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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

तुम्हें व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में क्या पता होना चाहिए? आत्मा, शरीर और वचन मिलकर ही स्वयं व्यावहारिक परमेश्वर को बनाते हैं; और यही स्वयं व्यावहारिक परमेश्वर का वास्तविक अर्थ है। यदि तू सिर्फ़ शरीर के बारे में जानता है, यदि तू उसकी आदतों, और उसके चरित्र के बारे में जानता है, लेकिन तू आत्मा के कार्य या देह में आत्मा के कार्य के बारे में कुछ नहीं जानता है, और सिर्फ़ आत्मा और वचन पर ध्यान देता है, और केवल आत्मा के सामने प्रार्थना करता है, व्यावहारिक परमेश्वर में परमेश्वर के आत्मा के कार्य के बारे में कुछ भी जाने बिना, तब भी यह साबित करता है कि तुझे व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है। व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में ज्ञान में उनके वचनों को जानना और अनुभव करना, और उन नियमों और सिद्धांतों को समझना जिनके द्वारा पवित्र आत्मा कार्य करता है, और परमेश्वर की आत्मा द्वारा देह में कार्य करने के तरीके को समझना शामिल है। इसी तरह, इसमें यह जानना भी शामिल है कि देह में परमेश्वर का हर कार्य आत्मा के द्वारा निर्देशित होता है, और कि उसके द्वारा बोले गए वचन आत्मा की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है। इसलिये, यदि तू व्यावहारिक परमेश्वर को जानना चाहता है, तो तुझे मुख्य रूप से यह जानना है कि परमेश्वर कैसे अपनी मानवीयता में, और अपनी ईश्वरीयता में कार्य करता है; यह सम्बन्ध रखता है आत्मा कि अभिव्यक्ति से, जिससे सभी लोगों का जुड़ाव है।

वह कौनसा पहलु है जो आत्मा के प्रकटीकरण में शामिल है? कभी-कभी व्यावहारिक परमेश्वर अपनी मानवीयता में कार्य करता है और कभी-कभी अपनी ईश्वरीयता में, लेकिन कुल मिलाकर, दोनों मामलों में कमान आत्मा के पास होता है। लोगों के भीतर जैसी भी आत्मा होती है उनकी बाहरी अभिव्यक्ति वैसी ही होती है। आत्मा साधारण ढंग से कार्य करता है, लेकिन आत्मा के द्वारा निर्देश के दो भाग होते हैं: एक भाग उसका मानवीयता में कार्य करना है, जबकि दूसरा उसकी ईश्वरीयता के द्वारा कार्य करना है। यह तुझे अच्छे ढंग से समझ लेना चाहिए। आत्मा का कार्य परिस्थिति के अनुसार विभिन्न होता है: जब उसके मानवीय कार्य की आवश्यकता होती है, तो आत्मा उसके मानवीय कार्य को निर्देशित करता है; जब उसके ईश्वरीय कार्य की आवश्यकता पड़ती है, तो उसके निष्पादन के लिए सीधे ईश्वरीयता प्रकट होती है। क्योंकि परमेश्वर देह में कार्य करता है और देह में प्रकट होता है, वह अपनी मानवीयता और अपनी ईश्वरीयता दोनों में कार्य करता है। जब वह अपनी मानवीयता में कार्य करता है, तो यह आत्मा के द्वारा शासित होता है, मनुष्य की देह की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने, मनुष्य को और आसानी से उनके साथ जुड़ने, और मनुष्य को परमेश्वर की सच्चाई और सादगी देखने के योग्य बनाता है। इसके अतिरिक्त, यह मनुष्य को यह देखने के योग्य बनाता है कि परमेश्वर का आत्मा देह धारण किया है और मनुष्यों के बीच है, मनुष्य के साथ रहता है और मनुष्य के साथ कार्य करता है। ईश्वरीयता में उसका कार्य, लोगों के जीवन की पूर्ति करने, लोगों की हर चीज़ में सकारात्मक पक्ष से अगुवाई करने, लोगों के स्वभाव को बदलने, और उन्हें वास्तव