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अंतिम दिनों के मसीह के कथन

(संकलन)

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भाग दो

मसीह के वचन जैसे वह कलीसियाओं में चला

(चयनित अंश)

1परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है
2परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है
3परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना
4विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए
5भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है
6सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए
7परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए
8प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं
9दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए
10परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें
11वास्तविकता को कैसे जानें
12नये युग की आज्ञाएँ
13सहस्राब्दि राज्य आ चुका है
14तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है
15आज परमेश्वर के कार्य को जानना
16क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?
17तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है
18सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे
19देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर
20परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर
21जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं
22जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे
23राज्य का युग वचन का युग है
24परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है
25केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है
26"सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता
27केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं
28पतरस ने यीशु को कैसे जाना
29परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे
30क्या आप जाग उठे हैं?
31एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है
32वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं
33"कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन
34"परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन
35"बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन
36"देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन
37"जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन
38देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं
39क्या त्रित्व का अस्तित्व है?
40पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान
41तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए
42जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है
43एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है
44तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो
45देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है
46उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है
47सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है
48व्यवस्था के युग में कार्य
49छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी
50तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई
51पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में
52केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है
53वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?
54जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं
55देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर
56परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है
57सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है
58परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे
59परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम
60परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है
61भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है
62परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार
63परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार
64स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है
65मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना
66जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा
67वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं
68बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं
69तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए
70क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?
71मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है
72क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है
73केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है
74अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए
75तुम किस के प्रति वफादार हो?
76तीन चेतावनियाँ
77परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है
78पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें
79दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए
80तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए
81परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है
82सर्वशक्तिमान का आह भरना
83केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है
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