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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

मेरे घर की धन-सम्पति असंख्य और अथाह है, फिर भी उनका आनन्द उठाने के लिए मनुष्य मेरे पास कभी नहीं आया। वह अपने आप में उनका आनन्द उठाने में असमर्थ है, और न ही अपने स्वयं की कोशिशों से अपने आप को बचाने में समर्थ है; उसके बजाए, उसने हमेशा अपना भरोसा दूसरों पर रखा है। उन सब ने जिनको मैं देखता हूँ, किसी ने भी समझते-बूझते और प्रत्यक्ष रूप से मेरी खोज नहीं की है। दूसरों के आग्रह से वे सभी भीड़ का अनुसरण करते हुए मेरे सामने आते हैं, और वे कीमत चुकाने या अपने जीवन को समृद्ध करने के लिए समय बिताने को तैयार नहीं हैं। इसलिए, मनुष्यों में, किसी ने भी वास्तविकता में जीवन नहीं बिताया है, और सभी लोग ऐसा जीवन बिताते हैं जिसका कोई अर्थ नहीं है। मनुष्य के चिरस्थायी तरीकों और रीतियों के कारण, सभी लोगों का शरीर पृथ्वी की मिट्टी की गंध से भर गया है। परिणामस्वरूप, मनुष्य कठोर हो गया; संसार के उजाड़पन के प्रति असंवेदनशील हो गया, वह उसके बदले इस जमी हुई पृथ्वी पर अपने आप को प्रफुल्लित करने के काम में लगा हुआ है। मनुष्य के जीवन में थोड़ा-सा भी उत्साह नहीं है, और उसमें कोई मानवीय स्वाद या चमक नहीं है—फिर भी उसने हमेशा अपने आप को उसमें तपाया है, और अपना सम्पूर्ण जीवनकाल बिना महत्व के बिताया है जिस में वह बिना कुछ हासिल किए यहाँ से वहाँ भागता फिरता है। आँखों के पलक झपकाते ही, मृत्यु का दिन नज़दीक आ जाता है, और मनुष्य एक कड़वी मौत मरता है। इस संसार में, उसने कुछ भी पूर्ण नहीं किया, या कुछ भी हासिल नहीं किया है—वह जल्दी जल्दी आता है और जल्दी जल्दी चला जाता है। मेरी नज़रों में उन में से कोई कभी कुछ भी लेकर नहीं आया है या कुछ लेकर नहीं गया, और इस प्रकार मनुष्य सोचता है कि यह संसार अन्यायी है। फिर भी कोई भी जल्दी नहीं जाना चाहता है। वे महज उस दिन का इन्तज़ार करते हैं जब मेरी प्रतिज्ञा मनुष्य के बीच में अचानक से प्रकट होगी, जो उस समय उन्हें अनुमति देगी, कि जब वे भटक जाएँ, तो उन्हें एक बार फिर अनन्त जीवन का मार्ग दिखाएँ। इस तरह, मनुष्य हमेशा मेरे कामकाजों और कार्यों के बारे में सोचता एवं बात करता रहता है यह देखने के लिए कि मैंने उसके लिए अपनी प्रतिज्ञाओं को निभाया है कि नहीं। जब वह पीड़ा के मध्य या भयानक दर्द में होता है, या परीक्षाओं से घबरा जाता है और गिरने ही वाला होता है, तब मनुष्य अपने जन्म के दिन को धिक्कारने लगता है ताकि वह जल्दी से अपनी विपदाओं से बचकर निकल सके और दूसरी आदर्श जगह पर जा सके। परन्तु जब परीक्षाएँ बीत जाती हैं, तो मनुष्य आनन्द से भर जाता है। वह पृथ्वी पर अपने जन्म के दिन का आनन्द मनाता है और कहता है कि मैं उसके जन्म के दिन को आशीष दूँ; इस समय, मनुष्य भूतकाल की सौगंधों का जिक्र नहीं करता है और इस बात से बहुत ज़्यादा भयभीत होता है कि मृत्यु दूसरी बार उस पर आ जाएगी। जब मेरे हाथ संसार को आगे बढा़ते हैं, लोग