परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 173

कई प्रकार के लोगों और अनेक विभिन्न परिस्थितियों के माध्यम से पवित्र आत्मा के कार्य को सम्पन्न एवं पूरा किया जाता है। हालाँकि देहधारी परमेश्वर का कार्य एक समूचे युग के कार्य का प्रतिनिधित्व कर सकता है, और एक समूचे युग में लोगों के प्रवेश का प्रतिनिधित्व कर सकता है, फिर भी मनुष्यों के विस्तृत प्रवेश के कार्य को अभी भी पवित्र आत्मा के द्वारा उपयोग किए गए मनुष्यों के द्वारा किए जाने की आवश्यकता है और इसे देहधारी परमेश्वर के द्वारा किए जाने की आवश्यकता नहीं है। अतः, परमेश्वर का कार्य, या परमेश्वर के स्वयं की सेवकाई, परमेश्वर के देहधारी शरीर का कार्य है और इसे उसके स्थान पर मनुष्य के द्वारा नहीं किया जा सकता है। पवित्र आत्मा के कार्य को विभिन्न प्रकार के मनुष्यों के द्वारा पूरा किया गया है और इसे केवल एक ही व्यक्ति विशेष के द्वारा पूर्ण नहीं किया जा सकता है या एक ही व्यक्ति विशेष के द्वारा पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया जा सकता है। ऐसे लोग जो कलीसियाओं की अगुवाई करते हैं वे भी पूरी तरह से पवित्र आत्मा के कार्य का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं; वे सिर्फ अगुवाई का कुछ कार्य ही कर सकते हैं। इस रीति से, पवित्र आत्मा के कार्य को तीन भागों में बांटा जा सकता हैः परमेश्वर का स्वयं का कार्य, उपयोग में लाए गए मनुष्यों का कार्य, और उन सभी लोगों पर किया गया कार्य जो पवित्र आत्मा की मुख्य धारा में हैं। इन तीनों में, परमेश्वर का स्वयं का कार्य सम्पूर्ण युग की अगुवाई करने के लिए है; जिन्हें उपयोग किया जाता है उन मनुष्यों का काम परमेश्वर के स्वयं के कार्य के पश्चात् भेजे जाने या महान आदेशों को प्राप्त करने के द्वारा सभी अनुयायियों की अगुवाई करने के लिए है, और ये मनुष्य ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर के कार्य के साथ सहयोग करते हैं; वह कार्य जिसे पवित्र आत्मा के द्वारा उन लोगों पर किया जाता है जो इस मुख्य धारा में हैं वह उसके स्वयं के कार्य को बनाए रखने के लिए है, अर्थात्, सम्पूर्ण प्रबंधन को बनाए रखने के लिए है और अपनी गवाही को बनाए रखने के लिए है, जबकि ठीक उसी समय उन लोगों को सिद्ध किया जाता है जिन्हें सिद्ध किया जा सकता है। ये तीनों भाग पवित्र आत्मा के सम्पूर्ण कार्य हैं, किन्तु स्वयं परमेश्वर के कार्य के बिना, सम्पूर्ण प्रबंधकीय कार्य रूक जाएगा। स्वयं परमेश्वर के कार्य में सम्पूर्ण मानवजाति का कार्य सम्मिलित है, और यह सम्पूर्ण युग के कार्य का भी प्रतिनिधित्व करता है। कहने का तात्पर्य है, परमेश्वर का स्वयं का कार्य पवित्र आत्मा के सभी कार्य की गति एवं प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि प्रेरितों का कार्य परमेश्वर के स्वयं के कार्य का अनुसरण करता है और युग की अगुवाई नहीं करता है, न ही यह सम्पूर्ण युग में पवित्र आत्मा के कार्य करने की प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। वे केवल वही कार्य करते हैं जिसे मनुष्य को अवश्य करना चाहिए, जो प्रबंधकीय कार्य को बिलकुल भी शामिल नहीं करता है। परमेश्वर का स्वयं का कार्य प्रबंधकीय कार्य के भीतर एक परियोजना है। मनुष्य का कार्य केवल उन मनुष्यों का कर्तव्य है जिन्हें उपयोग किया जाता है और इसका प्रबंधकीय कार्य से कोई सम्बन्ध नहीं है। कार्य के विभिन्न पहचान एवं विभिन्न प्रतिनिधित्व के कारण, तथा इस तथ्य के बावजूद कि वे दोनों ही पवित्र आत्मा के कार्य हैं, परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के मध्य स्पष्ट एवं ठोस अन्तर हैं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न पहचानों के साथ पवित्र आत्मा के द्वारा कार्य के विषयों पर किए गए कार्य का विस्तार भिन्न होता है। ये पवित्र आत्मा के कार्य के सिद्धान्त एवं दायरे हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

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