परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 17

आज के दिन तक अपना 6,000 वर्षों का कार्य करते हुए, परमेश्वर ने अपने बहुत से क्रिया-कलापों को पहले ही प्रकट कर दिया है, मुख्य रूप से शैतान को पराजित करने और समस्त मानवजाति का उद्धार करने का कार्य। वह स्वर्ग की हर चीज़, पृथ्वी के ऊपर की हर चीज़ और समुद्र के अंदर की हर चीज़ और साथ ही पृथ्वी पर परमेश्वर के सृजन की हर अंतिम वस्तु को परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को देखने और परमेश्वर के सभी क्रिया-कलापों को देखने की अनुमति देने के लिए इस अवसर का उपयोग करता है। वह मानवजाति पर अपने सभी क्रिया-कलापों को प्रकट करने हेतु शैतान को पराजित करने के अवसर पर कब्ज़ा करता है, और लोगों को उसकी स्तुति करने और शैतान को पराजित करने वाली उसकी बुद्धि को प्रोत्साहित करने में समर्थ बनने की अनुमति देता है। पृथ्वी पर, स्वर्ग में, और समुद्र के भीतर की प्रत्येक वस्तु उसकी महिमा लाती है, और उसकी सर्वशक्तिमत्ता की स्तुति करती है, उसके सभी क्रिया-कलापों की स्तुति करती है, और उसके पवित्र नाम की जय—जयकार करती है। यह शैतान की पराजय का उसका प्रमाण है; यह शैतान पर उसकी विजय का प्रमाण है; और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण, यह उसके द्वारा मानवजाति के उद्धार का प्रमाण है। परमेश्वर की समस्त सृष्टि उसके लिए महिमा लाती है, अपने शत्रु को पराजित करने और विजयी होकर लौटने के लिए उसकी स्तुति करती है और एक महान विजयी राजा के रूप में उसकी स्तुति करती है। उसका उद्देश्य केवल शैतान को पराजित करना ही नहीं है, और इसलिए उसका कार्य 6,000 वर्ष तक जारी रहा। वह मानवजाति को बचाने के लिए शैतान की पराजय का उपयोग करता है; वह अपने सभी क्रिया-कलापों को प्रकट करने के लिए और अपनी सारी महिमा को प्रकट करने के लिए शैतान की पराजय का उपयोग करता है। वह महिमा प्राप्त करेगा, और स्वर्गदूतों का समस्त जमघट भी उसकी सम्पूर्ण महिमा को देखेगा। स्वर्ग में संदेशवाहक, पृथ्वी पर मनुष्य, और पृथ्वी पर समस्त सृष्टि सृजनकर्ता की महिमा को देखेगी। यही वह कार्य है जो वह करता है। स्वर्ग में और पृथ्वी पर उसकी सृष्टि, सभी उसकी महिमा को देखेंगे। और वह शैतान को सर्वथा पराजित करने के बाद विजयोल्लास के साथ वापस लौटेगा, और मानवजाति को अपनी प्रशंसा करने देगा। इस प्रकार वह इन दोनों पहलुओं को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा। अंत में समस्त मानवजाति उसके द्वारा जीत ली जाएगी, और वह ऐसे किसी को भी मिटा देगा जो उसका विरोध करेगा या विद्रोह करेगा, अर्थात्, उन सभी को मिटा देगा जो शैतान से संबंधित हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

स्तुति करो परमेश्वर की वह विजेता बनकर लौटा है

अपने छह हज़ार वर्षों के कार्य के ज़रिये, परमेश्वर अपने कई कर्मों को दिखा चुका है कर्म शैतान को पराजित करने और पूरी मानवता को बचाने के। परमेश्वर स्वर्ग में, धरती पर, समुद्र में सब कुछ को, अपने कामों और असीमित सामर्थ्य को देखने का अवसर देता है सभी प्राणियों को, सभी प्राणियों को। शैतान की हार से, मनुष्य देखता है परमेश्वर के कर्मों को। शैतान की हार से, मनुष्य देखता है परमेश्वर के कर्मों को। इसीलिए वे उसकी करते हैं स्तुति और उसकी बुद्धि का वे करते हैं महिमामंडन। धरती पर सब कुछ, स्वर्ग में सब कुछ, समुद्र की गहराई में सब कुछ गाए महिमा उसकी, महिमा उसकी! सबको स्तुति करने दो, करो स्तुति परमेश्वर के सर्वसामर्थ्य की। सभी चीजें करें स्तुति उसके सभी कर्मों की, जयघोष करें उसके पवित्र नाम की, जयघोष करें परमेश्वर के पवित्र नाम की!

ऐसा जयघोष शैतान की हार का साक्ष्य है, साक्ष्य है कि परमेश्वर ने अपने शत्रु को जीत लिया है। ऐसे जयघोष साक्ष्य देते हैं कि उसने हर एक को है बचाया, अपनी बनाई मानवता को बचाया। सभी सृष्टि करती है स्तुति, उसने अपने शत्रु को हरा दिया। वह विजयी होकर लौटता है, वह है महान महाराज जो जीतता है!

शैतान की हार से, मनुष्य देखता है परमेश्वर के कर्मों को। शैतान की हार से, मनुष्य देखता है परमेश्वर के कर्मों को। इसीलिए वे उसकी करते हैं स्तुति और उसकी बुद्धि का वे करते हैं महिमामंडन। धरती पर सब कुछ, स्वर्ग में सब कुछ, समुद्र की गहराई में सब कुछ गाए महिमा उसकी, महिमा उसकी!

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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