परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 184

सभी चीज़ों के विकास के लिए परमेश्वर द्वारा निर्धारित नियमों के दृष्टिकोण से देखने पर, क्या संपूर्ण मानवजाति, अपनी तमाम भिन्नताओं में, परमेश्वर द्वारा प्रदत्त जीविका और उसके भरण-पोषण के अंतर्गत नहीं जी रही है? यदि वे नियम नष्ट हो गए होते या परमेश्वर मानवजाति के लिए इस प्रकार के नियम निर्धारित नहीं करता, तो उसके भविष्य की संभावनाएँ क्या होतीं? मनुष्य यदि जीवित रहने के लिए अपने मूल वातावरण को खो देते, तो क्या उनके पास भोजन का कोई स्रोत होता? संभव है कि भोजन के स्रोत एक समस्या बन जाते। यदि लोगों ने अपने भोजन के स्रोत को खो दिया होता, अर्थात्, उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिलता, तो वे कितने दिनों तक जीवित रह पाते? संभवतः वे एक माह भी नहीं जी पाते और उनका जीवित बचे रहना एक समस्या बन जाता। अतः हर एक चीज़ जिसे परमेश्वर लोगों के जीवित रहने के लिए, उनके लगातार अस्तित्व में बने रहने के लिए और बहुगुणित होने और उनके जीवन निर्वाह के लिए करता है वह अति महत्वपूर्ण है। हर एक चीज़ जिसे परमेश्वर अपने सभी सृजित चीज़ों के मध्य करता है उसका लोगों के जीवित रहने से क़रीबी और अभिन्‍न संबंध है। यदि मानवजाति का जीवित रहना एक समस्या बन जाता, तो क्या परमेश्वर का प्रबंधन जारी रह पाता? क्या परमेश्वर का प्रबंधन तब भी अस्तित्व में बना रहता? परमेश्वर के प्रबंधन का सह-अस्तित्व उस सम्पूर्ण मानवजाति के जीवन के साथ है जिसका वह पालन-पोषण करता है, और जो भी तैयारियाँ परमेश्वर सभी चीज़ों के लिए करता है और जो कुछ वह मनुष्यों के लिए करता है, वह सब परमेश्वर के लिए जरूरी है, और मानवजाति के अस्तित्व में बने रहने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि परमेश्वर द्वारा सभी चीज़ों के लिए निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया जाता, उन्हें तोड़ा या बाधित किया जाता तो कोई भी चीज़ अस्तित्व में नहीं रह पाती, जीवित रहने के लिए मानवजाति का वातावरण समाप्त हो जाता, और न ही उनका दैनिक जीवन आधार, और न ही वे स्वयं अस्तित्व में बने रहते। इस कारण से, मानवजाति के उद्धार हेतु परमेश्वर का प्रबंधन भी अस्तित्व में नहीं रहता।

हर चीज़ जिसकी हमने चर्चा की, हर एक चीज़, और हर एक वस्तु प्रत्येक व्यक्ति के जीवित रहने से घनिष्टता से जुड़ी हुई है। तुम लोग कह सकते हो, "तुम जो बात कह रहे हो वह बहुत ही बड़ी है, हम इसे नहीं देख पाते," और कदाचित् ऐसे लोग हैं जो कहेंगे "जो कुछ तुम कह रहे हो उसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है।" फिर भी, यह न भूलो कि तुम लोग सभी चीज़ों के मात्र एक हिस्से के रूप में जी रहे हो; तुम परमेश्वर के शासन के अंतर्गत सभी सृजित चीज़ों के बीच एक सदस्य हो। परमेश्वर द्वारा सृजित सभी चीज़ों को उसके शासन से अलग नहीं किया जा सकता, और न ही कोई व्यक्ति स्वयं को उसके शासन से अलग कर सकता है। उसके नियम को खोने और उसके संपोषण को खोने का अर्थ होगा कि लोगों का जीवन, लोगों का दैहिक जीवन लुप्त हो जाएगा। यह मानवजाति के जीवित रहने के लिए परमेश्वर द्वारा स्थापित विभिन्न वातावरण का महत्व है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि तुम किस नस्ल के हो या किस भूभाग पर रहते हो, चाहे पश्चिम में हो या पूर्व में—तुम जीवित रहने के लिए उस वातावरण से अपने आपको अलग नहीं कर सकते जिसे परमेश्वर ने मानवजाति के लिए स्थापित किया है, और तुम जीवित रहने के लिए उस वातावरण के संपोषण और प्रयोजनों से अपने आपको अलग नहीं कर सकते जिसे उसने मनुष्यों के लिए स्थापित किया है। चाहे तुम्हारी आजीविका कुछ भी हो, तुम जीने के लिए जिन चीजों पर भी आश्रित हो, और अपने दैहिक जीवन को बनाए रखने के लिए तुम जिन चीजों पर भी निर्भर हो, परंतु तुम स्वयं को परमेश्वर के शासन और प्रबंधन से अलग नहीं कर सकते। कुछ लोग कहते हैं : "मैं तो किसान नहीं हूं, मैं जीने के लिए फसल नहीं उगाता हूँ। मैं अपने भोजन के लिए आसमानों पर आश्रित नहीं हूँ, अतः मैं जीवित रहने के लिए परमेश्वर के द्वारा स्थापित उस वातावरण में नहीं जी रहा हूँ। उस प्रकार के वातावरण ने मुझे कुछ नहीं दिया है।" क्या यह सही है? तुम कहते हो कि तुम अपने जीने के लिए फसल नहीं उगाते, लेकिन क्या तुम अनाज नहीं खाते हो? क्या तुम मांस और अण्डे नहीं खाते हो? क्या तुम सब्‍ज़ियां और फल नहीं खाते हो? हर चीज़ जो तुम खाते हो, वे सभी चीज़ें जिनकी तुम्हें ज़रूरत है, वे जीवित रहने के लिए उस वातावरण से अविभाज्य हैं जिसे परमेश्वर के द्वारा मानवजाति के लिए स्थापित किया गया था। मानवजाति की आवश्यकताओं से जुड़ी सारी चीजों के स्रोत को परमेश्वर द्वारा सृजित सभी चीज़ों से अलग नहीं किया जा सकता। ये सारी चीजें अपनी संपूर्णता में तुम्हारे जीवन के लिए जरूरी वातावरण का निर्माण करती हैं। वह जल जो तुम पीते हो, वे कपड़े जो तुम पहनते हो, और वे सभी चीज़ें जिन्हें तुम इस्तेमाल करते हो—इनमें से ऐसी कौन-सी चीज़ है जो परमेश्वर द्वारा सृजित चीज़ों से प्राप्त नहीं होती? कुछ लोग कहते हैं : "कुछ चीज़ें ऐसी हैं जो इनसे प्राप्त नहीं होतीं। देखो, प्लास्टिक उन वस्तुओं में से एक है। यह एक रासायनिक चीज़ है, यह मानव-निर्मित चीज़ है।" क्या यह सही है? प्लास्टिक बिल्कुल मानव-निर्मित है, यह एक रासायनिक चीज़ है, किन्तु प्लास्टिक के मूल तत्व कहाँ से आए? मूल-तत्वों को परमेश्वर द्वारा सृजित सामग्री से प्राप्त किया गया। वे चीज़ें जिन्हें तुम देखते और जिनका तुम आनन्द उठाते हो, हर एक चीज़ जिसका तुम उपयोग करते हो, उन सब को परमेश्वर द्वारा सृजित चीज़ों से प्राप्त किया जाता है। दूसरे शब्दों में, कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी व्यक्ति की नस्ल क्या है, उसकी जीविका क्या है, या वे किस प्रकार के वातावरण में रहते हैं, वे अपने आपको परमेश्वर द्वारा प्रदत्त चीज़ों से अलग नहीं कर सकते।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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