आनन्द से नाचने लग जाते हैं, वे आगे से दुखी नहीं होते हैं, और वे सब के सब मुझ पर निर्भर होते हैं। जब मैं अपने हाथों से अपना चेहरा ढाँक लेता हूँ, और लोगों को नीचे ज़मीन में धँसा देता हूँ, उनकी साँस रूकने लग जाती है, और वे मुश्किल से ही जीवित रह पाते हैं। वे सभी मुझे पुकारते हैं, और इस बात से भयभीत होते हैं कि मैं उनका विनाश कर दूँगा, क्योंकि वे सभी उस दिन को देखना चाहते हैं जब मैं गौरवान्वित होऊँगा। मनुष्य मेरे दिन को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के एक सिद्धांत के रूप में लेता है, और यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि लोग उस दिन को देखने के लिए तरसते हैं जब मेरी महिमा का आगमन होगा और इसलिए मानवजाति आज तक जीवित बची हुई है। वह आशीष जिसकी आज्ञा मेरे मुख के द्वारा दी गई है वह यह है कि वे लोग जो आखिरी दिनों में पैदा हुए हैं मेरी सारी महिमा देखने के लिए सैाभाग्यशाली हैं।

युगों से, बहुत से लोग निराशा, और अनिच्छा के साथ इस संसार से चले गए हैं, और बहुत से लोग आशा और विश्वास के साथ इसमें आ गए हैं। मैंने बहुतों के आने का प्रबन्ध किया है, और बहुतों को दूर भेज दिया है। अनगिनित लोग मेरे हाथों से होकर गुज़रें हैं। बहुत सी आत्माओं को अधोलोक में फेंक दिया गया है, बहुतों ने देह में जीवन बिताया है, और बहुत से लोग मर चुके हैं और उन्होंने पृथ्वी पर दुबारा जन्म ले लिया है। परन्तु उनमें से किसी के पास राज्य के आशीषों का आनन्द उठाने का अवसर नहीं था। मैंने मानवजाति को इतना कुछ दिया, फिर भी उसने थोड़ा-सा ही प्राप्त किया है, क्योंकि शैतान के आक्रमणों ने उन्हें मेरी सारी समृद्धि का आनन्द उठाने में असमर्थ कर दिया है। उसके पास केवल देखने के लिए एक अच्छा भविष्य है, परन्तु उसने उसका कभी भरपूर आनन्द नहीं उठाया है। मनुष्य ने कभी भी स्वर्ग की धन-समृद्धि को पाने के लिए अपने शरीर में ख़ज़ाने से भरे घर की खोज नहीं की है, और इस प्रकार उसने उन आशीषों को खो दिया है जो मैंने उसे दिया था। क्या मनुष्य का आत्मा वह आन्तरिक शक्ति नहीं है जो उसे मेरे आत्मा से जोड़ता है? क्यों मनुष्य ने मुझे कभी भी अपनी आत्मा से नहीं जोड़ा है? वह देह में मेरे निकट क्यों आता है, फिर भी वह आत्मा में ऐसा नहीं कर पाता है? क्या मेरा असली चेहरा हड्डी और माँस का है? मनुष्य मेरे सार-तत्व को क्यों नहीं जानता? क्या वास्तव में मनुष्य की आत्मा में मेरा कोई पदचिन्ह कभी नहीं रहा है? क्या मैं मनुष्य की आत्मा से पूरी तरह ग़ायब हो चुका हूँ? यदि मनुष्य आत्मिक क्षेत्र में प्रवेश नहीं करता, तो वह मेरी इच्छाओं का आभास कैसे कर पाएगा? क्या मनुष्य की आँखों में वह बात है जो सीधे आत्मिक क्षेत्र को भेद सकती है? कई बार ऐसा हुआ है जब मैंने अपने आत्मा के द्वारा मनुष्य को आवाज़ दी है, फिर भी मनुष्य ऐसा व्यवहार करता है मानो मैंने उसे छुरा भोंक दिया है, और वह अति भय के साथ दूर से मेरे बारे में विचार करता है कि मैं उसे किसी और दुनिया में ले जाऊँगा। कई