36. कितने धर्मी लोग विपत्तिओं में परमेश्वर के पास वापस आ जाएँगे?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ अपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और उसके बाद उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, अर्थात्, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और मेरे कारण सूर्य और चन्द्रमा को नया बना दिया जायेगा—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से विभक्त कर दिया जाएगा और मेरे राष्ट्र के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राष्ट्र बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता हो; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान से संबंध रखते हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा दिखाया जायेगा—अर्थात उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो, भिन्न-भिन्न अंशों में, धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जा कर मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। समस्त मानवता अपने-अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उसने किया है उससे भिन्न-भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े हुए हैं सभी नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया है, वे अपने आपको दोषमुक्त करने के ढंग के कारण, पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर बने रहेंगे। मैं अपने महान कार्य की समाप्ति की घोषणा करने के लिए पृथ्वी पर अपनी ध्वनि आगे करते हुए अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

कुछ लोग कहते हैं, "अंत में, धार्मिक वर्गों के कितने लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास कर सकते हैं?" तुम केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अधिक वचनों को पढ़कर ही इसका जवाब पा सकते हो। वर्तमान में, अनुग्रह का द्वार अभी तक बंद नहीं हुआ है, और हम भीषण आपदाओं के समय तक नहीं पहुंचे हैं। खासकर भीषण आपदाओं के समय, धार्मिक जगत के कुछ ऐसे लोग होंगे जो विभिन्न अंशों में परमेश्वर के पास लौटेंगे। इसीलिए तुम अभी ये नहीं कह सकते: "धार्मिक जगत में जो भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार नहीं करते उनका पतन हो जायेगा।" उनके बदलने के लिए अभी भी समय है। इस समय के दौरान, क्या तुम जानते हो कि धार्मिक समूह में, कौन परमेश्वर को स्वीकार करेगा और कौन नहीं? यह कुछ ऐसा है जिसे हम स्पष्ट नहीं देख पाते हैं; केवल परमेश्वर ही इसका जवाब जानता है। हालाँकि, जब हमने धार्मिक जगत के बीच सुसमाचार फैलाने और परमेश्वर की गवाही देने की कोशिश की, हमने देखा कि धार्मिक लोग इसे नकार रहे हैं। वे सभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध करते हैं और उसकी निंदा करते हैं। क्या हम सब ये नहीं देख पा रहे हैं? और इसलिए, धार्मिक लोगों के बीच सुसमाचार फैलाना बहुत मुश्किल है। इसलिए, यह तय है कि धार्मिक जगत में अंतत: जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास लौटेंगे, वे संख्या में बहुत कम होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि धार्मिक लोग बहुत दृढ़ता से पादरियों, एल्डरों की बातों और धार्मिक धारणाओं से नियंत्रित होते हैं, वे बहुत सा नकारात्मक प्रचार और गलत जानकारी पाकर धोखा खाते हैं। उनके पास सत्य की खोज करने और सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने वाला हृदय नहीं है। क्या ये सच नहीं है? अगर तुम सुसमाचार फैलाने के लिए किसी धार्मिक समूह में प्रवेश करते हो, तो तुम्हें बहुत से कड़वे अनुभव होंगे। पहले तुम्हें असीकार कर दिया जाएगा और तुम्हारी नाक जमीन पर रगड़ी जाएगी, दूसरे, तुम्हें शर्मिंदा किया जायेगा, तीसरे, तुम्हारा उपहास उड़ाया जायेगा, निंदा की जाएगी और चारों ओर से हमला किया जायेगा। कुछ ऐसे भी लोग होंगे जो तुम्हारी सहमति के बिना तुम्हारी तस्वीर लेंगे और अपनी कलीसिया में अन्य लोगों को दिखाते हुए कहेंगे, "यह इन्सान, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सुसमाचार के प्रचार के लिए आया है। किसी को भी इसका सत्कार नहीं करना चाहिये।" वे तुम्हारे साथ ऐसा ही व्यवहार करेंगे। अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करने जो भी जाता है, धार्मिक जगत उसके साथ ऐसा ही व्यवहार करता है। इसका क्या अर्थ है? धार्मिक जगत ने बहुत समय से मसीह-विरोधियों के लिए मजबूत किले का कार्य किया है और शैतान की दुष्ट शक्तियों का एक हिस्सा बन गया है। हालाँकि, तुम यह नहीं कह सकते हो कि धार्मिक जगत से कोई बचाया नहीं जा सकता। बात बस इतनी है कि, बचाए जाने वालों की संख्या अत्यधिक कम है।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

कुछ लोग पूछते हैं, "तुम कैसे कह सकते हो कि भीषण आपदा से पहले परमेश्वर के कार्य को स्वीकारने वाले धार्मिक जगत के केवल कुछ ही लोग होंगे? मुझे नहीं लगता कि यह सिर्फ़ कुछ ही लोग होंगे।" अनुग्रह के युग के दौरान किसी भी कलीसिया के विश्वासियों पर नज़र डालो। क्या उनमें से अधिकतर सचमुच सत्य का अनुसरण करने के लिए हैं, या केवल अपना पेट भरने के लिए हैं? अधिकांश लोग केवल अपना पेट भरने के लिए हैं। क्या ऐसे कई लोग हैं जिन पर दुष्ट आत्माओं का कब्ज़ा है? ऐसे कई लोग हैं जिन पर दुष्ट आत्माओं का कब्ज़ा है और वे अलग-अलग भाषाओं में बोलते हैं, प्रकटन प्राप्त करते हैं और दर्शन देखते हैं, बीमारियों का इलाज करते हैं, राक्षसों को बाहर निकालते हैं, चमत्कारों का प्रदर्शन करते हैं। इसलिए, कुछ लोग हैं जिन पर दुष्ट आत्माओं का कब्ज़ा है, कुछ हैं जो केवल पेट भरते हैं, और कुछ हैं जो मसीह विरोधी हैं और कुछ ऐसे दुष्ट लोग भी हैं जो सत्य से घृणा करते हैं। फिर ऐसे लोग भी हैं जो केवल भ्रमित हैं, जिनके पास सत्य की धुंधली-सी भी समझ नहीं है। एक बार जब हम इन लोगों को बाहर निकाल देंगे, तो शेष लोग जो सत्य से प्रेम करते हैं, क्या वे समुदाय का बहुमत होंगे? क्या वे कुल मिलाकर 10% भी होंगे? नहीं, यह संभव नहीं है! क्या यह चीज़ों की वास्तविक स्थिति नहीं है? धार्मिक दुनिया से जो अंततः सर्वनाश से पहले परमेश्वर के पास लौट पाएंगे, वे बहुत कम हैं। वे बहुमत में बिल्कुल भी नहीं होंगे। क्योंकि सत्य से प्रेम करने वाले धार्मिक लोग हमेशा संख्या में बहुत कम रहे हैं। यह पूरी तरह से तथ्यों के अनुसार है, और बिना किसी आधार के नहीं कहा गया है।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

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