2. बुरे कर्म कौन-से होते हैं और वे कैसे अभिव्यक्त किए जाते हैं

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

वह मानक क्या है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के कर्मों का न्याय अच्छे या बुरे के रूप में किया जाता है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपने विचारों, अभिव्यक्तियों और कार्यों में तुममें सत्य को व्यवहार में लाने और सत्य-वास्तविकता को जीने की गवाही है या नहीं। यदि तुम्हारे पास यह वास्तविकता नहीं है या तुम इसे नहीं जीते, तो इसमें कोई शक नहीं कि तुम कुकर्मी हो। परमेश्वर कुकर्मियों को किस नज़र से देखता है? तुम्हारे विचार और बाहरी कर्म परमेश्वर की गवाही नहीं देते, न ही वे शैतान को शर्मिंदा करते या उसे हरा पाते हैं; बल्कि वे परमेश्वर को शर्मिंदा करते हैं और ऐसे निशानों से भरे पड़े हैं जिनसे परमेश्वर शर्मिंदा होता है। तुम परमेश्वर के लिए गवाही नहीं दे रहे, न ही तुम परमेश्वर के लिये अपने आपको खपा रहे हो, तुम परमेश्वर के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और दायित्वों को भी पूरा नहीं कर रहे; बल्कि तुम अपने फ़ायदे के लिये काम कर रहे हो। "अपने फ़ायदे के लिए" से क्या अभिप्राय है? शैतान के लिये काम करना। इसलिये, अंत में परमेश्वर यही कहेगा, "हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ।" परमेश्वर की नज़र में तुमने अच्छे कर्म नहीं किये हैं, बल्कि तुम्हारा व्यवहार दुष्टों वाला हो गया है। तुम्हें पुरस्कार नहीं दिया जाएगा और परमेश्वर तुम्हें याद नहीं रखेगा। क्या यह पूरी तरह से व्यर्थ नहीं है?

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को दो, और तुम सत्य को प्राप्त कर सकते हो' से उद्धृत

मनुष्य का स्वभाव अत्यंत शातिर बन गया है, उसकी समझ अत्यंत मंद हो गई है, और उसका अंत:करण दुष्ट के द्वारा पूरी तरह से रौंद दिया गया है और मनुष्य के मौलिक अंत:करण का अस्तित्व बहुत पहले ही समाप्त हो गया था। मनुष्य, मानवजाति को बहुत अधिक जीवन और अनुग्रह प्रदान करने के लिए देहधारी परमेश्वर का न केवल एहसानमंद नहीं है, बल्कि परमेश्वर के द्वारा उसे सत्य दिए जाने पर वह आक्रोश में भी है; ऐसा इसलिए है क्योंकि मनुष्य को सत्य में थोड़ी-सी भी रूचि नहीं है, इसलिए वह परमेश्वर के प्रति आक्रोश में आ गया है। मनुष्य न सिर्फ देहधारी परमेश्वर के लिए अपनी जान देने के नाकाबिल है, बल्कि वह उससे उपकार हासिल करने की कोशिश भी करता रहता है, और परमेश्वर से ऐसे सूद की माँग करता है जो उससे दर्जनों गुना बड़ी हैं जो मनुष्य ने परमेश्वर को दिया है। ऐसे विवेक और समझ के लोग इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते हैं, वे अब भी ऐसा मानते हैं कि उन्होंने परमेश्वर के लिए स्वयं को बहुत अधिक खर्च किया है, और परमेश्वर ने उन्हें बहुत थोड़ा दिया है। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने मुझे सिर्फ एक कटोरा पानी ही दिया है फिर भी अपने हाथ पसार कर माँग करते हैं कि मैं उन्हें दो कटोरे दूध की कीमत चुकाऊँ या मुझे एक रात के लिए कमरा दिया है परन्तु मुझ से कई रातों के किराए की माँग करते हैं। ऐसी मानवता, और ऐसे विवेक के साथ, कैसे तू अब भी जीवन पाने की कामना कर सकता है? तू कितना घृणित अभागा है! इंसान की इसी प्रकार की मानवता और विवेक के कारण ही देहधारी परमेश्वर पूरी धरती पर भटकता फिरता है, वह किसी भी स्थान पर आश्रय नहीं पाता। जो सचमुच विवेक और मानवता को धारण किये हुए हैं उन्हें देहधारी परमेश्वर की आराधना और सच्चे दिल से सेवा इसलिए नहीं करनी चाहिए कि उसने बहुत कार्य किया है, बल्कि तब भी करनी चाहिए अगर उसने कुछ भी कार्य न किया होता। जो लोग सही समझ के हैं उन्हें यह करना चाहिये और यह मनुष्य का कर्तव्य है। अधिकतर लोग परमेश्वर की सेवा करने के लिए शर्तों की बात भी करते हैं : वे परवाह नहीं करते कि वह परमेश्वर है या मनुष्य है, वे सिर्फ अपनी शर्तों की ही बात करते हैं, और सिर्फ अपनी ही इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं। जब तुम लोग मेरे लिए खाना पकाते हो, तो तुम सेवा शुल्क की माँग करते हो, जब तुम लोग मेरे लिए दौड़ते हो, तो तुम लोग मुझसे दौड़ने का शुल्क माँगते हो, जब तुम लोग मेरे लिए काम करते हो तो काम करने का शुल्क माँगते हो, जब तुम लोग मेरे कपड़े धोते हो तो कपड़े धोने का शुल्क माँगते हो, जब तुम कलीसिया के लिए कुछ करते हो तो स्वास्थ्यलाभ की लागत माँगते हो, जब तुम लोग बोलते हो तो तुम वक्ता का शुल्क माँगते हो, जब तुम लोग पुस्तकें बाँटते हो तो तुम लोग वितरण शुल्क माँगते हो, और जब लिखते हो तो लिखने का शुल्क माँगते हो। जिनके साथ मैं निपट चुका हूँ वे मुझ से मुआवजा तक माँगते हैं, जबकि वे जो घर भेजे जा चुके हैं अपने नाम के नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति की माँग करते हैं; वे जो अविवाहित हैं दहेज की माँग करते हैं, या अपनी खोई हुई जवानी के लिए मुआवजे की माँग करते हैं, वे जो मुर्गे को काटते हैं वे कसाई के शुल्क की माँग करते हैं, वे जो खाने को तलते हैं, तलने का शुल्क माँगते हैं, और वे जो सूप बनाते हैं उसके लिए भी भुगतान माँगते हैं...। यह तुम लोगों की ऊँची और शक्तिशाली मानवता है और ये तुम सबके स्नेही विवेक के द्वारा निर्धारित कार्य हैं। तुम लोगों की समझ कहाँ है? तुम लोगों की मानवता कहाँ है? मैं तुम लोगों को बता दूँ! यदि तुम लोग ऐसे ही करते रहोगे, तो मैं तुम सबके मध्य में कार्य करना बंद कर दूँगा। मैं मनुष्य के रूप में जंगली जानवरों के झुंड में कार्य नहीं करूँगा, मैं ऐसे समूह के लोगों के लिए दुःख नहीं सहूँगा जिनका उजला चेहरा जंगली हृदय को छुपाये हुए है, मैं ऐसे जानवरों के झुंड के लिए कष्ट नहीं झेलूँगा जिनके उद्धार की थोड़ी-सी भी संभावना नहीं है। जिस दिन मैं तुम सबकी ओर पीठ कर लूँगा उसी दिन तुम सब मर जाओगे, उस दिन अंधकार तुम सब पर आ जायेगा, और उस दिन तुम सब प्रकाश के द्वारा त्याग दिए जाओगे। मैं तुम लोगों को बता दूँ! मैं कभी भी तुम लोगों जैसे समूह पर दयालु नहीं बनूँगा, एक ऐसा झुंड जो जानवरों से भी बदतर है! मेरे वचनों और कार्यकलापों की कुछ सीमायें हैं, और तुम सबकी मानवता और विवेक जैसे हैं उसके चलते, मैं और कार्य नहीं करूँगा, क्योंकि तुम सबमें विवेक की बहुत कमी है, तुम लोगों ने मुझे बहुत अधिक पीड़ा दी है, और तुम लोगों का घृणित व्यवहार मुझे बहुत अधिक घिन दिलाता है! तुम जैसे लोग जिनमें मानवता और विवेक की इतनी कमी है उन्हें उद्धार का अवसर कभी नहीं मिलेगा; मैं ऐसे बेरहम और एहसान-फरामोश लोगों को कभी भी नहीं बचाऊँगा। जब मेरा दिन आएगा, मैं अनंत काल के लिए अनाज्ञाकारिता की संतानों पर अपनी झुलसाने वाली आग की लपटों को बरसाऊँगा जिन्होंने एक बार मेरे प्रचण्ड कोप को उकसाया था, मैं ऐसे जानवरों पर अपने अनंत दंड को थोप दूंगा जिन्होंने कभी मुझे अपशब्द कहे थे और मुझे त्याग दिया था, मैं अनाज्ञाकारिता के पुत्रों को अपने क्रोध की आग में हमेशा के लिए जलाऊँगा जिन्होंने कभी मेरे साथ खाया था और जो मेरे साथ रहे थे, परन्तु मुझ में विश्वास नहीं रखा, और मेरा अपमान किया और मुझे धोखा दिया था। मैं उन सब को सज़ा दूँगा जिन्होंने मेरे क्रोध को भड़काया, मैं उन सभी जानवरों पर अपने कोप की सम्पूर्णता को बरसाऊँगा जिन्होंने कभी बराबरी में मेरे बगल में खड़े होने की कामना की थी, फिर भी मेरी आराधना या मेरा आज्ञापालन नहीं किया, मेरी छड़ी जिससे मैं मनुष्य को मारता हूँ, वह उन जानवरों पर टूट पड़ेगी जिन्होंने कभी मेरी देखभाल और जो रहस्य मैंने बोले उनका आनंद लिया था, और जिन्होंने कभी मुझसे भौतिक आनंद लेने की कोशिश की थी। मैं ऐसे किसी भी व्यक्ति को क्षमा नहीं करूँगा जो मेरा स्थान लेने की कोशिश करते हैं; मैं उन में से किसी को भी नहीं छोड़ूँगा जो मुझ से खाना और कपड़े हथियाने की कोशिश करते हैं। फिलहाल तो, तुम सब नुकसान से बचे हुए हो और मुझसे माँगने में हद से आगे बढ़ जाने के कारण असफल हो जाते हो। जब कोप का दिन आ जायेगा तो तुम मुझ से और अधिक नहीं माँगोगे; उस समय, मैं तुम लोगों को जी भरकर चीजों का "आनंद" लेने दूँगा, मैं तुम सबके चेहरों को मिट्टी में घुसा दूँगा, और तुम सब फिर दोबारा कभी भी उठ नहीं पाओगे! देर-सवेर, मैं तुम सबका यह कर्ज "चुका" दूँगा—और मैं आशा करता हूँ कि तुम सब धीरज से इस दिन के आने की प्रतीक्षा करोगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है' से उद्धृत

