परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 95
सृष्टिकर्ता का अधिकार समय, स्थान या भूगोल द्वारा सीमित नहीं है, और सृष्टिकर्ता का अधिकार गणना से परे है (चुना हुआ अंश) कुछ लोग अनुमान लगाना...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
यदि लोग अनुग्रह के युग में बने रहेंगे, तो वे कभी भी अपने भ्रष्ट स्वभाव से मुक्त नहीं होंगे, और परमेश्वर के अंर्तनिहित स्वभाव को जानने की बात को तो जाने ही दें। यदि लोग सदैव अनुग्रह की प्रचुरता में रहते हैं, परंतु वे जीवन के उस मार्ग के बिना हैं, जो उन्हें परमेश्वर को जानने और उसे संतुष्ट करने देता है, तब वे उसे वास्तव में कभी भी प्राप्त नहीं करेंगे, यद्यपि वे उस पर विश्वास करते हैं। यह विश्वास का कैसा दयनीय स्वरूप है। जब तुम इस पुस्तक को पढ़ना समाप्त कर लोगे, जब तुम राज्य के युग में देहधारी परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक कदम का अनुभव प्राप्त कर लोगे, तब तुम अनुभव करोगे कि अनेक वर्षों की तुम्हारी आशाएँ अंततः साकार हो गयी हैं। तुम अनुभव करोगे कि केवल अब तुमने परमेश्वर को वास्तव में आमने-सामने देखा है, केवल अब ही तुमने परमेश्वर के चेहरे को निहारा है, परमेश्वर व्यक्तिगत कथन को सुना है, परमेश्वर के कार्य की बुद्धि की सराहना की है, और वास्तव में महसूस किया है कि परमेश्वर कितना वास्तविक और सर्वशक्तिमान है। तुम महसूस करोगे कि तुमने ऐसी बहुत सी चीजों को पाया है जिन्हें अतीत में लोगों ने कभी देखा या धारण नहीं किया था। इस समय, तुम संतुष्ट रूप में जान लोगे कि परमेश्वर पर विश्वास करना क्या है, और परमेश्वर के हृदय के अनुसरण में होना क्या है। निस्संदेह, यदि तुम अतीत के विचारों से जुड़े रहते हो और परमेश्वर के दूसरे देहधारण को अस्वीकार या इनकार करते हो, तब तुम खाली-हाथ रहोगे और कुछ नहीं पाओगे, और अंततः परमेश्वर का विरोध करने के दोषी होगे। वे जो सत्य का पालन करते हैं और परमेश्वर के कार्य के प्रति समर्पण करते हैं, वे दूसरे देहधारी परमेश्वर-सर्वशक्तिमान—के नाम के अधीन आएँगे। वे परमेश्वर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन पाने में सक्षम होंगे, वे अधिक उच्चतर सत्य को प्राप्त करेंगे और वास्तविक मानव जीवन ग्रहण करेंगे। वे उस दर्शन को देखेंगे जिसे अतीत के लोगों ने कभी नहीं देखा है: "तब मैं ने उसे, जो मुझ से बोल रहा था, देखने के लिये अपना मुँह फेरा; और पीछे घूमकर मैं ने सोने की सात दीवटें देखीं, और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र सदृश एक पुरुष को देखा, जो पाँवों तक का वस्त्र पहिने, और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए था। उसके सिर और बाल श्वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है" (प्रकाशितवाक्य 1:12-16)। यह दर्शन परमेश्वर के सम्पूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है, और उसके सम्पूर्ण स्वभाव की यह अभिव्यक्ति परमेश्वर के कार्य की अभिव्यक्ति भी है, जब इस समय वह देहधारी हुआ। ताड़ना और न्याय की बौछारों में, मनुष्य का पुत्र वचनों को बोलने के द्वारा अपने अंर्तनिहित स्वभाव को अभिव्यक्त करता है, और उन सबको जो उसकी ताड़ना और न्याय को स्वीकार करते हैं, मनुष्य के पुत्र के वास्तविक चेहरे को निहारने की अनुमति देता है, ऐसा चेहरा जो यूहन्ना द्वारा देखे गए मनुष्य के पुत्र के चेहरे का ईमानदार चित्रण है (निस्संदेह, यह सब उनके लिये अदृश्य होगा जो राज्य के युग में परमेश्वर के कार्यों को स्वीकार नहीं करते हैं)। मनुष्य के वचनों का उपयोग करके परमेश्वर के वास्तविक चेहरे को पूर्णरूप से व्यक्त नहीं किया जा सकता है, और इसलिये मनुष्य को अपना वास्तविक चेहरा दिखाने के लिए परमेश्वर अपने अंर्तनिहित स्वभाव की अभिव्यक्ति का उपयोग करता है। अर्थात्, उन सब ने जिन्होंने मनुष्य के पुत्र के अंर्तनिहित स्वभाव का अनुभव किया है, मनुष्य के पुत्र का वास्तविक चेहरा देखा है, क्योंकि परमेश्वर अति महान है और मनुष्यों के वचनों का उपयोग करके उसे व्यक्त नहीं किया जा सकता है। एक बार जब मनुष्य राज्य के युग में परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण का अनुभव कर लेगा, तब वह यूहन्ना के वचनों का वास्तविक अर्थ जान लेगा, जो उसने दीवटों के बीच मनुष्य के पुत्र के बारे में कहे थे: "उसके सिर और बाल श्वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है।" उस समय, तुम बिना किसी संदेह के जान जाओगे कि यह साधारण शरीर जिसने बहुत से वचन कहे हैं ही वास्तव में दूसरा देहधारी परमेश्वर है। और तुम्हें वास्तव में महसूस होगा कि तुम कितने धन्य हो, और तुम स्वयं को सबसे अधिक भाग्यशाली महसूस करोगे। क्या तुम इस आशीष को प्राप्त करने के अनिच्छुक होगे?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, प्रस्तावना
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