बार ऐसा हुआ जब मैंने मनुष्य की आत्मा से पूछताछ कि, फिर भी वह भुलक्कड़ बना रहता है, और बहुत ज़्यादा डर जाता है कि मैं उसके घर में घुस जाऊँगा और उस अवसर का लाभ उठा कर उसकी सारी सम्पति को छीन लूँगा। अत; वह मुझे बाहर निकाल देता है और मैं सर्द, कसकर बन्द किए दरवाज़े के सामने खड़ा रह जाता हूं। कई बार ऐसा हुआ जब मनुष्य गिर गया और मैंने उसे बचाया, फिर भी जागने के बाद वह तुरंत ही मुझे छोड़ देता है और, मेरे प्रेम का एहसास किए बगैर, मुझे चौकन्नी निगाहों से देखता है; मानो मैंने उसके हृदय को कभी उत्साहित नहीं किया है। मनुष्य भावना-शून्य है, और नृशंस पशु है। यद्यपि वह मेरे आलिंगन से उत्साहित होता है, फिर भी वह कभी इस से भावविभोर नहीं हुआ है। मनुष्य पहाड़ी जंगली जीव के समान है। उसने कभी भी मानवजाति के प्रति ताड़ना को संजो कर नहीं रखा है। वह मेरे पास आने से आनाकानी करता है, और पहाड़ों पर रहना पसंद करता है, जहाँ उसे जंगली जानवरों से खतरा रहता है फिर भी वह मेरे आश्रय में आना नहीं चाहता है। मैं किसी मनुष्य को बाध्य नहीं करता हूँ: मैं महज अपना कार्य करता हूँ। वह दिन आएगा जब मनुष्य सामर्थी महासागर के बीच में से तैर कर मेरे पास आ जाएगा, ताकि वह पृथ्वी पर सभी समृद्धि का आनन्द उठाए और समुद्र के द्वारा निगले जाने के भय को पीछे छोड़ दे।

मेरे वचनों के पूर्ण होने के बाद, राज्य धीरे-धीरे पृथ्वी पर आकार लेने लगता है और मनुष्य धीरे-धीरे सामान्य हो जाता, और इस प्रकार पृथ्वी पर मेरे हृदय में राज्य स्थापित हो जाता है। उस राज्य में, परमेश्वर के सभी लोगों को सामान्य मनुष्य का जीवन वापस मिल जाता है। बर्फीली शीत ऋतु चली गई है, उसका स्थान बहारों के संसार ने ले लिया है, जहाँ साल भर बहार बनी रहती है। लोग आगे से मनुष्य के उदास और अभागे संसार का सामना नहीं करते हैं, और न ही वे आगे से मनुष्य के शांत ठण्डे संसार को सहते हैं। लोग एक दूसरे से लड़ाई नहीं करते हैं। एक दूसरे के विरूद्ध युद्ध नहीं करते हैं, वहाँ अब कोई नरसंहार नहीं होता है और न ही नरसंहार से लहू बहता है; पूरी ज़मीं प्रसन्नता से भर जाती है, और यह हर जगह मनुष्यों के बीच उत्साह को बढ़ाता है। मैं पूरे संसार में घूमता हूँ, मैं ऊपर सिंहासन से आनन्दित होता हूँ, और मैं सितारों के मध्य रहता हूँ। और स्वर्गदूत मेरे लिए नए नए गीत गाते और नए नए नृत्य करते हैं। अब उनके चेहरों से उनकी स्वयं की क्षणभंगुरता के कारण आँसू नहीं ढलकते हैं। मैं अब अपने सामने स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनता हूँ, और अब कोई मुझ से किसी कठिनाई की शिकायत नहीं करता है। आज, तुम लोगमेरे सामने रहते हो; कल तुम लोग मेरे राज्य में बने रहोगे। क्या यह सब से बड़ा आशीष नहीं है जिसे मैं मनुष्य को देता हूँ? उस कीमत के कारण जो तुम लोग आज चुकाते हो, तुम लोग भविष्य की आशीषों को विरासत में प्राप्त करोगे और मेरी महिमा के मध्य रहोगे। क्या तुम लोग अभी भी मेरे आत्मा के मुख्य तत्व के साथ शामिल नहीं होना चाहते हो? क्या