परमेश्वर के दैनिक वचन | "दुष्टों को निश्चित ही दंड दिया जाएगा" | अंश 329

परमेश्वर के दैनिक वचन | "दुष्टों को निश्चित ही दंड दिया जाएगा" | अंश 329

261 |24 अगस्त, 2020

पहले, जब परमेश्वर स्वर्ग में था, तब मनुष्य ने अपने चाल-चलन से उसे मूर्ख बनाने की कोशिश की; आज, परमेश्वर मनुष्य के बीच आ गया है—कितने समय के लिए कोई नहीं जानता है—फिर भी मनुष्य परमेश्वर के लिए बिना रुचि लिए कार्य करता है, और परमेश्वर को मूर्ख बनाने की कोशिश करता है। क्या मनुष्य अपनी सोच में अत्यंत पीछे नहीं है? ऐसा ही यहूदा के साथ था: यीशु के आने से पहले, यहूदा अपने भाई-बहनों से झूठ बोला करता था, और यीशु के आने के बाद भी वह नहीं बदला; उसे यीशु के बारे में थोड़ा सा भी ज्ञान नहीं था, और अंत में उसने यीशु के साथ विश्वासघात किया। क्या यह इसलिए नहीं था क्योंकि वह परमेश्वर को नहीं जानता था? यदि, आज तुम लोग अभी भी परमेश्वर को नहीं जानते हो, तो तुम लोग यहूदा बन जाओगे, और, हजारों वर्ष पहले, अनुग्रह के युग में, यीशु को सलीब पर चढ़ाने की त्रासदी पुनः दोहरायी जाएगी। क्या तुम लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं है? यह एक यथार्थ है। आज, ज़्यादातर लोग ऐसी ही परिस्थितियों में हैं—हो सकता है कि मैं यह बात समय से पहले कह रहा हूँ—और ऐसे लोग ही यहूदा की भूमिका निभाते हैं। मैं लापरवाही से नहीं, बल्कि तथ्य के अनुसार कह रहा हूँ—और तुम्हें अवश्य विश्वास करना चाहिए। यद्यपि अनेक लोग विनम्र होने का दिखावा करते हैं, किन्तु उनके हृदयों में गदले, बदबूदार पानी के अलावा कुछ नहीं है। अब, कलीसिया में ज़्यादातर इसी तरह के लोग हैं। तुम लोग सोचते हो मुझे कुछ पता नहीं है; आज, मेरी पवित्रात्मा मेरा मार्गदर्शन करती है, और मेरे लिए गवाही देती है। क्या तुमको लगता है कि मैं कुछ नहीं जानता हूँ? क्या तुमको लगता है कि मैं तुम लोगों के हृदयों के अंदर के कपटपूर्ण विचारों को और तुम लोगों के हृदयों रखी बातों को नहीं समझता हूँ? क्या परमेश्वर को धोखा देना इतना आसान है? क्या तुमको लगता है कि तुम परमेश्वर के साथ जैसा चाहो वैसा व्यवहार कर सकते हो? अतीत में मैं चिंतित था कि तुम लोग बंधन में पड़े हुए हो, और इसलिए तुम लोग बागडोर को मुक्त छोड़ते गए, किन्तु किसी ने यह नहीं समझा कि मैं उनके प्रति भला हो रहा था। मैंने उन्हें अँगुली पकड़ाई और उन्होंने पहुँचा पकड़ लिया। एक-दूसरे से पूछो: मैंने लगभग किसी को भी निपटाया नहीं है, और किसी को धिक्कारने में ज़ल्दबाज़ी नहीं की—फिर भी मैं मनुष्य की अभिप्रेरणाओं और धारणाओं के बारे में बहुत स्पष्ट हूँ। क्या तुमको लगता है कि परमेश्वर स्वयं जो परमेश्वर की गवाही देता है, मूर्ख है? यदि ऐसा है, तो मैं कहता हूँ कि तुम बहुत अधिक अंधे हो। मैं तुम पर आक्षेप नहीं लगाऊँगा, और आओ देखें कि तुम कितने पथभ्रष्ट हो। यह भी देखें कि क्या तुम्हारी चालाकियाँ तुम्हें बचा सकती हैं, या परमेश्वर को प्यार करने के लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास करना तुमको बचा सकता है? आज मैं तुम्हारी निन्दा नहीं करूँगा; आइए यह देखने के लिए कि वह तुम से कैसे प्रतिशोध लेता है हम परमेश्वर के समय का इंतजार करें। अब मेरे पास तुम्हारे साथ निर्रथक गपशप के लिए समय नहीं है, और मैं तुम्हारे वास्ते अपने बड़े काम में विलंब नहीं करना चाहता हूँ, तुम जैसे किसी भुनगे के साथ व्यवहार करने के लिए अपना समय निकालना परमेश्वर के लिए उचित नहीं है—इसलिए आइए देखें कि तुम स्वयं को कितना अधिक लिप्त कर सकते हो। ऐसे लोग परमेश्वर के थोड़े से भी ज्ञान की खोज नहीं करते हैं, और उनमें परमेश्वर के लिए कोई प्यार नहीं होता है, फिर भी वे परमेश्वर के द्वारा धर्मी कहलाने की इच्छा रखते हैं—क्या यह एक मज़ाक नहीं है? क्योंकि वास्तव में ऐसे लोग थोड़ी सी ही संख्या में हैं जो ईमानदार हैं, मैं अपने आप को मनुष्य को केवल जीवन देने में संलग्न करता हूँ। जो आज किया जाना चाहिए मैं केवल उसे ही पूरा करूँगा, और बाद में, हर एक पर उसके व्यवहार के अनुसार प्रतिफल लाया जाएगा। मुझे जो कहना चाहिए, मैं कह चुका हूँ, क्योंकि यही वह कार्य है जिसे मैं करता हूँ। मैं वह करता हूँ जो मुझे करना चाहिए, और वह नहीं करता हूँ जो मुझे नहीं करना चाहिए, फिर भी मुझे आशा है कि तुम लोग इस विचार पर अधिक समय व्यतीत करोगे: वास्तव में परमेश्वर के बारे में तुम्हारा ज्ञान कितना सच्चा है? क्या तुम उनमें से एक हो जिन्होंने परमेश्वर को एक बार और सलीब पर चढ़ाया है? अंत में, मैं यह कहता हूँ: जो परमेश्वर को सलीब पर चढ़ाते हैं उनके लिए संताप।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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