मैंने बहुत सारे वचन कहे हैं, और अपनी इच्छा और अपने स्वभाव को भी व्यक्त किया है, फिर भी लोग अभी भी मुझे जानने और मुझ पर विश्वास करने में अक्षम हैं। या यह कहा जा सकता है कि लोग अभी भी मेरी आज्ञा का पालन करने में अक्षम हैं। जो बाइबल में जीते हैं, जो व्यवस्था में जीते हैं, जो सलीब पर जीते हैं, जो सिद्धांत के अनुसार जीते हैं, जो उस कार्य के मध्य जीते हैं जिसे मैं आज करता हूँ—उनमें से कौन मेरे अनुकूल है? तुम लोग सिर्फ़ आशीष और पुरस्कार पाने के बारे में ही सोचते हो, पर कभी यह नहीं सोचा कि मेरे अनुकूल वास्तव में कैसे बनो, या अपने को मेरे विरुद्ध होने से कैसे रोको। मैं तुम लोगों से बहुत निराश हूँ, क्योंकि मैंने तुम लोगों को बहुत अधिक दिया है, जबकि मैंने तुम लोगों से बहुत कम हासिल किया है। तुम लोगों का छल, तुम लोगों का घमंड, तुम लोगों का लालच, तुम लोगों की फालतू इच्छाएँ, तुम लोगों का धोखा, तुम लोगों की अवज्ञा—इनमें से कौन-सी चीज़ मेरी नज़र से बच सकती है? तुम लोग मेरे प्रति असावधान हो, मुझे मूर्ख बनाते हो, मेरा अपमान करते हो, मुझे फुसलाते हो, मुझसे ज़बरन वसूली करते हो, बलिदानों के लिए मुझसे ज़बरदस्ती करते हो—ऐसे दुष्कर्म मेरी सज़ा से कैसे बचकर निकल सकते हैं? ये सब दुष्कर्म मेरे साथ तुम लोगों की शत्रुता का प्रमाण हैं, और तुम लोगों की मेरे साथ अनुकूलता न होने का प्रमाण हैं। तुम लोगों में से प्रत्येक अपने को मेरे साथ बहुत अनुकूल समझता है, परंतु यदि ऐसा होता, तो फिर यह अकाट्य प्रमाण किस पर लागू होगा? तुम लोगों को लगता है कि तुम्हारे अंदर मेरे प्रति बहुत ईमानदारी और निष्ठा है। तुम लोग सोचते हो कि तुम बहुत ही रहमदिल, बहुत ही करुणामय हो और तुमने मेरे प्रति बहुत समर्पण किया है। तुम लोग सोचते हो कि तुम लोगों ने मेरे लिए पर्याप्त से अधिक किया है। लेकिन क्या तुम लोगों ने कभी इसे अपने कामों से मिलाकर देखा है? मैं कहता हूँ, तुम लोग बहुत हीघमंडी, बहुत ही लालची, बहुत ही लापरवाह हो; और जिन चालबाज़ियों से तुम मुझे मूर्ख बनाते हो, वे बहुत शातिर हैं, और तुम्हारे इरादे और तरीके बहुत घृणित हैं। तुम लोगों की वफ़ादारी बहुत ही थोड़ी है, तुम्हारी ईमानदारी बहुत ही कम है, और तुम्हारी अंतरात्मा तो और अधिक क्षुद्र है। तुम लोगों के हृदय में बहुत ही अधिक द्वेष है, और तुम्हारे द्वेष से कोई नहीं बचा है, यहाँ तक कि मैं भी नहीं। तुम लोग अपने बच्चों या अपने पति या आत्म-रक्षा के लिए मुझे बाहर निकाल देते हो। मेरी चिंता करने के बजाय तुम लोग अपने परिवार, अपने बच्चों, अपनी हैसियत, अपने भविष्य और अपनी संतुष्टि की चिंता करते हो। तुम लोगों ने बातचीत या कार्य करते समय कभी मेरे बारे में सोचा है? ठंड के दिनों में तुम लोगों के विचार अपने बच्चों, अपने पति, अपनी पत्नी या अपने माता-पिता की तरफ मुड़ जाते हैं। गर्मी के दिनों में भी तुम सबके विचारों में मेरे लिए कोई स्थान नहीं होता। जब तुम अपना कर्तव्य निभाते हो, तब तुम अपने हितों, अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा, अपने परिवार के सदस्यों के बारे में ही सोच रहे होते हो। तुमने कब मेरे लिए क्या किया है? तुमने कब मेरे बारे में सोचा है? तुमने कब अपने आप को, हर कीमत पर, मेरे लिए और मेरे कार्य के लिए समर्पित किया है? मेरे साथ तुम्हारी अनुकूलता का प्रमाण कहाँ है? मेरे साथ तुम्हारी वफ़ादारी की वास्तविकता कहाँ है? मेरे साथ तुम्हारी आज्ञाकारिता की वास्तविकता कहाँ है? कब तुम्हारे इरादे केवल मेरे आशीष पाने के लिए नहीं रहे हैं? तुम लोग मुझे मूर्ख बनाते और धोखा देते हो, तुम लोग सत्य के साथ खेलते हो, तुम सत्य के अस्तित्व को छिपाते हो, और सत्य के सार को धोखा देते हो। इस तरह मेरे ख़िलाफ़ जाने से भविष्य में क्या चीज़ तुम लोगों की प्रतीक्षा कर रही है? तुम लोग केवल एक अज्ञात परमेश्वर के साथ अनुकूलता की खोज करते हो, और मात्र एक अज्ञात विश्वास की खोज करते हो, लेकिन तुम मसीह के साथ अनुकूल नहीं हो। क्या तुम्हारी दुष्टता के लिए भी वही प्रतिफल नहीं मिलेगा, जो दुष्ट को मिलता है? उस समय तुम लोगों को एहसास होगा कि जो कोई मसीह के अनुकूल नहीं होता, वह कोप के दिन से बच नहीं सकता, और तुम लोगों को पता चलेगा कि जो मसीह के शत्रु हैं, उन्हें कैसा प्रतिफल दिया जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम्हें मसीह के साथ अनुकूलता का तरीका खोजना चाहिए' से उद्धृत

