2. धोखेबाज़ व्यक्ति कौन होते हैं और वे कैसे प्रकट होते हैं

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

जब लोग अपने भ्रष्ट शैतानी स्वभावों में जीते हैं, तो वे चाहे कुछ भी कर रहे हों, नाटक ही करेंगे, खुद को अच्छे ढंग से पेश करेंगे और गुप्त चालों का सहारा लेंगे; वे हर चीज में छल का प्रयोग करेंगे, वे मानते हैं कि हर काम के लिए कपट और चालबाजी करनी चाहिए। कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो खरीदारी करने जैसा साधारण काम करते हुए भी छल करते हैं। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति बहुत ही फैशनेबल किस्म के एक जोड़ी जूते खरीदता है। वह सोचता है : "अगर भाई-बहन मुझे ये जूते पहने हुए देखेंगे, तो वे यह जरूर कहेंगे कि मैं अपने पैसे सार्थक चीजों पर खर्च नहीं करता, इसलिए मैं ये जूते उनके सामने नहीं पहनूँगा। मैं इन्हें तब पहनूँगा जब हमारी सभा नहीं होगी, और मैं तब तक इंतजार करूँगा जब तक ये फैशन से बाहर नहीं हो जाते और कीमती लगना बंद हो जाते हैं।" इस मामले में तुम चाहे जैसी हरकत करो, तुम इसे जैसे चाहे देखो, लेकिन क्या तुम अपनी इस हिसाब-किताब वाली मानसिकता से छल नहीं कर रहे हो? तुम पहले से ही छल में जीते हो, तुम पहले से ही इस तरह से कार्य करने के लिए तैयार हो। तो तुम छल क्यों करते हो? क्या तुम अपनी प्रेरणाओं और उद्देश्यों से नियंत्रित हो रहे हो? और क्या तुम्हारे ये उद्देश्य वैध हैं? उनका सार क्या है? तुम्हारा शैतानी स्वभाव ही तुम्हें नियंत्रित कर रहा है, है न? तुम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुछ हथकंडे अपनाते हो और छल करते हो, है न? तुम लोगों के सामने एक तरह से पेश आते हो और उनकी पीठ पीछे दूसरी तरह से। तुम बहुत धूर्तता से काम करते हो, दोनों तरफ खेल खेल रहे हो–इसी को छलपूर्ण व्यवहार करना कहते हैं। इस बारे में तुम लोगों का क्या कहना है : धोखेबाज लोग मूर्ख होते हैं, है न? ऐसा क्यों होता है कि जैसे ही कुछ लोगों को अपना विश्लेषण करने के लिए कहा जाता है, वे तनावग्रस्त हो जाते हैं? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनकी चालाकीपूर्ण छोटी-छोटी चालें मूर्खतापूर्ण, भद्दी और हेय नजर आने लगती हैं—वे उन्हें दूसरों को दिखाने में बेहद लजाते हैं, वे नीच लोगों की संदेहपूर्ण सौदे-बाजी होती हैं। धोखेबाजों के मामलों को सबके सामने कभी नहीं लाया जा सकता। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि, जैसे ही वे अपना खुलासा करने वाले होते हैं, उन्हें अचानक एहसास होता है : "मैं इतना मूर्ख कैसे हो गया कि मैंने ऐसा काम किया? मैं इतना घिनौना कैसे हो गया?" उन्हें भी खुद से घृणा होने लगती है। लेकिन जब वे ऐसा कर रहे होते हैं, तो वे मजबूर होते हैं—वे हमेशा उसी तरह व्यवहार करना चाहते हैं; क्योंकि वे प्रकृति से धोखेबाज होते हैं, और वे जो कुछ भी करते हैं, उसमें उनकी कपटपूर्ण प्रकृति प्रकट हो जाती है—यहाँ तक कि बहुत छोटी-छोटी बातों में भी उनकी कपटपूर्ण प्रकृति प्रकट हो जाती है। वे किसी भी चीज में अपने आपको रोक नहीं पाते; यह उनकी घातक कमजोरी होती है। ... जो लोग धोखेबाज होते हैं, उनकी धोखेबाजी प्रकट हो ही जाती है, और तो और, वे ऐसा किसी भी समय और कहीं भी कर बैठते हैं। यह उन्हें सीखने की जरूरत नहीं होती, ऐसा भी नहीं है कि उन्हें इसकी शिक्षा किसी और से लेने की आवश्यकता पड़े; यदि कोई बिलकुल सीधा-सा मामला हो, जिसमें किसी झूठ या कपट की जरूरत न हो, तो भी वे कुटिलता का रास्ता अपनाएँगे और लोगों को धोखा देने के लिए झूठ गढ़ लेंगे।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'एक ईमानदार व्यक्ति होने का सबसे बुनियादी अभ्यास' से उद्धृत

