परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 89

सृष्टिकर्ता के अधिकार के अधीन, सभी चीज़ें पूर्ण हैं

परमेश्वर के द्वारा सब वस्तुओं की सृष्टि की गई, जिन में वे शामिल हैं जो चल फिर सकते थे और वे जो चल फिर नहीं सकते थे, जैसे पक्षी और मछलियाँ, जैसे वृक्ष और फूल, और जिसमें पशुओं का झुण्ड, कीड़े मकौड़े, और छठवें दिन बनाए गए जंगली जानवर भी शामिल थ—वे सभी परमेश्वर के साथ अच्छे से थे, और, इसके अतिरिक्त, परमेश्वर की निगाहों में ये वस्तुएँ उसकी योजना के अनुरूप थे, और पूर्णता के शिखर को प्राप्त कर चुके थे, और एक ऐसे स्तर तक पहुँच गए थे जिस तक पहुँचाने की परमेश्वर ने अभिलाषा की थी। कदम दर कदम, सृष्टिकर्ता ने उन कार्यों को किया जो वह अपनी योजना के अनुसार करने का इरादा रखता था। एक के बाद दूसरा, जो कुछ उसने बनाने का इरादा किया था प्रगट होते गए, और प्रत्येक का प्रकटीकरण सृष्टिकर्ता के अधिकार का प्रतिबिम्ब था, और उसके अधिकार के विचारों का ठोस रूप था, और विचारों के इन ठोस रूपों के कारण, सभी जीवधारी सृष्टिकर्ता के अनुग्रह, और सृष्टिकर्ता के प्रयोजन के लिए धन्यवादित होने के सिवाए कुछ नहीं कर सकते थे। जैसे ही परमेश्वर के चमत्कारी कार्यों ने अपने आपको प्रगट किया, यह संसार अंश अंश कर के परमेश्वर के द्वारा सृजी गई सब वस्तुओं से फैल गया, और यह बर्बादी और अँधकार से स्वच्छता और जगमगाहट में बदल गया, घातक निश्चलता से जीवन्त और असीमित जीवन चेतना में बदल गया। सृष्टि की सब वस्तुओं के मध्य, बड़े से लेकर छोटे तक, और छोटे से लेकर सूक्ष्म तक, ऐसा कोई भी नहीं था जो सृष्टिकर्ता के अधिकार और सामर्थ के द्वारा सृजा नहीं गया था, और हर एक जीवधारी के अस्तित्व की एक अद्वितीय और अंतर्निहित आवश्यकता और मूल्य था। उनके आकार और ढांचे के अन्तर के बावजूद भी, उन्हें सृष्टिकर्ता के द्वारा बनाया जाना था ताकि सृष्टिकर्ता के अधिकार के अधीन अस्तित्व में बने रहें। कई बार लोग एक ऐसे कीड़े को देखेंगे जो बहुत घृणित है और कहेंगे, "वह कीड़ा बहुत भद्दा है, ऐसा हो ही नहीं सकता कि ऐसे घृणित चीज़ को परमेश्वर के द्वारा बनाया जा सकता था"—ऐसा हो ही नहीं सकता कि परमेश्वर किसी घृणित चीज़ को बनाए। कितना मूर्खतापूर्ण नज़रिया है! इसके बजाय उन्हें यह कहना चाहिए, "भले ही यह कीड़ा इतना भद्दा है, उसे परमेश्वर के द्वारा बनाया गया था, और इस प्रकार उसके पास उसका अपना अनोखा उद्देश्य होगा।" परमेश्वर के विचारों में, विभिन्न जीवित प्राणी जिन्हें उसने बनाया था, वह उन्हें हर प्रकार का और हर तरह का रूप, और हर प्रकार की कार्य प्रणालियाँ और उपयोगिताएँ देना चाहता था, और इस प्रकार परमेश्वर के द्वारा बनाए गए वस्तुओं में से कुछ भी ऐसा नहीं था जिसे उस साँचे से अलग किया गया था। उनकी बाहरी संरचना से लेकर भीतरी संरचना तक, उनके जीने की आदतों से लेकर उनके निवास तक जिन में वे रहते थे—हर एक चीज़ अलग थी। गायों के पास गायों का रूप था, गधों के पास गधों का रूप था, हिरनों के पास हिरनों का रूप था, हाथियों के पास हाथियों का रूप था। क्या तुम कह सकते हो कि कौन सबसे अच्छा दिखता था, और कौन सबसे भद्दा दिखता था? क्या तुम कह सकते हो कि कौन सबसे अधिक उपयोगी था, और किसकी उपस्थिति की आवश्यकता सबसे कम थी? कुछ लोगों को हाथियों का रूप अच्छा लगता है, परन्तु कोई भी खेती के लिए हाथियों का इस्तेमाल नहीं करता है; कुछ लोग शेरों और बाघों के रूप को पसंद करते हैं, क्योंकि उनका रूप सब वस्तुओं में सबसे अधिक प्रभावकारी है, परन्तु क्या तुम उन्हें पालतु जानवर की तरह रख सकते हो? संक्षेप में, जब सब वस्तुओं की बात आती है, तो मनुष्य सृष्टिकर्ता के अधिकार के अनुसार अन्तर कर सकता है, दूसरे शब्दों में, सब वस्तुओं के सृष्टिकर्ता के द्वारा नियुक्त किए गए क्रम के अनुसार अन्तर कर सकता है; यह सबसे सही मनोवृत्ति है। सृष्टिकर्ता के मूल अभिप्रायों को खोजने और उसके प्रति आज्ञाकारी होने की एकमात्र मनोवृति ही सृष्टिकर्ता के अधिकार की सच्ची स्वीकार्यता और निश्चितता है। यह परमेश्वर के साथ अच्छा है, तो मनुष्य के पास दोष ढूँढ़ने का कौन सा कारण है?

अतः, सृष्टिकर्ता के अधिकार के अधीन सब वस्तुएँ सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के लिए सुर में सुर मिलाकर गाती हो, और उसके नए दिन के कार्य के लिए एक बेहतरीन भूमिका का काम करती हैं, और इस समय सृष्टिकर्ता भी अपने कार्य के प्रबन्ध में एक नया पृष्ठ खोलेगा! बसंत ऋतु के अँकुरों, ग्रीष्म ऋतु की परिपक्वता, शरद ऋतु की कटनी, और शीत ऋतु के भण्डारण की व्यवस्था के अनुसार जिसे सृष्टिकर्ता के द्वारा नियुक्त किया गया था, सब वस्तुएँ सृष्टिकर्ता की प्रबंधकीय योजना के साथ प्रतिध्वनित होंगे, और वे अपने स्वयं के नए दिन, नई शुरूआत, और नए जीवन पथक्रम का स्वागत करेंगे, और वे सृष्टिकर्ता के अधिकार की संप्रभुता के अधीन हर दिन का अभिनन्दन करने के लिए कभी न खत्म होनेवाले अनुक्रम के अनुसार जल्द ही पुनः उत्पन्न करेंगे...

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

सृष्टिकर्ता के अधिकार के तहत हर चीज़ अत्युत्तम है

I

परमेश्वर ने बनायीं हैं जो सभी चीज़ें, चल-अचल सभी चीज़ें, जैसे मछली, पक्षी, फूल और पेड़-पौधे, पशुधन, जंगली जीव और कीड़े-मकौड़े, परमेश्वर की नज़रों में वे भले थे, थे परमेश्वर की नजरों में, उसकी योजना के हिसाब से अपनी पूर्णता की चोटी पे, परमेश्वर चाहता था जो, उस दर्जे को वे पा चुके थे।

II

कदम-दर-कदम उसने काम किया, उसकी योजना में था जो वो सब किया। एक एक कर प्रकट हुईं वो चीज़ें, जिन्हें बनाने का उसने इरादा किया था। हर एक चीज़ है अभिव्यक्ति उसके अधिकार की और है उसका नतीजा। और इसके कारण ही, सभी प्राणी हैं सृष्टिकर्ता के अनुग्रह के आभारी, हैं सृष्टिकर्ता के अनुग्रह के आभारी।

III

जैसे जैसे स्पष्ट होने लगे, अद्भुत कर्म परमेश्वर के, ये जहाँ, एक एक कर भर गया परमेश्वर द्वारा बनाई गयी चीज़ों से। बदल गया ये जहाँ, अव्यवस्था से स्पष्टता में, अंधकार से उजाले में, स्थिरता से सजीवता में, मौत सी स्थिरता से, अनंत जीवन चेतना में।

IV

सृष्टि की सारी चीज़ों में, सबसे बड़ी से सबसे छोटी तक, छोटी से बहुत ही छोटी तक, नहीं थी ऐसी कोई चीज़ जो बनाई न गयी, परमेश्वर के अधिकार से, परमेश्वर के सामर्थ्य से। हर एक प्राणी के अस्तित्व के पीछे, थी एक अनूठी, निहित ज़रूरत और महत्व। चाहे हो कोई भी रूप या आकार उनका, उसके अधिकार के तहत ही अस्तित्व है सभी का।

V

सृष्टिकर्ता के अधिकार में, सभी प्राणी उसकी प्रभुता के लिए नई धुन बजायेंगे, बजायेंगे, नये दिन के उसके कार्य से पर्दा उठाएंगे, उठाएंगे। और इसी क्षण में, अपने प्रबन्धन के कार्य में, सृष्टिकर्ता खोलेगा नया पन्ना। हाँ, सृष्टिकर्ता खोलेगा नया पन्ना।

VI

सृष्टिकर्ता द्वारा निश्चित, बसंत के अंकुरण, गर्मी की परिपक्वता, शरद की कटनी और सर्दी के संचय की व्यवस्था के अनुसार सभी चीज़ें, परमेश्वर की प्रबन्धन योजना से गूंजेंगी, अपने नये दिन का, नई शुरुआत का, नये जीवन पथक्रम का स्वागत करेंगीं। जल्द ही पीढ़ी दर पीढ़ी प्रजनन करेंगीं, ताकि परमेश्वर के अधिकार की प्रभुता के अधीन, वे करें स्वागत हर नये दिन का। सब कुछ अत्युत्तम है। सब कुछ अत्युत्तम है।

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