यदि तुम परमेश्वर के मापन और परिसीमन के लिए अपनी धारणाओं का उपयोग करते हो, मानो परमेश्वर कोई मिट्टी की अचल मूर्ति हो, और अगर तुम लोग परमेश्वर को बाइबल के मापदंडों के भीतर सीमांकित करते हो और उसे कार्य के एक सीमित दायरे में समाविष्ट करते हो, तो इससे यह प्रमाणित होता है कि तुम लोगों ने परमेश्वर की निंदा की है। चूँकि पुराने विधान के युग के यहूदियों ने परमेश्वर को एक अचल प्रतिमा के रूप में लिया था, जिसे वे अपने हृदयों में रखते थे, मानो परमेश्वर को मात्र मसीह ही कहा जा सकता था, और मात्र वही, जिसे मसीह कहा जाता था, परमेश्वर हो सकता हो, और चूँकि मानवजाति परमेश्वर की सेवा और आराधना इस तरह से करती थी, मानो वह मिट्टी की एक (निर्जीव) मूर्ति हो, इसलिए उन्होंने उस समय के यीशु को मौत की सजा देते हुए सलीब पर चढ़ा दिया—निर्दोष यीशु को इस तरह मौत की सजा दे दी गई। परमेश्वर ने कोई अपराध नहीं किया था, फिर भी मनुष्य ने उसे छोड़ने से इनकार कर दिया, और उसे मृत्युदंड देने पर जोर दिया, और इसलिए यीशु को सलीब पर चढ़ा दिया गया। मनुष्य सदैव विश्वास करता है कि परमेश्वर स्थिर है, और वह उसे एक अकेली पुस्तक बाइबल के आधार पर परिभाषित करता है, मानो मनुष्य को परमेश्वर के प्रबंधन की पूर्ण समझ हो, मानो मनुष्य वह सब अपनी हथेली पर रखता हो, जो परमेश्वर करता है। लोग बेहद बेतुके, बेहद अहंकारी और स्वभाव से बड़बोले हैं। परमेश्वर के बारे में तुम्हारा ज्ञान कितना भी महान क्यों न हो, मैं फिर भी यही कहता हूँ कि तुम परमेश्वर को नहीं जानते, कि तुम वह व्यक्ति हो जो परमेश्वर का सबसे अधिक विरोध करता है, और कि तुमने परमेश्वर की निंदा की है, कि तुम परमेश्वर के कार्य का पालन करने और परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जाने के मार्ग पर चलने में सर्वथा अक्षम हो। क्यों परमेश्वर मनुष्य के कार्यकलापों से कभी संतुष्ट नहीं होता? क्योंकि मनुष्य परमेश्वर को नहीं जानता, क्योंकि उसकी अनेक धारणाएँ है, क्योंकि उसका परमेश्वर का ज्ञान वास्तविकता से किसी भी तरह मेल नहीं खाता, इसके बजाय वह नीरस ढंग से एक ही विषय को बिना बदलाव के दोहराता रहता है और हर स्थिति के लिए एक ही दृष्टिकोण इस्तेमाल करता है। और इसलिए, आज पृथ्वी पर आने पर, परमेश्वर को एक बार फिर मनुष्य द्वारा सलीब पर चढ़ा दिया गया है। क्रूर मानवजाति! साँठ-गाँठ और साज़िश, एक-दूसरे से छीनना और हथियाना, प्रसिद्धि और संपत्ति के लिए हाथापाई, आपसी कत्लेआम—यह सब कब समाप्त होगा? परमेश्वर द्वारा बोले गए लाखों वचनों के बावजूद किसी को भी होश नहीं आया है। लोग अपने परिवार और बेटे-बेटियों के वास्ते, आजीविका, भावी संभावनाओं, हैसियत, महत्वाकांक्षा और पैसों के लिए, भोजन, कपड़ों और देह-सुख के वास्ते कार्य करते हैं। पर क्या कोई ऐसा है, जिसके कार्य वास्तव में परमेश्वर के वास्ते हैं? यहाँ तक कि जो परमेश्वर के लिए कार्य करते हैं, उनमें से भी बहुत थोड़े ही हैं, जो परमेश्वर को जानते हैं। कितने लोग अपने स्वयं के हितों के लिए काम नहीं करते? कितने लोग अपनी हैसियत बचाए रखने के लिए दूसरों पर अत्याचार या उनका बहिष्कार नहीं करते? और इसलिए, परमेश्वर को असंख्य बार बलात् मृत्युदंड दिया गया है, और अनगिनत बर्बर न्यायाधीशों ने परमेश्वर की निंदा की है और एक बार फिर उसे सलीब पर चढ़ाया है। कितने लोगों को इसलिए धर्मी कहा जा सकता है, क्योंकि वे वास्तव में परमेश्वर के लिए कार्य करते हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'दुष्टों को निश्चित ही दंड दिया जाएगा' से उद्धृत