धोखेबाज़ लोगों की मुख्य विशेषता यह है कि वे किसी के साथ सहभागिता करते समय कभी खुलते नहीं; वे खुद को बहुत गहराई से छिपाते हैं। इसके अलावा, कोई भी यह पता नहीं लगा सकता कि वे जो कह रहे हैं, वह सही है या गलत। इतना ही नहीं, वे दिखावे और कुतर्क में विशेष रूप से निपुण होते हैं; वे अच्छा, गुणी, निष्कपट, प्रिय और सम्मानित होने का दिखावा करते हैं। उनके साथ बातचीत करते हुए तुम कभी नहीं जान पाओगे कि वे मन में क्या सोच रहे हैं; वे किसी को नहीं बताते कि चीज़ों के प्रति उनका विचार या दृष्टिकोण वास्तव में क्या है, यहाँ तक कि उनके निकटतम लोग भी यह नहीं जानते। वे अपना दिल नहीं खोलते; वे अपनी कोई बात नहीं बताते। इतना ही नहीं, वे यह दिखावा भी करते हैं कि उनमें इंसानियत है, वे अत्यधिक आध्यात्मिक हैं और वे सत्य का अनुसरण करते हैं। किसी को नहीं लगेगा कि वे ऐसे नहीं हैं।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'वे परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते और मसीह के सार को नकारते हैं (I)' से उद्धृत

यदि तुम धोखेबाज हो, तो तुम सभी लोगों और मामलों के प्रति सतर्क और शंकित रहोगे, और इस प्रकार मुझमें तुम्हारा विश्वास संदेह की नींव पर निर्मित होगा। मैं इस तरह के विश्वास को कभी स्वीकार नहीं कर सकता। सच्चे विश्वास के अभाव में तुम सच्चे प्यार से और भी अधिक वंचित हो। और यदि तुम परमेश्वर पर इच्छानुसार संदेह करने और उसके बारे में अनुमान लगाने के आदी हो, तो तुम यकीनन सभी लोगों में सबसे अधिक धोखेबाज हो। तुम अनुमान लगाते हो कि क्या परमेश्वर मनुष्य जैसा हो सकता है : अक्षम्य रूप से पापी, क्षुद्र चरित्र का, निष्पक्षता और विवेक से विहीन, न्याय की भावना से रहित, शातिर चालबाज़ियों में प्रवृत्त, विश्वासघाती और चालाक, बुराई और अँधेरे से प्रसन्न रहने वाला, आदि-आदि। क्या लोगों के ऐसे विचारों का कारण यह नहीं है कि उन्हें परमेश्वर का थोड़ा-सा भी ज्ञान नहीं है? ऐसा विश्वास पाप से कम नहीं है! कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो मानते हैं कि जो लोग मुझे खुश करते हैं, वे बिल्कुल ऐसे लोग हैं जो चापलूसी और खुशामद करते हैं, और जिनमें ऐसे हुनर नहीं होंगे, वे परमेश्वर के घर में अवांछनीय होंगे और वे वहाँ अपना स्थान खो देंगे। क्या तुम लोगों ने इतने बरसों में बस यही ज्ञान हासिल किया है? क्या तुम लोगों ने यही प्राप्त किया है? और मेरे बारे में तुम लोगों का ज्ञान इन गलतफहमियों पर ही नहीं रुकता; परमेश्वर के आत्मा के खिलाफ तुम्हारी निंदा और स्वर्ग की बदनामी इससे भी बुरी बात है। इसीलिए मैं कहता हूँ कि ऐसा विश्वास तुम लोगों को केवल मुझसे दूर भटकाएगा और मेरे खिलाफ बड़े विरोध में खड़ा कर देगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें' से उद्धृत

