33. विपत्ति के पहले स्वर्गारोहण क्या है? ऐसा विजयी किसे कहते हैं जिसे विपत्ति से पहले पूर्ण किया जाता हो?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

"उठाया जाना" नीचे स्थानों से उँचे स्थानों पर ले जाया जाना नहीं है जैसा कि लोग कल्पना करते हैं। यह एक बहुत बड़ी ग़लती है। उठाया जाना मेरे द्वारा पूर्वनियत और फिर चयनित किए जाने को संदर्भित करता है। यह उन सभी पर लक्षित है जिन्हें मैंने पूर्वनियत और चयनित किया है। जिन लोगों ने ज्येष्ठ पुत्रों की, मेरे पुत्रों की, या मेरे लोगों की हैसियत प्राप्त कर ली है, वे सभी ऐसे लोग हैं जो उठाए जा चुके हैं। यह लोगों की अवधारणाओं के साथ सर्वाधिक असंगत है। जिन लोगों का भविष्य में मेरे घर में हिस्सा है वे सभी ऐसे लोग हैं जो मेरे सामने उठाए जा चुके हैं। यह पूर्णतः सत्य है, कभी भी नहीं बदलता है, और किसी के द्वारा भी अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। यह शैतान के विरुद्ध जवाबी हमला है। जिस किसी को भी मैंने पूर्व नियत किया है वह मेरे सामने उठाया जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 104' से उद्धृत

फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है, और यह पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है। परमेश्वर के लिए प्रेम अनेक संतों में जगता है जो बिना डगमगाए अपने आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। वे अपने इस विश्वास पर दृढ़ रहते हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीज़ों को नियंत्रित करता है : इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और यह पर्वतों की तरह अचल है! यह कभी नहीं बदल सकता!

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आज तुमने सभी कलीसियों को पूरा किया है—फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया—और इस प्रकार अपनी 6,000 साल की प्रबंधन योजना को पूरा किया है। सभी संत अब नम्रता से तुम्हारे सामने समर्पित हो सकते हैं; वे एक दूसरे से आत्मा में जुड़े हुए हैं और एक दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक आगे बढ़ते हैं। वे झरने के स्रोत से जुड़े हैं। जीवन का जीवित पानी निरंतर बहता है और वह कलीसिया की सभी गंदगी और कीचड़ को बहा ले जाता है, और एक बार फिर तुम्हारे मंदिर को शुद्ध करता है। हमने व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर को जाना है, उसके वचनों में चले हैं, अपने कार्यों और कर्तव्यों को पहचाना है, और कलीसिया के लिए खुद को खपाने के लिए जो कुछ हम कर सकते थे वो हमने किया है। तुम्हारे सामने हर एक पल शांत रहते हुए, हमें पवित्र आत्मा के काम पर ध्यान देना चाहिए ताकि तुम्हारी इच्छा हमारे भीतर अवरुद्ध न हो। संतों के बीच आपसी प्रेम है, और कुछ की मज़बूतियां दूसरों की विफलताओं की भरपाई करेंगी। वे हर पल आत्मा में चल सकते हैं और पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध और प्रकाशित किए गए हैं। सत्य समझने के तुरंत बाद वे उसे अभ्यास में ले आते हैं। वे नई रोशनी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हैं।

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सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो, सेवा में समन्वय करो और एक हो जाओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करो, एक पवित्र आध्यात्मिक शरीर बनने के लिए तत्पर रहो, शैतान को कुचलो, और उसकी नियति समाप्त करो। फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया परमेश्वर के सामने आरोहित की गयी है और परमेश्वर की महिमा में प्रकट की जाती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 2' से उद्धृत