वर्तमान में तुम परमेश्वर के बहुत-से क्रिया-कलाप को देख रहे हो, मगर तब भी तुम प्रतिरोध करते हो और विद्रोही हो, और समर्पण नहीं करते हो; तुम अपने भीतर बहुत सी चीज़ों को आश्रय देते हो, और वही करते हो जो तुम चाहते हो; तुम अपनी वासनाओं और अपनी पसंद का अनुसरण करते हो; यह विद्रोहीपन और प्रतिरोध है। परमेश्वर पर वह विश्वास जो देह के लिए, वासनाओं के लिए, अपनी खुद की पसंद के लिए, संसार के लिए, और शैतान के लिए किया जाता है, वह कलुषित है; वह प्रकृति से प्रतिरोधी व विद्रोही है। आज सभी भिन्न-भिन्न प्रकार के विश्वास हैं : कुछ आपदा से बचने के लिए आश्रय खोजते हैं, अन्य आशीषें प्राप्त करने के लिए प्रयास करते हैं; जबकि कुछ रहस्यों को समझना चाहते हैं, और कुछ अन्य कुछ धन पाने का प्रयास करते हैं; ये सभी प्रतिरोध के रूप हैं; ये सब ईशनिंदा के प्रतीक हैं! यह कहना कि कोई व्यक्ति प्रतिरोध या विद्रोह करता है—क्या यह इन व्यवहारों के संदर्भ में नहीं है? बहुत-से लोग आजकल बड़बड़ाते हैं, शिकायतें करते हैं या आलोचनाएँ करते हैं। ये सभी चीजें दुष्टों के द्वारा की जाती हैं; वे मानव प्रतिरोध और विद्रोहीपन के उदाहरण हैं; ऐसे व्यक्ति शैतान के अधिकार और नियंत्रण में होते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई' से उद्धृत

भाइयों और बहनों के बीच जो लोग हमेशा अपनी नकारात्मकता का गुबार निकालते रहते हैं, वे शैतान के अनुचर हैं और वे कलीसिया को परेशान करते हैं। ऐसे लोगों को अवश्य ही एक दिन निकाल और हटा दिया जाना चाहिए। परमेश्वर में अपने विश्वास में, अगर लोगों के अंदर परमेश्वर के प्रति श्रद्धा-भाव से भरा दिल नहीं है, अगर ऐसा दिल नहीं है जो परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी हो, तो ऐसे लोग न सिर्फ परमेश्वर के लिये कोई कार्य कर पाने में असमर्थ होंगे, बल्कि वे परमेश्वर के कार्य में बाधा उपस्थित करने वाले और उसकी उपेक्षा करने वाले लोग बन जाएंगे। परमेश्वर में विश्वास करना किन्तु उसकी आज्ञा का पालन नहीं करना या उसका आदर नहीं करना और उसका प्रतिरोध करना, किसी भी विश्वासी के लिए सबसे बड़ा कलंक है। यदि विश्वासी वाणी और आचरण में हमेशा ठीक उसी तरह लापरवाह और असंयमित हों जैसे अविश्वासी होते हैं, तो ऐसे लोग अविश्वासी से भी अधिक दुष्ट होते हैं; ये मूल रूप से राक्षस हैं। जो लोग कलीसिया के भीतर विषैली, दुर्भावनापूर्ण बातों का गुबार निकालते हैं, भाइयों और बहनों के बीच अफवाहें व अशांति फैलाते हैं और गुटबाजी करते हैं, तो ऐसे सभी लोगों को कलीसिया से निकाल दिया जाना चाहिए था। अब चूँकि यह परमेश्वर के कार्य का एक भिन्न युग है, इसलिए ऐसे लोग नियंत्रित हैं, क्योंकि उन पर बाहर निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है। शैतान द्वारा भ्रष्ट ऐसे सभी लोगों के स्वभाव भ्रष्ट हैं। कुछ के स्वभाव पूरी तरह से भ्रष्ट हैं, जबकि अन्य लोग इनसे भिन्न हैं : न केवल उनके स्वभाव शैतानी हैं, बल्कि उनकी प्रकृति भी बेहद विद्वेषपूर्ण है। उनके शब्द और कृत्य न केवल उनके भ्रष्ट, शैतानी स्वभाव को प्रकट करते हैं, बल्कि ये लोग असली पैशाचिक शैतान हैं। उनके आचरण से परमेश्वर के कार्य में बाधा पहुंचती है; उनके सभी कृत्य भाई-बहनों को अपने जीवन में प्रवेश करने में व्यवधान उपस्थित करते हैं और कलीसिया के सामान्य कार्यकलापों को क्षति पहुंचाते हैं। आज नहीं तो कल, भेड़ की खाल में छिपे इन भेड़ियों का सफाया किया जाना चाहिए, और शैतान के इन अनुचरों के प्रति एक सख्त और अस्वीकृति का रवैया अपनाया जाना चाहिए। केवल ऐसा करना ही परमेश्वर के पक्ष में खड़ा होना है; और जो ऐसा करने में विफल हैं वे शैतान के साथ कीचड़ में लोट रहे हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो सत्य का अभ्यास नहीं करते हैं उनके लिए एक चेतावनी' से उद्धृत

हर कलीसिया में ऐसे लोग होते हैं जो कलीसिया के लिए मुसीबत पैदा करते हैं या परमेश्वर के कार्य में व्यवधान डालते हैं। ये सभी लोग शैतान के छ्द्म वेष में परमेश्वर के परिवार में घुस आए हैं। ऐसे लोग अभिनय कला में निपुण होते हैं : मेरे समक्ष विनीत भाव से आकर, नमन करते हुए, नत-मस्तक होते हैं, खुजली वाले कुत्ते की तरह व्यवहार करते हैं, अपने मकसद को पूरा करने के लिये अपना "सर्वस्व" न्योछावर करते हैं, लेकिन भाई-बहनों के सामने उनका बदसूरत चेहरा प्रकट हो जाता है। जब वे सत्य पर चलने वाले लोगों को देखते हैं तो उन पर आक्रमण कर देते हैं और उन्हें दर-किनार कर देते हैं; और जब वे ऐसे लोगों को देखते हैं जो उनसे भी अधिक भयंकर हैं, तो फिर वे उनकी चाटुकारिता करने लगते हैं, उनके आगे गिड़गिड़ाने लगते हैं। कलीसिया के भीतर वे आततायियों की तरह व्यवहार करते हैं। कह सकते हैं कि ऐसे "स्थानीय गुण्डे" और ऐसे "पालतू कुत्ते" ज़्यादातर कलीसियाओं में मौजूद हैं। ऐसे लोग मिलकर आस-पास मुखबिरी करते हैं, आँखे झपका कर, गुप्त संकेतों और इशारों से आपस में बात करते हैं, और इनमें से कोई भी सत्य का अभ्यास नहीं करता। जो सबसे ज़्यादा ज़हरीला होता है, वही "प्रधान राक्षस" होता है, और जो सबसे अधिक प्रतिष्ठित होता है, वह इनकी अगुवाई करता है और इनका परचम बुलंद रखता है। ऐसे लोग कलीसिया में उपद्रव मचाते हैं, नकारात्मकता फैलाते हुए मौत का तांडव करते हैं, मनमर्जी करते हैं, जो चाहे बकते हैं; किसी में इन्हें रोकने की हिम्मत नहीं होती है, ये शैतानी स्वभाव से भरे होते हैं। जैसे ही ये लोग व्यवधान पैदा करते हैं, कलीसिया में मुर्दनी छा जाती है। कलीसिया के भीतर सत्य का अभ्यास करने वाले लोगों को अलग हटा दिया जाता है और वे अपना सर्वस्व अर्पित करने में असमर्थ हो जाते हैं, जबकि कलीसिया में परेशानियाँ खड़ी करने वाले, मौत का वातावरण निर्मित करने वाले लोग यहां उपद्रव मचाते फिरते हैं, और इतना ही नहीं, अधिकतर लोग उनका अनुसरण करते हैं। साफ बात है, ऐसी कलीसियाएँ शैतान के कब्ज़े में होती है; हैवान इनका सरदार होता है। यदि समागम के सदस्य विद्रोह नहीं करेंगे और उन प्रधान राक्षसों को खारिज नहीं करेंगे, तो देर-सवेर वे भी बर्बाद हो जाएँगे। अब ऐसी कलीसियाओं के ख़िलाफ़ कदम उठाए जाने चाहिए। जो लोग थोड़ा भी सत्य का अभ्यास करने में सक्षम हैं यदि वे खोज नहीं करते हैं, तो उस कलीसिया को मिटा दिया जाएगा। यदि कलीसिया में ऐसा कोई भी नहीं है जो सत्य का अभ्यास करने का इच्छुक हो, और परमेश्वर की गवाही दे सकता हो, तो उस कलीसिया को पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया जाना चाहिए और अन्य कलीसियाओं के साथ उसके संबंध समाप्त कर दिये जाने चाहिए। इसे "मृत्यु दफ़्न करना" कहते हैं; इसी का अर्थ है शैतान को बहिष्कृत करना। यदि किसी कलीसिया में कई स्थानीय गुण्डे हैं, और कुछ छोटी-मोटी "मक्खियों" द्वारा उनका अनुसरण किया जाता है जिनमें विवेक का पूर्णतः अभाव है, और यदि समागम के सदस्य, सच्चाई जान लेने के बाद भी, इन गुण्डों की जकड़न और तिकड़म को नकार नहीं पाते, तो उन सभी मूर्खों का अंत में सफाया कर दिया जायेगा। भले ही इन छोटी-छोटी मक्खियों ने कुछ खौफ़नाक न किया हो, लेकिन ये और भी धूर्त, ज़्यादा मक्कार और कपटी होती हैं, इस तरह के सभी लोगों को हटा दिया जाएगा। एक भी नहीं बचेगा!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो सत्य का अभ्यास नहीं करते हैं उनके लिए एक चेतावनी' से उद्धृत

