परमेश्वर के दैनिक वचन | "गंतव्य के बारे में" | अंश 335

तुम्हारा गंतव्य और तुम्हारी नियति तुम लोगों के लिए बहुत अहम हैं—वे गंभीर चिंता के विषय हैं। तुम मानते हो कि अगर तुम अत्यंत सावधानी से कार्य नहीं करते, तो इसका अर्थ यह होगा कि तुम्हारा कोई गंतव्य नहीं होगा, कि तुमने अपना भाग्य बिगाड़ लिया है। लेकिन क्या तुम लोगों ने कभी सोचा है कि अगर कोई मात्र अपने गंतव्य के लिए प्रयास करता है, तो वह व्यर्थ ही परिश्रम करता है? ऐसे प्रयास सच्चे नहीं हैं—वे नकली और कपटपूर्ण हैं। यदि ऐसा है, तो जो लोग केवल अपने गंतव्य के लिए कार्य करते हैं, वे अपनी अंतिम पराजय की दहलीज पर हैं, क्योंकि परमेश्वर में व्यक्ति के विश्वास की विफलता धोखे के कारण होती है। मैं पहले कह चुका हूँ कि मुझे चाटुकारिता या खुशामद या अपने साथ उत्साह के साथ व्यवहार किया जाना पसंद नहीं है। मुझे ऐसे ईमानदार लोग पसंद हैं, जो मेरे सत्य और अपेक्षाओं का सामना कर सकें। इससे भी अधिक मुझे तब अच्छा लगता है, जब लोग मेरे हृदय के प्रति अत्यधिक चिंता या आदर का भाव दिखाते हैं, और जब वे मेरी खातिर सब-कुछ छोड़ देने में सक्षम होते हैं। केवल इसी तरह से मेरे हृदय को सुकून मिल सकता है। इस समय, तुम लोगों के विषय में ऐसी कितनी चीज़ें हैं, जो मुझे नापसंद हैं? तुम लोगों के विषय में ऐसी कितनी चीज़ें हैं, जो मुझे पसंद हैं? क्या ऐसा हो सकता है कि तुम लोगों में से किसी ने भी कुरूपता की वे सभी विभिन्न अभिव्यक्तियाँ महसूस न की हों, जो तुम लोगों ने अपने गंतव्य की खातिर प्रदर्शित की हैं?