में आत्मा के देह में प्रकटीकरण को देखने देने के लिए है। मनुष्य के जीवन में बढ़ोतरी मुख्य रूप से परमेश्वर के वचनों और ईश्वरीयता के कार्य के द्वारा प्राप्त की जाती है। सिर्फ़ ईश्वरीयता के कार्य को स्वीकार करके मनुष्य के स्वभाव में बदलाव को पूरा किया जा सकता है और उसके बारे में उसी भावार्थ से बताया जा सकता है। उसके बाद उसमें मानवीयता का कार्य, अर्थात् परमेश्वर के पालन-पोषण, सहायता, और मानवीयता की पूर्ति, जोड़ देने के बाद ही मनुष्य परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर सकता है। आज्ञाओं का सही ढंग से पालन करने के लिए, लोगों को देह में प्रकट होने वाले व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में बिल्कुल स्पष्ट ज्ञान तो कम से कम होना ही चाहिए। दूसरे शब्दों में, लोगों को आज्ञाएँ सही ढंग से मानने के सिद्धान्त को समझना चाहिए। आज्ञाओं के पालन का मतलब उनका लक्ष्यहीन या मनमाने ढंग से पालन करना नहीं है, बल्कि आधार, उद्देश्य, और सिद्धान्तों के आधार पर करना है। सबसे पहले हासिल की जाने वाली चीज़ तुम्हारी दृष्टि का स्पष्ट होना है। व्यावहारिक परमेश्वर जिसके बारे में आज हम बातें करते हैं वो अपनी मानवीयता और अपनी ईश्वरीयता दोनों में ही कार्य करता है। व्यावहारिक परमेश्वर के प्रकटीकरण के द्वारा उसके मानवीयता वाले कार्य और जीवन, तथा उसके सम्पूर्ण ईश्वरीयता वाले कार्य पूरे होते हैं। उसकी मानवीयता और ईश्वरीयता मिल कर एक हो जाते हैं, और दोनों के कार्य वचनों के द्वारा पूरे किए जाते हैं। चाहे मानवीयता में हों या ईश्वरीयता में, वह वचन बोलता है। जब परमेश्वर मानवीयता में काम करता है, तो वह मानवीयता की भाषा में बोलता है ताकि मनुष्य उससे जुड़ सके और उसके वचनों को समझ सके। उसके वचन सामान्य ढंग से बोले जाते हैं और समझने में आसान होते हैं, ताकि वे सभी लोगों तक पहुँचाए जा सके; सुशिक्षित और खराब ढंग से शिक्षित दोनों ही उसके वचनों को स्वीकार करने के योग्य होते हैं। जब वह अपनी ईश्वरीयता में कार्य करता है, कार्य तब भी वचनों के द्वारा ही किए जाते हैं, लेकिन उसके वचन पूर्ति और जीवन से भरपूर होते हैं। उसके वचनों में मानव अर्थ की मिलावट नहीं होती है और उनमें मानवीय प्राथमिकताएँ शामिल नहीं होती हैं; वे मानवीयता से बंधनमुक्त और सामान्य मानवीयता की सीमाओं से परे होते हैं। भले ही यह कार्य एक देह में किया जाता है, यह आत्मा का सीधा प्रकटीकरण है। यदि लोग परमेश्वर के कार्य को सिर्फ़ उसकी मानवीयता में ही स्वीकार करते हैं, तो वे अपने आप को एक दायरे में सीमित कर लेते हैं। इसके पहले कि एक छोटा सा भी बदलाव सम्भव हो उन्हें निपटने, कांट-छांट, और अनुशासन के लम्बे वर्षों की आवश्यकता होगी। हालाँकि, पवित्र आत्मा के कार्य या उपस्थिति के बिना, वे हमेशा उन्हीं गलतियों को दोहराएँगे। इस तरह के नुकसान और कमियों को केवल ईश्वरीयता के काम के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, केवल तभी मनुष्य को सम्पूर्ण बनाया जा सकता है। बहुत लम्बे समय तक निपटने और कांट-छांट करने के बजाय, जो चीज जरूरी है वह है सकारात्मक पूर्ति, सभी कमियों को पूरा करने के लिए वचनों का उपयोग करना, लोगों की सभी अवस्थाओं को प्रकट करने के लिए वचनों का उपयोग करना, उनके जीवन, उनकी प्रत्येक वाणी, उनके हर कार्य को निर्देशित करने तथा उनके इरादों और प्रेरणा को खोल कर रख देने के लिए वचनों