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परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" (अंश 7)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" (अंश 7) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 5) मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 7)मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 7) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" (अंश 3) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 2)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 2) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 5)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 5) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 4)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 29" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 29" (अंश 2) मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 9)मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 9) परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 27" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 27" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 7)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 7) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 6)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 6) परमेश्वर के दैनिक वचन "राज्य का युग वचन का युग है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "राज्य का युग वचन का युग है" (अंश 1) मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 3)मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 29" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 29" (अंश 1) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 1)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 10" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 10" (अंश 2) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश 4)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 10" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 10" (अंश 1) सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे अंश 1सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे अंश 1 परमेश्वर के दैनिक वचन "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "बाइबल के विषय में (1)" (अंश 4)परमेश्वर के दैनिक वचन "बाइबल के विषय में (1)" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" (अंश 3) "केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है" (अंश 4)"केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 12)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 12) परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 26" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 26" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" (अंश 8) "सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे" (अंश 2)"सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 6)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 6) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 3) मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 6)मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 6) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 8) परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 4)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" (अंश I)परमेश्वर के दैनिक वचन "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" (अंश 1) परमेश्वर के वचन "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" (अंश 1)परमेश्वर के वचन "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (अंश II)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (अंश II) परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश I)परमेश्वर के दैनिक वचन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (अंश 8) मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 2)मसीह के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 6)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 6) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" (अंश 1) मसीह के वचन "जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं" (अंश 2)मसीह के वचन "जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 10)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 10) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 4)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 8) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 14)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 14) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 12)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 12) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 15)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 15) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 10)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 10) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 16)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 16) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 7)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" (अंश 7) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 13)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 13) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 12)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 12) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 4)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 11)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 11) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 8) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 8) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 7)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 7) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 8)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 8) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 11)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 11) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 4)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 4) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" (अंश 2)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" (अंश 2) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 11)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 11) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 10)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" (अंश 10) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 10)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 10) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 3)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 3) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 5)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 5) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 1)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" (अंश 1) परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 14)परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 14) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश 7)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश 7) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 15)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (अंश 15) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश III)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश III) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 17)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश 17) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश II)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश II) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश IV)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश IV) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश IX)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश IX) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश X)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (अंश X) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश VI)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (अंश VI) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश III)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश III) परमेश्वर के वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश I)परमेश्वर के वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश II)परमेश्वर के दैनिक वचन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश II)

परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 14)

परमेश्वर के वचन के पाठ   1101  

परिचय

परमेश्वर के दैनिक वचन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" (अंश 14)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "सृष्टिकर्ता की पहचान अद्वितीय है, और तुम्हें बहुईश्वरवाद के विचार को श्रेय नहीं देना चाहिए

