1. सीसीपी सरकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का बेतहाशा दमन और उत्पीड़न क्यों करती है

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"इस युग के लोग बुरे हैं" (लूका 11:29)।

"सारा संसार उस दुष्ट के वश में पड़ा है" (1 यूहन्ना 5:19)।

"और दण्ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे। क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए" (यूहन्ना 3:19-20)।

"तब वह बड़ा अजगर, अर्थात् वही पुराना साँप जो इब्लीस और शैतान कहलाता है और सारे संसार का भरमानेवाला है" (प्रकाशितवाक्य 12:9)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

बड़े लाल अजगर की अभिव्यक्ति मेरे प्रति प्रतिरोध, मेरे वचनों के अर्थों की समझ और बोध की कमी, बार-बार मेरा उत्पीड़न, और मेरे प्रबंधन को बाधित करने के लिए षड़यंत्रों का उपयोग करने की कोशिश करना है। शैतान इस प्रकार से व्यक्त होता है: सामर्थ्य के लिए मेरे साथ संघर्ष करना, मेरे चुने हुए लोगों पर कब्‍ज़ा करने की इच्छा करना, और मेरे लोगों को धोखा देने के लिए नकारात्मक वचनों को जारी करना। शैतान (जो लोग मेरे नाम को स्वीकार नहीं करते हैं, जो विश्वास नहीं करते हैं, वे सभी शैतान हैं) की अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार हैं: देह के सुखों की अभिलाषा करना, बुरी वासनाओं में लिप्त होना, शैतान के बंधन में रहना, कुछ लोगों द्वारा मेरा विरोध करना और कुछ के द्वारा समर्थन किया जाना (किन्तु यह साबित नहीं करना कि वे मेरे प्रिय पुत्र हैं)। प्रधान दूत की अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार है: बदतमीज़ी से बोलना, अधर्मी होना, लोगों को व्याख्यान देने के लिए प्रायः मेरा स्वर अपनाना, केवल बाह्य रूप से मेरी नक़ल करने पर ध्यान केन्द्रित करना, जो मैं खाता हूँ वह खाना और जो मैं उपयोग करता हूँ उसका उपयोग करना; संक्षेप में, मेरे साथ बराबरी करना चाहना, महत्वाकांक्षी होना किन्तु मेरी गुणवत्ता का अभाव और मेरा जीवन नहीं होना, अपशिष्ट होना। राक्षस, शैतान, और प्रधान दूत सभी बड़े लाल अजगर के विशिष्ट प्रदर्शन हैं, इसलिए जो लोग मेरे द्वारा पूर्वनियत और चयनित नहीं हैं वे सभी बड़े लाल अजगर की संतान हैं: यह बिल्कुल ऐसा ही है! ये सभी मेरे दुश्मन हैं। (हालाँकि शैतान के व्यवधानों को बाहर रखा गया है। यदि तेरी प्रकृति मेरी गुणवत्ता है, तो कोई भी इसे बदल नहीं सकता है। क्योंकि तू अभी भी देह में रहता है, इसलिए कभी-कभी तुझे शैतान के प्रलोभनों का सामना करना पड़ेगा—यह अपरिहार्य है—किन्तु तुझे सदैव सावधान अवश्य रहना चाहिए।) इसलिए, मैं बड़े लाल अजगर की सभी संतानों को अपने पहले पुत्रों के बाहर त्याग दूँगा। उनकी प्रकृति कभी नहीं बदल सकती है, और यह शैतान की गुणवत्ता है। वे लोग शैतान को व्यक्त करते हैं, और यह प्रधान दूत है जिसे वे जीते हैं। यह पूरी तरह से सत्य है। जिस बड़े लाल अजगर के बारे में मैं बात करता हूँ वह एक बड़ा लाल अजगर नहीं है; बल्कि यह मेरे विरोध में दुष्ट आत्मा है, जिसके लिए "बड़ा लाल अजगर" एक समानार्थी है। इसलिए पवित्र आत्मा के बाहर की सभी आत्माएँ दुष्ट आत्माएँ हैं, और बड़े लाल अजगर की संतान भी कही जा सकती हैं। यह सभी को बिल्कुल स्पष्ट हो जाना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 96' से उद्धृत