कुछ लोग ऐसे भी हो सकते हैं, जो कभी खुलकर बात न करें, और जो वे सोचते हैं, उसे दूसरों के साथ साझा न करें। और जो कुछ भी वे करते हैं, उसमें कभी दूसरों के साथ परामर्श नहीं करते, बल्कि प्रकट रूप में हर मोड़ पर दूसरों के प्रति सतर्क रहते हुए अलग-थलग रहते हैं। वे खुद को जितना हो सकता है, उतना ज्यादा ढककर रखते हैं। क्या यह शातिर व्यक्ति नहीं है? उदाहरण के लिए, उनके पास एक विचार है जो उन्हें शानदार लगता है, और वे सोचते हैं, "मैं अभी इसे अपने तक ही रखूँगा। अगर मैं इसे साझा करूँगा, तो तुम लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हो और मेरी सफलता हथिया सकते हो। मैं इसे गुप्त रखूँगा।" या अगर कुछ ऐसा हुआ, जिसे वे पूरी तरह से नहीं समझते, तो वे सोचेंगे : "मैं अभी नहीं बोलूँगा। अगर मैं बोला और किसी ने कोई और ऊँची बात कह दी तो क्या होगा, क्या मैं मूर्ख जैसा नहीं दिखूँगा? हर कोई मेरी असलियत जान लेगा, इसमें मेरी कमज़ोरी देखेगा। मुझे कुछ नहीं कहना चाहिए।" इसलिए चाहे जो भी परिप्रेक्ष्य या कारण हो, चाहे जो भी अंतर्निहित उद्देश्य हो, वे डरते हैं कि हर कोई उनकी वास्तविकता जान जाएगा। वे अपने कर्तव्य और लोगों, चीज़ों और घटनाओं को हमेशा इस तरह के परिप्रेक्ष्य और रवैये के साथ लेते हैं। यह किस तरह का स्वभाव है? कुटिल, कपटी और दुष्ट स्वभाव। सतह पर ऐसा लगता है कि उन्होंने दूसरों से वह सब कह दिया है, जो उन्हें लगता है कि वे कह सकते हैं, लेकिन सतह के नीचे वे कुछ चीजें रोके रखते हैं। वे कभी वैसी चीजें नहीं कहते, जो उनकी प्रतिष्ठा और हितों पर असर डालती हों—किसी से नहीं, अपने माता-पिता से भी नहीं। वे ये चीजें कभी नहीं कहते। यह समस्या है!

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'सत्य का अभ्यास करके ही कोई सामान्य मानवता से युक्त हो सकता है' से उद्धृत

कुछ लोग किसी को सच नहीं बताते। कभी-कभी वे खुद भी यह नहीं जानते कि वे जो कह रहे हैं, वह सच है या झूठ—वे खुद को भ्रमित करते हैं। जब वे दूसरों से बात करते हैं, तो वे हमेशा सोचते रहते हैं और उनका दिमाग हमेशा इस बात पर मंथन करता रहता है कि कोई बात कहने के क्या परिणाम होंगे। इससे पहले कि वे कुछ कहें, वे आकलन करते हैं, कयास लगाते हैं कि इसे एक तरह से कहने से क्या हासिल हो सकता है और दूसरे तरीके से कहने से क्या हासिल हो सकता है, और दूसरों को क्या चीज मूर्ख बना देगी और उन्हें मामले की सच्चाई समझने से रोकेगी। यह कौन-सा स्वभाव है? यह कपट है। क्या किसी के लिए अपने कपटी स्वभाव को बदलना आसान है? स्वभावगत कोई भी चीज बदलना आसान नहीं है। कुछ लोग अपने बारे में कुछ प्रकट करने के बाद सोचते हैं : "मैंने उन्हें अपने सच्चे विचारों से अवगत करा दिया। यह बुरा हुआ। मुझे इसे उलटने का तरीका खोजना होगा—इसे अलग ढंग से कहने का तरीका खोजना होगा, ताकि वे सच्चाई न जान सकें।" वे इसी तरह से सोचते और योजना बनाते हैं, और जब वे कार्य करने वाले होते हैं, तो वे जिस प्रकार के स्वभाव को प्रकट करते हैं, वह है : छल। वे कोई शैतानी करने जा रहे हैं। कुछ करने से पहले ही उन्होंने अपने धोखे का खुलासा कर दिया है। यह एक प्रकार का स्वभाव है। चाहे तुमने कुछ कहा हो या नहीं, या तुमने कुछ किया हो या नहीं—यह स्वभाव हमेशा तुम्हारे भीतर होता है, यह तुम्हें नियंत्रित करता है, तुमसे खेल कराता है और तुम्हें छल-कपट में संलग्न करता है, तुमसे लोगों के साथ खिलवाड़ कराता है, सच्चाई पर पर्दा डलवाता है, और तुम्हें अच्छा भेष बनाने पर मजबूर करता है। यह कपट है। कपटी लोग कौन-सी खास बातें करते हैं? उदाहरण के लिए, मान लो, दो लोग बातें कर रहे हैं, और एक कहता है, "मैं हाल ही में कुछ परिस्थितियों से गुजरा हूँ, और मुझे लगता है कि परमेश्वर में विश्वास करने के ये वर्ष वास्तव में व्यर्थ रहे हैं। एक व्यक्ति के रूप में मैं असफल हूँ! दरिद्र, दयनीय! मैं कुछ समय से अच्छे से काम नहीं कर पा रहा हूँ। मैं भविष्य में खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करूँगा।" उसके यह कहने का क्या असर होगा? दूसरा इसे सुनता है और सोचता है : "इस व्यक्ति ने पश्चात्ताप किया है—पूरी तरह से पश्चात्ताप किया है। यह वास्तविक है। मैं इसमें संदेह नहीं कर सकता। वह बेहतरी के लिए बदल गया है। उसने यह तक कहा कि एक व्यक्ति के रूप में वह असफल है और हाल ही में जिन मुद्दों का उसने सामना किया, वे सभी परमेश्वर द्वारा आयोजित थे। वह समर्पण करने में सक्षम है।" श्रोता पर ऐसा प्रभाव डालने से क्या वक्ता का लक्ष्य प्राप्त हो गया है? (हाँ।) तो, क्या ऐसे लोगों की वास्तविक स्थिति ठीक वैसी ही है, जैसी उन्होंने कही है? जरूरी नही। उन्होंने जो कहा, उसका इतना असर हुआ, लेकिन उन्होंने जो किया, वह वैसा नहीं था जैसा उन्होंने कहा। यह कहने का उनका मकसद उनके कहने का ढंग है, वह परिणाम है जो वे प्राप्त करना चाहते हैं। बोलने से वे हमेशा कुछ हासिल करने की कोशिश करते हैं, उनका हमेशा कोई मकसद होता है, अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वे हमेशा एक निश्चित विधि या निश्चित शब्दों का प्रयोग करते हैं। यह किस तरह का स्वभाव है? यह कपट है, और यह वास्तव में कपटी है! और सच तो यह है कि उन्हें जरा भी पता नहीं होता कि वे बुरे, दरिद्र और दयनीय हैं। तुम्हारा समर्थन प्राप्त करने के लिए, उनके बारे में तुम एक अच्छी राय बनाओ इसके लिए, वे थोड़ी आध्यात्मिक भाषा और शब्दों का प्रयोग करते हैं, ताकि तुम्हें लगे कि उन्होंने खुद को समझ लिया है और पश्चात्ताप किया है। क्या ऐसा प्रभाव प्राप्त करना छल नहीं है?

