परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 12" | अंश 61

जब पूर्व से बिजली चमकती है—जो कि निश्चित रूप से वही क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जिस क्षण बिजली प्रकट होती है, तो संपूर्ण नभमण्डल जगमगा उठता है, और सभी तारे रूपान्तरित होना शुरू कर देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी मानवजाति को उचित प्रकार से शुद्ध करने और काट-छाँट करने के अधीन कर दिया गया हो। पूर्व के प्रकाश की इस किरण के नीचे, समस्त मानवजाति को उसके मूल स्वरूप में प्रकट किया जाता है चुँधियाई आँखें, भ्रम में हक्के बक्के; अभी भी वे अपनी कुरूप मुखाकृति को छिपाने में कम समर्थ हैं। फिर, वे ऐसे पशुओं के समान हैं जो पहाड़ों की गुफाओं में शरण लेने के लिए मेरे प्रकाश से दूर भाग रहे हैं; फिर भी, उन में से एक को भी मेरे प्रकाश के भीतर से मिटाया नहीं जा सकता है। सभी मनुष्य दहशत और भय के शिकंजे में पड़े हैं और सभी प्रतीक्षा कर रहें हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन का आनन्द मनाते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोस रहे हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना असंभव है; आत्म-दण्ड के आँसू नदियों का निर्माण करते हैं और व्यापक जल प्रवाह में बह जाते हैं और पलक झपकते ही बिना किसी निशान के चले जाते हैं। एक बार फिर, मेरा दिन मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जाग्रत कर रहा है और मानवता को एक स्थान दे रहा है जहाँ से एक नई शुरूआत की जाए। मेरा हृदय धड़कता है और, मेरे हृदय की धड़कन की लय का अनुसरण करते हुए पहाड़ आनन्द के लिए उछलते हैं और समुद्र खुशी से नृत्य करता है तथा लहरें समय-समय पर चट्टानी भित्तियों से टकराती हैं। जो मेरे हृदय में है उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं चाहता हूँ कि सभी अशुद्ध चीज़ें मेरे घूरने से जलकर भस्म हो जाएँ। मैं चाहता हूँ कि अवज्ञा के सभी पुत्र मेरी नज़रों के सामने से ओझल हो जाएँ, और आगे से अस्तित्व में न मँडराते रहें। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरूआत की है, बल्कि मैंने विश्व में एक नए कार्य की शुरूआत की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य हो जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए समाप्त हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले से ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा करते हुए, बड़े लाल अजगर ने मेरी योजना में गड़बड़ करने के लिए हर कल्पनीय साधन को समाप्त कर लिया है, लेकिन क्या मैं उसके छलपूर्ण षडयन्त्रों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या उसकी धमकियों के द्वारा मुझे भयभीत किया जा सकता है कि मैं अपना आत्मविश्वास खो दूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी भी ऐसा एक भी प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैं अपने हाथ की हथेली पर नहीं रखता हूँ; यह युक्ति जो कि मेरे लिए एक विषमता के रूप में कार्य करती है, बड़े लाल अजगर के बारे में कितनी अधिक सत्य है? क्या यह भी मेरे हाथों से छेड़छाड़ की जाने वाली एक वस्तु नहीं है?

मानव जगत में मेरे देहधारण के समय, मानवजाति मेरे मार्गदर्शन करने वाले हाथ की सहायता से अनिच्छापूर्वक इस दिन तक पहुँची, मुझे जानने के लिए अनिच्छापूर्वक आयी। लेकिन, जहाँ तक इसकी बात है कि जो मार्ग सामने है उस पर कैसे चला जाए, तो किसी को कोई आभास नहीं है, कोई नहीं जानता है, और किसी के पास कोई सुराग तो और भी कम है कि वह मार्ग उसे किस दिशा में ले जाएगा? जिस पर सर्वशक्तिमान निग़रानी रखेगा केवल वही मार्ग पर अंत तक चल पाने में समर्थ होगा; केवल पूर्व की चमकती हुई बिजली के मार्गदर्शन के द्वारा ही कोई मेरे राज्य की ओर ले जाने वाली दहलीज़ को पार करने में समर्थ होगा। मनुष्यों के बीच, ऐसा एक भी नहीं रहा है जिसने मेरे चेहरे को देखा है, ऐसा एक जिसने पूर्व की चमकती हुई बिजली को देखा है; कितना कम कोई एक है जिसने मेरे सिंहासन से निकलती हुई आवाज़ को सुना है? वास्तव में, प्राचीन काल से, एक भी मनुष्य सीधे मेरे व्यक्तित्व के सम्पर्क में नहीं आया है; केवल आज, जब मैं संसार में आ चुका हूँ, मनुष्यों के पास मुझे देखने का अवसर है। किन्तु यहाँ तक कि अब भी, मनुष्य अभी भी मुझे नहीं जानते हैं, बस ऐसे ही वे केवल मेरे चेहरे को देखते हैं और केवल मेरी आवाज़ को सुनते हैं, किन्तु बिना यह समझे हुए कि मेरे कहने का क्या अर्थ है। सभी मनुष्य इसी तरह के हैं। मेरे लोगों में से एक होने के नाते, जब तुम लोग मेरा चेहरा देखते हो, तो क्या तुम लोग बहुत ज़्यादा गर्व महसूस नहीं करते हो? और क्या तुम लोग भयानक शर्मिन्दगी महसूस नहीं करते हो क्योंकि तुम लोग मुझे नहीं जानते हो? मैं मनुष्यों के बीच चलता-फिरता हूँ, और मैं मनुष्यों के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैं देह बन गया हूँ और मैं मानव जगत में आ गया हूँ। मेरा उद्देश्य मानवजाति को मात्र मेरी देह की देखभाल करने में सक्षम बनाना नहीं है; अधिक महत्वपूर्ण रूप से, यह मानवजाति को मुझे जानने में सक्षम बनाना है। और अधिक क्या, मैं अपनी देहधारी देह के माध्यम से मानवजाति को उसके पापों के बारे में दोषी ठहराऊँगा; मैं अपनी देहधारी देह के माध्मम से उस बड़े लाल अजगर को परास्त करूँगा और उसकी माँद को कुचल दूँगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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