परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" | अंश 397

परमेश्वर का अनुसरण करने में प्रमुख महत्व इस बात का है कि हर चीज़ आज परमेश्वर के वचनों के अनुसार होनी चाहिए: चाहे तुम जीवन प्रवेश का अनुसरण कर रहे हो या परमेश्वर की इच्छापूर्ति, सब कुछ आज परमेश्वर के वचनों के आस-पास ही केन्द्रित होना चाहिए। यदि तुम्हारे समागम और अनुसरण परमेश्वर के वचनों के आसपास केन्द्रित नहीं होते हैं, तो तुम परमेश्वर के वचनों के लिए एक अजनबी हो, और पवित्र आत्मा के कार्य से पूरी तरह से वंचित हो। परमेश्वर ऐसे लोग चाहता है जो उसके पदचिन्हों का अनुसरण करें। भले ही जो तुमने पहले समझा था वह कितना ही अद्भुत और शुद्ध क्यों न हो, परमेश्वर उसे नहीं चाहता है, और यदि तुम ऐसी चीजों को दूर नहीं कर सकते, तो वे भविष्य में तुम्हारे प्रवेश के लिए एक बड़ी बाधा होंगी। वे सभी धन्य हैं जो पवित्र आत्मा के वर्तमान प्रकाश का अनुसरण करने में सक्षम हैं। पिछले युगों के लोग भी परमेश्वर के नक़्शेकदम पर चलते थे, फिर भी वे आज तक इसका अनुसरण नहीं कर सके; यह आखिरी दिनों के लोगों के लिए आशीर्वाद है। जो लोग पवित्र आत्मा के वर्तमान कार्य का अनुसरण कर सकते हैं, और जो परमेश्वर के नक्शेकदम पर चलने में सक्षम हैं, इस तरह कि चाहे परमेश्वर उन्हें जहाँ कहीं भी ले जाए वे उसका अनुसरण करते ही हैं—वे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त है। जो लोग पवित्र आत्मा के वर्तमान कार्य का अनुसरण नहीं करते हैं, उन्होंने परमेश्वर के वचनों के कार्य में प्रवेश नहीं किया है, और चाहे वे कितना भी काम करें, या उनकी पीड़ा कितनी भी बड़ी हो, या वे कितनी ही भाग-दौड़ करें, परमेश्वर के लिए इनमें से किसी बात का कोई महत्व नहीं है, और वह उनकी सराहना नहीं करेगा। आज, जो लोग परमेश्वर के वर्तमान वचनों का पालन करते हैं, वे पवित्र आत्मा की धारा में हैं; जो लोग आज परमेश्वर के वचनों से अनभिज्ञ हैं, वे पवित्र आत्मा की धारा के बाहर हैं, और परमेश्वर की सराहना ऐसे लोगों के लिए नहीं है। वह सेवा जो पवित्र आत्मा की वर्तमान उक्तियों से विभाजित हो, वह देह की और धारणाओं की सेवा है, और यह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार होने में असमर्थ है। यदि लोग धार्मिक अवधारणाओं में रहते हैं, तो वे ऐसा कुछ भी करने में असमर्थ होते हैं जो परमेश्वर की इच्छा के लिए उपयुक्त हो, और भले ही वे परमेश्वर की सेवा करें, वे अपनी कल्पना और अवधारणाओं के घेरे में सेवा करते हैं, और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सेवा करने में पूरी तरह से असमर्थ होते हैं। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने में असमर्थ हैं, वे परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते हैं, और जो परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते हैं वे परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकते। परमेश्वर ऐसी सेवा चाहता है जो उसके दिल के मुताबिक हो; वह ऐसी सेवा नहीं चाहता है जो कि धारणाओं और देह की हो। यदि लोग पवित्र आत्मा के कार्य के चरणों का पालन करने में असमर्थ हैं, तो वे अवधारणाओं के बीच रहते हैं। ऐसे लोगों की सेवा दखल देती है और परेशान करती है, और ऐसी सेवा परमेश्वर के विरूद्ध चलती है। इस प्रकार जो लोग परमेश्वर के पदचिन्हों पर चलने में असमर्थ हैं, वे परमेश्वर की सेवा करने में असमर्थ हैं; जो लोग परमेश्वर के पदचिन्हों पर चलने में असमर्थ हैं, वे निश्चित रूप से परमेश्वर का विरोध करते हैं, और वे परमेश्वर के साथ सुसंगत होने में असमर्थ हैं। "पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण" करने का मतलब है आज परमेश्वर की इच्छा को समझना, परमेश्वर की वर्तमान अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करने में सक्षम होना, आज के परमेश्वर का अनुसरण और आज्ञापालन करने में सक्षम होना, और परमेश्वर के नवीनतम कथनों के अनुसार प्रवेश करना। केवल ऐसा व्यक्ति ही है जो पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करता है और पवित्र आत्मा की धारा में है। ऐसे लोग न केवल परमेश्वर की सराहना प्राप्त करने और परमेश्वर को देखने के लिए सक्षम हैं, बल्कि परमेश्वर के नवीनतम कार्य से परमेश्वर के स्वभाव को भी जान सकते हैं, और मनुष्य की अवधारणाओं और अवज्ञा को, मनुष्य के प्रकृति और सार को भी, परमेश्वर के नवीनतम कार्य से जान सकते हैं; इसके अलावा, वे अपनी सेवा के दौरान धीरे-धीरे अपने स्वभाव में परिवर्तन हासिल करने में सक्षम होते हैं। केवल ऐसे लोग ही हैं जो परमेश्वर को प्राप्त करने में सक्षम हैं, और जो वास्तव में सही राह को हासिल कर चुके हैं। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य से हटा दिए गए हैं, वे वो लोग हैं जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य का अनुसरण करने में असमर्थ हैं, और जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य के विरुद्ध विद्रोह करते हैं। ऐसे लोग खुले आम परमेश्वर का विरोध इसलिए करते हैं कि परमेश्वर ने नया कार्य किया है, और परमेश्वर की छवि उनकी धारणाओं के अनुरूप नहीं है—जिसके परिणामस्वरूप वे परमेश्वर का खुले आम विरोध करते हैं और परमेश्वर पर निर्णय देते हैं, जिससे वे स्वयं के लिए परमेश्वर की घृणा और अस्वीकृति उत्पन्न करते हैं। परमेश्वर के नवीनतम कार्य का ज्ञान रखना कोई आसान बात नहीं है, लेकिन अगर लोग स्वेच्छापूर्वक परमेश्वर के कार्य का अनुसरण कर पाते हैं और परमेश्वर के कार्य की तलाश कर सकते हैं, तो उन्हें परमेश्वर को देखने का मौका मिलेगा, और उन्हें पवित्र आत्मा का नवीनतम मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिलेगा। जो जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करते हैं, वे पवित्र आत्मा के प्रबोधन या परमेश्वर के मार्गदर्शन को प्राप्त नहीं कर सकते हैं; इस प्रकार, लोगों को परमेश्वर का नवीनतम कार्य प्राप्त होता है या नहीं, यह परमेश्वर की कृपा पर निर्भर करता है, यह उनके अनुसरण पर निर्भर करता है, और यह उनके इरादों पर निर्भर करता है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