मेरी पीठ पीछे बहुत-से लोग हैसियत के आशीष की अभिलाषा करते हैं, वे ठूँस-ठूँसकर खाना खाते हैं, सोना पसंद करते हैं तथा देह की इच्छाओं पर पूरा ध्यान देते हैं, हमेशा भयभीत रहते हैं कि देह से बाहर कोई मार्ग नहीं है। वे कलीसिया में अपना उपयुक्त कार्य नहीं करते, पर मुफ़्त में कलीसिया से खाते हैं, या फिर मेरे वचनों से अपने भाई-बहनों की भर्त्सना करते हैं, और अधिकार के पदों से दूसरों के ऊपर आधिपत्य जताते हैं। ये लोग निरंतर कहते रहते हैं कि वे परमेश्वर की इच्छा पूरी कर रहे हैं और हमेशा कहते हैं कि वे परमेश्वर के अंतरंग हैं—क्या यह बेतुका नहीं है? यदि तुम्हारे इरादे सही हैं, पर तुम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सेवा करने में असमर्थ हो, तो तुम मूर्ख हो; किंतु यदि तुम्हारे इरादे सही नहीं हैं, और फिर भी तुम कहते हो कि तुम परमेश्वर की सेवा करते हो, तो तुम एक ऐसे व्यक्ति हो, जो परमेश्वर का विरोध करता है, और तुम्हें परमेश्वर द्वारा दंडित किया जाना चाहिए! ऐसे लोगों से मुझे कोई सहानुभूति नहीं है! परमेश्वर के घर में वे मुफ़्तखोरी करते हैं, हमेशा देह के आराम का लोभ करते हैं, और परमेश्वर की इच्छाओं का कोई विचार नहीं करते; वे हमेशा उसकी खोज करते हैं जो उनके लिए अच्छा है, और परमेश्वर की इच्छा पर कोई ध्यान नहीं देते। वे जो कुछ भी करते हैं, उसमें परमेश्वर के आत्मा की जाँच-पड़ताल स्वीकार नहीं करते। वे अपने भाई-बहनों के साथ हमेशा छल करते हैं और उन्हें धोखा देते रहते हैं, और दो-मुँहे होकर वे, अंगूर के बाग़ में घुसी लोमड़ी के समान, हमेशा अंगूर चुराते हैं और अंगूर के बाग़ को रौंदते हैं। क्या ऐसे लोग परमेश्वर के अंतरंग हो सकते हैं? क्या तुम परमेश्वर के आशीष प्राप्त करने लायक़ हो? तुम अपने जीवन एवं कलीसिया के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं लेते, क्या तुम परमेश्वर का आदेश लेने के लायक़ हो? तुम जैसे व्यक्ति पर कौन भरोसा करने की हिम्मत करेगा? जब तुम इस प्रकार से सेवा करते हो, तो क्या परमेश्वर तुम्हें कोई बड़ा काम सौंपने की जुर्रत कर सकता है? क्या इससे कार्य में विलंब नहीं होगा?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप सेवा कैसे करें' से उद्धृत