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'स्‍वभाव में परिवर्तन के लिए भ्रष्‍ट स्‍वभाव के छह पक्षों को समझना अनिवार्य है' से उद्धृत

जब कपटी लोग सत्य को अभ्यास में लाते हैं, तो क्या वे कपट करते हैं? सत्य को अभ्यास में लाने के लिए उन्हें उसका मूल्य चुकाना पड़ता है, स्वयं के हितों को त्यागना पड़ता है, दूसरों के सामने स्वयं को खोलकर रख देना पड़ता है। लेकिन वे लोग कुछ छिपा जाते हैं; वे जब बोलते हैं, तो आधा ही बोलते हैं और शेष को रोककर रखते हैं। लोगों को हमेशा अंदाजा लगाना पड़ता है कि उनका क्या अर्थ है, उनका अर्थ समझने के लिए हमेशा कड़ियों को जोड़ना पड़ता है। वे तिकड़म के लिए थोड़ी जगह छोड़कर रखते हैं, वे स्वयं के लिए कुछ गुंजाइश छोड़ देते हैं। ज्यों ही लोग देखते हैं कि वे बेईमान हैं, वे उनके साथ किसी भी तरह का व्यवहार नहीं करना चाहते, वे उनके साथ बातचीत नहीं करना चाहते औरउनके साथ लेन-देन करते समय हमेशा सावधानी बरतते हैं। वे उनकी किसी बात पर भरोसा नहीं करते, सोचते हैं उसने जो कहा, वो सही है या गलत, उसमें से कितना गलत है? और इसलिए, अक्सर लोग उन पर भरोसा नहीं करते, लोगों में उनका ज़्यादा सम्मान नहीं होता या बिल्कुल ही सम्मान नहीं होता। लोगों के हृदय में तुम्हारी ऐसी हैसियत है, तुम्हारा ऐसा सम्मान है। तो परमेश्वर के सामने जाने पर परमेश्वर तुम्हें कैसे देखेगा? मनुष्य की तुलना में, परमेश्वर लोगों को अधिक सटीकता से, अधिक तीक्ष्णता से और अधिक यथार्थवादी तरीके से देखता है।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'एक ईमानदार व्यक्ति होने का सबसे बुनियादी अभ्यास' से उद्धृत