जब परमेश्वर आता है, तो लोगों को उसके प्रताप और उसके कोप का आनंद लेना चाहिए। हालाँकि उसके वचन चाहे कितने ही कठोर क्यों न हों, वह मानवजाति को बचाने और पूर्ण करने के लिए आता है। प्राणियों के रूप में लोगों को वे कर्तव्य पूरे करने चाहिए, जो उनसे अपेक्षित हैं, और शुद्धिकरण के बीच परमेश्वर के लिए गवाह बनना चाहिए। हर परीक्षण में उन्हें उस गवाही पर कायम रहना चाहिए, जो कि उन्हें देनी चाहिए, और परमेश्वर के लिए उन्हें ऐसा ज़बरदस्त तरीके से करना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति विजेता होता है। परमेश्वर चाहे कैसे भी तुम्हें शुद्ध करे, तुम आत्मविश्वास से भरे रहते हो और परमेश्वर पर से कभी विश्वास नहीं खोते। तुम वह करते हो, जो मनुष्य को करना चाहिए। परमेश्वर मनुष्य से इसी की अपेक्षा करता है, और मनुष्य का दिल पूरी तरह से उसकी ओर लौटने तथा हर पल उसकी ओर मुड़ने में सक्षम होना चाहिए। ऐसा होता है विजेता। जिन लोगों का उल्लेख परमेश्वर "विजेताओं" के रूप में करता है, वे लोग वे होते हैं, जो तब भी गवाह बनने और परमेश्वर के प्रति अपना विश्वास और भक्ति बनाए रखने में सक्षम होते हैं, जब वे शैतान के प्रभाव और उसकी घेरेबंदी में होते हैं, अर्थात् जब वे स्वयं को अंधकार की शक्तियों के बीच पाते हैं। यदि तुम, चाहे कुछ भी हो जाए, फिर भी परमेश्वर के समक्ष पवित्र दिल और उसके लिए अपना वास्तविक प्यार बनाए रखने में सक्षम रहते हो, तो तुम परमेश्वर के सामने गवाह बनते हो, और इसी को परमेश्वर "विजेता" होने के रूप में संदर्भित करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम्हें परमेश्वर के प्रति अपनी भक्ति बनाए रखनी चाहिए' से उद्धृत

परमेश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति के रूप में, तुम को यह समझना चाहिए कि आज, इन अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य और अपने अंदर परमेश्वर की योजना के सारे कार्यों को ग्रहण करके, तुमने वास्तव में परमेश्वर के महान उत्कर्ष और उद्धार को पा लिया है। समस्त ब्रम्हांड में परमेश्वर के सारे कार्यों में इसी एक जनसमूह पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उसने अपने सभी प्रयास तुम लोगों के लिये समर्पित किये और तुम्हारे लिये सब कुछ बलिदान किया है, उसने समस्त ब्रम्हांड में पवित्र आत्मा के सभी कार्यों को वापस लेकर तुम्हें सौंप दिया है। यही कारण है कि मैं कहता हूं, तुम सभी सौभाग्यशाली हो। और यही नहीं, उसने अपनी महिमा इज़राइल से, अर्थात उसके चुने हुए लोगों सेहटाकर तुम लोगों को दी है, ताकि वह अपनी योजना के उद्देश्यों को तुम्‍हारे जनसमूह के द्वारा पूर्ण रूप से प्रकट कर सके। इस कारण तुम सभी वे लोग हो जो परमेश्वर की विरासत को पाएंगे, और इससे भी अधिक परमेश्वर की महिमा के वारिस बनेंगे। संभवतः तुम सबको ये वचन स्मरण होंगे: "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।" अतीत में तुम सबने यह बात सुनी है, तो भी किसी ने इन वचनों का सही अर्थ नहीं समझा। आज, तुम सभी अच्छे से जानते हो कि उनका वास्तविक महत्व क्या है। ये वही वचन हैं जिन्हें परमेश्वर अंतिम दिनों में पूरा करेगा। और ये वचन उन लोगों में पूरे होंगे जो बड़े लाल अजगर द्वारा निर्दयतापूर्वक पीड़ित किये गए हैं, उस देश में जहां वह रहता है। यह बड़ा लाल अजगर परमेश्वर को सताता है और परमेश्वर का शत्रु है, इसलिए इस देश में, जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उन्हें अपमानित किया जाता और सताया जाता है। इस कारण ये वचन तुम्हारे समूह के लोगों में वास्तविकता बन जाएंगे। जब उस देश में परमेश्वर का कार्य किया जाता है जहाँ परमेश्वर का विरोध होता है, उसके सारे कामों में अत्यधिक बाधा आती है, और उसके बहुत से वचन सही समय पर पूरे नहीं किये जा सकते; अतः, परमेश्वर के वचनों के कारण लोग शुद्ध किये जाते हैं। यह भी पीड़ा का एक तत्व है। परमेश्वर के लिए बड़े लाल अजगर के देश में अपना कार्य करना बहुत कठिन है, परन्तु ऐसी कठिनाइयों के बीच में अपनी बुद्धि और अद्भुत कामों को प्रकट करने के लिए परमेश्वर अपने कार्य के एक चरण को पूरा करता है। परमेश्वर इस अवसर के द्वारा इस समूह के लोगों को पूर्ण करता है। इस अशुद्ध देश में लोगों की पीड़ा, उनकी क्षमता और उनके पूरे शैतानी स्वभाव के कारण परमेश्वर अपना शुद्धिकरण का कार्य करता और जीतता है ताकि इससे वह महिमा प्राप्त करे और उन्हें भी प्राप्त करे जो उसके कार्यों के गवाह बनते हैं। परमेश्वर ने इस सूमह के लोगों के लिए जो बलिदान किये हैं, यह उन सभी का संपूर्ण महत्व है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है,जितना मनुष्य कल्पना करता है?' से उद्धृत

