परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 251

परमेश्वर ने इन अशुद्ध और भ्रष्ट लोगों में कार्य करने और इस समूह के लोगों को पूर्ण बनाने के लिए इस स्तर तक स्वयं को दीन किया है। परमेश्वर लोगों के मध्य जीने और खाने-पीने, वह लोगों की चरवाही करने, और लोगों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए ही देह में नहीं आया। अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह उद्धार और जीतने का विशाल कार्य इन असहनीय रूप से भ्रष्ट लोगों पर करता है। वह इन सबसे अधिक भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए बड़े लाल अजगर के केन्द्र में आया, जिससे सभी लोग परिवर्तित हो सकें और नए बनाए जा सकें। वह अत्यधिक कष्ट, जो परमेश्वर सहन करता है, यह मात्र वह कष्ट नहीं है जो देहधारी परमेश्वर सहन करता है, परन्तु मुख्यतः यह वह अत्यधिक निरादर है जो परमेश्वर का आत्मा सहन करता है—वह स्वयं को इतना अधिक दीन करता है और छिपाए रखता है कि वह एक साधारण व्यक्ति बन जाता है। परमेश्वर ने देहधारण किया और देह का रूप ले लिया था ताकि लोग देखें कि उसका जीवन एक साधारण मानव-जीवन है, और उसकी साधारण मानवीय आवश्यकताएँ भी हैं। यह इस बात को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि परमेश्वर ने स्वयं को हद से ज़्यादा दीन किया है। परमेश्वर का आत्मा देह में साकार होता है। उसका आत्मा सर्वोच्च और महान है, परन्तु फिर भी वह अपने आत्मा का कार्य करने के लिए एक सामान्य मानव, तुच्छ मनुष्य का रूप ले लेता है। तुम में से प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता, अंतर्दृष्टि, समझ, मानवता और जीवन दर्शाते हैं कि तुम सब परमेश्वर के इस प्रकार के कार्य को स्वीकार करने के लिए वास्तव में अयोग्य हो। तुम सब परमेश्वर द्वारा तुम्हारे लिए इस कष्ट को सहन किए जाने के लिए वास्तव में अयोग्य हो। परमेश्वर अत्यधिक महान है। वह इतना सर्वोच्च है और लोग बहुत नीच हैं, फिर भी वह उन पर कार्य करता है। उसने न केवल इसलिए देहधारण किया कि लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करे, लोगों से बात करे, अपितु वह लोगों के साथ रहता भी है। परमेश्वर इतना दीन और इतना प्रेम करने वाला है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं

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