हज़ारों सालों से यह गंदगी की भूमि रही है। यह असहनीय रूप से गंदी है, दुःख से भरी हुई है, प्रेत यहाँ हर जगह बेकाबू दौड़ते हैं, चालें चलते हुए और धोखा देते हुए, निराधार आरोप लगाते हुए,[1] क्रूर और दुष्ट बनकर इस भुतहा शहर को कुचलते हुए और लाशों से पाटते हुए; सड़न की बदबू ज़मीन पर छा गई है और हवा में व्याप्त हो गई है, और इसे बेहद संरक्षित[2] रखा जाता है। आसमान से परे की दुनिया कौन देख सकता है? शैतान मनुष्य के पूरे शरीर को कसकर बांध देता है, उसकी दोनों आंखें बाहर निकाल देता है, और उसके होंठ मज़बूती से बंद कर देता है। शैतानों के राजा ने हज़ारों वर्षों तक उपद्रव किया है, और आज भी वह उपद्रव कर रहा है और इस भुतहा शहर पर करीब से नज़र रखे हुए है, मानो यह राक्षसों का एक अभेद्य महल हो; इस बीच रक्षक कुत्ते चमकती हुई आंखों से घूरते हैं, इस बात से अत्यंत भयभीत कि परमेश्वर अचानक उन्हें पकड़ लेगा और उन सभी को मिटाकर रख देगा, और उन्हें शांति और ख़ुशी के स्थान से वंचित कर देगा। ऐसे भुतहा शहर के लोग परमेश्वर को कभी भी कैसे देख सकते हैं? क्या उन्होंने कभी परमेश्वर की प्रियता और मनोहरता का आनंद लिया है? मानव-जगत के मामलों की क्या कद्र है उन्हें? उनमें से कौन परमेश्वर की उत्सुक इच्छा को समझ सकता है? फिर, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि देहधारी परमेश्वर पूरी तरह से छिपा रहता है : इस तरह के अंधेरे समाज में, जहां राक्षस बेरहम और अमानवीय हैं, शैतानों का राजा, जो बिना पलक झपकाए लोगों को मार डालता है, ऐसे परमेश्वर के अस्तित्व को कैसे सहन कर सकता है, जो प्यारा, दयालु और पवित्र भी है? वह परमेश्वर के आगमन की सराहना और जयजयकार कैसे कर सकता है? ये दास! ये दयालुता का बदला घृणा से चुकाते हैं, इन्होंने लंबे समय से परमेश्वर का तिरस्कार किया है, ये परमेश्वर को अपशब्द बोलते हैं, ये चरम सीमा तक बर्बर हैं, इनमें परमेश्वर के प्रति थोड़ा-सा भी सम्मान नहीं है, ये लूटते और डाका डालते हैं, ये पूरा विवेक खो चुके हैं, ये समस्त विवेक के विरुद्ध जाते हैं, और ये निर्दोषों को अचेत होने का प्रलोभन देते हैं। प्राचीन पूर्वज? प्रिय नेता? वे सभी परमेश्वर का विरोध करते हैं! उनके हस्तक्षेप ने स्वर्ग के नीचे के सभी लोगों को अंधेरे और अराजकता की स्थिति में छोड़ दिया है! धार्मिक स्वतंत्रता? नागरिकों के वैध अधिकार और हित? ये सब पाप छिपाने की चालें हैं! किसने परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया है? किसने परमेश्वर के कार्य के लिए अपना जीवन अर्पित किया है या रक्त बहाया है? पीढ़ी-दर-पीढ़ी, माता-पिता से लेकर बच्चों तक, गुलाम बनाए गए मनुष्य ने परमेश्वर को बेखटके गुलाम बना लिया है—ऐसा कैसे हो सकता है कि यह रोष न भड़काए? दिल में हज़ारों वर्ष की घृणा भरी हुई है, पापमयता की सहस्राब्दियाँ दिल पर अंकित हैं—यह कैसे घृणा को प्रेरित नहीं करेगा? परमेश्वर का बदला लो, उसके शत्रु को पूरी तरह से समाप्त कर दो, उसे अब और बेकाबू न दौड़ने दो, और उसे मनचाहे तरीके से परेशानी मत बढ़ाने दो! यही समय है : मनुष्य अपनी सभी शक्तियाँ लंबे समय से इकट्ठा करता आ रहा है, उसने इसके लिए अपने सभी प्रयास किए हैं, हर कीमत चुकाई है, ताकि वह इस दानव के घृणित चेहरे को तोड़ सके और जो लोग अंधे हो गए हैं, जिन्होंने हर प्रकार की पीड़ा और कठिनाई सही है, उन्हें अपने दर्द से उबरने और इस दुष्ट प्राचीन शैतान से पीठ फेरने दे। परमेश्वर के कार्य में ऐसी अभेद्य बाधा क्यों खड़ी की जाए? परमेश्वर के लोगों को धोखा देने के लिए विभिन्न चालें क्यों चली जाएँ? वास्तविक स्वतंत्रता और वैध अधिकार एवं हित कहां हैं? निष्पक्षता कहां है? आराम कहां है? गर्मजोशी कहां है? परमेश्वर के लोगों को छलने के लिए धोखेभरी योजनाओं का उपयोग क्यों किया जाए? परमेश्वर के आगमन को दबाने के लिए बल का उपयोग क्यों किया जाए? क्यों नहीं परमेश्वर को उस धरती पर स्वतंत्रता से घूमने दिया जाए, जिसे उसने बनाया? क्यों परमेश्वर को तब तक खदेड़ा जाए, जब तक उसके पास आराम से सिर रखने के लिए जगह न रहे? मनुष्यों के बीच की गर्मजोशी कहां है? लोगों के बीच स्वागत की भावना कहां है? परमेश्वर में इस तरह की हताश तड़प क्यों पैदा की जाए? परमेवर को बार-बार पुकारने पर मजबूर क्यों किया जाए? परमेश्वर को अपने प्रिय पुत्र के लिए चिंता करने पर मजबूर क्यों किया जाए? इस अंधेरे समाज में इसके घटिया रक्षक कुत्ते परमेश्वर को इस दुनिया में स्वतंत्रता से आने-जाने क्यों नहीं देते, जिसे उसने बनाया?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (8)' से उद्धृत