यद्यपि मनुष्य की अपेक्षा शैतान की कुशलताएँ और योग्यताएँ कहीं बढ़कर हैं, यद्यपि वह ऐसी चीज़ें कर सकता है जिन्हें मनुष्य प्राप्त नहीं कर सकता है, फिर भी इसके बावजूद कि जो शैतान करता है उससे तुम ईर्ष्याकरते हो या उसकी आकांक्षा करते हो इसके बावजूद कि तुम उससे नफरत या घृणा करते हो, इसके बावजूद कि तुम उसे देखने में सक्षम हो या नहीं हो, और इसके बावजूद कि शैतान कितना हासिल कर सकता है, या वह कितने लोगों को उसकी आराधना करने में और उसे पवित्र मानने के लिए धोखा दे सकता है, और इसके बावजूद कि तुम इसे किस प्रकार परिभाषित करते हो, संभवतः तुम यह नहीं कह सकते हो कि उसके पास परमेश्वर का अधिकार और सामर्थ है। तुम्हें जानना चाहिए कि परमेश्वर ही परमेश्वर है, और सिर्फ एक ही परमेश्वर है, और इसके अतिरिक्त, तुम्हें यह जानना चाहिए कि सिर्फ परमेश्वर के पास ही अधिकार है, और सभी चीज़ों के ऊपर शासन करने और उन पर नियन्त्रण करने की सामर्थ है। सिर्फ इसलिए क्योंकि शैतान के पास लोगों को धोखा देने की क्षमता है, वह परमेश्वर का रूप धारण कर सकता है, परमेश्वर द्वारा किए गए चिन्हों और चमत्कारों की नकल कर सकता है, और उसने परमेश्वर के समान ही कुछ समानान्तर चीज़ों को किया है, तो तुम भूलवश विश्वास करने लग जाते हो कि परमेश्वर अद्वितीय नहीं है, यह कि बहुत सारे ईश्वर हैं, यह कि उनके पास महज कुछ कम या कुछ ज़्यादा कुशलताएँ हैं, और यह कि उस सामर्थ का विस्तार अलग अलग है जिसे वे काम में लाते हैं। उनके आगमन के क्रम, और उनके युग के अनुसार तुम उनकी महानता को आँकते हो, और तुम भूलवश यह विश्वास करते हो कि परमेश्वर से अलग कुछ अन्य देवता हैं, और यह सोचते हो कि परमेश्वर की सामर्थ और उसका अधिकार अद्वितीय नहीं है। यदि तुम्हारे पास ऐसे विचार हैं, यदि तुम परमेश्वर की अद्वितीयता को पहचान नहीं सकते हो, यह विश्वास नहीं करते हो कि सिर्फ परमेश्वर के पास ही ऐसा अधिकार है, और यदि तुम बहुईश्वरवाद को महत्व देते हो, तो मैं कहूँगा कि तुम जीवधारियों के मल हो, तुम शैतान का साकार रूप हो, और तुम निश्चित तौर पर एक बुरे इंसान हो! क्या तुम समझ रहे हो कि मैं इन शब्दों को कहने के द्वारा तुम्हें क्या सिखाने की कोशिश कर रहा हूँ? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि समय, स्थान या तुम्हारी पृष्ठभूमि क्या है, तुम परमेश्वर को किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु, या पदार्थ के साथ लेकर भ्रमित मत हो। इसके बावजूद कि तुम यह महसूस करो कि स्वयं परमेश्वर का अधिकार और परमेश्वर की हस्ती कितनी अज्ञात और अगम्य है, इसके बावजूद कि शैतान के कार्य और शब्द तुम्हारी अवधारणा और कल्पना से कितना मेल खाते हैं, इसके बावजूद कि वे तुम्हें कितनी संतुष्टि प्रदान करते हैं, मूर्ख न बनो, इन धारणाओं में भ्रमित मत हो, परमेश्वर के अस्तित्व का इनकार मत करो, परमेश्वर की पहचान और हैसियत का इनकार मत करो, परमेश्वर को दरवाज़े के बाहर मत धकेलो और "परमेश्वर" को हटाकर शैतान को अपना ईश्वर बनाने के लिए अपने हृदय के भीतर मत लाओ। मुझे कोई सन्देह नहीं है कि तुम ऐसा करने के परिणामों की कल्पना करने में समर्थ हो!"— "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" से उद्धृत

अनुशंसित:

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग दो)

https://hi.godfootsteps.org/videos/know-God-s-disposition-part-two.html

चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।

विशेष वक्तव्य: यह वीडियो प्रस्तुति सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया द्वारा लाभ-के-लिए-नहीं (नॉट-फॉर प्रॉफिट) रचना के रूप में तैयार की गई थी। यह वीडियो किसी भी तीसरे पक्ष को लाभ के लिए वितरित नहीं किया जा सकता है, और हमें आशा है कि हर कोई इसे खुले तौर पर साझा और वितरित करेगा। जब आप इसे वितरित करते हैं, तो कृपया स्रोत पर ध्यान दें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया की सहमति के बिना, कोई भी संगठन, सामाजिक समूह या व्यक्ति इस वीडियो की सामग्री के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है या इसे गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं कर सकता है।

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