परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 74 | अंश 234

धन्य हैं वे, जिन्होंने मेरे वचन पढ़े हैं और जो यह विश्वास करते हैं कि वे पूरे होंगे। मैं तुम्हारे साथ बिलकुल भी दुर्व्यवहार नहीं करूंगा; जो तुम विश्वास करते हो, उसे तुम्हारे भीतर पूरा करूँगा। ये तुम पर आता हुआ मेरा आशीष है। मेरे वचन हर व्यक्ति के भीतर छिपे रहस्यों पर सटीकता से वार करते हैं; सभी में प्राणघातक घाव हैं, और मैं वह अच्छा चिकित्सक हूँ, जो उन्हें चंगा करता है : बस मेरी उपस्थिति में आ जाओ। मैंने क्यों कहा कि भविष्य में कोई दु:ख नहीं होगा और न ही कोई अश्रु होंगे? उसका कारण यही है। मुझमें सभी चीज़ें संपन्न होती हैं, परंतु मनुष्य में सभी बातें दूषित, खोखली और मनुष्यों को धोखा देने वाली हैं। मेरी उपस्थिति में तुम निश्चित रूप से सभी चीज़ें पाओगे, और निश्चित रूप से उन सभी आशीषों को देखोगे और उनका आनंद भी उठाओगे, जिनकी तुम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। जो मेरे समक्ष नहीं आते, वे निश्चित रूप से विद्रोही हैं और पूरी तरह से मेरा विरोध करने वाले हैं। मैं निश्चित रूप से उन्हें हलके में नहीं छोडूंगा; मैं ऐसे लोगों को कठोरता से ताड़ित करूंगा। इसे स्मरण रखो! लोग जितना अधिक मेरे सामने आएँगे, उतना ही अधिक वे प्राप्त करेंगे—हालाँकि वह सिर्फ़ अनुग्रह होगा। बाद में वे और बड़े आशीष प्राप्त करेंगे।

संसार के सृजन के समय से मैंने लोगों के इस समूह को—अर्थात् आज के तुम लोगों को—पूर्वनिर्धारित करना तथा चुनना प्रारंभ कर दिया है। तुम लोगों का मिज़ाज, क्षमता, रूप-रंग, कद-काठी, वह परिवार जिसमें तुमने जन्म लिया, तुम्हारी नौकरी और तुम्हारा विवाह—अपनी समग्रता में तुम, यहां तक कि तुम्हारे बालों और त्वचा का रंग, और तुम्हारे जन्म का समय—सभी कुछ मेरे हाथों से तय किया गया था। यहां तक कि हर एक दिन जो चीज़ें तुम करते हो और जिन लोगों से तुम मिलते हो, उसकी व्यवस्था भी मैंने अपने हाथों से की थी, साथ ही आज तुम्हें अपनी उपस्थिति में लाना भी वस्तुत: मेरा ही आयोजन है। अपने आप को अव्यवस्था में न डालो; तुम्हें शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए। आज जिस बात का मैं तुम्हें आनंद लेने देता हूँ, वह एक ऐसा हिस्सा है जिसके तुम योग्य हो, और यह संसार के सृजन के समय मेरे द्वारा पूर्वनिर्धारित किया गया है। सभी मनुष्य बहुत चरमपंथी हैं : या तो वे अत्यधिक दुराग्रही हैं या पूरी तरह से निर्लज्ज। वे मेरी योजना और व्यवस्था के अनुसार कार्य करने में असमर्थ हैं। अब और ऐसा न करो। मुझमें सभी मुक्ति पाते हैं; स्वयं को बांधो मत, क्योंकि इससे तुम्हारे जीवन के संबंध में हानि होगी। इसे स्मरण रखो!

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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