प्राचीन संस्कृति के ज्ञान ने मनुष्य को चुपके से परमेश्वर की उपस्थिति से चुरा लिया है और उसे शैतानों के राजा और उसकी संतानों को सौंप दिया है। चार पुस्तकों और पाँच क्लासिक्स[क] ने मनुष्य की सोच और धारणाओं को विद्रोह के एक अन्य युग में पहुँचा दिया है, जिससे वह उन पुस्तकों और क्लासिक्स के संकलनकर्ताओं की पहले से भी ज्यादा ठकुरसुहाती करने लगा है, और परिणामस्वरूप परमेश्वर के बारे में उसकी धारणाएँ और ज्यादा ख़राब हो गई हैं। शैतानों के राजा ने बिना मनुष्य के जाने ही उसके दृदय से निर्दयतापूर्वक परमेश्वर को बाहर निकाल दिया और फिर विजयी उल्लास के साथ खुद उस पर कब्ज़ा जमा लिया। तब से मनुष्य एक कुरूप और दुष्ट आत्मा तथा शैतानों के राजा के चेहरे के अधीन हो गया। उसके सीने में परमेश्वर के प्रति घृणा भर गई, और शैतानों के राजा की द्रोहपूर्ण दुर्भावना दिन-ब-दिन तब तक मनुष्य के भीतर फैलती गई, जब तक कि वह पूरी तरह से बरबाद नहीं हो गया। उसे अब जरा भी स्वतंत्रता नहीं थी और उसके पास शैतानों के राजा के चंगुल से छूटने का कोई उपाय नहीं था। उसके पास वहीं के वहीं बंदी बनने, आत्मसमर्पण करने और उसकी उपस्थिति में उसकी अधीनता में घुटने टेक देने के सिवा कोई चारा नहीं था। बहुत पहले जब मनुष्य का हृदय और आत्मा अभी शैशवावस्था में ही थे, शैतानों के राजा ने उनमें नास्तिकता के फोड़े का बीज बो दिया था, और उसे इस तरह की भ्रांतियाँ सिखा दीं, जैसे कि "विज्ञान और प्रौद्योगिकी को पढ़ो; चार आधुनिकीकरणों को समझो; और दुनिया में परमेश्वर जैसी कोई चीज़ नहीं है।" यही नहीं, वह हर अवसर पर चिल्लाता है, "आओ, हम एक सुंदर मातृभूमि का निर्माण करने के लिए अपने मेहनती श्रमिकों पर भरोसा करें," और बचपन से ही हर व्यक्ति को अपने देश की सेवा करने के लिए तैयार रहने के लिए कहता है। मनुष्य को अनजाने में इसके सामने लाया गया था, और इसने बेझिझक सारा श्रेय (अर्थात् समस्त मनुष्यों को अपने हाथों में रखने का परमेश्वर का श्रेय) हथिया लिया। कभी भी इसे शर्म का बोध महसूस नहीं हुआ, न ही कभी शर्मिंदगी की कोई भावना रखी। इतना ही नहीं, इसने निर्लज्जतापूर्वक परमेश्वर के लोगों को पकड़ लिया और उन्हें अपने घर में खींच लिया, जहाँ वह मेज पर एक चूहे की तरह उछलता रहा और मनुष्यों से परमेश्वर के रूप में अपनी आराधना करवाई। कैसा आततायी है! वह चीख-चीखकर ऐसी शर्मनाक और घिनौनी बातें कहता है : "दुनिया में परमेश्वर जैसी कोई चीज़ नहीं है। हवा प्राकृतिक नियमों के कारण होने वाले रूपांतरणों से आती है; बारिश तब होती है, जब पानी भाप बनकर ठंडे तापमानों से मिलता है और बूँदों के रूप में संघनित होकर पृथ्वी पर गिरता है; भूकंप भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण पृथ्वी की सतह का हिलना है; सूखा सूरज की सतह पर नाभिक विक्षोभ के कारण हवा के शुष्क हो जाने से पड़ता है। ये प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इस सबमें परमेश्वर का क्या काम है?" ऐसे लोग भी हैं, जो निम्नलिखित जैसे बयान भी देते हैं, ऐसे बयान, जिन्हें स्वर नहीं दिया जाना चाहिए : "मनुष्य प्राचीन काल में वानरों से विकसित हुआ था, और आज की दुनिया लगभग एक युग पहले शुरू हुए आदिम समाजों के अनुक्रमण