40. अच्छे कर्म क्या हैं? अच्छे कर्मों की अभिव्यक्तियाँ क्या हैं?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

यदि तुम सत्य को धारण करते हो, तो तुम परमेश्वर का अनुसरण कर सकते हो। यदि तुम जीवन जीते हो, तो तुम परमेश्वर के वचन की अभिव्यक्ति हो सकते हो। यदि तुम्हारे पास जीवन है तो तुम परमेश्वर की आशीषों का आनन्द ले सकते हो। जो लोग सत्य को धारण करते हैं वे परमेश्वर के आशीष का आनन्द ले सकते हैं। परमेश्वर उनके कष्टों का निवारण सुनिश्चित करता है जो उसे सम्पूर्ण हृदय से प्रेम करते हैं और साथ ही कठिनाईयों और पीड़ाओं को सहते हैं, उनके नहीं जो केवल अपने आप से प्रेम करते हैं और शैतान के धोखों का शिकार हो चुके हैं। जो लोग सत्य से प्रेम नहीं करते उनमें अच्छाई कैसे हो सकती है? जो लोग केवल देह से प्रेम करते हैं उनमें धार्मिकता कैसे हो सकती है? क्या धार्मिकता और अच्छाई दोनों सत्य के संदर्भ में नहीं हैं? क्या ये परमेश्वर से सम्पूर्ण हृदय से प्रेम करने वालों के लिए आरक्षित नहीं हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है' से उद्धृत

इसके पहले कि मैं तुम लोगों को छोड़ कर जाऊँ, मुझे तुम लोगों को ऐसे कर्मों से परहेज करने के लिए प्रोत्साहित अवश्य करना चाहिए जो सत्य के अनुरूप नहीं हैं। बल्कि, तुम लोगों को वह करना चाहिए जो सबके लिए सुखद हो, जो सभी मनुष्यों को लाभ पहुँचाता हो, और जो तुम लोगों की अपनी मंज़िल के लिए लाभदायक हो, अन्यथा, ऐसा व्यक्ति जो आपदा के बीच दुःख उठाएगा वह तुम्हारे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं होगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अपनी मंज़िल के लिएपर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो' से उद्धृत

जो लोग सच्चाई को व्यवहार में लाने में सक्षम हैं वे अपने कार्यों में परमेश्वर की जाँच को स्वीकार कर सकते हैं। जब तू परमेश्वर की जाँच को स्वीकार करता है, तो तेरा हृदय सही है। यदि तू हमेशा दूसरों के दिखाने के लिए ही चीज़ों को करता है और परमेश्वर की जाँच को स्वीकार नहीं करता है, तो क्या तेरे हृदय में परमेश्वर है? इस तरह के लोगों के पास परमेश्वर के भय से रहित हृदय होता है। हमेशा अपने स्वयं के वास्ते कार्यों को मत कर, हमेशा अपने हितों की मत सोच, और अपनी स्वयं की हैसियत, चेहरे या प्रतिष्ठा पर विचार मत कर। लोगों के हितों के प्रति मत सोच। तुझे सबसे पहले परमेश्वर के घर के हितों पर विचार अवश्य करना चाहिए और उसे अपनी पहली प्राथमिकता बनाना चाहिए; तुझे परमेश्वर की इच्छा के बारे में मननशील होना चाहिए, इस पर चिंतन करने के द्वारा आरंभ कर कि तू अपने कर्तव्य को पूरा करने में अशुद्ध रहा है या नहीं, तूने वफादार होने में, अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करने में, अपना अधिकतम किया और अपना सर्वस्व दिया है या नहीं, तूने अपने कर्तव्य, और परमेश्वर के घर के कार्य के प्रति पूरे दिल से विचार किया है या नहीं। तुझे इन चीज़ों के बारे में विचार करने की आवश्यकता है। इन चीज़ों पर बार-बार विचार कर, और तेरे पास अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभाने का एक आसान समय होगा। केवल जब तेरी क्षमता कमज़ोर होती है, तभी तेरा अनुभव उथला होता है, या जब तू अपने कार्यों से अच्छी तरह से वाकिफ़ नहीं होता है, तब सारी ताकत लगा देने के बावजूद तेरे कार्य में कुछ गलतियाँ या कमियाँ हो सकती हैं, और परिणाम बहुत अच्छे नहीं हो सकते हैं। जब तू कार्यों को करते हुए अपनी स्वयं की स्वार्थी इच्छाओं या अपने स्वयं के हितों के बारे में विचार नहीं करता है, और इसके बजाय हर समय परमेश्वर के घर के कार्य पर विचार करता है, परमेश्वर के घर के हितों के बारे में लगातार सोचता रहता है, और अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभाता है, तब तू परमेश्वर के समक्ष अच्छे कर्मों का संचय करेगा। जिनके पास ये अच्छे कर्म हैं ये वे लोग हैं जो सत्य की वास्तविकता को धारण करते हैं, और इसलिए उनके पास गवाही है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'तू अपने सच्चे हृदय कोपरमेश्वर की ओर मोड़ने के बाद सच्चाई को प्राप्त कर सकता है' से उद्धृत