तुम हमेशा अपने देह और अपनी संभावनाओं के बारे में सोचते हो, तुम हमेशा अपने देह की पीड़ा को कम करना चाहते हो, कम प्रयास करना चाहते हो, कम समर्पित रहना चाहते हो, कम कीमत चुकाना चाहते हो, और हमेशा पैंतरेबाजी के लिए स्वयं को बचाव का रास्ता प्रदान करते हो—और यही आपका बेईमान नजरिया हो। तुम जब परमेश्वर के लिए व्यय करते हो तब भी तुम दो बार सोचते हो, कहते हो: "आह! स्वयं को परमेश्वर को समर्पित करूँ? मुझे अभी भी बढ़िया जीवन जीना है; अगर परमेश्वर के कार्य का अंत नहीं होता है तो मैं क्या करुँगा? इसलिए मैं इसे अपना सब-कुछ नहीं दूंगा। हम नहीं जानते कि परमेश्वर के वचन कब पूरे होंगे, इसलिए मुझे सावधान रहना होगा, मुझे दो बार सोचना होगा। अपनी पारिवारिक जिंदगी व्यवस्थित कर लेने के बाद, और अपने भविष्य की संभावनाओं को व्यवस्थित कर लेने और उनका समाधान निकाल लेने के बाद, मैं स्वयं को परमेश्वर को समर्पित कर दूँगा।" इस तरह का मौन भी धोखा है, धोखे के बीच कार्य करना है, और यह कोई ईमानदार नजरिया नहीं है। अपने भाईबहनों से बातचीत करते समय, कुछ लोग डरते हैं कि कहीं वे उनके हृदय में छिपी कठिनाइयों का पता न लगा लें, और अगर ऐसा हुआ तो भाई‌-बहनों उनके खिलाफ कुछ बारे में कहने को या उनका तिरस्कार करने के लिए कुछ मसाला मिल जाएगा। जब वे बालते हैं, तो हमेशा ऐसी छाप छोड़ने का प्रयास करते है कि वे वास्तव में उत्साही हैं, वे वाकई परमेश्वर को चाहते हैं, और सत्य को अभ्यास में लाने के लिए वाकई इच्छुक हैं लेकिन असलियत में, अपने हृदय में वे अत्यधिक कमज़ोर और निष्क्रिय होते हैं। वे मज़बूत होने का ढोंग करते हैं, ताकि कोई उनकी असली प्रकृति को न जान न सके। यह भी कपट है। कुल मिलाकर, इस पर ध्यान दिए बगैर कि तुम क्या करते हो—चाहे यह जीवन में हो, परमेश्वर की सेवा करना हो, या अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना हो—अगर तुम लोगों को अपना नक़ली चेहरा दिखाते हो और उसका उपयोग लोगों को गुमराह करने के लिए करते हो, ताकि वे तुम्हारे बारे में ऊँचे विचार रखें या तुम्हें नीची नजर से न देखें, तब तुम बेईमान हो रहे हो!

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'एक ईमानदार व्यक्ति होने का सबसे बुनियादी अभ्यास' से उद्धृत