का उपयोग करना; यही है व्यावहारिक परमेश्वर का वास्तविक कार्य। और इसलिए, व्यावहारिक परमेश्वर के प्रति अपने रवैये में, तुझे उसे सम्मान देते हुए और स्वीकार करते हुए उसकी मानवीयता के सामने झुकना चाहिए और साथ ही साथ, तुझे उसकी ईश्वरीयता के कार्य और वचनों को भी स्वीकार करना चाहिए और उसकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। परमेश्वर द्वारा देह में प्रकट होने का अर्थ है कि परमेश्वर के आत्मा के सब कार्य और वचन उसकी सामान्य मानवीयता, और उसके देह धारण के द्वारा किये जाते हैं। अर्थात्, परमेश्वर का आत्मा उनकी मानवीयता के कार्य को निर्देशित करता है और ईश्वरीयता के कार्य को देह के साथ पूरा करता है, और देहधारी परमेश्वर में तू परमेश्वर के मानवीयता वाले कार्य और संपूर्ण ईश्वरीय कार्य दोनों को देख सकता है। व्यावहारिक परमेश्वर के देह में प्रकट होने का यही वास्तविक महत्व है। यदि तू सचमुच में इसे समझ सकता है, तो फिर तू परमेश्वर के सभी अलग-अलग भागों से जुड़ पाएगा; और तू उसके ईश्वरीयता के कार्य को बहुत ज़्यादा महत्व देना, या उसके मानवीयता के कार्य को बिल्कुल नकार देना बंद कर देगा, और तू चरम पर नहीं जाएगा, न ही गलत रास्ते पर मुड़ेगा। कुल मिलाकर, व्यावहारिक परमेश्वर का अर्थ यह है कि उसके मानवीयता के कार्य और उसके ईश्वरीयता के कार्य, उसकी आत्मा के निर्देशानुसार, उसके देह के द्वारा प्रदर्शित किये जाते हैं, ताकि लोग देख सकें कि वे जीवंत और सजीव है, तथा असली और वास्तविक है।

परमेश्वर के आत्मा का मानवीयता वाले कार्य के परिवर्ती स्तर होते हैं। मानवीयता को एकदम सही बना करके, वे अपनी मानवीयता को आत्मा का निर्देश प्राप्त करने में समर्थ बनाते हैं, जिसके बाद उसकी मानवीयता कलीसियाओं का भरण पोषण और उनकी अगुवाई कर पाती है। परमेश्वर के सामान्य कार्य की यह एक अभिव्यक्ति है। इसलिए, यदि तू परमेश्वर के मानवीयता वाले कार्य के सिद्धांतों को अच्छे ढंग से समझ जाता है, तो फिर तुझे परमेश्वर के मानवीयता वाले कार्य के बारे में धारणाएँ बनाने की संभावना नहीं होगी। चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर का आत्मा गलती नहीं कर सकता है; वह सही है और दोष रहित है। वह कुछ भी गलत नहीं करेगा। ईश्वरीयता का कार्य परमेश्वर की इच्छा का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण है। उसमें मानवीयता का कोई भी हस्तक्षेप नहीं होता है। यह पूर्णता से होकर नहीं गुजरता, बल्कि सीधे आत्मा से आता है। तो भी, उसकी ईश्वरीयता का कार्य सिर्फ़ उसकी सामान्य मानवीयता से ही सम्भव है। यह अलौकिक थोड़ा भी नहीं है, और किसी साधारण मनुष्य के द्वारा किया जाता प्रतीत होता है। परमेश्वर के स्वर्ग से पृथ्वी पर आने का मुख्य कारण परमेश्वर के वचनों को देह के द्वारा प्रकट करना है और देह का उपयोग करके परमेश्वर के कार्य को पूरा करना है।

आजकल, व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में लोगों का ज्ञान बहुत अधिक एक तरफा है, और देह धारण के महत्व के बारे में उनकी समझ अभी भी बहुत कम है। परमेश्वर की देह के मामले में, मनुष्य उसके कार्य और वचनों के माध्यम से देखता है कि परमेश्वर के आत्मा में बहुत कुछ शामिल है और वह बहुत सम्पन्न है। लेकिन कैसे भी हो, आख़िरकार परमेश्वर की गवाही परमेश्वर के आत्मा से ही आती है, बिल्कुल उसी तरह जैसे परमेश्वर देह में कार्य करता है, वह किन