अपने दिल में मैं ऐसे किसी भी दिल के लिए हानिकारक नहीं होना चाहता, जो सकारात्मक है और ऊपर उठने की आकांक्षा रखता है, और ऐसे किसी व्यक्ति की ऊर्जा कम करने की इच्छा तो मैं बिलकुल भी नहीं रखता, जो निष्ठा से अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहा है। फिर भी, मुझे तुम लोगों में से प्रत्येक को तुम्हारी कमियों और तुम्हारे दिलों के गहनतम कोनों में मौजूद गंदी आत्मा की याद ज़रूर दिलानी होगी। मैं ऐसा इस उम्मीद में करता हूँ कि तुम लोग मेरे वचनों के रूबरू आने के लिए अपना सच्चा हृदय अर्पित करने में सक्षम होगे, क्योंकि मुझे सबसे ज्यादा घृणा लोगों द्वारा मेरे साथ किए जाने वाले धोखे से है। मैं केवल यह उम्मीद करता हूँ कि मेरे कार्य के अंतिम चरण में तुम लोग अपना सर्वोत्कृष्ट निष्पादन देने में सक्षम होगे, और कि तुम अपने को पूरे मन से समर्पित करोगे, अधूरे मन से नहीं। बेशक, मैं यह उम्मीद भी करता हूँ कि तुम लोगों को सर्वोत्तम गंतव्य प्राप्त हो सके। फिर भी, मेरे पास अभी भी मेरी अपनी आवश्यकता हैं, और वह यह कि तुम लोग मुझे अपनी आत्मा और अंतिम भक्ति समर्पित करने में सर्वोत्तम निर्णय करो। अगर किसी की भक्ति एकनिष्ठ नहीं है, तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से शैतान की सँजोई हुई संपत्ति है, और मैं आगे उसे इस्तेमाल करने के लिए नहीं रखूँगा, बल्कि उसे उसके माता-पिता द्वारा देखे-भाले जाने के लिए घर भेज दूँगा। मेरा कार्य तुम लोगों के लिए एक बड़ी मदद है; मैं तुम लोगों से केवल एक ईमानदार और ऊपर उठने का आकांक्षी हृदय पाने की उम्मीद करता हूँ, लेकिन मेरे हाथ अभी तक खाली हैं। इस बारे में सोचो : अगर मैं किसी दिन इतना दुखी हूँगा कि उसे शब्दों में बयान न कर सकूँ, तो फिर तुम लोगों के प्रति मेरा रवैया क्या होगा? क्या मैं तब भी वैसा ही सौम्य हूँगा, जैसा अब हूँ? क्या मेरा हृदय तब भी उतना ही शांत होगा, जितना अब है? क्या तुम लोग उस व्यक्ति की भावनाएँ समझते हो, जिसने कड़ी मेहनत से खेत जोता हो और उसे फसल की कटाई में अन्न का एक दाना भी नसीब न हुआ हो? क्या तुम लोग यह समझते हो कि आदमी को बड़ा आघात लगने पर उसके दिल को कितनी भारी चोट पहुँचती है? क्या तुम लोग उस व्यक्ति की कड़ुवाहट का अंदाजा लगा सकते हो, जो कभी आशा से भरा हो, पर जिसे ख़राब शर्तों पर विदा होना पड़ा हो? क्या तुम लोगों ने उस व्यक्ति का क्रोध निकलते देखा है, जिसे उत्तेजित किया गया हो? क्या तुम लोग उस व्यक्ति की बदला लेने की आतुरता जान सकते हो, जिसके साथ शत्रुता और धोखे का व्यवहार किया गया हो? अगर तुम इन लोगों की मानसिकता समझ सकते हो, तो मैं सोचता हूँ, तुम्हारे लिए यह कल्पना करना कठिन नहीं होना चाहिए कि अपने प्रतिशोध के समय परमेश्वर का रवैया क्या होगा! अंत में, मुझे उम्मीद है कि तुम सब अपने गंतव्य के लिए गंभीर प्रयास करोगे; हालाँकि, अच्छा होगा कि तुम अपने प्रयासों में कपटपूर्ण साधन न अपनाओ, अन्यथा मैं अपने दिल में तुमसे निराश बना रहूँगा। और यह निराशा कहाँ ले जाती है? क्या तुम लोग स्वयं को ही बेवकूफ नहीं बना रहे हो? जो लोग अपने गंतव्य के विषय में सोचते हैं, पर फिर भी उसे बरबाद कर देते हैं, वे बचाए जाने के बहुत कम योग्य होते हैं। यहाँ तक कि अगर वे उत्तेजित और क्रोधित भी हो जाएँ, तो ऐसे व्यक्तियों पर कौन दया करेगा? संक्षेप में, मैं अभी भी तुम लोगों के लिए ऐसे गंतव्य की कामना करता हूँ, जो उपयुक्त और अच्छा दोनों हो, और उससे भी बढ़कर, मैं उम्मीद करता हूँ कि तुम लोगों में से कोई भी विपत्ति में नहीं फँसेगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

उम्मीद करता है परमेश्वर कि इंसान उसके वचनों के प्रति निष्ठावान बन सके

तुम्हारी मंज़िल और नियति तुम्हारी, तुम्हें लगती है सबसे अहम। ऐसा मानते हो तुम ना रहे ख़बरदार अगर, तो तबाह कर दोगे तुम लोग उन्हें।

