परमेश्वर के दैनिक वचन : कार्य के तीन चरण | अंश 17
आज के दिन तक अपना 6,000 वर्षों का कार्य करते हुए, परमेश्वर ने अपने बहुत से क्रिया-कलापों को पहले ही प्रकट कर दिया है, मुख्य रूप से शैतान को...
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बाइबल को पुराना नियम और नया नियम भी कहते हैं। क्या तुम लोग जानते हो कि "नियम" से क्या तात्पर्य है? "पुराने नियम" में "नियम" इस्राएल के लोगों के साथ बांधी गई परमेश्वर की वाचा से आता है, जब उसने मिस्रियों को मार डाला था और इस्राएलियों को फिरौन से बचाया था। बेशक, इस वाचा का प्रमाण दरवाज़ों की चौखट के ऊपर पोता गया मेमने का लहू था, जिसके द्वारा परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बांधी थी, जिसमें कहा गया था कि वे सभी लोग, जिनके दरवाज़ों के ऊपर और अगल-बगल मेमने का लहू लगा हुआ है, इस्राएली हैं, वे परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं, और उन सभी को यहोवा द्वारा बख्श दिया जाएगा (क्योंकि यहोवा तब मिस्र के सभी ज्येष्ठ पुत्रों और ज्येष्ठ भेड़ों और मवेशियों को मारने ही वाला था)। इस वाचा के अर्थ के दो स्तर हैं। मिस्र के लोगों और मवेशियों में से किसी को भी यहोवा द्वारा छोड़ा नहीं जाएगा; वह उनके सभी ज्येष्ठ पुत्रों और ज्येष्ठ भेड़ों और मवेशियों को मार डालेगा। इस प्रकार, भविष्यवाणी की अनेक पुस्तकों में यह भविष्यवाणी की गई थी कि यहोवा की वाचा के परिणामस्वरूप मिस्रियों को बहुत अधिक ताड़ना मिलेगी। यह वाचा के अर्थ का प्रथम स्तर है। यहोवा ने मिस्र के ज्येष्ठ पुत्रों और उसके सभी ज्येष्ठ मवेशियों को मार डाला, और उसने सभी इस्राएलियों को छोड़ दिया, जिसका अर्थ था कि वे सभी, जो इस्राएल की भूमि के थे, उन्हें यहोवा द्वारा संजोया गया था, और उन सभी को छोड़ दिया गया; वह उनमें दीर्घकालीन कार्य करना चाहता था, और उसने मेमने के लहू का उपयोग करके उनके साथ वाचा स्थापित की। तब से यहोवा ने इस्राएलियों को नहीं मारा, और कहा कि वे सदा के लिए उसके चुने हुए लोग होंगे। इस्राएल के बारह कबीलों के बीच वह समूचे व्यवस्था के युग के लिए अपने कार्य में लग गया, उसने इस्राएलियों पर अपनी सारी व्यवस्थाएँ प्रकट कीं, और उनके बीच में से नबी और न्यायी चुने, और वे उसके कार्य के केंद्र में रहे। यहोवा ने उनके साथ एक वाचा बांधी थी : जब तक युग परिवर्तित नहीं होता, वह सिर्फ चुने हुए लोगों के बीच में ही कार्य करेगा। यहोवा की वाचा अपरिवर्तनीय थी, क्योंकि वह लहू से बनी थी, और वह उसके चुने हुए लोगों के साथ स्थापित की गई थी। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि उसने समूचे युग के दौरान अपना कार्य करने के लिए एक उचित क्षेत्र और लक्ष्य चुना था, और इसलिए लोगों ने इस वाचा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण समझा था। यह वाचा के अर्थ का दूसरा स्तर है। उत्पत्ति को छोड़कर, जो वाचा की स्थापना के पहले की थी, पुराने नियम में अन्य सभी पुस्तकें वाचा की स्थापना के बाद इस्राएलियों के बीच किए गए परमेश्वर के कार्य को दर्ज करती हैं। बेशक, उनमें यदा-कदा अन्यजातियों का लेखा-जोखा भी है, किंतु कुल मिलाकर, पुराना नियम इस्राएल में किए गए परमेश्वर के कार्य का दस्तावेज़ है। इस्राएलियों के साथ यहोवा की वाचा के कारण व्यवस्था के युग के दौरान लिखी गई पुस्तकें "पुराना नियम" कहलाती हैं। उनका नाम इस्राएलियों के साथ बांधी गई यहोवा की वाचा के आधार पर रखा गया है।
नए नियम का नाम यीशु द्वारा क्रूस पर बहाए गए लहू और उन सभी के साथ उसकी वाचा के आधार पर रखा गया है, जो उस पर विश्वास करते हैं। यीशु की वाचा यह थी : लोगों को उसके द्वारा बहाए गए लहू के कारण अपने पाप क्षमा करवाने के लिए बस उस पर विश्वास करना था, और इस प्रकार वे बचा लिए जाते, और उसके ज़रिये नया जन्म प्राप्त करते, और अब पापी न रहते; उसका अनुग्रह प्राप्त करने के लिए लोगों को सिर्फ उस पर विश्वास करना था, और मरने के बाद उन्हें नरक में कष्ट न भोगना पड़ता। अनुग्रह के युग के दौरान लिखी गई सभी पुस्तकें इस वाचा के बाद आईं, और वे सभी उसमें शामिल कार्य और कथनों की दस्तावेज हैं। वे प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने या उस वाचा से प्राप्त उद्धार से आगे नहीं जातीं; वे सभी ऐसी पुस्तकें हैं, जो प्रभु के उन भाइयों द्वारा लिखी गई थीं, जिनके पास अनुभव थे। इस प्रकार, इन पुस्तकों का नाम भी एक वाचा के आधार पर रखा गया है : उन्हें नया नियम कहा जाता है। इन दोनों नियमों में सिर्फ व्यवस्था का युग और अनुग्रह का युग शामिल हैं, और इनका अंतिम युग के साथ कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार, अंतिम दिनों के आज के लोगों के लिए बाइबल का कोई बड़ा उपयोग नहीं है। अधिक से अधिक, यह एक अनंतिम संदर्भ के रूप में कार्य करता है, किंतु मूलत: इसका उपयोग-मूल्य बहुत कम है। फिर भी धार्मिक लोग इसे अभी भी बहुत अधिक संजोकर रखते हैं। वे बाइबल को नहीं जानते, वे सिर्फ बाइबल की व्याख्या करना जानते हैं, और वे बुनियादी रूप से उसके उद्भव से अनभिज्ञ हैं। बाइबल के प्रति उनकी मनोवृत्ति ऐसी है : बाइबल की हर चीज़ सही है, उसमें कोई अशुद्धि या त्रुटि नहीं है। चूँकि उन्होंने पहले ही निर्धारित कर लिया है कि बाइबल सही और त्रुटिहीन है, इसलिए वे बड़ी रुचि के साथ उसका अध्ययन और जाँच करते हैं। बाइबल में आज के कार्य के चरण के बारे में पहले से नहीं बताया गया। सबसे अंधकारमय स्थान में विजय के कार्य का कभी कोई जिक्र नहीं किया गया, क्योंकि यह नवीनतम कार्य है। चूँकि कार्य का युग अलग है, यहाँ तक कि स्वयं यीशु भी अनभिज्ञ था कि कार्य का यह चरण अंतिम दिनों के दौरान किया जाएगा—इसलिए अंतिम दिनों के लोग बाइबल की जाँच करके उसमें कार्य के इस चरण का पता कैसे लगा सकते हैं?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, बाइबल के विषय में (2)
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