से विकसित हुई है। किसी देश का उत्थान या पतन पूरी तरह से उसके लोगों के हाथों में है।" पृष्ठभूमि में, यह लोगों को उसे दीवार पर लटकाकर या मेज पर रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने और भेंट चढ़ाने के लिए बाध्य करता है। जिस समय वह चिल्लाता है कि "कोई परमेश्वर नहीं है," उसी समय वह खुद को परमेश्वर के रूप में स्थापित भी करता है और परमेश्वर के स्थान पर खड़ा होकर तथा शैतानों के राजा की भूमिका ग्रहण कर अविलंबित अशिष्टता के साथ परमेश्वर को धरती की सीमाओं से बाहर धकेल देता है। कितनी बेहूदा बात है! यह आदमी को उससे गहरी घृणा करने के लिए बाध्य कर देता है। ऐसा लगता है कि परमेश्वर और वह कट्टर दुश्मन हैं, और दोनों सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते। वह व्यवस्था की पहुँच से बाहर आज़ाद घूमता है[3] और परमेश्वर को दूर भगाने की योजना बनाता है। ऐसा है यह शैतानों का राजा! इसके अस्तित्व को कैसे बरदाश्त किया जा सकता है? यह तब तक चैन से नहीं बैठेगा, जब तक परमेश्वर के काम में घालमेल नहीं कर देता और उसे पूरा खंडहर[4] नहीं बना देता, मानो वह कड़वे अंत तक परमेश्वर का विरोध करना चाहता हो, जब तक कि या तो मछली न मर जाए या जाल न टूट जाए। वह जानबूझकर खुद को परमेश्वर के ख़िलाफ़ खड़ा कर लेता है और नज़दीक धँसता जाता है। इसका घिनौना चेहरा बहुत पहले से पूरी तरह से बेनक़ाब हो गया है, जो अब आहत और क्षत-विक्षत[5] है और एक खेदजनक स्थिति में है, फिर भी वह परमेश्वर से नफ़रत करने से बाज़ नहीं आएगा, मानो परमेश्वर को एक कौर में निगलकर ही वह अपने दिल में बसी घृणा से मुक्ति पा सकेगा। परमेश्वर के इस शत्रु को हम कैसे बरदाश्त कर सकते हैं! केवल इसके उन्मूलन और पूर्ण विनाश से ही हमारे जीवन की इच्छा फलित होगी। इसे उच्छृंखल रूप से कैसे दौड़ते फिरने दिया जा सकता है? यह मनुष्य को इस सीमा तक भ्रष्ट कर चुका है कि मनुष्य स्वर्ग के सूर्य को नहीं जानता, और वह अचेत और भावनाशून्य हो गया है। मनुष्य ने सामान्य मानवीय विवेक खो दिया है। इसे नष्ट और भस्म करने के लिए क्यों नहीं हम अपनी पूरी हस्ती का बलिदान कर देते, ताकि भविष्य की सारी चिंताएँ दूर कर सकें और परमेश्वर के कार्य को जल्दी से अभूतपूर्व भव्यता तक पहुँचने दें? बदमाशों का यह गिरोह मनुष्यों की दुनिया में आ गया है और यहाँ उथल-पुथल मचा दी है। वे सभी मनुष्यों को एक खड़ी चट्टान के कगार पर ले आए हैं और गुप्त रूप से उन्हें वहाँ से धकेलकर टुकड़े-टुकड़े करने की योजना बना रहे हैं, ताकि फिर वे उनके शवों को निगल सकें। वे व्यर्थ ही परमेश्वर की योजना को खंडित करने और उसके साथ जुआ खेलकर पासे की एक ही चाल में सब-कुछ दाँव पर लगाने[6] की आशा करते हैं। यह किसी भी तरह से आसान नहीं है! अंतत: शैतानों के राजा के लिए सलीब तैयार कर दिया गया है, जो सबसे घृणित अपराधों का दोषी है। परमेश्वर का सलीब से संबंध नहीं है। वह पहले ही उसे शैतान के लिए बगल में उछाल चुका है। परमेश्वर अब से बहुत पहले ही विजयी होकर उभर चुका है और अब मानवजाति के पापों पर दुख महसूस नहीं करता, लेकिन वह समस्त मानवजाति के लिए उद्धार लाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (7)' से उद्धृत