राज्य के युग में मनुष्य को पूरी तरह से पूर्ण किया जाएगा। विजय के कार्य के पश्चात्, मनुष्य को शुद्धिकरण और क्लेश के अधीन किया जाएगा। जो लोग विजय प्राप्त कर सकते हैं और इस क्लेश के दौरान गवाही दे सकते हैं वे ऐसे लोग हैं जिन्हें अन्ततः पूर्ण बनाया जाएगा; वे विजेता हैं। इस क्लेश के दौरान, मनुष्य से अपेक्षा की जाती है कि वह इस शुद्धिकरण को स्वीकार करे, और यह शुद्धिकरण परमेश्वर के कार्य की अन्तिम घटना है। यह अंतिम समय है कि परमेश्वर के प्रबंधन के समस्त कार्य के समापन से पहले मनुष्य को शुद्ध किया जाएगा, और जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं उन सभी को इस अंतिम परीक्षा को, इस अंतिम शुद्धिकरण को अवश्य स्वीकार करना चाहिए। जो लोग क्लेश से व्याकुल हैं वे पवित्र आत्मा के कार्य और परमेश्वर के मार्गदर्शन से रहित हैं, किन्तु जिन्हें सच में जीत लिया गया है और जो सच में परमेश्वर की खोज करते हैं वे अंततः डटे रहेंगे; ये वे लोग हैं जो मानवता को धारण करते हैं, और जो सचमुच में परमेश्वर से प्रेम करते हैं। परमेश्वर चाहे कुछ भी क्यों न करे, इन विजयी लोगों को दर्शनों से वंचित नहीं किया जाएगा, और तब भी ये अपनी गवाही में असफल हुए बिना सत्य को अभ्यास में लाएँगे। ये ऐसे लोग हैं जो अंततः बड़े क्लेश से उभर कर निकलेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास' से उद्धृत

मैं पहले कह चुका हूँ कि पूर्व दिशा से जीतने वालों का एक समूह प्राप्त किया जाता है, ऐसे जीतने वाले जो महान क्लेश से गुजर कर आते हैं। ऐसे वचनों का क्या अर्थ है? उनका अर्थ है कि न्याय और ताड़ना, व्यवहार और काँट-छाँट, और सभी प्रकार के शुद्धिकरण से गुजरने के बाद केवल ये प्राप्त कर लिए गए लोग ही वास्तव में आज्ञापालन करते हैं। ऐसे व्यक्तियों का विश्वास अस्पष्ट और अमूर्त नहीं है, बल्कि वास्तविक है। उन्होंने किन्हीं संकेतों और चमत्कारों, या अचम्भों को नहीं देखा है; वे गूढ़ पत्रों और सिद्धान्तों, या गहन अंर्तदृष्टि की बातें नहीं करते हैं; इसके बजाय उनके पास वास्तविकता और परमेश्वर के वचन, और परमेश्वर की वास्तविकता का सच्चा ज्ञान है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

जिन लोगों को परमेश्वर बचाएगा, उन्हें समूहों में वापस लाया गया है। पहला समूह उनका है जो मुख्यभूमि चीन से हैं। दूसरा समूह उनका है जो दूसरे देशों के हैं। इस समय, विदेशों में रहने वाले लोग परमेश्वर के पास वापस लौटने लगे हैं। तीसरा समूह उनका है जो, भीषण आपदा आने के बाद होश में आते हैं और आपदा के बीच में परमेश्वर के पास वापस लौट आते हैं। कई लोगों को आपदा के पहले स्वर्गारोहित किया जाएगा और परमेश्वर के पास वापस बुलाया जाएगा। इस वक्त, भीषण आपदा से स्वर्गारोगित करने का जो कार्य किया जाना है, वो जल्द ही खत्म हो रहा है। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ? "जल्दी से खत्म हो रहा है" किसे संदर्भित करता है? क्योंकि भीषण आपदा जल्द ही आ रही है। यदि भीषण आपदा दो साल में आती है, तो जो लोग दो साल में परमेश्वर के पास लौटते हैं, उन्हें भी उस समूह में माना जाएगा जो आपदा से पहले स्वर्गारोहित किये जाते हैं। ऐसे लोग भी होंगे जो इन दो वर्षों के दौरान परमेश्वर के पास वापस नहीं आते हैं। अन्य लोग उन्हें सुसमाचार सुनाते हैं और अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की गवाही देते हैं, फिर भी वे कहते हैं, "यह गलत है! यह वो नहीं है! मैंने इसे अपनी आँखों से नहीं देखा है, मैं विश्वास नहीं करूँगा।" दूसरे कैसे भी समझायें, फिर भी वे इसे अस्वीकार करते हैं। परमेश्वर इन लोगों को आपदा के ठीक बीच में रखेगा। वह इन लोगों को शोधित और दंडित करने के लिए आपदा का उपयोग करेगा। वे आपदा के बीच होंगे, अंधेरे में, रोते और अपने दांत पीसते रहेंगे।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

"तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर में क्यों विश्वास करते हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने का क्या अर्थ है?" इस मामले को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ लोग सोचते हैं: "मैं शुरू में प्रभु यीशु में विश्वास किया करता था। अब मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के प्रचारकों से बाइबल की सच्चाई की ऐसी बिल्कुल स्पष्ट गवाही को सुना है, विशेष रूप से, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथनों को सुना है, जो सभी सत्य हैं और स्पष्ट रूप से परमेश्वर की वाणी हैं। इससे वह वचन पूरा हुआ है जो प्रकाशित वाक्य में कहा गया है 'जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है' (प्रकाशितवाक्य 2:7)। जब मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सभी वचनों को सुन लिया, तो मुझे एक बात पक्की हो गई: प्रभु यीशु वापस आ गया है, वही सर्वशक्तिमान परमेश्वर है।" इस प्रकार, हम प्रभु के द्वारा स्वर्गारोहित किये गए लोग हैं क्योंकि हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करते हैं? इससे बाइबल की ये भविष्यवाणियां पूरी हुई हैं: "आधी रात को धूम मची: 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो'" (मत्ती 25:6), और, "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। "देख, मैं चोर के समान आता हूँ; धन्य वह है जो जागता रहता है, और अपने वस्त्र की चौकसी करता है कि नंगा न फिरे, और लोग उसका नंगापन न देखें" (प्रकाशितवाक्य 16:15)। चूंकि प्रभु की ये भविष्यवाणियां पूरी की गई हैं। अब हम प्रभु के साथ हैं, और प्रभु हमारे साथ रात्रिभोज कर रहा है। बाइबल में एक जगह प्रभु यीशु ने इसे "मेम्ने के विवाह का भोज" कहा है। "मेम्ने के विवाह का भोज" का क्या मतलब है? इसे क्यों "मेम्ने के विवाह का भोज" कहा जाता है? "मेम्ने" मसीह है, और मेम्ने के ब्याह का अर्थ है कि मसीह लोगों के एक समूह को पूर्ण करने के लिए आता है। वह अपने मेम्नों को पूर्ण करेगा, वे जिनका विजेता होना पूर्वनिर्धारित है, वह उन लोगों को आपदा के पहले ही विजेता बना देता है, इसलिए इसे "रात्रिभोज में भाग लेना" कहा जाता है। ब्याह का अर्थ हासिल करना है, और उसके बाद हम एक परिवार बन जाते हैं। इसलिए, इस ग्रंथ को समझाते समय, कुछ जगहों पर कहा गया है कि मसीह दूल्हा है, कलीसिया दुल्हन है। इसे एक ब्याह कहा जाता है, और इसमें कुछ न कुछ हासिल किया जाना चाहिए। हासिल करने की बात करें तो, इसका संबंध अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य से है, न्याय और ताड़ना का कार्य, परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य। इस कार्य का अनुभव करने का मतलब है लोग पहले परमेश्वर की विजय का अनुभव करते हैं, फिर वे शुद्ध, पूर्ण, प्राप्त और पूर्ण किये जायेंगे; परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य एक ऐसा ही कार्य है। इंसानों द्वारा अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य का अनुभव किये जाने और उनके मसीह के अनुकूल बन जाने के बाद, परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य इस तरह पूरा हो जाता है। परमेश्वर के राज्य में वे लोग क्या हैं जिन्हें यह सब पूरा होने के बाद पूर्ण किया गया है? वे उन विजेताओं के समूह हैं जिन्हें आपदा के पहले पूर्ण किया गया है, वे विजेता हैं। परमेश्वर के राज्य में विजेताओं की क्या स्थिति होती है? वे "मसीह के राज्य के स्तम्भ" हैं। आपदा के पहले परमेश्वर लोगों के एक समूह को, विजेताओं के एक समूह को पूर्ण करेगा, और ये विजेता मसीह के राज्य के स्तम्भ बन जाएँगे। क्या तुम्हें नहीं लगता कि यह एक बेहतरीन आशीर्वाद है? यह आशीर्वाद ज़बरदस्त है।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

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