जो लोग केवल अपने देह-सुख की सोचते हैं और सुख-साधनों का आनंद लेते हैं; जो विश्वास रखते हुए प्रतीत होते हैं लेकिन सचमुच विश्वास नहीं रखते; जो बुरी औषधियों और जादू-टोने में लिप्त रहते हैं; जो व्यभिचारी हैं, जो बिखर चुके हैं, तार-तार हो चुके हैं; जो यहोवा के चढ़ावे और उसकी संपत्ति को चुराते हैं; जिन्हें रिश्वत पसंद है; जो व्यर्थ में स्वर्गारोहित होने के सपने देखते हैं; जो अहंकारी और दंभी हैं, जो केवल व्यक्तिगत शोहरत और धन-दौलत के लिए संघर्ष करते हैं; जो कर्कश शब्दों को फैलाते हैं; जो स्वयं परमेश्वर की निंदा करते हैं; जो स्वयं परमेश्वर की आलोचना और बुराई करने के अलावा कुछ नहीं करते; जो गुटबाज़ी करते हैं और स्वतंत्रता चाहते हैं; जो खुद को परमेश्वर से भी ऊँचा उठाते हैं; वे तुच्छ नौजवान, अधेड़ उम्र के लोग और बुज़ुर्ग स्त्री-पुरुष जो व्यभिचार में फँसे हुए हैं; जो स्त्री-पुरुष निजी शोहरत और धन-दौलत का मज़ा लेते हैं और लोगों के बीच निजी रुतबा तलाशते हैं; जिन लोगों को कोई मलाल नहीं है और जो पाप में फँसे हुए हैं—क्या वे तमाम लोग उद्धार से परे नहीं हैं? व्यभिचार, पाप, बुरी औषधि, जादू-टोना, अश्लील भाषा और असभ्य शब्द सब तुम लोगों में निरंकुशता से फैल रहे हैं; सत्य और जीवन के वचन तुम लोगों के बीच कुचले जाते हैं और तुम लोगों के मध्य पवित्र भाषा मलिन की जाती है। तुम मलिनता और अवज्ञा से भरे हुए अन्यजाति राष्ट्रो! तुम लोगों का अंतिम परिणाम क्या होगा? जिन्हें देह-सुख से प्यार है, जो देह का जादू-टोना करते हैं, और जो व्यभिचार के पाप में फँसे हुए हैं, वे जीते रहने का दुस्साहस कैसे कर सकते हैं! क्या तुम नहीं जानते कि तुम जैसे लोग कीड़े-मकौड़े हैं जो उद्धार से परे हैं? किसी भी चीज़ की माँग करने का हक तुम्हें किसने दिया? आज तक, उन लोगों में ज़रा-सा भी परिवर्तन नहीं आया है जिन्हें सत्य से प्रेम नहीं है, जो केवल देह से प्यार करते हैं—ऐसे लोगों को कैसे बचाया जा सकता है? जो जीवन के मार्ग को प्रेम नहीं करते, जो परमेश्वर को ऊँचा उठाकर उसकी गवाही नहीं देते, जो अपने रुतबे के लिए षडयंत्र रचते हैं, जो अपनी प्रशंसा करते हैं—क्या वे आज भी वैसे ही नहीं हैं? उन्हें बचाने का क्या मूल्य है? तुम्हारा बचाया जाना इस बात पर निर्भर नहीं है कि तुम कितने वरिष्ठ हो या तुम कितने साल से काम कर रहे हो, और इस बात पर तो बिल्कुल भी निर्भर नहीं है कि तुमने कितनी साख बना ली है। बल्कि इस बात पर निर्भर है कि क्या तुम्हारा लक्ष्य फलीभूत हुआ है। तुम्हें यह जानना चाहिए कि जिन्हें बचाया जाता है वे ऐसे "वृक्ष" होते हैं जिन पर फल लगते हैं, ऐसे वृक्ष नहीं जो हरी-भरी पत्तियों और फूलों से तो लदे होते हैं, लेकिन जिन पर फल नहीं आते। अगर तुम बरसों तक भी गलियों की खाक छानते रहे हो, तो उससे क्या फर्क पड़ता है? तुम्हारी गवाही कहाँ है? परमेश्वर के प्रति तुम्हारी श्रद्धा, खुद के लिए तुम्हारे प्रेम और तुम्हारी वासनायुक्त कामनाओं से कहीं कम है—क्या इस तरह का व्यक्ति पतित नहीं है? वे उद्धार के लिए नमूना और आदर्श कैसे हो सकते हैं? तुम्हारी प्रकृति सुधर नहीं सकती, तुम बहुत ही विद्रोही हो, तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता! क्या ऐसे लोगों को हटा नहीं दिया जाएगा? क्या मेरे काम के समाप्त हो जाने का समय तुम्हारा अंत आने का समय नहीं है? मैंने तुम लोगों के बीच बहुत सारा कार्य किया है और बहुत सारे वचन बोले हैं—इनमें से कितने सच में तुम लोगों के कानों में गए हैं? इनमें से कितनों का तुमने कभी पालन किया है? जब मेरा कार्य समाप्त होगा, तो यह वो समय होगा जब तुम मेरा विरोध करना बंद कर दोगे, तुम मेरे खिलाफ खड़ा होना बंद कर दोगे। जब मैं काम करता हूँ, तो तुम लोग लगातार मेरे खिलाफ काम करते रहते हो; तुम लोग कभी मेरे वचनों का अनुपालन नहीं करते। मैं अपना कार्य करता हूँ, और तुम अपना "काम" करते हो, और अपना छोटा-सा राज्य बनाते हो। तुम लोग लोमड़ियों और कुत्तों से कम नहीं हो, सब-कुछ मेरे विरोध में कर रहे हो! तुम लगातार उन्हें अपने आगोश में लाने का प्रयास कर रहे हो जो तुम्हें अपना अविभक्त प्रेम समर्पित करते हैं—तुम लोगों की श्रद्धा कहाँ है? तुम्हारा हर काम कपट से भरा होता है! तुम्हारे अंदर न आज्ञाकारिता है, न श्रद्धा है, तुम्हारा हर काम कपटपूर्ण और ईश-निंदा करने वाला होता है! क्या ऐसे लोगों को बचाया जा सकता है? जो पुरुष यौन-संबंधों में अनैतिक और लम्पट होते हैं, वे हमेशा कामोत्तेजक वेश्याओं को आकर्षित करके उनके साथ मौज-मस्ती करना चाहते हैं। मैं ऐसे काम-वासना में लिप्त अनैतिक राक्षसों को कतई नहीं बचाऊंगा। मैं तुम मलिन राक्षसों से घृणा करता हूँ, तुम्हारा व्यभिचार और तुम्हारी कामोत्तेजना तुम लोगों को नरक में धकेल देगी। तुम लोगों को अपने बारे में क्या कहना है? मलिन राक्षसो और दुष्ट आत्माओ, तुम लोग घिनौने हो! तुम निकृष्ट हो! ऐसे कूड़े-करकट को कैसे बचाया जा सकता है? क्या ऐसे लोगों को जो पाप में फँसे हुए हैं, उन्हें अब भी बचाया जा सकता है? आज, यह सत्य, यह मार्ग और यह जीवन तुम लोगों को आकर्षित नहीं करता; बल्कि, तुम लोग पाप की ओर, धन की ओर, रुतबे की ओर, शोहरत और लाभ की ओर आकर्षित होते हो; देह-सुख की ओर आकर्षित होते हो; सुंदर स्त्री-पुरुषों की ओर आकर्षित होते हो। मेरे राज्य में प्रवेश करने की तुम लोगों की क्या पात्रता है? तुम लोगों की छवि परमेश्वर से भी बड़ी है, तुम लोगों का रुतबा परमेश्वर से भी ऊँचा है, लोगों में तुम्हारी प्रतिष्ठा का तो कहना ही क्या—तुम लोग ऐसे आदर्श बन गए हो जिन्हें लोग पूजते हैं। क्या तुम प्रधान स्वर्गदूत नहीं बन गए हो? जब लोगों के परिणाम उजागर होते हैं, जो वो समय भी है जब उद्धार का कार्य समाप्ति के करीब होने लगेगा, तो तुम लोगों में से बहुत-से ऐसी लाश होंगे जो उद्धार से परे होंगे और जिन्हें हटा दिया जाना होगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अभ्यास (7)' से उद्धृत

आज तुम लोग जो देखते हो, वह मात्र मेरे मुँह की तीखी तलवार है। तुमने मेरे हाथ में छड़ी या उस ज्वाला को नहीं देखा है, जिससे मैं मनुष्य को जलाता हूँ, और इसीलिए तुम लोग अभी भी मेरी उपस्थिति में अभिमानी और असंयमी हो। इसीलिए तुम लोग उस बात पर अपनी इंसानी ज़बान से विवाद करते हुए, जो मैंने तुम लोगों से कही थी, अभी भी मेरे घर में मुझसे लड़ते हो। मनुष्य मुझसे नहीं डरता, और यद्यपि आज भी वह मेरे साथ शत्रुता जारी रख रहा है, उसे बिल्कुल भी कोई भय नहीं है। तुम लोगों के मुँह में अधर्मी जिह्वा और दाँत हैं। तुम लोगों के वचन और कार्य उस साँप के समान हैं, जिसने हव्वा को पाप करने के लिए बहकाया था। तुम एक-दूसरे से आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत की माँग करते हो, और तुम अपने लिए पद, प्रतिष्ठा और लाभ झपटने के लिए मेरी उपस्थिति में संघर्ष करते हो, लेकिन तुम लोग नहीं जानते कि मैं गुप्त रूप से तुम लोगों के वचनों एवं कर्मों को देख रहा हूँ। इससे पहले कि तुम लोग मेरी उपस्थिति में आओ, मैंने तुम लोगों के हृदयों की गहराइयों की थाह ले ली है। मनुष्य हमेशा मेरे हाथ की पकड़ से बच निकलना और मेरी आँखों के अवलोकन से बचना चाहता है, किंतु मैं कभी उसके कथनों या कर्मों से कतराया नहीं हूँ। इसके बजाय, मैं उद्देश्यपूर्वक उन कथनों और कर्मों को अपनी नज़रों में प्रवेश करने देता हूँ, ताकि मैं मनुष्य की अधार्मिकता को ताड़ना दे सकूँ और उनके विद्रोह का न्याय कर सकूँ। इस प्रकार, मनुष्य के गुप्त कथन और कर्म हमेशा मेरे न्याय के आसन के सामने रहते हैं, और मेरे न्याय ने मनुष्य को कभी नहीं छोड़ा है, क्योंकि उसका विद्रोह बहुत ज़्यादा है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्य को बचाने का कार्य भी है' से उद्धृत