ऊपर से नीचे तक और शुरू से अंत तक शैतान परमेश्वर के कार्य को बाधित कर रहा है और उसके विरोध में काम कर रहा है। "प्राचीन सांस्कृतिक विरासत", मूल्यवान "प्राचीन संस्कृति के ज्ञान", "ताओवाद और कन्फ्यूशीवाद की शिक्षाओं" और "कन्फ्यूशियन क्लासिक्स और सामंती संस्कारों" की इस सारी चर्चा ने मनुष्य को नरक में पहुँचा दिया है। उन्नत आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ अत्यधिक विकसित उद्योग, कृषि और व्यवसाय कहीं नज़र नहीं आते। इसके बजाय, यह सिर्फ़ प्राचीन काल के "वानरों" द्वारा प्रचारित सामंती संस्कारों पर जोर देता है, ताकि परमेश्वर के कार्य को जानबूझकर बाधित कर सके, उसका विरोध कर सके और उसे नष्ट कर सके। न केवल इसने आज तक मनुष्य को सताना जारी रखा है, बल्कि वह उसे पूरे का पूरा निगल[7] भी जाना चाहता है। सामंतवाद की नैतिक और आचार-विचार विषयक शिक्षाओं के प्रसारण और प्राचीन संस्कृति के ज्ञान की विरासत ने लंबे समय से मनुष्य को संक्रमित किया है और उन्हें छोटे-बड़े शैतानों में बदल दिया है। कुछ ही लोग हैं, जो ख़ुशी से परमेश्वर को स्वीकार करते हैं, और कुछ ही लोग हैं, जो उसके आगमन का उल्लासपूर्वक स्वागत करते हैं। समस्त मानवजाति का चेहरा हत्या के इरादे से भर गया है, और हर जगह हत्यारी साँस हवा में व्याप्त है। वे परमेश्वर को इस भूमि से निष्कासित करना चाहते हैं; हाथों में चाकू और तलवारें लिए वे परमेश्वर का "विनाश" करने के लिए खुद को युद्ध के विन्यास में व्यवस्थित करते हैं। शैतान की इस सारी भूमि पर, जहाँ मनुष्य को लगातार सिखाया जाता है कि कहीं कोई परमेश्वर नहीं है, मूर्तियाँ फैली हुई हैं, और ऊपर हवा जलते हुए कागज और धूप की वमनकारी गंध से तर है, इतनी घनी कि दम घुटता है। यह उस कीचड़ की बदबू की तरह है, जो जहरीले सर्प के कुलबुलाते समय ऊपर उठती है, जिससे व्यक्ति उलटी किए बिना नहीं रह सकता। इसके अलावा, वहाँ अस्पष्ट रूप से दुष्ट दानवों के मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनी जा सकती है, जो दूर नरक से आती हुई प्रतीत होती है, जिसे सुनकर आदमी काँपे बिना नहीं रह सकता। इस देश में हर जगह इंद्रधनुष के सभी रंगों वाली मूर्तियाँ रखी हैं, जिन्होंने इस देश को कामुक आनंद की दुनिया में बदल दिया है, और शैतानों का राजा दुष्टतापूर्वक हँसता रहता है, मानो उसका नीचतापूर्ण षड्यंत्र सफल हो गया हो। इस बीच, मनुष्य पूरी तरह से बेखबर रहता है, और उसे यह भी पता नहीं कि शैतान ने उसे पहले ही इस हद तक भ्रष्ट कर दिया है कि वह बेसुध हो गया है और उसने हारकर अपना सिर लटका दिया है। वह चाहता है कि एक ही झपट्टे में परमेश्वर से संबंधित सब-कुछ साफ़ कर दे, और एक बार फिर उसे अपवित्र कर उसका हनन कर दे; वह उसके कार्य को टुकड़े-टुकड़े करने और उसे बाधित करने का इरादा रखता है। वह कैसे परमेश्वर को समान दर्जा दे सकता है? कैसे वह पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अपने काम में परमेश्वर का "हस्तक्षेप" बरदाश्त कर सकता है? कैसे वह परमेश्वर को उसके घिनौने चेहरे को उजागर करने दे सकता है? वह कैसे परमेश्वर को अपने काम को अव्यवस्थित करने की अनुमति दे सकता है? क्रोध के साथ भभकता यह शैतान कैसे परमेश्वर को पृथ्वी पर अपने शाही दरबार पर नियंत्रण करने दे सकता है? कैसे वह स्वेच्छा से परमेश्वर के श्रेष्ठतर सामर्थ्य के आगे झुक सकता है? इसके कुत्सित चेहरे की असलियत उजागर की जा चुकी है, इसलिए किसी को पता नहीं है कि वह हँसे या रोए, और यह बताना वास्तव में कठिन है। क्या यही इसका सार नहीं है? अपनी कुरूप आत्मा के बावजूद वह यह मानता है कि वह अविश्वसनीय रूप से सुंदर है। यह अपराध के साथियों का गिरोह![8] वे भोग में लिप्त होने के लिए मनुष्यों के देश में उतरते हैं और हंगामा करते हैं, और चीज़ों को इतना आलोड़ित करते हैं कि दुनिया एक चंचल और अस्थिर जगह बन जाती है और मनुष्य का दिल घबराहट और बेचैनी से भर जाता है, और उन्होंने मनुष्य के साथ इतना खिलवाड़ किया है कि उसका रूप उस क्षेत्र के एक अमानवीय जानवर जैसा अत्यंत कुरूप हो गया है, जिससे मूल पवित्र मनुष्य का उसका पिछला निशान खो गया है। इतना ही नहीं, वे धरती पर संप्रभु सत्ता ग्रहण करना चाहते हैं। वे परमेश्वर के कार्य को इतना बाधित करते हैं कि वह मुश्किल से बहुत धीरे आगे बढ़ पाता है, और वे मनुष्य को इतना कसकर बंद कर देते हैं, जैसे कि तांबे और इस्पात की दीवारें हों। इतने सारे गंभीर पाप करने और इतनी आपदाओं का कारण बनने के बाद भी क्या वे ताड़ना के अलावा किसी अन्य चीज़ की उम्मीद कर रहे हैं? राक्षस और बुरी आत्माएँ काफी समय से पृथ्वी पर अंधाधुंध विचरण कर रही हैं, और उन्होंने परमेश्वर की इच्छा और कष्टसाध्य प्रयास दोनों को इतना कसकर बंद कर दिया है कि वे अभेद्य बन गए हैं। सचमुच, यह एक घातक पाप है! परमेश्वर कैसे चिंतित महसूस न करता? परमेश्वर कैसे क्रोधित महसूस न करता? उन्होंने परमेश्वर के कार्य में गंभीर बाधा पहुँचाई है और उसका घोर विरोध किया है : कितने विद्रोही हैं वे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (7)' से उद्धृत

