परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 11

कार्य के ये तीनों चरणों का निरन्तर उल्लेख क्यों किया गया है? युगों की समाप्ति, सामाजिक विकास और प्रकृति का बदलता हुआ स्वरूप सभी कार्य के तीनों चरणों में परिवर्तनों का अनुसरण करते हैं। मानवजाति परमेश्वर के कार्य के साथ समय के अनुसार बदलती है, और अपने आप में विकसित नहीं होती है। परमेश्वर के कार्यों के चरणों का उल्लेख करने का कारण सभी प्राणियों को और प्रत्येक धर्म के लोगों को एक ही परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन लाना है। इस बात की परवाह किए बिना कि तुम किस धर्म से संबंधित हो, अंततः तुम सभी परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन समर्पित हो जाओगे। केवल परमेश्वर स्वयं ही इस कार्य को कर सकता है; यह किसी भी धार्मिक प्रमुख के द्वारा नहीं किया जा सकता है। संसार में कई प्रमुख धर्म हैं प्रत्येक का अपना स्वयं का प्रमुख, या अगुआ है, और अनुयायी सम्पूर्ण संसार भर के देशों और सम्प्रदायों में सभी ओर फैले हुए हैं; प्रत्येक देश, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, उसमें भिन्न-भिन्न धर्म हैं। हालाँकि, इस बात की परवाह किए बिना कि संसार भर में कितने धर्म हैं, ब्रह्माण्ड के सभी लोग अंततः एक ही परमेश्वर के मार्गदर्शन के अधीन अस्तित्व में हैं, और उनके अस्तित्व को किसी भी प्रमुख धार्मिक अगुवों या नेताओं के द्वारा मार्गदर्शित नहीं किया जाता है। कहने का अर्थ है कि मानवजाति को किसी विशेष धार्मिक अगुवा या नेता के द्वारा मार्गदर्शित नहीं किया जाता है; इसके बजाय सम्पूर्ण मानवजाति को एक ही रचयिता के द्वारा मार्गदर्शित किया जाता है, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी का और सभी चीजों का और मानवजाति का भी सृजन किया है—और यह एक तथ्य है। यद्यपि संसार में कई प्रमुख धर्म हैं, किन्तु इस बात कि परवाह किए बिना कि वे कितने महान हैं, वे सभी रचयिता के प्रभुत्व के अधीन अस्तित्व में हैं और उनमें से कोई भी इस प्रभुत्व के दायरे से बाहर नहीं जा सकता है। मानवजाति का विकास, सामाजिक प्रगति, प्राकृतिक विज्ञान का विकास—प्रत्येक रचनाकार की व्यवस्थाओं से अवियोज्य है और यह कार्य ऐसा नहीं है जो किसी विशेष धार्मिक प्रमुख के द्वारा किया जा सके। धार्मिक प्रमुख किसी विशेष धर्म के सिर्फ़ अगुआ हैं, और परमेश्वर का, या उसका जिसने स्वर्ग, पृथ्वी और सभी चीज़ों को रचा है, प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। धार्मिक प्रमुख पूरे धर्म के भीतर सभी का मार्गदर्शन कर सकते हैं, परन्तु स्वर्ग के नीचे के सभी प्राणियों को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं—यह सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत तथ्य है। धार्मिक प्रमुख मात्र अगुआ हैं, और परमेश्वर (रचयिता) के समकक्ष खड़े नहीं हो सकते हैं। सभी बातें रचनाकार के हाथों में हैं, और अंत में वे सभी रचयिता के हाथों में लौट जाएँगे। मानवजाति मूल रूप से परमेश्वर के द्वारा बनायी गई थी, और धर्म की परवाह किए बिना, प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन लौट जाएगा—यह अपरिहार्य है। केवल परमेश्वर ही सभी चीज़ों में सर्वोच्च है, और सभी प्राणियों में उच्चतम शासक को भी उसके प्रभुत्व के अधीन अवश्य लौटना चाहिए। इस बात की परवाह किए बिना कि मनुष्य की हैसियत कितनी ऊँची है, वह मानवजाति को किसी उपयुक्त गंतव्य तक नहीं ले जा सकता है और सभी चीजों को उनके प्रकार के आधार पर वर्गीकृत करने में कोई भी