यदि तुम्हारे पास वास्तव में विवेक है, तो तुम्हारे पास बोझ और उत्तरदायित्व की भावना अवश्य होनी चाहिए। तुम्हें अवश्य कहना चाहिए: "चाहे मुझे जीता जाये या पूर्ण बनाया जाए, मुझे इस गवाही देने के कदम को अवश्य सही ढंग से करना चाहिए।" परमेश्वर के एक प्राणी के रूप में, किसी भी व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा सर्वथा जीता जा सकता है, और अंततः, वह परमेश्वर से प्रेम रखने वाले दिल से परमेश्वर के प्रेम को चुकाते हुए और पूरी तरह से परमेश्वर के प्रति समर्पित होते हुए, परमेश्वर को संतुष्ट करने में सक्षम हो जाता है। यह मनुष्य का उत्तरदायित्व है, यह वह कर्तव्य है जिसे मनुष्य को अवश्य करना चाहिए, और वह बोझ है जिसे मनुष्य द्वारा अवश्य वहन किया जाना चाहिए, और मनुष्य को इस आदेश को अवश्य पूरा करना चाहिए। केवल तभी वह वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अभ्यास (3)' से उद्धृत

कलीसिया में, तुम मेरी गवाही में दृढ़ रहोगे, सत्य पर बने रहोगे—गलत गलत है और सही सही है—और काले और सफ़ेद के बीच भ्रमित नहीं होओगे। तुम शैतान के साथ युद्ध पर होओगे और तुम्हें उसे पूरी तरह से हराना होगा ताकि वह फिर कभी न खड़ा हो सके। मेरी गवाही की रक्षा के लिए तुम्हें सब कुछ बलिदान करना होगा। यह तुम्हारे कार्यों का लक्ष्य होगा, इसे मत भूलना।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 41' से उद्धृत

तुम लोगों में से प्रत्येक को अपना कर्तव्य अपनी पूरी क्षमता से, खुले और ईमानदार दिलों के साथ पूरा करना चाहिए, और जो भी कीमत ज़रूरी हो, उसे चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए। जैसा कि तुम लोगों ने कहा है, जब दिन आएगा, तो परमेश्वर ऐसे किसी भी व्यक्ति के प्रति लापरवाह नहीं रहेगा, जिसने उसके लिए कष्ट उठाए होंगे या कीमत चुकाई होगी। इस प्रकार का दृढ़ विश्वास बनाए रखने लायक है, और यह सही है कि तुम लोगों को इसे कभी नहीं भूलना चाहिए। केवल इसी तरह से मैं तुम लोगों के बारे में निश्चिंत हो सकता हूँ। वरना तुम लोगों के बारे में मैं कभी निश्चिंत नहीं हो पाऊँगा, और तुम हमेशा मेरी घृणा के पात्र रहोगे। अगर तुम सभी अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन सको और अपना सर्वस्व मुझे अर्पित कर सको, मेरे कार्य के लिए कोई कोर-कसर न छोड़ो, और मेरे सुसमाचार के कार्य के लिए अपनी जीवन भर की ऊर्जा अर्पित कर सको, तो क्या फिर मेरा हृदय तुम्हारे लिए अकसर हर्ष से नहीं उछलेगा? इस तरह से मैं तुम लोगों के बारे में पूरी तरह से निश्चिंत हो सकूँगा, या नहीं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'गंतव्य के बारे में' से उद्धृत

