परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 116

सृष्टिकर्ता का धर्मी स्वभाव सच्चा और स्पष्ट है

जब परमेश्वर ने नीनवे के लोगों के वास्ते अपने मन को बदल लिया, तो क्या यह उसकी करुणा और सहनशीलता एक दिखावा थी? नहीं, बिलकुल भी नहीं! फिर एक ही मुद्दे के दौरान परमेश्वर के स्वभाव के दोनों पहलुओं के बीच का रूपान्तरण तुम्हें क्या देखने देता है? परमेश्वर का स्वभाव पूरी तरह से सम्पूर्ण है; यह बिलकुल भी खण्डित नहीं है। इस पर ध्यान दिए बिना कि वह लोगों के प्रति क्रोध प्रकट कर रहा है या दया एवं सहनशीलता, यह सब उसके धर्मी स्वभाव की अभिव्यक्तियाँ हैं। परमेश्वर का स्वभाव सच्चा एवं सुस्पष्ट है। वह अपने विचारों और रवैयों को चीज़ों के विकास अनुसार बदलता है। नीनवे के निवासियों के प्रति उसके रवैये का रूपान्तरण मानवता को बताता है कि उसके पास अपने स्वयं के विचार और युक्तियां हैं; वह रोबोट या मिट्टी का कोई पुतला नहीं है, परन्तु स्वयं जीवित परमेश्वर है। वह नीनवे के लोगों से क्रोधित हो सकता था, ठीक उसी तरह जैसे वह उनके रवैये के अनुसार उनके अतीत को क्षमा कर सकता था; वह नीनवे के लोगों के ऊपर दुर्भाग्य लाने का निर्णय ले सकता था, और वह उनके पश्चाताप के कारण अपना निर्णय बदल सकता था। लोग यांत्रिक रूप से नियमों को लागू करना अधिक पसंद करते हैं, और वे परमेश्वर को पूर्ण करने और परिभाषित करने के लिए नियमों का उपयोग करना अधिक पसंद करते हैं, ठीक उसी तरह जैसे वे परमेश्वर के स्वभाव को जानने के लिए सूत्रों का उपयोग करना अधिक पसंद करते हैं। इसलिए, मानवीय विचारों के आयाम के अनुसार, परमेश्वर विचार नहीं करते, और न ही उनके पास कोई स्वतन्त्र योजनाएँ हैं। असलियत में, परमेश्वर के विचार चीज़ों और वातावरण में परिवर्तन के अनुसार निरन्तर रूपान्तरित हो रहे हैं; जब तक ये विचार रूपान्तरित हो रहे हैं, परमेश्वर के अस्तित्व के विभिन्न पहलू प्रकट होंगे। रूपान्तरण की इस प्रक्रिया के दौरान, उस घड़ी जब परमेश्वर अपना मन बदलता है, तब वह मानवजाति पर अपने जीवन के अस्तित्व की सच्चाई को प्रकट करता है, और वह यह प्रकट करता है कि उसका धर्मी स्वभाव सच्चा और सुस्पष्ट है। इससे बढ़कर, परमेश्वर मानवजाति के प्रति अपने क्रोध, अपनी दया, अपनी करुणा और अपनी सहनशीलता के अस्तित्व की सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए अपने सच्चे प्रकटीकरणों की उपयोग करता है। उसकी हस्ती को चीज़ों के विकास के अनुसार किसी भी समय पर और किसी भी स्थान में प्रकट किया जाएगा। उनमें एक सिंह का क्रोध और माता की ममता एवं सहनशीलता होती है। किसी मनुष्य को उनके धर्मी स्वभाव पर प्रश्न करने, उसका उल्लंघन करने, उसे बदलने या तोड़ने मरोड़ने की अनुमति नहीं दी गई है। समस्त मुद्दों और सभी चीज़ों के मध्य, परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को, अर्थात्, परमेश्वर का क्रोध एवं उसकी करुणा, किसी भी समय पर और किसी भी स्थान में प्रकट किया जा सकता है। वे प्रकृति के हर एक कोने एवं छिद्र में इन पहलुओं को स्पष्ट रूप से प्रकट करते हैं और हर पल स्पष्ट रूप से उन्हें अंजाम देते हैं। परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को समय या अन्तराल के द्वारा सीमित नहीं किया जाता है, या दूसरे शब्दों में, समय या अन्तराल की सीमाओं के द्वारा तय तरीके से परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को यांत्रिक रूप से प्रकट या प्रकाशित नहीं किया जाता है। उसके बजाए, परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को किसी भी समय और स्थान में स्वतन्त्र रूप से प्रकट और प्रकाशित किया जाता है। जब तुम परमेश्वर को अपना मन बदलते और अपने क्रोध को थामते और नीनवे के लोगों का नाश करने से पीछे हटते हुए देखते हो, तो क्या तुम कह सकते हो कि परमेश्वर केवल दयालु और प्रेमी है? क्या तुम कह सकते हो कि परमेश्वर का क्रोध खोखले वचनों से बना है? जब परमेश्वर प्रचण्ड क्रोध प्रकट करता है और अपनी दया को वापस ले लेता है, तो क्या तुम कह सकते हो कि वह मानवता के प्रति किसी सच्चे प्रेम का एहसास नहीं करता है? परमेश्वर लोगों के बुरे कार्यों के प्रत्युतर में प्रचण्ड क्रोध प्रकट करता है; उसका क्रोध दोषपूर्ण नहीं है। परमेश्वर का हृदय लोगों के पश्चाताप के द्वारा द्रवित हो जाता है, और यह वही पश्चाताप है जो इस तरह उसके हृदय को बदल देता है। उसका द्रवित होना, मनुष्य के प्रति उसके हृदय का बदलाव साथ ही साथ उसकी दया और सहनशीलता पूर्ण रूप से दोषमुक्त है; वह साफ, स्वच्छ, निष्कलंक और अमिश्रित है। परमेश्वर की सहनशीलता विशुद्ध रूप से सहनशीलता है; उनकी दया विशुद्ध रूप से दया है। उनका स्वभाव मनुष्य के पश्चाताप और उसके विभिन्न चाल-चलन के अनुसार क्रोध, साथ ही साथ दया एवं सहनशीलता को प्रकट करेगा। जो वह प्रकट या प्रकाशित करता है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि यह पूरी तरह पवित्र है; यह पूरी तरह प्रत्यक्ष है; उनकी हस्ती सृष्टि की किसी भी चीज़ की अपेक्षा पृथक है। कार्यों के वे सिद्धान्त जिन्हें परमेश्वर प्रकट करता है, उसके विचार एवं योजनाएँ या कोई विशेष निर्णय, साथ ही साथ हर एक कार्य, वह किसी भी प्रकार की त्रुटियों या दागों से स्वतन्त्र है। जैसा परमेश्वर ने निर्णय लिया है, वह वैसा ही करेगा, और इस रीति से वह अपने उद्यमों को पूरा करता है। इस प्रकार के परिणाम ठीक और दोषरहित हैं क्योंकि उनका स्रोत दोषरहित और निष्कलंक है। परमेश्वर का क्रोध दोषमुक्त है। इसी प्रकार, परमेश्वर की दया और सहनशीलता, जिसे किसी सृजन के द्वारा धारण नहीं किया जाता है, वे पवित्र एवं निर्दोष हैं, और वे सोच विचार और अनुभव किए जाने पर खरे निकल सकते हैं।

