परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल शुद्धिकरण का अनुभव करके ही मनुष्य सच्चे प्रेम से युक्त हो सकता है" | अंश 507

तुम सभी परीक्षण और शुद्धिकरण के बीच हो। शुद्धिकरण के दौरान तुम्हें परमेश्वर से प्रेम कैसे करना चाहिए? शुद्धिकरण का अनुभव करने के बाद लोग परमेश्वर को सच्ची स्तुति अर्पित कर पाते हैं, और शुद्धिकरण के दौरान वे यह देख सकते हैं कि उनमें बहुत कमी है। जितना बड़ा तुम्हारा शुद्धिकरण होता है, उतना ही अधिक तुम देह-सुख त्याग सकते हो; जितना बड़ा लोगों का शुद्धिकरण होता है, उतना ही अधिक परमेश्वर के प्रति उनका प्रेम होता है। तुम लोगों को यह बात समझनी चाहिए। लोगों का शुद्धिकरण क्यों किया जाना चाहिए? इसका लक्ष्य क्या परिणाम प्राप्त करना है? मनुष्य में परमेश्वर के शुद्धिकरण के कार्य का क्या अर्थ है? यदि तुम सच में परमेश्वर को खोजते हो, तो एक ख़ास बिंदु तक उसके शुद्धिकरण का अनुभव कर लेने पर तुम महसूस करोगे कि यह बहुत अच्छा और अत्यंत आवश्यक है। शुद्धिकरण के दौरान मनुष्य को परमेश्वर से कैसे प्रेम करना चाहिए? उसके शुद्धिकरण को स्वीकार करने के लिए उससे प्रेम करने के संकल्प का प्रयोग करके : शुद्धिकरण के दौरान तुम्हें भीतर से यातना दी जाती है, जैसे कोई चाकू तुम्हारे हृदय में घुमाया जा रहा हो, फिर भी तुम अपने उस हृदय का प्रयोग करके परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए तैयार हो, जो उससे प्रेम करता है, और तुम देह की चिंता करने को तैयार नहीं हो। परमेश्वर से प्रेम का अभ्यास करने का यही अर्थ है। तुम भीतर से आहत हो, और तुम्हारी पीड़ा एक ख़ास बिंदु तक पहुँच गई है, फिर भी तुम यह कहते हुए परमेश्वर के समक्ष आने और प्रार्थना करने को तैयार हो : "हे परमेश्वर! मैं तुझे नहीं छोड़ सकता। यद्यपि मेरे भीतर अंधकार है, फिर भी मैं तुझे संतुष्ट करना चाहता हूँ; तू मेरे हृदय को जानता है, और मैं चाहता हूँ कि तू अपना और अधिक प्रेम मेरे भीतर निवेश कर।" यह शुद्धिकरण के समय का अभ्यास है। यदि तुम परमेश्वर से प्रेम का नींव के रूप में प्रयोग करो, तो शुद्धिकरण तुम्हें परमेश्वर के और निकट ला सकता है और तुम्हें परमेश्वर के साथ और अधिक घनिष्ठ बना सकता है। चूँकि तुम परमेश्वर पर विश्वास करते हो, इसलिए तुम्हें अपने हृदय को परमेश्वर के समक्ष सौंप देना चाहिए। यदि तुम अपने हृदय को परमेश्वर पर चढ़ा दो और उसे उसके सामने रख दो, तो शुद्धिकरण के दौरान तुम्हारे लिए परमेश्वर को नकारना या त्यागना असंभव होगा। इस तरह से परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध पहले से अधिक घनिष्ठ और पहले से अधिक सामान्य हो जाएगा, और परमेश्वर के साथ तुम्हारा समागम पहले से अधिक नियमित हो जाएगा। यदि तुम सदैव ऐसे ही अभ्यास करोगे, तो तुम परमेश्वर के प्रकाश में और अधिक समय बिताओगे, और उसके वचनों के मार्गदर्शन में और अधिक समय व्यतीत करोगे, तुम्हारे स्वभाव में भी अधिक से अधिक बदलाव आएँगे, और तुम्हारा ज्ञान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाएगा। जब वह दिन आएगा, जब परमेश्वर के परीक्षण अचानक तुम पर आ पड़ेंगे, तो तुम न केवल परमेश्वर की ओर खड़े रह पाओगे, बल्कि परमेश्वर की गवाही भी दे पाओगे। उस समय तुम अय्यूब और पतरस के समान होगे। परमेश्वर की गवाही देकर तुम सच में उससे प्रेम करोगे, और ख़ुशी-ख़ुशी उसके लिए अपना जीवन बलिदान कर दोगे; तुम परमेश्वर के गवाह होगे, और परमेश्वर के प्रिय व्यक्ति होगे। वह प्रेम, जिसने शुद्धिकरण का अनुभव किया हो, मज़बूत होता है, कमज़ोर नहीं। इस बात की परवाह किए बिना कि परमेश्वर कब और कैसे तुम्हें अपने परीक्षणों का भागी बनाता है, तुम इस बात की चिंता नहीं करोगे कि तुम जीओगे या मरोगे, तुम ख़ुशी-ख़ुशी परमेश्वर के लिए सब-कुछ त्याग दोगे, और परमेश्वर के लिए कोई भी बात ख़ुशी-ख़ुशी सहन कर लोगे—इस प्रकार तुम्हारा प्रेम शुद्ध होगा, और तुम्हारा विश्वास वास्तविक होगा। केवल तभी तुम ऐसे व्यक्ति बनोगे, जिसे सचमुच परमेश्वर द्वारा प्रेम किया जाता है, और जिसे सचमुच परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाया गया है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अगर तुम ईश्वर में विश्वास करते हो तो उसे अपना हृदय सौंप दो