तुम अपना हृदय और शरीर और अपना समस्त वास्तविक प्यार परमेश्वर को समर्पित कर सकते हो, उसके सामने रख सकते हो, उसके प्रति पूरी तरह से आज्ञाकारी हो सकते हो, और उसकी इच्छा के प्रति पूर्णतः विचारशील हो सकते हो। शरीर के लिए नहीं, परिवार के लिए नहीं, और अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के परिवार के हित के लिए। तुम परमेश्वर के वचन को हर चीज में सिद्धांत के रूप में, नींव के रूप में ले सकते हो। इस तरह, तुम्हारे इरादे और तुम्हारे दृष्टिकोण सब सही जगह पर होंगे, और तुम ऐसे व्यक्ति होओगे जो परमेश्‍वर के सामने उसकी प्रशंसा प्राप्त करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो परमेश्वर से सचमुच प्यार करते हैं,वे वो लोग हैं जो परमेश्वर की व्यावहारिकता के प्रति पूर्णतः समर्पित हो सकते हैं' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

बीस अच्छे कर्म जो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को अवश्य तैयार करने चाहिए:

1. कलीसिया के जीवन में परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए समस्याओं को हल करने के लिए सत्य का अक्सर संवाद करो, लगातार उन लोगों का समर्थन करो जो वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करते हैं, उन्हें सत्य को समझने और वास्तविकता में प्रवेश करने में सहायता करो। यह एक अच्छा कर्म है। असली प्रेम यही है।

2. अगर, अपने कर्तव्य करने में, तुम इसे लेन-देन पर आधारित नहीं करते या इसे पुरस्कार के लिए नहीं करते, तुम्हारी कोई दूसरी मंशा नहीं होती है और तुम सिर्फ़ ऊपर-ऊपर से काम नहीं करते हो, और व्यावहारिक परिणाम हासिल होते हैं, तो यह एक अच्छा कर्म है। जो लोग इस तरह अपना कर्तव्य करते हैं वे ही वास्तव में परमेश्वर के लिए खुद को खपा रहे हैं।

3. यदि वे लोग जो गलती से कलीसिया से अलग या निष्कासित कर दिये गए हैं, अच्छे पाए जाते हैं, उन्हें मदद करने का प्रयास करो, और उनका समर्थन करो और उन्हें वापस कलीसिया में स्वीकार कर लो। यह एक अच्छा कर्म है। दूसरे स्थानों से कलीसिया की तलाश करने वाले भाइयों और बहनों को स्वीकार करना और उनके साथ परमेश्वर के वचनों को खाना-पीना और मिलकर कलीसियाई जीवन जीना, एक अच्छा कर्महै।

4. परमेश्वर के चुने हुए सच्चे विश्वासी सत्य को समझ सकें, वास्तविकता में प्रवेश कर सकें और जीवन में तरक्की पा सकें, इसके लिये भोजन और नींद की परवाह किये बिना कड़ी मेहनत करना और श्रमसाध्य प्रयास करना—यह एक अच्छा कर्म है। यह वास्तविकता उन व्यक्तियों में होनी चाहिए जो परमेश्वर की सेवा करने में परमेश्वर के इरादों के प्रति सचमुच विचारशील हैं।

5. सुसमाचार फैलाने पर ध्यान दो, जब भी तुम्हें किसी उपयुक्त व्यक्ति से मिलने का मौका मिले, तो परमेश्वर के कार्य की गवाही दो। अधिक से अधिक लोगों को पाने के लिए सुसमाचार का यथासंभव प्रचार करो। यह एक अच्छा कर्म है। यदि तुम कुछ अच्छे लोगों को परमेश्वर के सामने ला सको जो सचमुच परमेश्वर में विश्वास करते हों और जो वास्तव में सत्य का अनुसरण करने में सक्षम हों, तो यह एक और भी अच्छा कर्म है।

