परमेश्वर के दैनिक वचन | "राज्य का युग वचन का युग है" | अंश 28

राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरूआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने, और संपूर्ण युग में काम करने के लिये अपने वचन का उपयोग करता है। वचन के युग में यही वह सिद्धांत है, जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। वह देहधारी हुआ ताकि विभिन्न दृष्टिकोणों से बातचीत कर सके, मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को देख सके, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, और उसकी बुद्धि और आश्चर्य को जान सके। उसने यह कार्य इसलिए किये ताकि वह मनुष्यों को जीतने, उन्हें पूर्ण बनाने और ख़त्म करने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल कर सके। वचन के युग में वचन को उपयोग करने का यही वास्तविक अर्थ है। वचन के द्वारा परमेश्वर के कार्यों को, परमेश्वर के स्वभाव को, मनुष्य के मूल तत्व और इस राज्य में प्रवेश करने के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए, यह जाना जा सकता है। वचन के युग में परमेश्वर जिन सभी कार्यों को करना चाहता है, वे वचन के द्वारा संपन्न होते हैं। वचन के द्वारा ही मनुष्य की असलियत का पता चलता है, उसे नष्ट किया जाता है, और परखा जाता है। मनुष्य ने वचन देखा है, सुना है, और वचन के अस्तित्व को जाना है। जिसके परिणाम स्वरूप वह परमेश्वर के अस्तित्व पर विश्वास करता है, मनुष्य परमेश्वर के सर्वशक्तिमान होने और उसकी बुद्धि पर, साथ ही साथ मनुष्यों के लिये परमेश्वर के हृदय के प्रेम और मनुष्यों का उद्धार करने की उसकी अभिलाषा पर विश्वास करता है। यद्यपि ‘वचन’ शब्द सरल और साधारण है, देहधारी परमेश्वर के मुख से निकला वचन संपूर्ण ब्रह्माण्ड को कंपाता है; और उसका वचन मनुष्य के हृदय को रूपांतरित करता है, मनुष्य के सभी विचारों और पुराने स्वभाव, और समस्त संसार के पुराने स्वरूप में परिवर्तन लाता है। युगों-युगों से केवल आज के दिन का परमेश्वर ही इस प्रकार से कार्य करता है, और केवल वही इस प्रकार से बोलता और मनुष्य का उद्धार करता है। इसके बाद मनुष्य वचन के मार्गदर्शन में, उसकी चरवाही में, और उससे प्राप्त आपूर्ति में जीवन जीता है। वह वचन के संसार में जीता है, परमेश्वर के वचन के कोप और आशीषों में जीता है, और उससे भी अधिक वह परमेश्वर के वचन के न्याय और ताड़ना के अधीन जीता है। ये वचन और यह कार्य सब कुछ मनुष्य के उद्धार, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने, और पुरानी सृष्टि के संसार के मूल रूप रंग को बदलने के लिये है। परमेश्वर ने संसार की सृष्टि वचन से की, समस्त ब्रह्माण्ड में मनुष्य की अगुवाई वचन के द्वारा करता है, उन्हें वचन के द्वारा जीतता और उद्धार करता है। अंत में, वह इसी वचन के द्वारा समस्त प्राचीन जगत का अंत कर देगा। केवल तब उसके प्रबंधन की योजना पूरी होगी। राज्य के युग के शुरू से अंत तक, परमेश्वर अपना काम करने और अपने कामों का परिणाम प्राप्त करने के लिये वचन का उपयोग करता है। वह अद्भुत काम या चमत्कार नहीं करता, वह अपने कार्य को केवल वचन के द्वारा संपन्न करता है। वचन के कारण मनुष्य पोषण और आपूर्ति पाता है। वचन के कारण मनुष्य ज्ञान और वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है। वचन के युग में मनुष्य ने वास्तव में अति विशेष आशीषें पाई हैं। मनुष्य को शरीर में कोई कष्ट नहीं होता और वह परमेश्वर के वचन की भरपूर आपूर्ति का आनंद उठाता है; उन्हें प्रयास करने या यात्रा करने की आवश्यकता नहीं, और बड़ी आसानी से वे परमेश्वर के मुख को निहारते हैं, उसे व्यक्तिगत रूप में बातें करते हुए सुनते हैं, उसके द्वारा आपूर्ति पाते हैं; और उसे व्यक्तिगत रूप में उसका काम करते हुए देखते हैं। बीते दिनों में मनुष्य को इन सब बातों का आनंद प्राप्त नहीं था और वे इन आशीषों को कभी प्राप्त नहीं कर सकते थे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

In the Age of Kingdom, the Word Accomplishes Everything

I

God become flesh speaks from different perspectives, enabling man to truly see God Himself, who is the Word appearing in the flesh, and to see the wisdom and wonder of God. He does this to better achieve the goals of conquering, perfecting, eliminating man. This is the true meaning of using the word to perform all the work in the Age of Word. In the Age of Kingdom, God uses the word to bring in a new age, change how He works, and do the work for the entire age (and do the work for the entire age). This is God’s principle in the Age of Word.

II

Through the word, man knows God’s work, His disposition, knows what they should enter, and also their essence. God’s work in the Age of Word’s done through the word. Man’s revealed, eliminated, and tried through the word. Seeing and hearing the word, man knows it exists, thus believes God exists, He’s almighty and wise. Man knows that God has a heart of love for them, and also knows that God desires to save them. In the Age of Kingdom, God uses the word to bring in a new age, change how He works, and do the work for the entire age (and do the work for the entire age). This is God’s principle in the Age of Word. “Word” is a simple term, but the word God in flesh speaks can truly shake the entire universe. It transforms man’s heart, old nature and notions, and also changes how the old world appears. Only now does God work, speak, and save man this way. And the word guides them, shepherds and provides for them. They live in its world, with its curses and blessings. Many of them live in its judgment and chastisement.

III

His words and His work are for man’s salvation. They are used to achieve the will of God. They also change the original appearance of the world of the old creation of God. With the word, God created the world, He leads and conquers, saves men throughout the universe. Finally, He’ll use it to end the old world. That’s when His management plan is complete, when His plan is wholly complete. In the Age of Kingdom, God uses the word to bring in a new age, change how He works. In the Age of Kingdom, God uses the word to bring in a new age, change how He works, and do the work for the entire age. This is God’s principle (in the Age of Kingdom), this is God’s principle (oh, this is God’s principle), this is God’s principle in the Age of Word, in the Age of Word.

from Follow the Lamb and Sing New Songs

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