शैतान जन सामान्य को धोखा देने के जरिए प्रसिद्धि प्राप्त करता है। वह अक्सर स्वयं को धार्मिकता के प्रमुख और आदर्श पुरुष के रूप में स्थापित करता है। धार्मिकता के बचाव के झण्डे तले, वह मनुष्य को हानि पहुंचाता है, उनके प्राणों को निगल जाता है, और मनुष्य को स्तब्ध करने, धोखा देने और भड़काने के लिए हर प्रकार के साधनों का उपयोग करता है। उसका लक्ष्य है कि मनुष्य उसके बुरे आचरण को स्वीकार करे और उसका अनुसरण करे, और मनुष्य परमेश्वर के अधिकार और सर्वोच्च सत्ता का विरोध करने में उसके साथ जुड़ जाए। फ़िर भी, जब कोई उसकी चालों, षड्यंत्रों और बुरी युक्तियों को समझ जाता है और नहीं चाहता कि शैतान द्वारा उसे लगातार कुचला जाए और मूर्ख बनाया जाए या वो निरन्तर उसकी गुलामी करे, या उसके साथ दण्डित एवं नष्ट हो जाए, तो शैतान अपने असली दुष्ट, दुराचारी, भद्दे और वहशी चेहरे को प्रकट करने के लिए अपने पहले के संत रुपी चेहरे को बदल देता है और अपने झूठे नकाब को फाड़कर फेंक देता है। उसे उन सभी का विनाश करने में कहीं ज़्यादा खुशी मिलेगी जो उसका अनुसरण करने से इंकार करते हैं और उसकी बुरी शक्तियों का विरोध करते हैं। इस बिन्दु पर शैतान अब से विश्वास योग्य और सभ्य व्यक्ति का रूप धारण नहीं कर सकता है; उसके बजाए, उसके बुरे और असली शैतानी लक्षण प्रकट हो जाते हैं भेड़ की खाल उतर जाती है। जब एक बार शैतान की युक्तियों को प्रकाश में लाया जाता है, जब एक बार उसके असली लक्षणों का खुलासा हो जाता है, तो वह क्रोध से आगबबूला हो जाएगा और अपने वहशीपन का खुलासा करेगा; लोगों को नुकसान पहुंचाने और निगल जाने की उसकी इच्छा और भी तीव्र हो जाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह मनुष्य के जागृत हो जाने से क्रोधित हो गया है; स्वतन्त्रता और प्रकाश की लालसा और अपनी कैद को तोड़कर आज़ाद होने की उनकी आकांक्षा के कारण उसने मनुष्य के प्रति बदले की एक प्रबल भावना को विकसित कर लिया है। उसके क्रोध का अभिप्राय उसकी बुराई का समर्थन करना है, और साथ ही यह उसके जंगली स्वभाव का असली प्रकाशन भी है।

