से मेरी एकमात्र "स्वीकारोक्ति" है। मैं चाहता हूँ कि तुम लोग अपना अखण्डित ध्यान मेरी प्रत्येक गतिविधि पर दे सको, क्योंकि मेरी छड़ी एक बार फिर मनुष्यों के नज़दीक, विशेष रूप से उन सभी को नज़दीक से कुचलती है जो मेरा विरोध करते हैं।

आसमानों के साथ, मैं उस कार्य को आरंभ करता हूँ जो मुझे अवश्य करना चाहिए। और इसलिए मैं, किसी के द्वारा कभी भी मेरी गतिविधियों को महसूस किए या मेरे वचनों पर ध्यान दिए बिना, लोगों के विभिन्न समूहों के माध्यम से मार्ग निकालता हूँ और आसमान और पृथ्वी के बीच विचरण करता। इसलिये, मेरी योजना अभी भी निरंतर प्रगति कर रही है। यह केवल इतना ही है कि तुम्हारी सभी इंद्रियाँ इतनी सुन्न हो गई हैं कि तुम लोग मेरे कार्य के चरणों को जरा सा भी नहीं समझते हो। किन्तु, निश्चित रूप से एक दिना आएगा, जब तुम लोग मेरे अभिप्राय को जान जानोगे। आज, मैं तुम लोगों के साथ-साथ रहता और तुम लोगों के साथ दुःख सहता हूँ। मैंने बहुत पहले से ही उस प्रवृत्ति को समझ लिया था जो मानवजाति मेरे प्रति धारण करती है। मैं तुम लोगों को शर्मिंदा करने के लिए और अधिक स्पष्टीकरण नहीं देना चाहता हूँ, और पीड़ादायक विषयों के उदाहरणों को तो और बिल्कुल नहीं देना चाहता हूँ। मेरी केवल यही इच्छा है कि तुम लोग वह सब अपने हृदय में रखो जो तुम लोगों ने किया है—ताकि जिस दिन हम पुनः मिलें तो अपने खातों का मिलान कर सकें। मैं तुम लोगों में से किसी पर भी झूठा आरोप नहीं लगाना चाहता हूँ, क्योंकि मैंने सदैव न्यायपूर्वक, निष्पक्षता से, और सम्मानपूर्वक कार्य किया है। निश्चित रूप से, मैं यह भी चाहता हूँ कि तुम लोग निष्कपट और उदार बन सको और ऐसा कुछ न करो जो स्वर्ग और पृथ्वी और तुम्हारे विवेक के विरुद्ध जाता हो। मात्र यही एक चीज है जो मैं तुम लोगों से माँगता हूँ। बहुत से लोग बेचैनी और व्यग्रता महसूस करते हैं क्योंकि उन्होंने भयानक गलतियाँ की हैं, और बहुत से लोग स्वयं पर शर्मिंदा महसूस करते हैं क्योंकि उन्होंने कभी भी एक भी अच्छा कर्म नहीं किया है। फिर भी ऐसे कई लोग हैं जो अपने पापों के कारण अपमानित महसूस होने से दूर, मेरे स्वभाव की परीक्षा लेने के लिए, अपने वीभत्स चेहरे को छुपाने वाले मुखौटे को पूरी तरह से फाड़ते हुए—जिसे अभी तक पूरी तरह से उजागर होना था—बद से बदतर हो जाते हैं। मैं किसी व्यक्ति के कार्यों का संज्ञान नही लेता हूँ, न ही उस पर विशेष ध्यान देता हूँ। बल्कि, मैं उस कार्य को करता हूँ जो मुझे करना चाहिए, चाहे यह जानकारी इकट्ठा करना हो, या देश में घूमना हो, या कुछ ऐसा करना हो जो मुझे रुचिकर लगता है। प्रमुख समयों पर, मैं मनुष्यों के बीच अपने कार्य को, एक क्षण भी विलंब या शीघ्रता से नहीं, और सहजता और स्थिरता दोनों के साथ, उसी तरह से संपन्न करता हूँ जैसे मैंने मूल रूप से योजना बनाई थी। हालाँकि, मेरे कार्य में हर चरण के साथ कुछ लोगों को त्याग दिया जाता है, क्योंकि मैं उनके चापलूसी करने के तरीकों और उनके झूठी विनीतता से घृणा करता हूँ। जो मुझे घृणास्पद लगते हैं वे, चाहे जानबूझकर या अनजाने में, निश्चित रूप से त्यागे जाएँगे। संक्षेप में, मैं चाहता हूँ, जिनसे मैं घृणा करता हूँ, वे मुझसे दूर हो जाएँ। कहने की आवश्यकता नहीं कि, मैं अपने घर में बचे हुए दुष्टों को छोड़ूँगा नहीं। क्योंकि मनुष्यों को दण्ड देने का दिन निकट है, मुझे उन सभी घिनौनी आत्माओं को बाहर निकालने की जल्दबाजी नहीं है, क्योंकि मेरी अपनी एक योजना है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

दुनिया में इंसान का अंत लाता ईश्वर

ईश्वर के अंत के दिनों का न्याय नहीं कुछ लोगों के लिए, है ये इंसान को ईश-स्वभाव दिखाने के लिए। मगर वक्त की कमी, ज़्यादा काम की वजह से, ईश-स्वभाव से ईश्वर को न जान पाया इंसान। आगे बढ़े ईश्वर अपनी नयी योजना, अंतिम काम में। उसे देखने वाले अपनी छाती पीटेंगे रोएँगे क्योंकि मौजूद है वो। दुनिया में इंसान का अंत लाता ईश्वर। सबके सामने प्रकट होता उसका स्वभाव, जो जानें, या न जानें उसे देखते धरती पर उसका आगमन। ये ईश-योजना है, उसकी “स्वीकारोक्ति” है मानव-सृजन के समय से।

ईश्वर चाहे तुम सब उसकी तरफ ध्यान दो, पूरी लगन से उसका हर काम देखो क्योंकि उसकी छड़ी पड़े हर उस इंसान पर और जो उसका, उसका विरोध करे। जो उसका विरोध करे। आगे बढ़े ईश्वर अपनी नयी योजना, अंतिम काम में, अंतिम काम में। उसे देखने वाले अपनी छाती पीटेंगे रोएँगे क्योंकि मौजूद है वो। दुनिया में इंसान का अंत लाता ईश्वर। सबके सामने प्रकट होता उसका स्वभाव, जो जानें, या न जानें उसे देखते धरती पर उसका आगमन। ये ईश-योजना है, उसकी “स्वीकारोक्ति” है। ये ईश-योजना है, उसकी “स्वीकारोक्ति” है मानव-सृजन के समय से। ईश्वर के अंत के दिनों का न्याय नहीं कुछ लोगों के लिए, है ये इंसान को ईश-स्वभाव दिखाने के लिए, ईश-स्वभाव दिखाने के लिए।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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