5. लोग अक्सर कहते हैं, "सदाचार को मिले पुरस्कार, बुराई को प्रतिकार", तो परमेश्वर सभी बुरे लोगों को ख़त्म क्यों नहीं कर देते?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

आज, उनके कार्यों की परवाह किए बगैर, और इस शर्त के साथ कि वे परमेश्वर के प्रबंधन को बाधित न करें और उनका परमेश्वर के नए कार्य के साथ कोई लेना देना न हो, ऐसे लोगों को अनुकूल दण्ड के अधीन नहीं किया जाएगा, क्योंकि क्रोध का दिन अभी तक नहीं आया है। लोग विश्वास करते हैं कि ऐसा बहुत कुछ है जिससे परमेश्वर को पहले ही निपट लेना चाहिए था, और वे सोचते हैं कि उन कुकर्मियों को जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी दण्ड के अधीन किया जाना चाहिए। किन्तु क्योंकि परमेश्वर का प्रबंधन अभी तक समाप्ति पर नहीं पहुंचा है, और क्रोध के दिन का अभी तक आगमन नहीं हुआ है, इसलिए अधर्मी अभी भी अपने अधर्मी कार्यों को लगातार करते रहते हैं। …अभी मनुष्य के दण्ड का समय नहीं है, बल्कि विजय के कार्य को सम्पन्न करने का समय है, अन्यथा ऐसे लोग भी हैं जो परमेश्वर के प्रबंधन को हानि पहुंचाते हैं, उस स्थिति में उनके कार्यों के आधार पर उन्हें दण्ड के अधीन किया जाएगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार" से

एक बार अच्छे और बुरे के आधार पर अलग-अलग कर दिए जाने पर, लोगों को तुरंत दण्ड या पुरस्कार नहीं दिया जाता है; बल्कि, परमेश्वर केवल अंत के दिनों में जीतने के अपने कार्य को करने के बाद ही बुराई को दण्डित करने और अच्छाई को पुरस्कृत करने का अपना कार्य करेगा। वास्तव में, वह अच्छे और बुरे का उपयोग मानवजाति को पृथक करने के लिए तब से कर रहा है जब से उसने मानव जाति के बीच अपना कार्य आरंभ किया था। कार्य का अंत करने पर वह दुष्टों और धार्मिकों को पृथक करने और फिर बुरे को दण्ड और अच्छे को पुरस्कार देने का कार्य आरंभ करने के बजाय, वह अपने कार्य की समाप्ति पर ही केवल धार्मिकों को पुरस्कार और दुष्टों को दण्ड देगा। बुरे को दण्ड और अच्छे को पुरस्कार देने का उसका परम कार्य समस्त मानवजाति को सर्वथा शुद्ध करने के लिए है, ताकि वह पूर्णतः शुद्ध मानवजाति को अनंत विश्राम में ले जाए। उसके कार्य का यह चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण कार्य है। यह उसके समस्त प्रबंधन कार्य का अंतिम चरण है। यदि परमेश्वर दुष्टों का नाश नहीं करता बल्कि उन्हें बचा रहने देता तो संपूर्ण मानव जाति अभी भी विश्राम में प्रवेश करने योग्य नहीं होती, और परमेश्वर समस्त मानवजाति को एक बेहतर राज्य में नहीं पहुँचा पाता। इस प्रकार वह कार्य पूर्णतः समाप्त नहीं होता। जब वह अपना कार्य समाप्त कर लेगा, तो संपूर्ण मानव जाति पूर्णतः पवित्र हो जाएगी। केवल इस तरह से ही परमेश्वर शांतिपूर्वक विश्राम में रह सकता है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" से

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प्रश्न 38: हाल के वर्षों में, धार्मिक संसार में विभिन्न मत और संप्रदाय अधिक से अधिक निराशाजनक हो गए हैं, लोगों ने अपना मूल विश्वास और प्यार खो दिया है और वे अधिक से अधिक नकारात्मक और कमज़ोर बन गए हैं। हम उत्साह का मुरझाना भी देखते हैं और हमें लगता है कि हमारे पास प्रचार करने के लिए कुछ नहीं है और हम सभी ने पवित्र आत्मा के कार्य को खो दिया है। कृपया हमें बताओ, पूरी धार्मिक दुनिया इतनी निराशाजनक क्यों है? क्या परमेश्वर वास्तव में इस दुनिया से नफरत करता है और क्या उसने इसे त्याग दिया है? हमें "प्रकाशितवाक्य" पुस्तक में धार्मिक दुनिया के प्रति परमेश्वर के शाप को कैसे समझना चाहिए?

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