परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 254

जीवन का मार्ग कोई साधारण चीज़ नहीं है जो चाहे कोई भी प्राप्त कर ले, न ही इसे सभी के द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह इसलिए कि जीवन केवल परमेश्वर से ही आता है, कहने का अर्थ है कि केवल स्वयं परमेश्वर ही जीवन के तत्व का अधिकारी है, स्वयं परमेश्वर के बिना जीवन का मार्ग नहीं है, और इसलिए केवल परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जीवन के जल का सदा बहने वाला सोता है। जब से उसने संसार को रचा है, परमेश्वर ने बहुत सा कार्य जीवन को महत्वपूर्ण बनाने के लिये किया है, बहुत सारा कार्य मनुष्य को जीवन प्रदान करने के लिए किया है और बहुत अधिक मूल्य चुकाया है ताकि मनुष्य जीवन को प्राप्त करे, क्योंकि परमेश्वर स्वयं ही अनन्त जीवन है, और वह स्वयं ही वह मार्ग है जिससे मनुष्य नया जन्म लेता है। परमेश्वर मनुष्य के हृदय से कभी भी दूर नहीं रहा है और हर समय उनके मध्य में रहता है। वह मनुष्यों के जीवन यापन की असली ताकत है, मनुष्य के अस्तित्व का आधार है, जन्म के बाद मनुष्य के अस्तित्व के लिए उर्वर संचय है। वह मनुष्य को नया जन्म लेने देता है, और प्रत्येक भूमिका में दृढ़तापूर्वक जीने के लिये सक्षम बनाता है। उसकी सामर्थ्य के लिए और उसकी सदा जीवित रहने वाली जीवन की शक्ति के लिए धन्यवाद, मनुष्य पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहता है, जिसके द्वारा परमेश्वर के जीवन की सामर्थ्य मनुष्य के अस्तित्व के लिए मुख्य आधार बनती है और जिसके लिए परमेश्वर ने कीमत चुकाई है जिसे कोई भी साधारण मनुष्य कभी भी नहीं चुका सकता। परमेश्वर की जीवन शक्ति किसी भी शक्ति पर प्रभुत्व कर सकती है; इसके अलावा, वह किसी भी शक्ति से अधिक है। उसका जीवन अनन्त काल का है, उसकी सामर्थ्य असाधारण है, और उसके जीवन की शक्ति आसानी से किसी भी प्राणी या शत्रु की शक्ति से पराजित नहीं हो सकती। परमेश्वर की जीवन-शक्ति का अस्तित्व है, और अपनी शानदार चमक से चमकती है, चाहे वह कोई भी समय या स्थान क्यों न हो। परमेश्वर का जीवन सम्पूर्ण स्वर्ग और पृथ्वी की उथल-पुथल के मध्य हमेशा के लिए अपरिवर्तित रहता है। हर चीज़ का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा, परन्तु परमेश्वर का जीवन फिर भी अस्तित्व में रहेगा। क्योंकि परमेश्वर ही सभी चीजों के अस्तित्व का स्रोत है, और उनके अस्तित्व का मूल है। मनुष्य का जीवन परमेश्वर से निकलता है, स्वर्ग का अस्तित्व परमेश्वर के कारण है, और पृथ्वी का अस्तित्व भी परमेश्वर की जीवन शक्ति से ही उद्भूत होता है। कोई वस्तु कितनी भी महत्वपूर्ण हो, परमेश्वर के प्रभुत्व से बढ़कर श्रेष्ठ नहीं हो सकती, और कोई भी वस्तु शक्ति के साथ परमेश्वर के अधिकार की सीमा को तोड़ नहीं सकती है। इस प्रकार से, चाहे वे कोई भी क्यों न हों, सभी को परमेश्वर के अधिकार के अधीन ही समर्पित होना होगा, प्रत्येक को परमेश्वर की आज्ञा में रहना होगा, और कोई भी उसके नियंत्रण से बच कर नहीं जा सकता है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

केवल परमेश्वर के पास है जीवन का मार्ग

सबके पास नहीं हो सकता मार्ग जीवन का, आसान नहीं इसे पाना। क्योंकि जीवन आता है परमेश्वर से, है इसका सार उसके पास। उसके बिना न होगा मार्ग, जीवन का। वही स्रोत और सोता, जीवन जहाँ से बहता। दुनिया का आरंभ जब से हुआ (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का), इंसान को जीवन देने का, बहुत कार्य किया है परमेश्वर ने (परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का)। वो कीमत दी है परमेश्वर ने, जो चुकाई न इंसान ने (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का)। है परमेश्वर स्वयं अनंत जीवन (परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का)। परमेश्वर स्वयं है पुनर्जीवन का मार्ग।

परमेश्वर बसता दिल में हर इंसान के, रहता बीच उनके, जो जीवन-शक्ति, वो बुनियाद उनके श्वास की; स्रोत समृद्धि का जो देता पोषण जीवन को। वही कारण है इंसान के पुनर्जन्म का, वही बनाता काबिल उसे हर किरदार में।

परमेश्वर के सामर्थ्य से, उसकी अमिट जीवन-शक्ति से, युगयुगांतर से चला आ रहा है इंसान। इंसान के जीवन का परमेश्वर ही आधार है, उसकी जीवन-शक्ति हर ताकत को हराती है।

अनंत है जीवन उसका, असाधारण बल उसका। कोई जीव, शत्रु उसकी जीवन-शक्ति को हरा नहीं सकता। समय और स्थान से परे, उसकी शक्ति मौजूद है और प्रकाशित है। स्वर्ग और धरती बदल सकते हैं, पर जीवन परमेश्वर का यूँ ही बना रहेगा। भले मिट जाये हर चीज़, अनंत जीवन उसका बना रहेगा। दुनिया का आरंभ जब से हुआ (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का), इंसान को जीवन देने का, बहुत कार्य किया है परमेश्वर ने (परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का)। वो कीमत दी है परमेश्वर ने, जो चुकाई न इंसान ने (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का)। है परमेश्वर स्वयं अनंत जीवन (परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का)। परमेश्वर स्वयं है पुनर्जीवन का मार्ग।

क्योंकि परमेश्वर ही स्रोत है हर चीज़ के अस्तित्व का। क्योंकि परमेश्वर ही मूल है, उनके अस्तित्व का। क्योंकि परमेश्वर ही स्रोत है हर चीज़ के अस्तित्व का। क्योंकि परमेश्वर ही मूल है, उनके अस्तित्व का। (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का, परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का।) दुनिया का आरंभ जब से हुआ (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का), इंसान को जीवन देने का, बहुत कार्य किया है परमेश्वर ने (परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का)। वो कीमत दी है परमेश्वर ने, जो चुकाई न इंसान ने (है केवल परमेश्वर के पास मार्ग जीवन का)। है परमेश्वर स्वयं अनंत जीवन (परमेश्वर के पास मार्ग है जीवन का)। परमेश्वर स्वयं है पुनर्जीवन का मार्ग।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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