हर एक मामले में, शैतान का आचरण उसके बुरे स्वभाव का खुलासा करता है। उन सभी बुरे कार्यों से जिन्हें शैतान ने मनुष्यों पर क्रियान्वित किया है—उसके आरम्भ के प्रयासों से लेकर उसका अनुसरण करने के लिए मनुष्यों को बहकाने तक, और उसके द्वारा मनुष्य के शोषण तक, जिसके अंतर्गत वह मनुष्य को अपने बुरे कार्यों में खींचता है, और उसके असली लक्षणों का खुलासा कर दिए जाने और मनुष्य द्वारा उसे पहचानने और उसे छोड़ देने के पश्चात् मनुष्य के प्रति शैतान की बदले की भावना तक—कोई भी शैतान के बुरी सार का खुलासा करने से नहीं चूकता है; कोई भी बात उस तथ्य को प्रमाणित करने से नहीं चूकती है कि शैतान का सकारात्मक चीज़ों से कोई नाता नहीं है; कोई भी बात यह प्रमाणित करने से नहीं चूकती है कि शैतान ही समस्त बुरी चीज़ों का स्रोत है। उसका हर एक कार्य उसकी बुराई का बचाव करता है, उसके बुरे कार्यों की निरन्तरता को बनाए रखता है, धर्मी और सकारात्मक चीज़ों के विरुद्ध जाता है, और मनुष्य के सामान्य अस्तित्व के नियमों और विधियों को बर्बाद कर देता है। वे परमेश्वर के विरोधी हैं, और वे ऐसे हैं जिन्हें परमेश्वर का क्रोध नष्ट कर देगा। यद्यपि शैतान के पास उसका अपना क्रोध है, फ़िर भी उसका क्रोध उसके बुरे स्वभाव को प्रकट करने का एक माध्यम है। शैतान के भड़का हुआ और क्रोधित होने का कारण यह है: उसकी अकथनीय युक्तियों का खुलासा कर दिया गया है; उसके षडयन्त्र आसानी से दूर नहीं होते हैं; परमेश्वर का स्थान लेने और परमेश्वर के समान कार्य करने की उसकी वहशी महत्वाकांक्षा और लालसा पर प्रहार किया गया है और उसे रोका गया है; समूची मानवजाति को नियन्त्रित करने का उसका उद्देश्य निष्फल हो गया है और उसे कभी हासिल नहीं किया जा सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II' से उद्धृत

