29. दुष्टात्माओं के कब्ज़े में आ जाना क्या है? दुष्टात्माओं के कब्ज़े में आ जाना कैसे प्रकट होता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

यदि, वर्तमान समय में, कोई व्यक्ति उभर कर आता है जो चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करने, पिशाचों को निकालने, चंगाई करने में और कई चमत्कारों को करने में समर्थ है, और यदि यह व्यक्ति दावा करता है कि वो यीशु की वापसी है, तो यह दुष्टात्माओं की जालसाजी और उसका यीशु की नकल करना होगा। इस बात को स्मरण रखें! परमेश्वर एक ही कार्य को दोहराता नहीं है। यीशु के कार्य का चरण पहले ही पूर्ण हो चुका है, और परमेश्वर फिर से उस चरण के कार्य को पुनः नहीं दोहराएगा। ... यदि अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अभी भी चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करता है और अभी भी दुष्टात्माओं को निकालता और बीमारों को चंगा करता है—यदि वह यीशु के ही समान करता है—तो परमेश्वर एक ही कार्य को दोहरा रहा होगा, और यीशु के कार्य का कोई महत्व या मूल्य नहीं होगा। इस प्रकार, प्रत्येक युग में परमेश्वर कार्य के एक ही चरण को करता है। एक बार जब उसके कार्य का प्रत्येक चरण पूरा हो जाता है, तो शीघ्र ही इसकी दुष्टात्माओं के द्वारा नकल की जाती है, और शैतान द्वारा परमेश्वर का करीब से पीछा करने के बाद, परमेश्वर एक दूसरा तरीका बदल देता है। एक बार परमेश्वर अपने कार्य का एक चरण पूर्ण कर लेता है, तो इसकी दुष्टात्माओं द्वारा नकल कर ली जाती है। तुम लोगों को इस बारे में अवश्य स्पष्ट हो जाना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आज परमेश्वर के कार्य को जानना' से उद्धृत

कुछ ऐसे लोग हैं जो दुष्टात्माओं के द्वारा ग्रसित हैं और लगातार ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते रहते हैं, "मैं परमेश्‍वर हूँ!" फिर भी अंत में, उन पर से पर्दा हट जाता है, क्योंकि वे गलत चीज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे शैतान का प्रतिनिधित्व करते हैं और पवित्र आत्मा उन पर कोई ध्यान नहीं देता है। तुम अपने आपको कितना भी बड़ा ठहराओ या तुम कितनी भी ताकत से चिल्लाओ, तुम अभी भी एक सृजित प्राणी ही हो और एक ऐसे प्राणी हो जो शैतान से सम्बन्धित है। ... यदि तुम एक नए युग के लिए मार्ग नहीं बना सकते हो, और तुम पुराने युग का समापन नहीं कर सकते हो और एक नए युग का सूत्रपात या नया कार्य नहीं कर सकते हो तो, तुम्हें परमेश्वर नहीं कहा जा सकता है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (1)' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

राक्षसों के कब्ज़े में वे लोग होते हैं जो दुष्ट आत्माओं द्वारा दबाये गए और नियंत्रित होते हैं। मनोविक्षिप्ति या कभी-कभी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाना और सामान्य विवेक को पूरी तरह से खो देना, इसकी मुख्य अभिव्यक्ति होती है। ऐसे लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं लेकिन सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ होते हैं और केवल दूसरों को परेशान कर सकते हैं। इसलिए, वे परमेश्वर में विश्वास तो करते हैं लेकिन बचाये नहीं जा सकते हैं और उन्हें निष्कासित कर देना चाहिए। दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में रहने वाले अधिकांश लोग शैतान के अनुचरों के रूप में काम करते हैं और परमेश्वर के कार्य को उलट-पुलट कर देते हैं। उनकी दस मुख्य अभिव्यक्तियाँ निम्नानुसार होती हैं:

1. जो लोग परमेश्वर या मसीह होने का नाटक करते हैं वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।

2. जो लोग यह ढोंग करते हैं कि उनमें स्वर्गदूतों की आत्माएं बसी हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।

3. जो लोग एक और देहधारी परमेश्वर होने का नाटक करते हैं, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।

4. जो लोग परमेश्वर के वचनों को अपने शब्द बताते हैं या लोगों से अपने शब्दों को परमेश्वर के वचन मान लेने के लिए कहते हैं, वे सभी दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में होते हैं।

5. जो लोग अपना अनुसरण और आज्ञापालन करवाने के लिए पवित्र आत्मा द्वारा अपना उपयोग किये जाने का नाटक करते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।