तुम लोग इस बारे में क्या कहते हो : धोखेबाज लोगों के साथ रहना थका देने वाला होता है न?(हाँ।) क्या यह उनके लिए थका देने वाला होता है? यह उनके लिए भी थका देने वाला होता है, क्योंकि धोखेबाज होना ईमानदार होने से अलग होता है। एक ईमानदार व्यक्ति सरल होता है—उसकी सोच इतनी जटिल नहीं होती। लेकिन जहाँ तक धोखेबाज व्यक्ति की बात है, वह हमेशा बात को घुमा-फिरा कर कहता है, उसकी कोई भी बात सीधी नहीं होती। यह उनके लिए भी थका देने वाला है; लगातार चालबाजी करना और अपने झूठ को छुपाना थकाऊ होता है। वे लगातार अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाते रहते हैं और सोचते-विचारते रहते हैं, उन्हें डर होता है लापरवाही के क्षण में उनके मुँह से कुछ निकल न जाये। क्या तुम जानते हो कि कुछ लोग अपनी चालबाजी में किस हद तक चले जाएंगे? वे हर व्यक्ति से होड़ लगाते हैं। वे मानसिक रूप से टूटने की स्थिति तक संघर्ष करते हैं और रात को सो भी नहीं पाते। इससे उनके धोखेबाजी की हद का अंदाजा लगाया जा सकता है। एक ईमानदार व्यक्ति के रूप में जीवन जीना थका देने वाला नहीं होता : एक ईमानदार व्यक्ति वही बोलता है जो उसके दिमाग में होता है, वह वही प्रकट करता है जो वह सोचता है, और उसी पर काम करता है जो वह सोचता है, वह हर चीज में परमेश्वर की इच्छा खोजता है और उसी की इच्छा के अनुसार कार्य करता है। कुछ बातें ऐसी भी हो सकती हैं जिनका उसे ज्ञान न हो, इसलिए भविष्य में उन्हें समझदार होना चाहिए और कभी भी बढ़ना बंद नहीं करना चाहिए। लेकिन बेईमान लोग इस तरह काम नहीं करते हैं। वे शैतान के फलसफ़ों और अपनी धोखेबाज़ प्रकृति और सार के आधार पर जीते हैं। वे जो कुछ भी करते हैं उसमें उन्हें सावधान रहना होता है कि कहीं दूसरे लोगों को उनके बारे में पता न चल जाए, वे जो कुछ भी करते हैं उसमें अपने असली चेहरे को छिपाने के लिए, उन्हें अपनी विधियाँ, अपनी बेईमान और कुटिल चाल का उपयोग करना पड़ता है, इस डर से कि देर-सवेर वे गलती से अपना राज़ खोल देंगे और जब वे अपना असली रंग दिखाते हैं तब वे अवश्य ही चीजों को बदलने की कोशिश करते हैं। कई बार जब वे अपना आवरण बचाने का प्रयास कर रहे होते हैं, तो यह उतना आसान नहीं होता, और जब चीजें उनके हिसाब नहीं घटतीं, तो वे उत्तेजित हो जाते हैं, उन्हें भय होता है कि दूसरे लोग उनके बारे में जान जाएँगे। और ऐसा होने पर, उन्हें लगता है कि वे दूसरों के सामने शर्मिंदा हो गए, और फिर उन्हें स्थिति को सुधारने हेतु कुछ कहने के लिए सोचना पड़ता है। इतना सब कुछ करना—क्या उन्हें यह थकाऊ नहीं लगता? उनका दिमाग लगातार चलता रहता है; अगर ऐसा न होता, तो उनके सारे शब्द कहाँ से आते? यदि तुम ईमानदार हो और तुम्हारे शब्दों और कार्यों में किसी भी तरह के छिपे हुए उद्देश्य नहीं हैं, तो जब तुम कोई काम करते हो, तो वह संपन्न हो जाता है, तुम्हें अपनी असलियत के बाहर आ जाने की चिंता नहीं होती। तब तुम कैसे थक सकते हो? लेकिन धोखेबाज लोग जो कहते और करते हैं, उसके पीछे हमेशा एक गुप्त उद्देश्य होता है, और जब वह सामने आ जाता है, तो वे अपनी आड़ बचाने के लिए तरह-तरह की तरकीब सोचते हैं, और फिर वे तुम्हें मूर्ख बनाने के लिए एक और मुखौटा लगा लेंगे ताकि तुम यह सोचो कि यह तो पूरी तरह से अलग ही मामला है। यह उनके लिए विशेष रूप से थकाऊ होता है। उनके साथ अपनी बातचीत में, तुम समझ जाते हो कि उनका इस तरह से कार्य करना कितना बेवकूफी भरा है, और यह सब कहना कितना अनावश्यक है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें उन्हें वास्तव में समझाने की आवश्यकता नहीं होती, तुम उन चीजों के बारे में कुछ सोचते भी नहीं, लेकिन वे समझाने और स्थिति को संभालने के चक्कर में तब तक लगे रहते हैं, जब तक कि तुम उन्हें सुनकर ऊब नहीं जाते। उन्हें खुद भी लगता है कि अगर उन्हें सब-कुछ समझाना नहीं पड़ता तो यह इतना थकाऊ नहीं होता। उनका दिमाग लगातार इसमें ही लगा रहता है कि वे तुम्हें उन्हें गलत समझने से कैसे रोकें, तुम्हें कैसे आश्वस्त करें कि उनके शब्दों या कार्यों के पीछे कोई दुर्भावना नहीं है, ताकि तुम उन्हें स्वीकार और उन पर विश्वास कर सको। इसलिए वे इस पर सोच-विचार करते रहते हैं। जब वे रात को सो नहीं पाते, तो इसी बारे में सोचते रहते हैं; दिन के दौरान, अगर वे खा-पी नहीं पाते, तो वे इसके बारे में ही सोच रहे होते हैं; या किसी अन्य मामले पर दूसरों से परामर्श करते समय भी, वे इस मामले की जाँच-पड़ताल करने में लगे रहते हैं। वे हमेशा अपने आपको ऐसे पेश करेंगे जिससे तुम्हें लगे कि वे उस तरह के इंसान नहीं हैं, बल्कि वे अच्छे इंसान हैं, या तुम्हें ऐसा महसूस कराएँगे कि उनका यह मतलब नहीं था। धोखेबाज लोग ऐसे ही होते हैं।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'एक ईमानदार व्यक्ति होने का सबसे बुनियादी अभ्यास' से उद्धृत