6. किसी दुष्ट व्यक्ति द्वारा कलीसिया में गड़बड़ी किये जाने का पता लगने पर उसे बुराई करने से रोकने और प्रतिबंधित करने के लिए हर तरह के विवेक का प्रयोग करो, अव्यवस्था सुधारने और कलीसियाई जीवन की सहजता को बनाए रखने के लिए सत्य और विवेक का उपयोग करो। यह एक अच्छा कर्म है।

7. चाहे कलीसिया में कोई भी समस्या उत्पन्न हो, परमेश्वर के पक्ष में खड़े होकर उसके कार्य की सुरक्षा करना, परमेश्वर के चुने हुए लोगों के जीवन-प्रवेश की रक्षा करना एक अच्छा कर्म है। यदि तुम सत्य का उपयोग करने में सक्षम हो ताकि समस्याएँ सुलझ सकें और परमेश्वर के चुने हुए लोग सत्य को समझ सकें और वे बुराई से भलाई को अलग कर सकें, तो यह और भी बहुत अच्छा कर्म है।

8. उन दुष्टों को कठोरता से उजागर करने और उनका खंडन करने में सक्षम होना जो पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग में लाये गए व्यक्ति की आलोचना करने, उस पर हमला और उसका विरोध करने की हिम्मत करते हैं, और परमेश्वर के कार्य को कायम रखना, एक अच्छा कर्म है। यदि कोई व्यक्ति सभी प्रकार के दुष्ट लोगों और मसीह-विरोधियों द्वारा पैदा की गई बाधाओं को दूर करने के लिए सत्य का उपयोग करता है, और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को लाभ पहुंचाता है, तो यह एक अच्छा कर्म है।

9. कलीसिया में सभी तरह की भ्रांतियों और पाखंडों का पता लगने पर सत्य की तलाश करो और परमेश्वर के वचनों के अनुसार उनका खंडन और उनकी निंदा करो, ताकि परमेश्वर के चुने हुए लोग नुकसान से बचे रहें और उन्हें जीवन में आत्मिक उन्नति और विकास पाने में मदद मिल सके। यह एक अच्छा कर्म है।

10. यदि यह पता चलता है कि जो लोग परमेश्वर पर सच्चा विश्वास करते हैं और सत्य का अनुसरण करने के इच्छुक हैं, उन्हें धोखा दिया गया है या नियंत्रित किया गया है, तो उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना, सत्य के बारे में धैर्यपूर्वक सहभागिता करना और उन्हें दुष्टों के हाथों से बाहर निकालना, ताकि वे वास्तव में परमेश्वर के पास लौट सकें और प्रकाश के लिए अंधेरे को त्याग सकें, यह एक अच्छा कर्म है।

11. यदि यह पाया जाता है कि वास्तव में कोई एक झूठा अगुवा या मसीह-विरोधी है जो दूसरों पर हुकूमत करता है और अपना एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, तो इसकी तुरंत इसकी रिपोर्ट की जाए और उन लोगों से संपर्क किया जाए जो सत्य को समझते हैं, ताकि परमेश्वर के चुने हुए लोगों को दुष्ट शैतान के नुकसान से बचाया जा सके। यह बेशक एक अच्छा कर्म होगा।

12. प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न होने पर, यदि कोई परमेश्वर के चुने हुए लोगों की रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास कर सकता है, परमेश्वर के घर के धन और सामान के लिए उचित व्यवस्था कर सकता है और परमेश्वर के चढ़ावे को शैतान और बड़े लाल अजगर के हाथों में पड़ने से बचा सकता है, तो ऐसा करने वाला व्यक्ति परमेश्वर के कार्य की रक्षा करता है और परमेश्वर के प्रति वास्तव में वफ़ादार होता है।

13. जो वास्तव में परमेश्वर पर सच्चा विश्वास करते हैं उन लोगों को गिरफ्तारी से बचाना और जिन भाइयों और बहनों को गिरफ्तार कर लिया गया है उन्हें छुड़ाने के लिए सभी संपर्कों का उपयोग करना एक अच्छा कर्म है। कलीसियाई जीवन को बनाए रखने और परमेश्वर के चुने हुए लोगों की रक्षा करने के लिए विवेक का उपयोग करना और भी अच्छा कर्म है।