तुम लोगों में से हर एक अधिकता के शिखर तक उठ चुका है; तुम लोग बहुतायत के पितरों के रूप में आरोहण कर चुके हो। तुम लोग अत्यंत स्वेच्छाचारी हो, और आराम के स्थान की तलाश करते हुए और अपने से छोटे भुनगों को निगलने का प्रयास करते हुए उन सभी भुनगों के बीच पगलाकर दौड़ते हो। अपने हृदयों में तुम लोग द्वेषपूर्ण और कुटिल हो, और समुद्र-तल में डूबे हुए भूतों को भी पीछे छोड़ चुके हो। तुम गोबर की तली में रहते हो और ऊपर से नीचे तक भुनगों को तब तक परेशान करते हो, जब तक कि वे बिलकुल अशांत न हो जाएँ, और थोड़ी देर एक-दूसरे से लड़ने-झगड़ने के बाद शांत होते हो। तुम लोगों को अपनी जगह का पता नहीं है, फिर भी तुम लोग गोबर में एक-दूसरे के साथ लड़ाई करते हो। इस तरह की लड़ाई से तुम क्या हासिल कर सकते हो? यदि तुम लोगों के हृदय में वास्तव में मेरे लिए आदर होता, तो तुम लोग मेरी पीठ पीछे एक-दूसरे के साथ कैसे लड़ सकते थे? तुम्हारी हैसियत कितनी भी ऊँची क्यों न हो, क्या तुम फिर भी गोबर में एक बदबूदार छोटा-सा कीड़ा ही नहीं हो? क्या तुम पंख उगाकर आकाश में उड़ने वाला कबूतर बन पाओगे? बदबूदार छोटे कीड़ो, तुम लोग मुझ यहोवा की वेदी के चढ़ावे चुराते हो; ऐसा करके क्या तुम लोग अपनी बरबाद, असफल प्रतिष्ठा बचा सकते हो और इस्राएल के चुने हुए लोग बन सकते हो? तुम लोग बेशर्म कमीने हो! वेदी पर वे भेंटें लोगों द्वारा अपनी उन उदार भावनाओं की अभिव्यक्ति के रूप में मुझे चढ़ाई गई थीं, जिनसे वे मेरा आदर करते हैं। वे मेरे नियंत्रण और मेरे उपयोग के लिए होती हैं, तो लोगों द्वारा मुझे दिए गए छोटे जंगली कबूतर संभवतः तुम मुझसे कैसे लूट सकते हो? क्या तुम एक यहूदा बनने से नहीं डरते? क्या तुम इस बात से नहीं डरते कि तेरी भूमि रक्त का मैदान बन सकती है? बेशर्म चीज़! क्या तुम्हें लगता है कि लोगों द्वारा चढ़ाए गए जंगली कबूतर तुम भुनगों का पेट भरने के लिए हैं? मैंने तुम्हें जो दिया है, वह वही है जिससे मैं संतुष्ट हूँ और तुम्हें देने का इच्छुक हूँ; मैंने तुम्हें जो नहीं दिया है, वह मेरी इच्छा पर है। तुम बस मेरे चढ़ावे चुरा नहीं सकते। वह एक, जो कार्य करता है, वह मैं, यहोवा—सृष्टि का प्रभु—हूँ, और लोग मेरी वजह से भेंटें चढ़ाते हैं। क्या तुम्हे लगता है कि तुम जो दौड़-भाग करते हो, यह उसकी भरपाई है? तुम सच में बेशर्म हो! तुम किसके लिए दौड़-भाग करते हो? क्या यह तुम्हारे अपने लिए नहीं है? तुम मेरी भेंटें क्यों चुराते हो? तुम मेरे बटुए में से पैसे क्यों चुराते हो? क्या तुम यहूदा इस्करियोती के बेटे नहीं हो? मुझ यहोवा को चढ़ाई गई भेंटें याजकों द्वारा उपभोग किए जाने के लिए हैं। क्या तुम याजक हो? तुम मेरी भेंटें दंभ के साथ खाने की हिम्मत करते हो, यहाँ तक कि उन्हें मेज पर छोड़ देते हो; तुम किसी लायक नहीं हो! नालायक कमीने! मुझ यहोवा की आग तुम्हें भस्म कर देगी!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब झड़ते हुए पत्ते अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे, तो तुम्हें अपनी की हुई सभी बुराइयों पर पछतावा होगा' से उद्धृत

मैंने इस तरह से तुम लोगों के बीच कार्य किया और बात की है, मैंने बहुत सारी ऊर्जा व्यय की और प्रयास किए हैं, फिर भी तुम लोगों ने कब वह सुना है, जो मैं तुम लोगों से सीधे तौर पर कहता हूँ? तुम लोग कहाँ मुझ सर्वशक्तिमान के सामने झुके हो? तुम लोग मुझसे ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं? क्यों जो तुम लोग कहते और करते हो, वह मेरा क्रोध भड़काता है? तुम्हारे हृदय इतने कठोर क्यों हैं? क्या मैंने कभी भी तुम्हें मार गिराया है? क्यों तुम लोग मुझे दुःखी और चिंतित करने के अलावा और कुछ नहीं करते? क्या तुम लोग अपने ऊपर मेरे, यहोवा के, कोप के दिन के आने की प्रतीक्षा में हो? क्या तुम लोग प्रतीक्षा कर रहे हो कि मैं तुम्हारी अवज्ञा से भड़का क्रोध भेजूँ? क्या मैं जो कुछ करता हूँ, वह तुम लोगों के लिए नहीं है? फिर भी तुम लोगों ने सदैव मुझ यहोवा के साथ ऐसा व्यवहार किया है : मेरे बलिदान को चुराना, मेरे घर की वेदी के चढ़ावों को भेड़ियों की माँद में ले जाकर शावकों और शावकों के शावकों को खिलाना; लोग मुझ सर्वशक्तिमान के वचनों को मलमूत्र के समान गंदा करने के लिए पाखाने में उछालते हुए एक दूसरे से लड़ाई करते हैं, गुस्से से घूरते हुए तलवारों और भालों के साथ एक दूसरे का सामना करते हैं। तुम लोगों की ईमानदारी कहाँ है? तुम लोगों की मानवता पाशविकता बन गई है! तुम लोगों के हृदय बहुत पहले पत्थरों में बदल गए हैं। क्या तुम लोग नहीं जानते हो कि जब मेरे कोप का दिन आएगा, तब मुझ सर्वशक्तिमान के विरुद्ध आज की गई तुम लोगों की दुष्टता का मैं न्याय करूँगा? क्या तुम लोगों को लगता है कि मुझे इस प्रकार से बेवकूफ़ बनाकर, मेरे वचनों को कीचड़ में फेंककर और उन पर ध्यान न देकर—क्या तुम लोगों को लगता है कि मेरी पीठ पीछे ऐसा करके तुम लोग मेरी कुपित नज़रों से बच सकते हो? क्या तुम लोग नहीं जानते कि जब तुम लोगों ने मेरे बलिदानों को चुराया और मेरी चीज़ों के लिए लालायित हुए, तभी तुम लोग मुझ यहोवा की आँखों द्वारा पहले ही देखे जा चुके थे? क्या तुम लोग नहीं जानते कि जब तुम लोगों ने मेरे बलिदान चुराए, तो यह उस वेदी के सामने किया, जिस पर बलिदान चढ़ाए जाते हैं? तुमने कैसे मान लिया कि तुम इतने चालाक हो कि मुझे इस तरह से धोखा दे सकोगे? तुम लोगों की बुरी करतूतें मेरे प्रकोप से कैसे बच सकती हैं? मेरा प्रचंड क्रोध कैसे तुम लोगों के बुरे कामों को नज़रंदाज़ कर सकता है? आज तुम लोग जो बुराई करते हो, वह तुम लोगों के लिए कोई बचने का मार्ग नहीं खोलती, बल्कि तुम्हारे कल के लिए ताड़ना इकट्ठी करती है; यह तुम लोगों के प्रति मुझ सर्वशक्तिमान की ताड़ना को भड़काती है। कैसे तुम लोगों की बुरी करतूतें और बुरे वचन मेरी ताड़ना से बच सकते हैं? कैसे तुम लोगों की प्रार्थनाएँ मेरे कानों तक पहुँच सकती हैं? कैसे मैं तुम लोगों को अधार्मिकता से बचाने का मार्ग खोल सकता हूँ? मैं कैसे अपनी अवहेलना करने में तुम लोगों की बुरी करतूतों को जाने दे सकता हूँ? ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं तुम लोगों की ज़ुबानें काटकर अलग न कर दूँ, जो साँप के समान ज़हरीली हैं? तुम लोग मुझे अपनी धार्मिकता के वास्ते नहीं पुकारते, बल्कि इसके बजाय अपनी अधार्मिकता के परिणामस्वरूप मेरा कोप संचित करते हो। मैं तुम लोगों को कैसे क्षमा कर सकता हूँ? मेरी, सर्वशक्तिमान की नज़रों में, तुम लोगों के वचन और कार्य दोनों ही गंदे हैं। मेरी, सर्वशक्तिमान की नज़रें, तुम लोगों की अधार्मिकता को एक निर्मम ताड़ना के रूप में देखती हैं। कैसे मेरी धार्मिक ताड़ना और न्याय तुम लोगों से दूर जा सकती है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कोई भी जो देह में है, कोप के दिन से नहीं बच सकता' से उद्धृत