प्रकृति के मामले केवल कमजोरी के क्षण में की गई चीजें नहीं होते, बल्कि पूरे जीवन में बने रहते हैं। व्यक्ति जो कुछ भी करता है, उसमें उसकी गंध होती है, उसकी प्रकृति के तत्त्व होते हैं। भले ही वे तत्त्व कभी-कभी स्पष्ट न दिखते हों, तो भी वे उसके भीतर मौजूद होते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई धोखेबाज व्यक्ति कभी ईमानदारी से बोलता है, तो भी उसकी बोली में वास्तव में एक दूसरी बोली होती है और उसमें धोखेबाजी मिश्रित होती है। एक धोखेबाज़ व्यक्ति किसी पर भी अपनी चालें आज़माता है, वह अपने रिश्तेदारों—यहां तक कि अपने बच्चे भी नहीं छोड़ता है। भले ही तू उसके साथ कितने भी साफ़दिल से पेश आ, वह तेरे साथ चाल चलने की कोशिश करेगा। यह उसके स्वभाव का असली चेहरा है, और वह इसी प्रकृति का व्यक्ति है। इसे बदलना मुश्किल है और वह हर समय इसी तरह रहता है। ईमानदार लोग कभी-कभी धूर्त और धोखेबाज़ शब्द कह सकते हैं, लेकिन ऐसा व्यक्ति आम तौर पर ईमानदार रहता है; वह दूसरों के साथ अपने संबंधों में बिना उनका अनुचित लाभ उठाए ईमानदारी से काम करता है। जब वह अन्य लोगों के साथ बात करता है, तो वह उन्हें आज़माने के लिए जानबूझकर कुछ बातें नहीं बोलता है; वह खुले दिल से दूसरों के साथ संवाद कर सकता है और हर कोई कहता है कि वह काफ़ी ईमानदार है। कभी ऐसे समय होते हैं जब वह थोड़ी-बहुत धोखेबाज़ी से बात करता है; वह केवल एक दूषित स्वभाव का प्रकटन है और यह उसकी प्रकृति का प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि वह कोई धोखेबाज़ व्यक्ति नहीं है।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