तमाम कोशिशें तुम्हारी बेकार हैं अपनी मंज़िल के लिये, क्या एहसास है तुम्हें? कपट हैं, धोखा हैं वो।

मंज़िल के लिये काम करते जो मिलेगी उन्हें अंतिम हार, क्योंकि उनके धोखे की वजह से अपनी आस्था में हार जाते हैं लोग।

नापसंद है परमेश्वर को खुशामद अपनी या आतुरता से कोई उससे पेश आये। पसन्द हैं वो नेक लोग जो उसके सच का सामना करें, और उसकी उम्मीदों पर खरे उतरें। पसन्द है उसे, जब रखता है इंसान पूरा ख़्याल उसके दिल का। त्याग देंगे जब लोग अपना सर्वस्व उसके लिए, तभी मिलेगा सुकून, दिल को परमेश्वर के।

नहीं चाहता परमेश्वर किसी दिल को दुखाना, प्रगति में लगा है जो लगन से, नहीं चाहता है कम करना जोश किसी का निभाए जो पूरी निष्ठा से फ़र्ज़ अपना।

फिर भी, याद दिलायेगा तुम्हें परमेश्वर तुम्हारी कमियों की, तुम्हारे दिल में गहरी जड़ें जमाये बैठी तुम्हारी मलिन आत्मा की।

उसे उम्मीद है सामना कर लोगे तुम उसके वचनों का सच्चे दिल से, क्योंकि नफ़रत है परमेश्वर को उनसे, जो उसके साथ धोखा करते हैं।

नापसंद है परमेश्वर को खुशामद अपनी या आतुरता से कोई उससे पेश आये। पसन्द हैं वो नेक लोग जो उसके सच का सामना करें, और उसकी उम्मीदों पर खरे उतरें। पसन्द है उसे, जब रखता है इंसान पूरा ख़्याल उसके दिल का। त्याग देंगे जब लोग अपना सर्वस्व उसके लिए, उसके लिए, तभी मिलेगा सुकून, दिल को परमेश्वर के।

उम्मीद करता है तुमसे परमेश्वर, करो बेहतरीन प्रदर्शन आख़िरी पड़ाव पर, आधे-अधूरे मन से नहीं, काम करो पूरे समर्पण से। उम्मीद करता है परमेश्वर, अच्छी मंज़िल हो तुम्हारी, फिर भी अपेक्षाएँ हैं उसकी, तुम बेहतरीन विकल्प चुनोगे, उसे अपना पूरा समर्पण दोगे।

नापसंद है परमेश्वर को खुशामद अपनी या आतुरता से कोई उससे पेश आये। पसन्द हैं वो नेक लोग जो उसके सच का सामना करें, और उसकी उम्मीदों पर खरे उतरें। पसन्द है उसे, जब रखता है इंसान पूरा ख़्याल उसके दिल का। त्याग देंगे जब लोग अपना सर्वस्व उसके लिए, तभी मिलेगा सुकून, दिल को परमेश्वर के।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

परमेश्वर के दैनिक वचन | "कलीसिया जीवन और वास्तविक जीवन पर विचार-विमर्श" | अंश 437

कलीसियाई जीवन केवल इस प्रकार का जीवन है जहाँ लोग परमेश्वर के वचनों का स्वाद लेने के लिए एकत्र होते हैं, और यह किसी व्यक्ति के जीवन का एक...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 32

अंत के दिनों में परमेश्वर मुख्य रूप से अपने वचन बोलने के लिए आया है। वह आत्मा के दृष्टिकोण से, मनुष्य के दृष्टिकोण से, और तीसरे व्यक्ति के...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "मात्र उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं" | अंश 251

परमेश्वर ने इन अशुद्ध और भ्रष्ट लोगों में कार्य करने और इस समूह के लोगों को पूर्ण बनाने के लिए इस स्तर तक स्वयं को दीन किया है। परमेश्वर...