सक्षम नहीं है। स्वयं यहोवा ने मानवजाति की रचना की और प्रत्येक को उसके प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया, और जब अंत का समय आएगा तो वह तब भी, सभी चीजों को उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत करते हुए, अपना कार्य स्वयं ही करेगा—और यह परमेश्वर के अलावा और किसी के द्वारा नहीं किया जा सकता है। आरंभ से आज तक किए गए कार्य के सभी तीन चरण परमेश्वर स्वयं के द्वारा किए गए थे और एक ही परमेश्वर के द्वारा किए गए थे। कार्य के तीन चरणों की वास्तविकता समस्त मानवजाति की परमेश्वर की अगुआई की वास्तविकता है, एक ऐसा तथ्य जिसे कोई नकार नहीं सकता है। कार्य के तीन चरणों के अंत में, सभी चीज़ें उसके प्रकारों के आधार पर वर्गीकृत की जाएँगी और परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन लौट जाएँगी, क्योंकि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में केवल इसी एक परमेश्वर का अस्तित्व है, और कोई दूसरा धर्म नहीं है। जो संसार का निर्माण करने में अक्षम है वह उसका अंत करने में भी अक्षम होगा, जबकि जिसने संसार की रचना की है वह उसका अंत भी निश्चित रूप से करेगा, और इसलिए यदि कोई युग का अंत करने में असमर्थ है और केवल मानव की उसके मस्तिष्क को विकसित करने में सहायता करने के लिए है, तो वह निश्चित रूप से परमेश्वर नहीं होगा, और निश्चित रूप से मानवजाति का प्रभु नहीं होगा। वह इस तरह के महान कार्य को करने में असमर्थ होगा; केवल एक ही है जो इस प्रकार का कार्य कर सकता है, और वे सभी जो इस प्रकार के कार्य करने में असमर्थ हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर से इतर अन्य दुश्मन हैं। यदि वे पंथ हैं, तो वे परमेश्वर के साथ असंगत हैं, और यदि वे परमेश्वर के साथ असंगत हैं, तो वे परमेश्वर के शत्रु हैं। समस्त कार्य केवल इसी एक सच्चे परमेश्वर के द्वारा किया जाता है, और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड केवल इसी एक परमेश्वर के द्वारा आदेशित किया जाता है। इस बात की परवाह किए बिना कि वह इस्राएल में या चीन में कार्य कर रहा है, इस बात की परवाह किए बिना कि यह कार्य पवित्रात्मा या देह के द्वारा किया जाता है, सब कुछ परमेश्वर के ही द्वारा किया जाता है और किसी अन्य के द्वारा नहीं किया जा सकता है। यह ठीक-ठीक इसलिए है क्योंकि वह समस्त मानवजाति का परमेश्वर है कि वह, किसी भी परिस्थिति से अनवरुद्ध, स्वतंत्ररूप से कार्य करता है—और सभी दर्शनों में सबसे महान है। परमेश्वर के प्राणी के रूप में, यदि तुम परमेश्वर के प्राणी के कर्तव्य को करना चाहते हो और परमेश्वर की इच्छा को समझते हो, तो तुम्हें परमेश्वर के कार्य को अवश्य समझना चाहिए, प्राणियों के लिए परमेश्वर की इच्छा को अवश्य समझना चाहिए, उसकी प्रबंधन योजना को अवश्य समझना चाहिए, और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य के समस्त महत्व को अवश्य समझना चाहिए। जो लोग इस बात को नहीं समझते हैं वे परमेश्वर के प्राणी होने के योग्य नहीं हैं! परमेश्वर के प्राणी के रूप में, यदि तुम यह नहीं समझते हो कि तुम कहाँ से आए हो, मानवजाति के इतिहास और परमेश्वर द्वारा किए गए सम्पूर्ण कार्य को नहीं समझते हो, और, इसके अलावा, यह नहीं समझते हो कि आज तक मानवजाति का विकास कैसे हुआ है, और नहीं समझते हो कि कौन सम्पूर्ण मानवजाति को नियंत्रित करता है, तो तुम अपने कर्तव्य को करने में अक्षम हो। परमेश्वर ने आज तक मानवजाति की अगुवाई की है, और जब से उसने पृथ्वी पर मनुष्य की रचना की है तब से उसने उसे कभी