तुम लोग अभी भी अपने आप को खत्म करना चाहते हो? लोग उस प्रतिज्ञा का अनुसरण करने के इच्छुक हैं जिसे वे देख सकते हैं, भले ही वे अल्पजीवी हैं, फिर भी कोई भी कल की प्रतिज्ञाओं को स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं है, भले ही वे पूरे अनन्त काल के लिए हों। वे चीज़ें जो मनुष्य को दिखाई देती हैं वे ऐसी चीज़ें हैं जिनका मैं सम्पूर्ण विनाश करूँगा, और ऐसी चीज़ें जो मनुष्य के लिए दृष्टिगोचर नहीं है वे ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें मैं पूरा करूँगा। परमेश्वर और मनुष्य के बीच में यही अन्तर है।

मनुष्य मेरे दिन का लिखित ब्योरा रखता है, फिर भी किसी ने वास्तविक तिथि को कभी नहीं जाना, और इस प्रकार मनुष्य केवल जड़ता के मध्य में ही जीवन बिता सकता है। अनन्त आसमानों में मनुष्य की लालसाएँ प्रतिध्वनित होती हैं, और फिर ग़ायब हो जाती हैं, और मनुष्य बार बार अपनी आशा को खो देता है, इस तरह वह वर्तमान परिस्थितियों में नीचे गिरता चला जाता है। मेरे कथनों का उद्देश्य मनुष्यों से तिथियों का अनुसरण करवाना नहीं है, न ही उनकी हताशा के परिणामस्वरूप उन्हें स्वयं के विध्वंस की ओर धकेलना है। मैं चाहता हूँ कि मनुष्य मेरी प्रतिज्ञाओं को स्वीकार करें, और मैं पूरे संसार के लोगों से चाहता हूँ कि वे मेरी प्रतिज्ञाओं के भागी बनें। मैं ऐसे जीवित प्राणियों को चाहता हूँ जो जीवन से भरपूर हैं, लाशों को नहीं जो मौत के कगार पर हैं चूंकि मैं राज्य की मेज पर झुकता हूँ, तो मैं पृथ्वी के सभी लोगों को आज्ञा दूँगा कि वे मेरे निरीक्षण को स्वीकार करें। मैं अपने सामने किसी अशुद्ध वस्तु की मौजूदगी की अनुमति नहीं देता हूँ। मैं अपने कार्य में किसी मनुष्य की दखल अंदाजी की अनुमति नहीं देता हूँ। वे सभी जो मेरे काम में हस्तक्षेप करते हैं उन्हें कैदखाने में फेंक दिया जाता है, और छूटने के बाद भी वे महा विपत्तियों से घिरे रहते हैं और पृथ्वी की आग की ज्वाला में झुलसते रहते हैं। जब मैं अपने देहधारी शरीर में हूँ, तब जो कोई मेरे कार्यों को लेकर मेरी देह के साथ वादविवाद करता है उस से मैं घृणा करूँगा। अनेक बार मैंने मनुष्य को स्मरण दिलाया कि पृथ्वी पर मेरा कोई सगा-सम्बन्धी नहीं है, और जो कोई मुझे बराबरी के लिहाज से देखता है, और अपनी ओर खींचता है ताकि हम अतीत के यादों को स्मरण कर सके, तो उसकाविनाश हो जाएगा। मैं यही आज्ञा देता हूँ। ऐसे मामलों में मैं मनुष्य के प्रति थोड़ा भी कोमल नहीं हूँ। वे सभी जो मेरे कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं और मुझे परामर्श देते हैं उन्हें मेरे द्वारा प्रताड़ित किया जाएगा, और मेरे द्वारा उन्हें कभी क्षमा नहीं किया जाएगा। यदि मैं साफ-साफ न कहूँ, तो मनुष्य कभी अपने आपे में नहीं आएगा, और अनजाने में मेरी ताड़नाओं को पाएगा—क्योंकि मनुष्य मुझे मेरी देह में नहीं जानते हैं।

20 मार्च 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

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