नीनवे की कहानी को समझने के पश्चात्, क्या तुम सब परमेश्वर के धर्मी स्वभाव के तत्व के अन्य पक्ष को देख पाते हो? क्या तुम सब परमेश्वर के अद्वितीय धर्मी स्वभाव के अन्य पक्ष को देख पाते हो? क्या मानवता के मध्य कोई इस प्रकार का स्वभाव धारण करता है? क्या कोई परमेश्वर के समान इस प्रकार का क्रोध धारण करता है? क्या कोई परमेश्वर के समान दया और सहनशीलता धारण करता है? सृष्टि के मध्य ऐसा कौन है जो इतना अधिक क्रोध कर सकता है और मानवजाति को नष्ट करने या उसके ऊपर विपत्ति लाने का निर्णय ले सकता है? और करुणा प्रदान करने, मनुष्यों को सहने और क्षमा करने, और उसके द्वारा मनुष्य को नष्ट करने के निर्णय को बदलने के योग्य कौन है? सृष्टिकर्ता अपने स्वयं की अनोखी पद्धतियों और सिद्धान्तों के माध्यम से अपने धर्मी स्वभाव को प्रकट करता है; वह लोगों, घटनाओं या चीज़ों के नियन्त्रण या प्रतिबन्ध के अधीन नहीं है। उसके अद्वितीय स्वभाव के साथ, कोई भी उसके विचारों और उपायों को बदलने में समर्थ नहीं है, न ही कोई उसे मनाने में और उसके निर्णयों को बदलने में समर्थ है। सृष्टि के व्यवहार और विचारों की सम्पूर्णता उसके धर्मी स्वभाव के न्याय के अधीन अस्तित्व में रहती है। चाहे वह क्रोध करे या दया इसे कोई भी नियन्त्रित नहीं कर सकता है; केवल सृष्टिकर्ता की हस्ती—या दूसरे शब्दों में, सृष्टिकर्ता का धर्मी स्वभाव—ही इसका निर्णय ले सकती है। सृष्टिकर्ता के धर्मी स्वभाव की अद्वितीय प्रकृति यही है!

जब हम ने एक बार नीनवे के लोगों के प्रति परमेश्वर के रवैये में रूपान्तरण का विश्लेषण कर लिया है और समझ लिया है, तो क्या तुम सब परमेश्वर के धर्मी स्वभाव के अंतर्गत पाई जानेवाली दया का वर्णन करने के लिए "अद्वितीय" शब्द का उपयोग करने में समर्थ हो? हम ने पहले ही कहा था कि परमेश्वर का क्रोध उनके अद्वितीय धर्मी स्वभाव के तत्व का एक पहलू है। अब मैं दो पहलुओं, परमेश्वर का क्रोध और परमेश्वर की दया, को उनके धर्मी स्वभाव के रूप में परिभाषित करूंगा। परमेश्वर का धर्मी स्वभाव पवित्र है; यह अनुल्लंघनीय साथ ही साथ निर्विवादित भी है; यह कुछ ऐसा है जिसे सृजी गई वस्तुओं और न सृजी गई वस्तुओं के मध्य कोई भी धारण नहीं कर सकता है। यह परमेश्वर के लिए अद्वितीय और अतिविशेष दोनों है। कहने का तात्पर्य है कि परमेश्वर का क्रोध पवित्र और अनुल्लंघनीय है; ठीक उसी समय, परमेश्वर के धर्मी स्वभाव का अन्य पहलू—परमेश्वर की दया—पवित्र है और उसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। सृजी गई वस्तुओं या न सृजी गई वस्तुओं में से कोई भी परमेश्वर का स्थान नहीं ले सकता है या उनके कार्यों में उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है, और न ही कोई सदोम के विनाश या नीनवे के उद्धार में उनका स्थान ले सकता है या उनका प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह परमेश्वर के अद्वितीय धर्मी स्वभाव की सच्ची अभिव्यक्ति है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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