परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक बहुत गंभीर समस्या : विश्वासघात (2)" | अंश 362

शैतान द्वारा भ्रष्ट की गई सभी आत्माएँ, शैतान के अधिकार क्षेत्र के नियंत्रण में हैं। केवल वे लोग जो मसीह में विश्वास करते हैं, शैतान के शिविर से बचा कर, अलग कर दिए गए हैं, और आज के राज्य में लाए गए हैं। अब ये लोग शैतान के प्रभाव में और नहीं रहते हैं। फिर भी, मनुष्य की प्रकृति अभी भी मनुष्य के शरीर में जड़ जमाए हुए है। कहने का अर्थ है कि भले ही तुम लोगों की आत्माएँ बचा ली गई हैं, किंतु तुम लोगों की प्रकृति अभी भी पहले जैसी ही दिखायी देती है और इस बात की संभावना अभी भी सौ प्रतिशत रहती है कि तुम लोग मेरे साथ विश्वासघात करोगे। यही कारण है कि मेरा कार्य इतने लंबे समय तक चलता है, क्योंकि तुम्हारी प्रकृति दु:साध्य है। अब तुम अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए उतनी अधिक पीड़ा उठा रहे हो जितना तुम उठा सकते हो, लेकिन यह एक अखण्डनीय तथ्य है : तुम लोगों में से प्रत्येक मुझे धोखा देने और शैतान के अधिकार क्षेत्र, उसके शिविर में लौटने, और अपने पुराने जीवन में वापस जाने में सक्षम है। उस समय, तुम लोगों के पास लेशमात्र मानवता या इंसान की समानता, जैसी कि अभी तुम्हारे पास है, होना संभव नहीं होगा। गंभीर मामलों में, तुम लोगों को नष्ट कर दिया जाएगा और इसके अलावा तुम लोगों को, फिर कभी भी अवतरण नहीं करने, बल्कि गंभीर रूप से दंडित करने के लिए अनंतकाल तक के लिए अभिशप्त कर दिया जाएगा। यह तुम लोगों के सामने रखी गई समस्या है। मैं तुम लोगों को इस तरह से याद दिला रहा हूँ ताकि पहला, मेरा कार्य व्यर्थ नहीं होगा, और दूसरे, तुम सभी लोग प्रकाश के दिनों में रह सको। वास्तव में, मेरा कार्य व्यर्थ होना सर्वाधिक महत्वपूर्ण समस्या नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि तुम लोगों के लिए खुशहाल जीवन और एक अद्भुत भविष्य पाने में सक्षम होना। मेरा कार्य लोगों की आत्माओं को बचाने का कार्य है। यदि तुम्हारी आत्मा शैतान के हाथों में पड़ जाती है, तो तुम्हारा शरीर शांति में नहीं रहेगा। यदि मैं तुम्हारे शरीर की रक्षा कर रहा हूँ, तो तुम्हारी आत्मा निश्चित रूप से मेरी देखभाल के अधीन होगी। यदि मैं तुमसे वास्तव में घृणा करूँ, तो तुम्हारा शरीर और आत्मा तुरंत शैतान के हाथों में पड़ जाएँगे। क्या तुम कल्पना कर सकते हो कि तब तुम्हारी स्थिति किस तरह की होगी? यदि एक दिन मेरे वचनों का तुम पर कोई असर न हो, तो मैं तुम सभी लोगों को तब तक के लिए दोगुनी यातना देने के लिए शैतान को सौंप दूँगा जब तक कि मेरा गुस्सा पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो जाता है, अथवा मैं कभी न सुधर सकने योग्य तुम मानवों को व्यक्तिगत रूप से दंडित करूँगा, क्योंकि मेरे साथ विश्वासघात करने वाले तुम लोगों के हृदय कभी नहीं बदलेंगे।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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