पवित्र आत्मा के नए काम का अनुसरण करो और परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करो

ओ... ओ... ओ... ओ... पवित्र आत्मा के काम पर चलने का मतलब परमेश्वर की आज की इच्छा को समझना, परमेश्वर की मांग के अनुसार कार्य करना, आज के परमेश्वर के पीछे चलना, उसकी वर्तमान अपेक्षाओं को मानना, उसके नवीनतम कथनों में प्रवेश करना। ऐसे लोग चलते हैं पवित्र आत्मा के काम पर। वे हैं पवित्र आत्मा की धारा में, देख सकते हैं परमेश्वर को, पा सकते हैं स्वीकृति परमेश्वर की। जान सकते हैं वो परमेश्वर के स्वभाव को, जान सकते हैं वो इंसान की धारणाओं, नाफ़र्मानी को, जान सकते हैं वो इंसान की प्रकृति, उसके सार को। और तो और, परमेश्वर की सेवा में, बदल जाएगा उनका स्वभाव। ऐसे लोग ही हैं जो सिर्फ़ पा सकते हैं परमेश्वर को। ऐसे लोग ही हैं जिन्हें सिर्फ़ सही में मिल चुका है एकमात्र सच्चा रास्ता।

परमेश्वर के नवीनतम कार्य का ज्ञान होना नहीं है आसान। लेकिन अगर लोग इरादतन परमेश्वर के कार्य को मानें, इरादतन करें उसकी खोज, तो परमेश्वर को देखने का मिलेगा उन्हें मौक़ा, तो पवित्र आत्मा का नया मार्गदर्शन पाएंगे वो। और तो और, परमेश्वर की सेवा में, बदल जाएगा उनका स्वभाव। ऐसे लोग ही हैं जो सिर्फ़ पा सकते हैं परमेश्वर को। ऐसे लोग ही हैं जिन्हें सिर्फ़ सही में मिल चुका है एकमात्र सच्चा रास्ता।

जानबूझकर जो लोग करते हैं विरोध परमेश्वर के कार्य का, मिलती नहीं उन्हें पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता, मिलता नहीं उन्हें परमेश्वर का मार्गदर्शन। इसलिए लोग परमेश्वर के नवीनतम कार्य को प्राप्त कर पाते हैं या नहीं इसलिए लोग परमेश्वर के नवीनतम कार्य को प्राप्त कर पाते हैं या नहीं निर्भर है परमेश्वर के अनुग्रह पर, निर्भर है उनके अपने अनुसरण पर, निर्भर है उनके अपने इरादों पर। निर्भर है उनके अपने इरादों पर। ओ... ओ... ओ... ओ...

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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