क्योंकि विश्वास तुम ईश्वर में करते हो, दे दो उसे अपना दिल। अर्पित कर दो अपना दिल, उसके शुद्ध होने पर, न इनकार करोगे, न छोड़ोगे तुम ईश्वर को। ईश्वर से रिश्ता तुम्हारा सामान्य हो जाएगा। और परमेश्वर से तुम्हारी बात पहले से कहीं ज़्यादा होगी। अगर इस तरह सदा अभ्यास करोगे, तो ईश्वर की रोशनी में ज़्यादा रहोगे, उसके वचन तुम्हें ज़्यादा राह दिखाएँगे, ज़्यादा बदलेगा स्वभाव तुम्हारा। दिन-ब-दिन संचित होगा, ज्ञान तुम्हारा।

जब आएगा दिन और अचानक तुम ईश्वर के परीक्षणों से गुज़रोगे, तो न सिर्फ ईश्वर के साथ खड़े होगे, बल्कि उसकी गवाही दोगे तुम। तब अय्यूब और पतरस से इंसान बन जाओगे तुम। क्योंकि विश्वास तुम ईश्वर में करते हो, दे दो उसे अपना दिल। अर्पित कर दो अपना दिल, उसके शुद्ध होने पर, न इनकार करोगे, न छोड़ोगे तुम ईश्वर को। ईश्वर से रिश्ता तुम्हारा सामान्य हो जाएगा। और परमेश्वर से तुम्हारी बात पहले से कहीं ज़्यादा होगी।

ईश्वर की गवाही देकर तुम उसे, सच में प्यार करने वाले इंसान बन जाओगे। उसके लिए तुम जान दे पाओगे, उसकी गवाही बन जाओगे। तुम प्रिय हो जाओगे, तुम ईश्वर के प्रिय हो जाओगे। क्योंकि विश्वास तुम ईश्वर में करते हो, दे दो उसे अपना दिल। अर्पित कर दो अपना दिल, उसके शुद्ध होने पर, न इनकार करोगे, न छोड़ोगे तुम ईश्वर को। ईश्वर से रिश्ता तुम्हारा सामान्य हो जाएगा। और परमेश्वर से तुम्हारी बात पहले से कहीं ज़्यादा होगी।

शुद्धिकरण से गुज़रा हुआ प्यार, कमज़ोर नहीं, ये मज़बूत होता है ईश्वर तुम्हारा परीक्षण कभी भी, कैसे भी ले, तुम जियोगे या मरोगे ये विचार नहीं करोगे।

तुम ईश्वर के लिए खुशी से सब-कुछ त्याग दोगे, खुशी से सब-कुछ तुम सह लोगे। इस तरह प्रेम शुद्ध होगा, होगी आस्था असली तुम्हारी, तब प्रेम करेगा ईश्वर तुम्हें। तभी तुम ईश्वर द्वारा पूर्ण बन पाओगे। क्योंकि विश्वास तुम ईश्वर में करते हो, दे दो उसे अपना दिल। अर्पित कर दो अपना दिल, उसके शुद्ध होने पर, न इनकार करोगे, न छोड़ोगे तुम ईश्वर को। ईश्वर से रिश्ता तुम्हारा सामान्य हो जाएगा। और परमेश्वर से तुम्हारी बात पहले से कहीं ज़्यादा होगी।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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