फुटनोट :

1. "निराधार आरोप लगाते हुए" उन तरीकों को संदर्भित करता है, जिनके द्वारा शैतान लोगों को नुकसान पहुँचाता है।

2. "बेहद संरक्षित" यह दर्शाता है, कि वे तरीके, जिनके द्वारा शैतान लोगों को यातना पहुँचाता है, बहुत ही शातिर होते हैं, और लोगों को इतना नियंत्रित करते हैं कि उन्हें हिलने-डुलने की भी जगह नहीं मिलती।

3. "व्यवस्था की पहुँच से बाहर आज़ाद घूमता है" इंगित करता है कि शैतान उन्मत्त होकर आपे से बाहर हो जाता है।

4. "पूरा खंडहर" बताता है कि कैसे उस शैतान का हिंसक व्यवहार देखने में असहनीय है।

5. "आहत और क्षत-विक्षत" शैतानों के राजा के बदसूरत चेहरे के बारे में बताता है।

6. "पासे की एक ही चाल में सब-कुछ दाँव पर लगाने" का अर्थ है अंत में जीतने की उम्मीद में अपना सारा धन एक ही दाँव पर लगा देना। यह शैतान की भयावह और कुटिल योजनाओं के लिए एक रूपक है। इस अभिव्यक्ति का प्रयोग उपहास में किया जाता है।

7. "निगल" जाना शैतानों के राजा के शातिर व्यवहार के बारे में बताता है, जो लोगों को पूरी तरह से मोह लेता है।

8. "अपराध के साथियों का गिरोह" का वही अर्थ है, जो "गुंडों के गिरोह" का है।

क. चार पुस्तकें और पाँच क्लासिक्स चीन में कन्फ्यूशीवाद की प्रामाणिक किताबें हैं।

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परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:वह मानक क्या है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के कर्मों का मूल्यांकन अच्छे या बुरे के रूप में किया जाता है? यह इस बात...

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परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:यहोवा का कार्य दुनिया का सृजन था, वह आरंभ था; कार्य का यह चरण, कार्य का अंत है, और यह समापन है। आरंभ में,...

33. विपत्ति के पहले स्वर्गारोहण क्या है? ऐसा विजयी किसे कहते हैं जिसे विपत्ति से पहले पूर्ण किया जाता हो?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:"उठाया जाना" नीचे स्थानों से उँचे स्थानों पर ले जाया जाना नहीं है जैसा कि लोग कल्पना करते हैं। यह एक बहुत बड़ी...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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