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क्या तुम अपने दिल का प्रेम दोगे परमेश्वर को?

I

अगर तुम्हें है विश्वास परमेश्वर पर, लेकिन है नहीं तुम्हारा कोई उद्देश्य,

तो तुम्हारा जीवन रहेगा निरर्थक।

जब समय होगा जीवन के अंत का,

तुम देखोगे बस नीला आसमान और धूल से भरी धरती।

उसे अपना प्रेम देने को क्या हो तुम तैयार?

इसे अपने अस्तित्व का आधार बनाने को क्या हो तुम तैयार?

देखा है मैंने जितना प्रेम दिया है, परमेश्वर को मैंने

उतनी ही बढ़ी है ख़ुशी और असीमित शक्ति जीवन में मेरे।

II

मैं देता हूँ उस परमेश्वर को दिलासा जिसे करूँ में दिल से प्रेम,

स्वर्ग में मौजूद उसके आत्मा को देने के लिए आराम।

दिल है कीमती, पर प्रेम है उससे भी ज़्यादा अनमोल।

मैं दूंगा यह अनमोल प्रेम परमेश्वर को,

मेरी सबसे अच्छी चीज़ से उसे संतुष्ट करने के लिए।

परमेश्वर मानता है इंसान के प्रेम को अनमोल,

देता है वो आशीष उसे जो करता है उसे प्रेम।

क्योंकि इंसान का प्रेम मिलता है मुश्किल से,

इसलिए वो देता है उसे और भी ज़्यादा।

अपने जीवन में, परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा करना,

है ख़ूबसूरत बात।

क्यों तलाश में रहो परेशानी के?

परमेश्वर को अपना दिल देने का मेरे मन में किया वादा मैंने।

III

परमेश्वर को अपना तन और मन इच्छा से देता हूँ मैं,

और फिर भी नहीं कर पाता हूँ मैं उसे पूरा प्रेम,

फिर भी नहीं कर पाता हूँ मैं उसे पूरा प्रेम।

उसे अपना प्रेम देने को क्या हो तुम तैयार?

उसे अपना प्रेम देने को क्या हो तुम तैयार?

इसे अपने अस्तित्व का आधार बनाने को क्या हो तुम तैयार?

देखा है मैंने जितना प्रेम दिया है, परमेश्वर को मैंने

उतनी ही बढ़ी है ख़ुशी और असीमित शक्ति जीवन में मेरे।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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