14. जो भाई और बहनें सचमुच खुद को परमेश्वर के लिए खपाते हैं और जब कठिनाइयाँ और परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं तब भी सत्य का अनुसरण करते हैं, उन्हें मदद देने के लिए हर संभव प्रयास करना एक अच्छा कर्म है। उन अगुवाओं और सेवाकर्मियों की मदद करना जो स्वयं को परमेश्वर के लिए पूरे समय खपाते हैं और जिनके परिवार कठिनाई में हैं, एक अच्छा कर्म है।

15. यदि कोई व्यक्ति बिना खतरों से डरे या कीमत अदा करने से बेखौफ, उन भाइयों और बहनों को स्वीकार करता है और उनकी हर संभव मदद करने की कोशिश करता है जिनका पीछा किया जा रहा है और जो वांछितों की सूची में है, और इसके अलावा, यदि वह परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए अपने कर्तव्य के निर्वाह के दौरान लोगों की आलोचना, घृणा और मुसीबतों को सहन कर सकता है तो यह एक अच्छा कर्म है।

16. उन भाइयों और बहनों को जो वास्तव में परमेश्वर में विश्वास रखते हैं और सत्य का अनुसरण करते हैं, परमेश्वर के वचनों को खाने और पीने के लिए एकत्रित करना, सत्य के बारे में उनसे सहभागिता करना और परीक्षणों में कलीसियाई जीवन जीना-एक अच्छा कर्म है। सत्य को समझने में, परीक्षणों और आपदाओं के दौरान गवाह के रूप में खड़े होने में, कमज़ोर भाइयों और बहनों का समर्थन करना एक अच्छा कर्म है।

17. उन बुरे लोगों को बेनक़ाब करना और उनकी शिकायत करना जो चढ़ावे की चोरी करते हैं और परमेश्वर के घर की संपत्ति का गबन करते हैं, एक अच्छा कर्म है। इससे परमेश्वर के चढ़ावे और परमेश्वर के घर के धन की हानि को रोका जा सकता है। परमेश्वर के चढ़ावे को दुष्टों के हाथों में पड़ने से और कुत्सित इरादों वाले लोगों द्वारा गबन किये जाने से बचाना भी एक अच्छा कर्म है।

18. यदि पवित्र आत्मा द्वारा इस्तेमाल किए गए इंसान की कार्य-व्यवस्थाओं को अंजाम देने में सहयोग किया जाए और कलीसिया में परमेश्वर के चुने हुए लोगों की सभी प्रकार की व्यावहारिक समस्याओं को हल करने के लिए कड़ी मेहनत की जाए, तथा परमेश्वर के कार्य की रक्षा करने एवं परमेश्वर के चुने हुए लोगों को परमेश्वर में विश्वास करने के सही मार्ग पर लाने के लिए काफ़ी व्यावहारिक काम किया जाए, तो यह एक अच्छा कर्म है।

19. पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए जाने वाले व्यक्ति के नेतृत्व और उसकी चरवाही में सक्रिय सहयोग करना, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को परमेश्वर पर विश्वास करने के सही मार्ग पर लाने के लिए झूठे अगुवाओं और मसीह-विरोधियों के साथ बिना किसी डर के संघर्ष शुरू करना, परमेश्वर के कार्य की रक्षा करने के लिए कीमत चुकाना और परिणाम प्राप्त करना—ये सब अच्छे कर्मों के रूप में वर्गीकृत किये जाते हैं।

20. कार्य की व्यवस्थाओं के अनुसार झूठे अगुवाओं और मसीह-विरोधियों को पहचानना और उन्हें अलग करना, उन्हें सत्य के अनुसार उजागर करना, और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को अधिक नुकसान से बचाने की खातिर उन्हें इस्तीफा देने के लिए राजी करना एक अच्छा कर्म है। जिन लोगों ने भूल की है लेकिन वास्तविक पश्चाताप करने में सक्षम हैं और जिनमें अपने कर्तव्यों को जारी रखने की भली मानवता है, उन अगुवाओं की मदद और रक्षा करना एक अच्छा कर्म है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

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