सिद्धांतों के द्वारा कार्य करता है, कैसे वह अपनी मानवीयता और ईश्वरीयता में कार्य करता है। आज, तुम इस व्यक्तित्व की आराधना करते हो, लेकिन वास्तव में, तुम आत्मा की आराधना कर रहे हो। यह वह न्यूनतम चीज है जिसका ज्ञान लोगों को देहधारी परमेश्वर के संबंध में पता होना चाहिए: देह के माध्यम से आत्मा के तत्व के बारे में जानना, आत्मा के द्वारा देह में ईश्वरीयता और मानवीयता के कार्य को जानना, आत्मा द्वारा देह के माध्यम से बोले गए सभी वचनों और कथनों को स्वीकार करना, और देखना कि कैसे परमेश्वर का आत्मा देह को निर्देशित करता है, और कैसे अपनी महान शक्ति को देह में दर्शाता है। अर्थात्, इस देह के माध्यम से ही, मनुष्य स्वर्ग के पवित्र आत्मा को जान जाता है, मानव जाति के मध्य में स्वयं व्यावहारिक परमेश्वर के प्रकट होने से, संदिग्ध परमेश्वर जो मनुष्य की धारणाओं में होता है लुप्त हो जाता है, लोगों द्वारा व्यावहारिक परमेश्वर की आराधना के कारण परमेश्वर के प्रति उनकी आज्ञाकारिता बढ़ गई है; और परमेश्वर के आत्मा के द्वारा देह में ईश्वरीयता और मानवीयता कार्य के माध्यम से, मनुष्य ईश्वरोक्ति प्राप्त करता और पालन-पोषण पाता है, और अपने जीवन स्वभाव में परिवर्तन को प्राप्त करता है। आत्मा के देह में आने का केवल यही वास्तविक अर्थ है, और यह मुख्य रूप से इसलिए कि लोग परमेश्वर से जुड़ सकें, परमेश्वर पर आश्रित हो सकें, और परमेश्वर को जान सकें।

वह मुख्य प्रवृति क्या है जिसे मनुष्य को अपने भीतर व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में रखना चाहिए? तू देह धारण, वचन के देह में प्रकट होने, परमेश्वर के देह में प्रकट होने, और व्यावहारिक परमेश्वर के कार्यों के बारे में क्या जानता है? और आजकल मुख्य रूप से किसके बारे में बात होती है? देह धारण के बारे में, वचन के देह में आने के बारे में, और परमेश्वर के देह में प्रकट होने के बारे में, ये ही हैं जिन्हें तुझे अच्छे ढंग से समझ लेना चाहिए। तुम लोगों के कद और युग के अनुसार, तुम लोगों को धीरे-धीरे इन मामलों की समझ हो जानी चाहिए। जब तुम लोग जीवन का अनुभव करते हो, तुम लोगों को धीरे-धीरे इन मामलों की समझ हो जानी चाहिए और स्पष्ट ज्ञान प्राप्त हो जाना चाहिए। मनुष्य के द्वारा परमेश्वर के वचन को अनुभव करने की प्रक्रिया असल में परमेश्वर के वचनों के देह में प्रकट होने के बारे में जानने की प्रक्रिया के समान है। मनुष्य जितना अधिक परमेश्वर के वचनों को अनुभव करता है, उतना ही अधिक परमेश्वर के आत्मा के बारे में जानता है। परमेश्वर के वचनों के अपने अनुभव के द्वारा, मनुष्य आत्मा के कार्य के सिद्धांतों को समझता है और स्वयं व्यावहारिक परमेश्वर के बारे में जानता है। वास्तविकता में, जब परमेश्वर मनुष्य को पूर्ण बनाता और लाभ प्रदान करता है, तो वह उन्हें व्यावहारिक परमेश्वर के कामों के बारे में बता रहा होता है। वह व्यावहारिक परमेश्वर के कार्य का उपयोग लोगों को देह धारण का महत्व दिखाने और यह दिखाने के लिए कर रहा होता है कि परमेश्वर का आत्मा मनुष्य के सामने वास्तव में प्रकट हुआ है। जब लोग परमेश्वर के द्वारा लाभ प्राप्त करते हैं और उसके द्वारा पूर्ण बनाए जाते हैं, व्यावहारिक परमेश्वर का प्रकटीकरण उन्हें जीत लेता है, व्यावहारिक परमेश्वर के वचन उन्हें बदल देते हैं, और उनके भीतर अपना जीवन डाल देते हैं, उन लोगों को उस चीज से भर देते हैं जो वह है (चाहे वह उनकी मानवीयता का अस्तित्व हो या उसकी ईश्वरीयता का), उन लोगों को अपने वचनों के तत्व से भर देता है, और लोगों को उसके वचन के अनुसार जीने देता है। जब परमेश्वर लोगों को लाभ प्रदान करता है, वह ऐसा मुख्य रूप से व्यावहारिक परमेश्वर के वचनों और वाणियों का उपयोग करके करता है ताकि लोगों की कमियों से निपट सके, और उनके विद्रोही स्वभाव को पहचान सके और उन्हें प्रकट कर सके, इस प्रकार उन्हें वह चीजें प्रदान करता है जिनकी उन्हें जरूरत है, और उन्हें दिखाता है कि परमेश्वर उनके बीच आया है। सबसे महत्वपूर्ण बात, व्यावहारिक परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला कार्य प्रत्येक मनुष्य को शैतान के प्रभाव से बचाना है, उन्हें गंदगी वाली जगह से दूर ले जाना है, और मनुष्य को उनके भ्रष्ट स्वभाव से छुटकारा दिलाना है। व्यावहारिक परमेश्वर के द्वारा लाभ हासिल किये जाने का सबसे गहरा महत्व यह है कि इस योग्य बने कि उन्हें एक आदर्श, एक नमूने के जैसे माने, और एक सामान्य मानवीयता को जीए, और इस योग्य बने कि व्यावहारिक परमेश्वर के वचनों और मांगों को बिना किसी विचलन या उल्लंघन के क्रिया में लागू कर सके, ऐसे कि वे जो कुछ भी कहें तुम उसे अभ्यास में लाओ, और तुम इस योग्य होते हो कि जो कुछ भी वह कहता है तुम उसे प्राप्त कर सको। फिर तुम परमेश्वर के द्वारा लाभ हासिल कर चुके होगे। जब तुम परमेश्वर के द्वारा लाभ हासिल कर लेते हो तो तुम में केवल पवित्र आत्मा का कार्य ही नहीं होता है; सैद्धांतिक रूप से तुम व्यावहारिक परमेश्वर की आवश्यकताओं को जी पाते हो। सिर्फ़ आत्मा के कार्य होने का अर्थ यह नहीं है कि तुम्हारे पास जीवन है; कुंजी यह है कि क्या तुम वह कर पाते हो जो व्यावहारिक परमेश्वर ने तुमसे कहा है, जो इससे संबंधित है कि क्या तुम परमेश्वर के द्वारा लाभ हासिल कर सकते हो कि नहीं। ये देह में व्यावहारिक परमेश्वर के द्वारा कार्य पूरा करने के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। अर्थात, परमेश्वर सचमुच और वाकई देह में प्रकट हो कर, तथा जीवंत और सजीव होकर, लोगों द्वारा देखे जाकर, देह में आत्मा का काम वास्तव में करके, और देह में लोगों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करके लोगों के समूह को लाभ प्रदान करता है। परमेश्वर देह में मुख्यतः इसलिए आता है कि मनुष्य परमेश्वर के असली कार्यों को देख सके, निराकार आत्मा को देह में अहसास कर सके, और वह मनुष्य के द्वारा स्पर्श किया और देखा जा सके। इस तरह से, जिन्हें वह पूर्ण बनाता है वह ही उसे जी पाएँगे, उसके द्वारा लाभ हासिल कर पाएँगे, और वह उसके हृदय के अनुसार हो पाएँगे। यदि परमेश्वर केवल स्वर्ग में ही बोलता, और वास्तव में पृथ्वी पर नहीं आता, तो लोग अब भी परमेश्वर को जानने के अयोग्य होते; वे खोखले सिद्धांत का उप्तोग करते हुए परमेश्वर के कार्यों का केवल उपदेश दे पाते, और उनके पास परमेश्वर के वचन वास्तविकता के रूप में नहीं होते। परमेश्वर पृथ्वी पर मुख्यतः उनके लिए एक प्रतिमान और आदर्श का कार्य करने के लिए आता है जिन्हें परमेश्वर द्वारा प्राप्त किया जाता है। सिर्फ़ इसी ढंग से मनुष्य व्यावहारिक रूप से परमेश्वर को जान, स्पर्श, और देख सकता है; और केवल इसी ढंग से मनुष्य सचमुच में परमेश्वर के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

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