अतीत के बारे में सोचो : कब तुम लोगों के प्रति मेरी दृष्टि क्रोधित, और मेरी आवाज़ कठोर हुई है? मैंने कब तुम लोगों में मीनमेख निकाली है? मैंने कब तुम लोगों को बेवजह प्रताड़ित किया है? मैंने कब तुम लोगों को तुम्हारे मुँह पर डाँटा है? क्या यह मेरे कार्य के वास्ते नहीं है कि मैं तुम लोगों को हर प्रलोभन से बचाने के लिए अपने परमपिता को पुकारता हूँ? तुम लोग मेरे साथ इस प्रकार का व्यवहार क्यों करते हो? क्या मैंने कभी भी अपने अधिकार का उपयोग तुम लोगों की देह को मार गिराने के लिए किया है? तुम लोग मुझे इस प्रकार का प्रतिफल क्यों दे रहे हो? मेरे प्रति कभी हाँ और कभी ना करने के बाद, तुम लोग न हाँ में हो और न ही ना में, और फिर तुम मुझे मनाने और मुझसे बातें छिपाने का प्रयास करते हो और तुम लोगों के मुँह अधार्मिकता के थूक से भरे हुए हैं? क्या तुम लोगों को लगता है कि तुम लोगों की ज़ुबानें मेरे आत्मा को धोखा दे सकती हैं? क्या तुम लोगों को लगता है कि तुम लोगों की ज़ुबानें मेरे कोप से बच सकती हैं? क्या तुम लोगों को लगता है कि तुम लोगों की ज़ुबानें मुझ यहोवा के कार्यों की, जैसी चाहे वैसी आलोचना कर सकती हैं? क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ, जिसके बारे में मनुष्य आलोचना कर सकता है? क्या मैं छोटे से भुनगे को इस प्रकार अपनी ईशनिंदा करने दे सकता हूँ? मैं ऐसे अवज्ञाकारिता के पुत्रों को कैसे अपने अनंत आशीषों के बीच रख सकता हूँ? तुम लोगों के वचनों और कार्यों ने तुम लोगों को काफी समय तक उजागर और निंदित किया है। जब मैंने स्वर्ग का विस्तार किया और सभी चीज़ों का सृजन किया, तो मैंने किसी भी प्राणी को उसके मन मुताबिक़ भाग लेने की अनुमति नहीं दी, किसी भी चीज़ को उसके हिसाब से मेरे कार्य और मेरे प्रबंधन में गड़बड़ करने की अनुमति तो बिल्कुल नहीं दी। मैंने किसी भी मनुष्य या वस्तु को सहन नहीं किया; मैं कैसे उन लोगों को छोड़ सकता हूँ, जो मेरे प्रति निर्दयी और क्रूर और अमानवीय हैं? मैं कैसे उन लोगों को क्षमा कर सकता हूँ, जो मेरे वचनों के ख़िलाफ़ विद्रोह करते हैं? मैं कैसे उन्हें छोड़ सकता हूँ, जो मेरी अवज्ञा करते हैं? क्या मनुष्य की नियति मुझ सर्वशक्तिमान के हाथों में नहीं है? मैं कैसे तुम्हारी अधार्मिकता और अवज्ञा को पवित्र मान सकता हूँ? तुम्हारे पाप मेरी पवित्रता को कैसे मैला कर सकते हैं? मैं अधर्मी की अशुद्धता से दूषित नहीं होता, न ही मैं अधर्मियों के चढ़ावों का आनंद लेता हूँ। यदि तुम मुझ यहोवा के प्रति वफादार होते, तो क्या तुम मेरी वेदी से बलिदानों को अपने लिए ले सकते थे? क्या तुम मेरे पवित्र नाम की ईशनिंदा के लिए अपनी विषैली ज़ुबान का उपयोग कर सकते थे? क्या तुम इस प्रकार मेरे वचनों के विरुद्ध विद्रोह कर सकते थे? क्या तुम मेरी महिमा और पवित्र नाम को, एक दुष्ट, शैतान की सेवा के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग कर सकते थे? मेरा जीवन पवित्र लोगों के आनंद के लिए प्रदान किया जाता है। मैं तुम्हें कैसे अपने जीवन के साथ तुम्हारी इच्छानुसार खेलने और तुम लोगों के बीच के संघर्ष में इसे एक उपकरण के रूप में उपयोग करने की इजाज़त दे सकता हूँ? तुम लोग अच्छाई के मार्ग में इतने निर्दयी और इतने अभावग्रस्त कैसे हो सकते हो, जैसे तुम मेरे प्रति हो? क्या तुम लोग नहीं जानते कि मैंने पहले ही तुम लोगों की बुरी करतूतों को जीवन के इन वचनों में लिख दिया है? जब मैं मिस्र को ताड़ना देता हूँ, तब तुम लोग कोप के दिन से कैसे बच सकते हो? कैसे तुम लोगों को इस तरह बार-बार अपना विरोध और अनादर करने की अनुमति दे सकता हूँ? मैं तुम लोगों को सीधे तौर पर कहता हूँ कि जब वह दिन आएगा, तो तुम लोगों की ताड़ना मिस्र की ताड़ना की अपेक्षा अधिक असहनीय होगी! तुम लोग कैसे मेरे कोप के दिन से बच सकते हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कोई भी जो देह में है, कोप के दिन से नहीं बच सकता' से उद्धृत

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