भी नहीं छोड़ा है। पवित्र आत्मा कभी भी कार्य करना बंद नहीं करता है, उसने मानवजाति की अगुवाई करना कभी भी बंद नहीं किया है, और कभी भी मानवजाति को नहीं त्यागा है। परन्तु मानवजाति यह महसूस नहीं करती है कि यहाँ एक परमेश्वर है, वह परमेश्वर के बारे में तो बिल्कुल भी नहीं जानती है, और क्या परमेश्वर के सभी प्राणियों के लिए इससे भी अधिक अपमानजनक कुछ और है? परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से मनुष्य की अगुवाई करता है, परन्तु मनुष्य परमेश्वर के कार्य को नहीं समझता है। तुम परमेश्वर के एक प्राणी हो, फिर भी तुम अपने स्वयं के इतिहास को नहीं समझते हो, और इससे अनजान हो कि किसने तुम्हारी यात्रा में तुम्हारी अगुआई की है, तुम परमेश्वर द्वारा किए गए कार्य के प्रति बेसुध हो और इसलिए तुम परमेश्वर को नहीं जान सकते हो। यदि तुम अभी नहीं जानते हो, तो तुम कभी भी परमेश्वर की गवाही बनने के योग्य नहीं बनोगे। आज, रचयिता व्यक्तिगत तौर पर एक बार फिर से सभी लोगों की अगुवाई करता है, और सभी लोगों को उसकी बुद्धि, सर्वशक्तिमत्ता, उद्धार और चमत्कारिकता को देखने देता है। फिर भी तुम नहीं समझते और महसूस करते हो—और इसलिए क्या तुम वह नहीं हो जिसे उद्धार प्राप्त नहीं होगा? जो शैतान से संबंधित होते हैं वे परमेश्वर के वचनों को नहीं समझते हैं और जो परमेश्वर से संबंधित होते हैं वे परमेश्वर की आवाज़ को सुन सकते हैं। वे सभी लोग जो मेरे द्वारा बोले गए वचनों को महसूस करते और समझते हैं ऐसे लोग हैं जो बचाए जाएँगे, और परमेश्वर की गवाही देंगे; वे सभी लोग जो मेरे द्वारा बोले गए वचनों को नहीं समझते हैं परमेश्वर की गवाही नहीं दे सकते हैं, और ऐसे लोग हैं जो निकाल दिए जाएँगे। जो लोग परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते हैं और परमेश्वर के कार्यों को महसूस नहीं करते हैं वे परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने में अक्षम हैं, और इस प्रकार के लोग परमेश्वर की गवाही नहीं देंगे। यदि तुम परमेश्वर की गवाही देना चाहते हो, तो तुम्हें परमेश्वर को अवश्य जानना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य के द्वारा ही परमेश्वर का ज्ञान निष्पादित किया जा सकता है। सब मिला कर, यदि तुम परमेश्वर को जानने की इच्छा करते हो, तो तुम्हें उसके कार्य को अवश्य जानना चाहिए: परमेश्वर के कार्य को जानना सबसे महत्वपूर्ण बात है। जब कार्य के तीन चरण समाप्ति पर पहुँचेंगे, तो ऐसे लोगों का समूह बनेगा जो परमेश्वर के प्रति गवाही देते हैं, ऐसे लोगों का एक समूह जो परमेश्वर को जानते हैं। ये सभी लोग परमेश्वर को जानेंगे और सत्य को व्यवहार में लाने में समर्थ होंगे। वे मानवता और समझ को धारण करेंगे और परमेश्वर के उद्धार के कार्य के तीनों चरणों को जानेंगे। यही कार्य अंत में निष्पादित होगा, और यही लोग 6,000 साल के प्रबंधन के कार्य का सघन रूप हैं, और शैतान की अंतिम पराजय की सबसे शक्तिशाली गवाही हैं। जो परमेश्वर की गवाही दे सकते है वे ही परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं और आशीषों को प्राप्त करने में समर्थ होंगे, और ऐसा समूह होंगे जो बिल्कुल अंत तक बना रहेगा, जो परमेश्वर के अधिकार को धारण करेंगे और परमेश्वर की गवाही देंगे। शायद तुम लोगों में से वे सभी, या शायद केवल आधे या केवल थोड़े से ही इस समूह के एक सदस्य बन सकते हैं—यह तुम लोगों की इच्छा और तलाश पर निर्भर करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

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