परमेश्वर के दैनिक वचन | "युवा और वृद्ध लोगों के लिए वचन" | अंश 344

यद्यपि मेरा कार्य तुम लोगों के लिए बहुत सहायक है, किंतु मेरे वचन तुम लोगों पर हमेशा खो जाते हैं और बेकार हो जाते हैं। मेरे द्वारा पूर्ण बनाए जाने के लिए किसी को ढूँढ़ पाना मुश्किल है, और आज मैं तुम लोगों के बारे में आशा लगभग खो चुका हूँ। मैंने तुम्हारे बीच कई सालों तक खोज की है, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ पाना मुश्किल है, जो मेरा विश्वासपात्र बन सकता हो। मुझे लगता है, जैसे तुम लोगों के अंदर कार्य करना जारी रखने का मुझे कोई भरोसा नहीं है, और न कोई प्रेम है, जिससे मैं तुमसे प्रेम करना जारी रखूँ। इसका कारण यह है कि मैं बहुत पहले ही तुम लोगों की उन तुच्छ, दयनीय उपलब्धियों से निराश हो गया था; ऐसा लगता है, जैसे मैंने कभी तुम लोगों के बीच बात नहीं की और कभी तुम लोगों में कार्य नहीं किया। तुम्हारी उपलब्धियाँ कितनी घृणास्पद हैं। तुम लोग अपने लिए हमेशा बरबादी और शर्मिंदगी लाते हो और तुम्हारा लगभग कोई मूल्य नहीं है। मैं शायद ही तुम लोगों में इनसान की समानता खोज पाऊँ, न ही मैं तुम्हारे अंदर इनसान होने का चिह्न सूँघ सकता हूँ। तुम्हारी ताज़ी सुगंध कहाँ है? वह कीमत कहाँ है, जो तुम लोगों ने कई वर्षों में चुकाई है, और उसके परिणाम कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को कभी कोई परिणाम नहीं मिला? मेरे कार्य में अब एक नई शुरुआत है, एक नया प्रारंभ। मैं भव्य योजनाएँ पूरी करने जा रहा हूँ तथा मैं और भी बड़ा कार्य संपन्न करना चाहता हूँ, फिर भी तुम लोग पहले की तरह कीचड़ में लोट रहे हो, अतीत के गंदे पानी में रहते हुए, और व्यावहारिक रूप से तुम अपनी मूल दुर्दशा से खुद को छुड़ाने में असफल रहे हो। इसलिए तुम लोगों ने अभी भी मेरे वचनों से कुछ हासिल नहीं किया है। तुम लोगों ने अब तक खुद को कीचड़ और गंदे पानी के अपने मूल स्थान से नहीं छुड़ाया है, और तुम लोग केवल मेरे वचनों को जानते हो, लेकिन तुमने वास्तव में मेरे वचनों की मुक्ति के दायरे में प्रवेश नहीं किया है, इसलिए मेरे वचन कभी भी तुम लोगों के लिए प्रकट नहीं गए हैं; वे भविष्यवाणी की एक किताब की तरह हैं, जो हजारों वर्षों से मुहरबंद रही है। मैं तुम लोगों के जीवन में प्रकट होता हूँ, लेकिन तुम लोग इससे हमेशा अनजान रहते हो। यहाँ तक कि तुम लोग मुझे पहचानते भी नहीं। मेरे द्वारा कहे गए वचनों में से लगभग आधे वचन तुम लोगों का न्याय करते हैं, और वे उससे आधा प्रभाव ही हासिल कर पाते हैं, जितना कि उन्हें करना चाहिए, जो तुम्हारे भीतर गहरा भय पैदा करने के लिए है। शेष आधे वचन तुम लोगों को जीवन के बारे में सिखाने के लिए, और स्वयं को संचालित कैसे करें, इस बारे में बताने के लिए हैं। लेकिन जहाँ तक तुम्हारा संबंध है, ऐसा लगता है, जैसे वे तुम लोगों के लिए मौजूद ही नहीं हैं, या जैसे कि तुम लोग बच्चों की बातें सुन रहे थे, ऐसी बातें जिन्हें सुनकर तुम हमेशा दबे-ढके ढंग से मुसकरा देते हो, लेकिन उन पर कार्रवाई कुछ नहीं करते। तुम लोग इन चीज़ों के बारे में कभी चिंतित नहीं रहे हो; तुम लोगों ने हमेशा मेरे कार्यों को मुख्यत: जिज्ञासा के नाप पर ही देखा है, जिसका परिणाम यह हुआ है कि अब तुम लोग अँधेरों में गिर गए हो और प्रकाश को देख नहीं सकते, और इसलिए तुम लोग अँधेरे में दयनीय ढंग से रो रहे हो। मैं जो चाहता हूँ, वह तुम लोगों की आज्ञाकारिता है, तुम्हारी बेशर्त आज्ञाकारिता, और इससे भी बढ़कर, मेरी अपेक्षा है कि तुम लोग मेरी कही हर चीज़ के बारे में पूरी तरह से निश्चित रहो। तुम लोगों को उपेक्षा का रवैया नहीं अपनाना चाहिए और खास तौर से मेरी कही चीज़ों के बारे में चयनात्मक व्यवहार नहीं करना चाहिए, न ही मेरे वचनों और कार्य के प्रति उदासीन रहना चाहिए, जिसके कि तुम आदी हो। मेरा कार्य तुम लोगों के बीच किया जाता है और मैंने तुम लोगों के लिए बहुत सारे वचन प्रदान किए हैं, लेकिन यदि तुम लोग मेरे साथ ऐसा व्यवहार करोगे, तो जो कुछ तुमने न तो हासिल किया और न ही जिसे अभ्यास में लाए हो, उसे मैं केवल गैर-यहूदी परिवारों को दे सकता हूँ। समस्त सृजित प्राणियों में से कौन है, जिसे मैंने अपने हाथों में नहीं रखा हुआ है? तुम लोगों में से अधिकांश "पके बुढ़ापे" की उम्र के हो और तुम लोगों के पास इस तरह के कार्य को स्वीकार करने की ऊर्जा नहीं है, जो मेरे पास है। तुम लोग मुश्किल से गुज़ारा करने वाले हानहाओ पक्षी की तरह हो, और तुम ने कभी भी मेरे वचनों को गंभीरता से नहीं लिया है। युवा लोग अत्यंत व्यर्थ और अति-आसक्त हैं और मेरे कार्य पर और भी कम ध्यान देते हैं। वे मेरे भोज के व्यंजनों का आनंद लेने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते; वे उस छोटे-से पक्षी की तरह हैं, जो अपने पिंजरे से बाहर निकलकर बहुत दूर जाने के लिए उड़ गया है। इस तरह के युवा और वृद्ध लोग मेरे लिए कैसे उपयोगी हो सकते हैं?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 249

मेरी दया उन पर व्यक्त होती है जो मुझसे प्रेम करते हैं और अपने आपको नकारते हैं। और दुष्टों को मिला दण्ड निश्चित रूप से मेरे धार्मिक स्वभाव...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 172

ऐसा कार्य जो पवित्र आत्मा की मुख्य धारा में है वह पवित्र आत्मा का कार्य है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह परमेश्वर का स्वयं का कार्य है...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रार्थना की क्रिया के विषय में" | अंश 416

अपने प्रतिदिन के जीवन में तुम प्रार्थना पर बिलकुल ध्यान नहीं देते। लोगों ने प्रार्थना को सदैव नजरअंदाज किया है। प्रार्थनाएँ लापरवाही से की...