6. जो लोग अक्सर ज़ुबानों में बोलते हैं, भाषाओँ की व्याख्या करते हैं, और सभी प्रकार के अलौकिक दृश्यों को देख सकते हैं, या अक्सर दूसरों के पापों को इंगित करते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में होते हैं।

7. जो लोग अक्सर आत्माओं की अलौकिक बातें सुनते हैं या आत्माओं की आवाज़ें सुनते हैं या अक्सर भूतों को देखते हैं, और जो लोग स्पष्ट रूप से कुछ हद तक दिमाग से सही नहीं होते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में हैं।

8. जिन लोगों का दिमाग खराब हो गया है, जो अक्सर झूठ बोलते हैं, अक्सर खुद से बात करते हैं, बकबक करते हैं या अक्सर कहते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें निर्देश दिया है और पवित्र आत्मा ने उन्हें छुआ है, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में हैं।

9. जिन लोगों के साथ मनोविक्षिप्ति की घटनाएँ हो चुकी हैं, जो मूर्खतापूर्ण काम करते हैं, जो लोगों से सहजता से बात नहीं कर पाते हैं और कभी-कभी पागल-से और खोये-से रहते हैं, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में हैं। जो लोग समलैंगिकों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं राक्षसों के कब्ज़े में रहने वाले लोग हैं, वे भी निष्कासित किये जाएँगे।

10. कुछ लोग आमतौर पर काफी सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ महीनों या एक-दो वर्षों में, उत्तेजित हो सकते हैं और उनमें कोई मानसिक विकार पैदा हो सकता है। विकार के समय वे पूरी तरह से उन लोगों के समान होते हैं जो राक्षसों के वश में हैं। यद्यपि ये लोग कभी-कभी सामान्य होते हैं, फिर भी उन्हें दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में रहे लोगों की तरह वर्गीकृत किया जाता है। (यदि किसी व्यक्ति को कई साल पहले मानसिक विकार हो चुका हो, लेकिन बाद में कई साल तक ऐसा न हुआ हो, और वह परमेश्वर में विश्वास करने के सत्य को समझ गया हो और उसे स्वीकार कर लिया हो, और उसमें कुछ बदलाव हुए हों, तो उसको बुरी आत्माओं से वशीभूत के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा।)

जो व्यक्ति राक्षसों के कब्ज़े में होता है, वह पूरी तरह से शैतान द्वारा वशीभूत, नियंत्रित और शापित होता है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

केवल दो प्रकार की परिस्थितियाँ होती हैं, जहाँ दुष्ट आत्माएँ मनुष्य को धोखा देती हैं: एक प्रकार है, दुष्ट आत्माओं का अलौकिक कार्य, और दूसरा प्रकार है, बुरी आत्माओं का इंसानों के रूप में पुनर्जन्म। जो लोग परमेश्वर का विरोध करते हैं, और बड़े लाल अजगर रूपी राक्षस की तरह सत्य का प्रतिरोध करते हैं वे भी दुष्ट आत्माएँ हैं, वे अधिक कपटी, अधिक दुर्भावनापूर्ण दुष्टात्माएँ हैं। कुछ दुष्ट आत्माएँ मनुष्यों के जीवन-काल में किसी भी समय उनके शरीर को काबू में कर लेती हैं; कुछ दुष्ट आत्माएँ राक्षसों के रूप में पुनर्जन्म लेती हैं। यद्यपि बाहरी तौर पर दुष्ट आत्माओं का कोई अलौकिक कार्य नहीं होता है, और तुम शैतानों के कब्जे के कोई निशान नहीं देख सकते हो, फिर भी वे पागलों की तरह सत्य का विरोध करते हैं; वे बेतहाशा परमेश्वर का विरोध और प्रतिरोध करते हैं। पुनर्जीवित राक्षस सामान्य होते हैं, वे अलौकिक नहीं होते हैं, लेकिन वे सत्य के प्रति शत्रुतापूर्ण होते हैं, जो काफी स्पष्ट है। बड़ा लाल अजगर राक्षसों के पुनर्जन्म की श्रेणी में आता है। सभी राजनीतिज्ञ और सरकारों के प्रमुख जो परमेश्वर का विरोध करते हैं वे भी राक्षसों का पुनर्जन्म हैं। यदि तुम कहते हो कि केवल वे लोग ही राक्षसों के कब्जे में हैं और दुष्ट आत्माएँ हैं जिनके पास दुष्ट आत्माओं का कार्य है, तो यह वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। तो कुछ बुरी आत्माएँ स्वयं को अधिक गहराई से छुपा लेती हैं और तुम उन्हें पहचान नहीं सकते, वे राक्षसों के पुनर्जन्म की श्रेणी में आते हैं।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

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