लोगों के उस वर्ग के बीच, जो मसीह-विरोधी हैं, पक्का दुरंगापन उनकी मानवता द्वारा प्रकट प्रमुख लक्षणों में से एक है। उनकी भाषा के माध्यम से, जो वे कहते हैं और जिस तरह से कहते हैं, उनकी अभिव्यक्ति के तरीके, उनके शब्दों के अर्थ और उनके पीछे की प्रेरणा के माध्यम से दिखता है कि इन लोगों में सामान्य मानवता की कमी है, कि उनमें वह ईमानदारी नहीं है जिसकी परमेश्वर सामान्य मानवता से अपेक्षा करता है। और तो और, इन लोगों की मानवता में पक्का दुरंगापन आम लोगों के झूठ और धोखे से कहीं अधिक गंभीर होता है। यह कोई सामान्य प्रकार का भ्रष्ट स्वभाव या साधारण प्रकार की असामान्य मानवता का प्रकटीकरण नहीं है; वे ज्यादातर लोगों की तुलना में अधिक आसानी से झूठ बोलते हैं, और वे इसके अधिक अभ्यस्त होते हैं। जब ज्यादातर लोग झूठ बोलते हैं, तो उन्हें झूठ गढ़ना पड़ता है, उन्हें उस पर ध्यान से विचार करना पड़ता है; लेकिन इस तरह के व्यक्ति को कुछ भी गढ़ने या सोच-विचार करने की जरूरत नहीं होती : वे अपना मुँह खोलते हैं और झूठ बाहर निकल आता है—और इससे पहले कि कुछ समझ आए तुम फँस चुके होते हो। उनके झूठ और धोखे ऐसे होते हैं कि प्रतिक्रिया करने में धीमे लोग चीजों को समझने में दो-तीन दिन लगा देते हैं; तब कहीं उन्हें पता चल पाता है कि उस व्यक्ति का क्या आशय था। मंदबुद्धि या निम्न बौद्धिक स्तर वाले लोग तो शायद वर्षों बाद भी चीजों को समझ नहीं पाएँ; हो सकता है कि वे अपने पूरे जीवन में कभी न जान सकें कि उन शब्दों से उसका क्या आशय था। मसीह-विरोधी झूठ बोलने के आदी होते हैं : उनकी मानवता का विशेष गुण क्या है? जाहिर है, वह कुछ ऐसा नहीं है, जो सामान्य मानवता का हिस्सा हो। सटीक रूप से, यह एक दानव की प्रकृति है। उनका पक्का दुरंगापन, झूठ और धोखा : क्या चीजों को करने के ये तरीके स्कूल में सीखे जाते हैं? क्या वे ज्ञान की अधिकता का परिणाम हैं? क्या वे माता-पिता के शिक्षण और प्रभाव के कारण हैं? (नहीं।) ये चीजें उनकी अंतर्निहित प्रकृति हैं। वे इन चीजों के साथ पैदा हुए थे; किसी ने उन पर ये चीजें थोपी नहीं, और न किसी ने उन्हें ये बातें सिखाईं। वे बस ऐसे ही हैं—आदतन दुरंगे। और, इतना ही नहीं, वे अपने झूठों से कभी शर्मिंदा या परेशान नहीं होते, वे कभी संतप्त या असहज नहीं होते। न केवल वे अपने झूठों से परेशान नहीं होते, बल्कि वे अकसर खुद को बहुत चालाक, अत्यधिक बुद्धिमान समझते हैं; वे झूठ और अन्य तरकीबों का उपयोग करके दूसरों के साथ चालबाजी करने और उन्हें धोखा देने में सक्षम होने के लिए खुद को भाग्यशाली, गौरवशाली और गुप्त रूप से आनंदित महसूस करते हैं। मसीह-विरोधी ऐसे लोगों का वर्ग है, जो दूसरों के साथ चालबाजी करने और उन्हें धोखा देने के लिए लगातार झूठ का इस्तेमाल करता है। जब वे ईमानदार व्यक्ति बनने के संबंध में उपदेश और दूसरों की सहभागिता सुन लेते हैं, तो क्या वे परेशान होते हैं? क्या वे खुद को धिक्कारते हैं? (नहीं।) और कोई कैसे कह सकता है कि उन्हें कोई आत्मग्लानि नहीं होती, कि वे परेशान नहीं होते? इस तथ्य से कि वे कभी आत्म-विश्लेषण नहीं करते। वे कभी नहीं खुलते और अपने झूठ उजागर नहीं करते, न ही वे कभी स्वीकार करते हैं कि वे बेईमान हैं। इसके अतिरिक्त, जब भी उन्हें जरूरत महसूस होती है, वे झूठ बोलते और लोगों को धोखा देते रहते हैं। ऐसी उनकी प्रकृति है, और उसे बदलने का कोई उपाय नहीं है। यह प्रकृति सामान्य मानवता की अभिव्यक्ति नहीं है; सही कहा जाए तो यह एक दानव की प्रकृति है।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'परिशिष्ट चार : मसीह-विरोधियों की मानवता के चरित्र और उनके स्वभाव के सार का सारांश (I)' से उद्धृत

पिछला: 1. ईमानदार व्यक्ति क्या होता है और परमेश्वर लोगों से ईमानदार होने की अपेक्षा क्यों करता है

अगला: 3. धोखेबाज़ लोग उद्धार क्यों नहीं प्राप्त कर पाते

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

संबंधित सामग्री

3. अंत के दिनों में अपना न्याय का कार्य करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, बल्कि देहधारण कर उसे स्वयं क्यों करता है

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :न्याय का कार्य परमेश्वर का अपना कार्य है, इसलिए स्वाभाविक रूप से इसे परमेश्वर द्वारा ही किया जाना चाहिए; उसकी...

3. अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय का कार्य महान श्वेत सिंहासन का न्याय का कार्य है

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :बीते समय में जो यह कहा गया था कि न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होगा, उन वचनों में "न्याय" उस फैसले को संदर्भित...

2. स्वर्गारोहण वास्तव में क्या है, और व्यक्ति को परमेश्वर के सिंहासन के सामने कैसे उठाया जा सकता है

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है, और यह पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है।...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें